सीबीएसई कक्षा 12 भौतिकी (2026–27)
अध्याय 3 : धारा विद्युत (Current Electricity)
20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
1. विद्युत धारा क्या है? इसका SI मात्रक बताइए।
उत्तर:
किसी चालक के अनुप्रस्थ काट से एकांक समय में प्रवाहित होने वाले कुल विद्युत आवेश की दर को विद्युत धारा कहते हैं। यदि (Q) आवेश (t) समय में प्रवाहित होता है, तो धारा (I = Q/t) होगी। विद्युत धारा का SI मात्रक एम्पियर (A) है। एक एम्पियर वह धारा है जिसमें एक सेकंड में एक कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है। विद्युत धारा एक अदिश राशि है। इसे परिपथ में श्रेणीक्रम (Series) में जुड़े एमीटर द्वारा मापा जाता है। परंपरागत धारा उच्च विभव से निम्न विभव की ओर बहती है, जबकि इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह विपरीत दिशा में होता है। विद्युत धारा सभी विद्युत उपकरणों और परिपथों का आधार है।
2. इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग (Drift Velocity) की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
धातु चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉन सामान्यतः अनियमित गति करते हैं। जब चालक के सिरों पर विभवांतर लगाया जाता है, तब विद्युत क्षेत्र उत्पन्न होता है और इलेक्ट्रॉन एक निश्चित दिशा में गति करने लगते हैं। इस कारण प्राप्त औसत वेग को अपवाह वेग (Drift Velocity) कहते हैं। इसका मान बहुत छोटा होता है, लगभग (10^{-4}) मीटर प्रति सेकंड। विद्युत धारा का प्रवाह इसी अपवाह वेग के कारण होता है। अपवाह वेग और धारा के बीच संबंध (I = nAeV_d) द्वारा व्यक्त किया जाता है, जहाँ (n) इलेक्ट्रॉनों का संख्या घनत्व, (A) अनुप्रस्थ क्षेत्रफल, (e) इलेक्ट्रॉन का आवेश तथा (V_d) अपवाह वेग है।
3. ओम का नियम लिखिए तथा इसकी सीमाएँ बताइए।
उत्तर:
ओम का नियम कहता है कि यदि किसी चालक का तापमान एवं अन्य भौतिक परिस्थितियाँ स्थिर रहें, तो उसमें प्रवाहित धारा उसके सिरों के बीच विभवांतर के समानुपाती होती है। गणितीय रूप में,
[V = IR]
जहाँ (R) चालक का प्रतिरोध है। यह नियम केवल ओमिक चालकों जैसे धातुओं पर लागू होता है। डायोड, ट्रांजिस्टर तथा अर्धचालक उपकरणों में धारा और विभवांतर का संबंध रैखिक नहीं होता, इसलिए वहाँ यह नियम लागू नहीं होता। तापमान में परिवर्तन होने पर भी प्रतिरोध बदल जाता है, जिससे ओम का नियम सही नहीं रहता। अतः यह नियम केवल निश्चित परिस्थितियों में ही मान्य है।
4. प्रतिरोधकता (Resistivity) क्या है? इसे प्रभावित करने वाले कारक बताइए।
उत्तर:
प्रतिरोधकता किसी पदार्थ का वह आंतरिक गुण है जो विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है। इसे (ρ) द्वारा दर्शाया जाता है। प्रतिरोधकता का सूत्र
[ρ = \frac{RA}{L}]
है, जहाँ (R) प्रतिरोध, (A) अनुप्रस्थ क्षेत्रफल तथा (L) चालक की लंबाई है। इसका SI मात्रक ओम-मीटर (Ωm) है। प्रतिरोधकता पदार्थ की प्रकृति तथा तापमान पर निर्भर करती है, लेकिन चालक की लंबाई और क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करती। धातुओं की प्रतिरोधकता कम तथा कुचालकों की अधिक होती है। तापमान बढ़ने पर धातुओं की प्रतिरोधकता सामान्यतः बढ़ जाती है।
5. विद्युत वाहक बल (EMF) और विभवांतर में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
विद्युत वाहक बल (EMF) वह ऊर्जा है जो कोई स्रोत प्रति इकाई आवेश को संपूर्ण परिपथ में प्रवाहित करने के लिए प्रदान करता है। दूसरी ओर, विभवांतर वह ऊर्जा है जो परिपथ के दो बिंदुओं के बीच प्रति इकाई आवेश व्यय होती है। EMF को (E) तथा विभवांतर को (V) से दर्शाया जाता है। दोनों का SI मात्रक वोल्ट है। EMF का मापन तब किया जाता है जब परिपथ में धारा प्रवाहित नहीं हो रही हो, जबकि विभवांतर कार्यरत परिपथ में मापा जाता है। आंतरिक प्रतिरोध के कारण किसी सेल का टर्मिनल विभवांतर प्रायः उसके EMF से कम होता है।
6. सेल का आंतरिक प्रतिरोध क्या है?
उत्तर:
किसी सेल के भीतर इलेक्ट्रोलाइट और इलेक्ट्रोड द्वारा धारा के प्रवाह में उत्पन्न अवरोध को आंतरिक प्रतिरोध कहते हैं। इसे (r) द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। जब सेल से धारा प्रवाहित होती है, तब उसकी कुछ ऊर्जा इस प्रतिरोध को पार करने में व्यय होती है। परिणामस्वरूप टर्मिनल विभव EMF से कम हो जाता है। आंतरिक प्रतिरोध इलेक्ट्रोलाइट की प्रकृति, उसकी सांद्रता, इलेक्ट्रोडों के बीच की दूरी, इलेक्ट्रोडों के क्षेत्रफल तथा तापमान पर निर्भर करता है। एक अच्छे सेल का आंतरिक प्रतिरोध कम होना चाहिए ताकि वह अधिक धारा प्रदान कर सके।
7. प्रतिरोधों के श्रेणीक्रम संयोजन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
जब कई प्रतिरोधों को एक के बाद एक इस प्रकार जोड़ा जाता है कि उनमें समान धारा प्रवाहित हो, तो इसे श्रेणीक्रम संयोजन कहते हैं। इस स्थिति में तुल्य प्रतिरोध सभी प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है:
[R = R_1 + R_2 + R_3]
संपूर्ण विभवांतर विभिन्न प्रतिरोधों पर विभाजित हो जाता है। श्रेणीक्रम संयोजन में तुल्य प्रतिरोध बढ़ जाता है, जिससे धारा का मान कम हो जाता है। इस प्रकार के संयोजन का उपयोग वहाँ किया जाता है जहाँ सभी उपकरणों में समान धारा की आवश्यकता होती है। यदि एक प्रतिरोध टूट जाए तो पूरा परिपथ खुल जाता है और धारा रुक जाती है।
8. प्रतिरोधों के समानांतर संयोजन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
जब प्रतिरोधों को इस प्रकार जोड़ा जाता है कि उनके दोनों सिरे समान बिंदुओं से जुड़े हों, तो इसे समानांतर संयोजन कहते हैं। इसमें प्रत्येक प्रतिरोध पर समान विभवांतर होता है। तुल्य प्रतिरोध का सूत्र है:
[\frac{1}{R}=\frac{1}{R_1}+\frac{1}{R_2}+\frac{1}{R_3}]
इस संयोजन में तुल्य प्रतिरोध सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम होता है। स्रोत से प्राप्त कुल धारा विभिन्न शाखाओं में विभाजित हो जाती है। घरेलू वायरिंग में समानांतर संयोजन का उपयोग किया जाता है ताकि प्रत्येक उपकरण को समान वोल्टेज प्राप्त हो और किसी एक उपकरण के खराब होने पर अन्य प्रभावित न हों।
9. विद्युत शक्ति क्या है? इसके सूत्र लिखिए।
उत्तर:
विद्युत शक्ति वह दर है जिस पर विद्युत ऊर्जा का उपयोग या रूपांतरण होता है। इसे (P) द्वारा दर्शाया जाता है। इसका SI मात्रक वाट (W) है। एक वाट वह शक्ति है जिसमें एक सेकंड में एक जूल ऊर्जा व्यय होती है। विद्युत शक्ति के प्रमुख सूत्र हैं:
[P = VI]
[P = I^2R]
[P = \frac{V^2}{R}]
इन सूत्रों का उपयोग ज्ञात राशियों के आधार पर किया जाता है। विद्युत शक्ति किसी उपकरण की ऊर्जा खपत को दर्शाती है तथा बिजली बिल की गणना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
10. किर्चहॉफ का धारा नियम (KCL) लिखिए।
उत्तर:
किर्चहॉफ का धारा नियम कहता है कि किसी जंक्शन पर आने वाली धाराओं का योग उस जंक्शन से निकलने वाली धाराओं के योग के बराबर होता है। दूसरे शब्दों में, किसी जंक्शन पर धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
[\sum I = 0]
यह नियम आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है। चूँकि आवेश न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, इसलिए जंक्शन पर आने वाला कुल आवेश वहीं से बाहर निकलता है। यह नियम जटिल विद्युत परिपथों के विश्लेषण में अत्यंत उपयोगी है।
11. किर्चहॉफ का विभव नियम (KVL) लिखिए।
उत्तर:
किर्चहॉफ का विभव नियम कहता है कि किसी बंद परिपथ में सभी विद्युत वाहक बलों तथा विभव पतनों का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
[\sum V = 0]
यह नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है। बंद परिपथ में स्रोतों द्वारा प्रदान की गई कुल ऊर्जा परिपथ के विभिन्न अवयवों में व्यय हुई कुल ऊर्जा के बराबर होती है। इस नियम का उपयोग जटिल विद्युत नेटवर्कों में अज्ञात धारा और विभवांतर ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
12. व्हीटस्टोन ब्रिज क्या है?
उत्तर:
व्हीटस्टोन ब्रिज एक विद्युत परिपथ है जिसका उपयोग अज्ञात प्रतिरोध के सटीक मापन के लिए किया जाता है। इसमें चार प्रतिरोध ब्रिज के रूप में जुड़े होते हैं तथा एक गैल्वेनोमीटर लगाया जाता है। जब गैल्वेनोमीटर में धारा नहीं बहती, तब ब्रिज संतुलित माना जाता है। संतुलन की स्थिति में:
[\frac{P}{Q}=\frac{R}{S}]
जहाँ (S) अज्ञात प्रतिरोध है। यह विधि अत्यंत संवेदनशील एवं सटीक होती है। इसका उपयोग प्रयोगशालाओं तथा विभिन्न मापन यंत्रों में किया जाता है।
13. मीटर ब्रिज क्या है?
उत्तर:
मीटर ब्रिज व्हीटस्टोन ब्रिज का व्यावहारिक रूप है जिसका उपयोग अज्ञात प्रतिरोध ज्ञात करने के लिए किया जाता है। इसमें एक मीटर लंबी समान प्रतिरोध वाली तार लगी होती है। इसका सिद्धांत इस तथ्य पर आधारित है कि प्रतिरोध तार की लंबाई के समानुपाती होता है। जब जॉकी को तार पर खिसकाकर संतुलन बिंदु प्राप्त किया जाता है, तब अज्ञात प्रतिरोध की गणना की जाती है। यह उपकरण सरल, सस्ता तथा पर्याप्त सटीक होता है। विद्यालय एवं महाविद्यालय प्रयोगशालाओं में इसका व्यापक उपयोग किया जाता है।
14. पोटेंशियोमीटर का सिद्धांत लिखिए।
उत्तर:
पोटेंशियोमीटर इस सिद्धांत पर कार्य करता है कि किसी समान तार में स्थिर धारा प्रवाहित होने पर उसके किसी भाग पर विभवपात उस भाग की लंबाई के समानुपाती होता है।
[V \propto l]
इसमें एक लंबी प्रतिरोध तार का उपयोग किया जाता है। संतुलन लंबाई ज्ञात करके अज्ञात EMF या विभवांतर का सटीक मापन किया जाता है। पोटेंशियोमीटर मापन के दौरान स्रोत से धारा नहीं लेता, इसलिए यह अत्यधिक सटीक परिणाम देता है।
15. पोटेंशियोमीटर को वोल्टमीटर से अधिक अच्छा क्यों माना जाता है?
उत्तर:
पोटेंशियोमीटर नल-विचलन (Null Deflection) विधि पर कार्य करता है। संतुलन स्थिति में यह स्रोत से कोई धारा नहीं लेता, इसलिए मापन पर आंतरिक प्रतिरोध का प्रभाव नहीं पड़ता। इसके विपरीत, वोल्टमीटर थोड़ी धारा खींचता है जिससे मापन में त्रुटि आ सकती है। पोटेंशियोमीटर बहुत छोटे विभवांतरों को भी सटीकता से माप सकता है। इसका उपयोग EMF की तुलना, आंतरिक प्रतिरोध मापन तथा सूक्ष्म विभवांतरों के निर्धारण में किया जाता है। इसलिए इसकी शुद्धता वोल्टमीटर से अधिक होती है।
16. चालकता (Conductivity) क्या है?
उत्तर:
चालकता किसी पदार्थ की विद्युत धारा प्रवाहित करने की क्षमता को दर्शाती है। इसे (σ) द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। चालकता प्रतिरोधकता का व्युत्क्रम होती है:
[σ=\frac{1}{ρ}]
इसका SI मात्रक सीमेंस प्रति मीटर (S/m) है। जिन पदार्थों की चालकता अधिक होती है, वे विद्युत धारा को आसानी से प्रवाहित करते हैं। ताँबा और चाँदी उच्च चालकता वाले पदार्थ हैं। चालकता मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करती है। विद्युत तारों तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में चालकता एक महत्वपूर्ण गुण है।
17. प्रतिरोध का तापमान पर निर्भरता समझाइए।
उत्तर:
धात्विक चालकों का प्रतिरोध तापमान बढ़ने पर बढ़ जाता है। तापमान बढ़ने से धातु के परमाणुओं का कंपन बढ़ जाता है, जिससे इलेक्ट्रॉनों का टकराव अधिक होता है। परिणामस्वरूप धारा के प्रवाह में बाधा बढ़ती है और प्रतिरोध बढ़ जाता है। इसका संबंध निम्न सूत्र द्वारा व्यक्त किया जाता है:
[R_t = R_0(1+\alpha \Delta T)]
जहाँ (α) ताप गुणांक है। धातुओं में प्रतिरोध बढ़ता है जबकि अर्धचालकों में तापमान बढ़ने पर प्रतिरोध घटता है। यह गुण विद्युत उपकरणों के डिजाइन में महत्वपूर्ण है।
18. श्रेणीक्रम में जुड़े सेल क्या होते हैं? एक लाभ बताइए।
उत्तर:
जब एक सेल का धनात्मक सिरा दूसरे सेल के ऋणात्मक सिरे से जोड़ा जाता है, तो सेल श्रेणीक्रम में जुड़े कहलाते हैं। इस स्थिति में कुल EMF सभी सेल के EMF के योग के बराबर होता है। हालांकि आंतरिक प्रतिरोध भी बढ़ जाता है। ऐसे संयोजन का उपयोग तब किया जाता है जब अधिक विभवांतर की आवश्यकता होती है। टॉर्च, बैटरी पैक आदि में इसका प्रयोग किया जाता है। इसका मुख्य लाभ यह है कि यह अधिक वोल्टेज प्रदान करता है जिससे उच्च विभव की आवश्यकता वाले उपकरण आसानी से संचालित किए जा सकते हैं।
19. समानांतर में जुड़े सेल क्या होते हैं? एक लाभ बताइए।
उत्तर:
जब सभी सेल के धनात्मक सिरों को एक साथ तथा सभी ऋणात्मक सिरों को एक साथ जोड़ा जाता है, तो उन्हें समानांतर संयोजन कहते हैं। इस स्थिति में संयोजन का EMF एक सेल के EMF के बराबर रहता है, लेकिन प्रभावी आंतरिक प्रतिरोध कम हो जाता है। परिणामस्वरूप संयोजन अधिक धारा लंबे समय तक प्रदान कर सकता है। इसका उपयोग उन स्थानों पर किया जाता है जहाँ अधिक धारा की आवश्यकता होती है। इसका मुख्य लाभ यह है कि बैटरी की कार्यक्षमता और कार्यकाल बढ़ जाता है।
20. दैनिक जीवन में धारा विद्युत के चार अनुप्रयोग लिखिए।
उत्तर:
धारा विद्युत का उपयोग आधुनिक जीवन के लगभग हर क्षेत्र में किया जाता है। पहला, घरेलू उपकरण जैसे पंखा, फ्रिज, टीवी और वॉशिंग मशीन इसके द्वारा संचालित होते हैं। दूसरा, घरों, कार्यालयों तथा सड़कों की प्रकाश व्यवस्था विद्युत धारा पर आधारित है। तीसरा, मोबाइल फोन, कंप्यूटर और इंटरनेट उपकरणों के संचालन के लिए विद्युत धारा आवश्यक है। चौथा, उद्योगों में मशीनों और उत्पादन इकाइयों को चलाने के लिए इसका व्यापक उपयोग होता है। इसके अतिरिक्त चिकित्सा उपकरणों, परिवहन प्रणालियों तथा वैज्ञानिक अनुसंधान में भी धारा विद्युत अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
