यह रहे CBSE Class 12 Geography (India: People and Economy)
Chapter 6 – Planning and Sustainable Development in Indian Context
20 महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
1. भारत में नियोजन (Planning) क्या है?
उत्तर:
नियोजन वह प्रक्रिया है जिसमें किसी देश या क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और भौतिक विकास के लिए पूर्व-निर्धारित लक्ष्य तय किए जाते हैं और उन्हें प्राप्त करने के लिए योजनाएँ बनाई जाती हैं। भारत में स्वतंत्रता के बाद योजनाबद्ध विकास अपनाया गया ताकि संसाधनों का सही उपयोग हो सके और क्षेत्रीय असमानताओं को कम किया जा सके। इसके अंतर्गत पंचवर्षीय योजनाओं का प्रयोग किया गया। नियोजन का मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और जीवन स्तर में सुधार करना है। यह विकास को संतुलित और दीर्घकालिक बनाने में सहायता करता है।
2. क्षेत्रीय नियोजन (Regional Planning) क्या है?
उत्तर:
क्षेत्रीय नियोजन का उद्देश्य देश के विभिन्न क्षेत्रों में समान विकास सुनिश्चित करना है। भारत में कुछ क्षेत्र विकसित हैं जबकि कुछ पिछड़े हैं, इसलिए क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने के लिए यह योजना अपनाई जाती है। इसमें प्रत्येक क्षेत्र की भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार विकास योजनाएँ बनाई जाती हैं। जैसे पर्वतीय क्षेत्र, मरुस्थलीय क्षेत्र और जनजातीय क्षेत्र के लिए अलग-अलग योजनाएँ लागू की जाती हैं। इसका मुख्य लक्ष्य संतुलित क्षेत्रीय विकास और संसाधनों का न्यायसंगत वितरण करना है।
3. क्षेत्रीय नियोजन के दो प्रमुख दृष्टिकोण बताइए।
उत्तर:
क्षेत्रीय नियोजन के दो प्रमुख दृष्टिकोण हैं—
(1) क्षेत्रीय दृष्टिकोण (Regional Approach): इसमें किसी विशेष क्षेत्र के समग्र विकास पर ध्यान दिया जाता है।
(2) क्षेत्र-आधारित दृष्टिकोण (Target Area Approach): इसमें पिछड़े या समस्याग्रस्त क्षेत्रों जैसे सूखा प्रभावित या पहाड़ी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
इन दोनों दृष्टिकोणों का उद्देश्य आर्थिक असमानताओं को कम करना और विकास को संतुलित बनाना है। भारत में इन दोनों का उपयोग योजनाबद्ध विकास में किया गया है।
4. लक्षित क्षेत्र कार्यक्रम क्या हैं?
उत्तर:
लक्षित क्षेत्र कार्यक्रम वे योजनाएँ हैं जो विशेष रूप से पिछड़े और समस्याग्रस्त क्षेत्रों के विकास के लिए बनाई जाती हैं। इनका उद्देश्य क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना है। उदाहरण के लिए—सूखा प्रवण क्षेत्र विकास कार्यक्रम (DPAP), मरुस्थलीय विकास कार्यक्रम और पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम। इन कार्यक्रमों में कृषि विकास, सिंचाई, वनीकरण और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इनका लक्ष्य स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर सतत विकास को बढ़ावा देना है।
5. सतत विकास (Sustainable Development) क्या है?
उत्तर:
सतत विकास वह विकास प्रक्रिया है जिसमें वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है, लेकिन भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को प्रभावित नहीं किया जाता। इसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक समानता और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना है। यह प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर आधारित है। बढ़ते प्रदूषण और संसाधनों की कमी के कारण इसकी आवश्यकता बढ़ गई है। यह विकास को दीर्घकालिक और पर्यावरण अनुकूल बनाता है।
6. सतत विकास के प्रमुख उद्देश्य बताइए।
उत्तर:
सतत विकास के प्रमुख उद्देश्य हैं—प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, पर्यावरण संतुलन बनाए रखना, गरीबी कम करना और सामाजिक समानता को बढ़ावा देना। यह आर्थिक विकास को इस प्रकार सुनिश्चित करता है कि पर्यावरण को नुकसान न हो। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, जल संरक्षण और वनीकरण को बढ़ावा दिया जाता है। इसका लक्ष्य वर्तमान और भविष्य दोनों पीढ़ियों के लिए संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
7. भारत में पंचवर्षीय योजनाओं का महत्व क्या है?
उत्तर:
भारत में पंचवर्षीय योजनाएँ आर्थिक विकास की आधारशिला रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से देश में कृषि, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों का विकास किया गया। इसका उद्देश्य गरीबी कम करना, रोजगार बढ़ाना और संसाधनों का संतुलित उपयोग करना था। यह नियोजन प्रणाली केंद्रीय योजना आयोग द्वारा संचालित की जाती थी। इससे भारत में आर्थिक संरचना मजबूत हुई और विकास की दिशा तय हुई।
8. सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP) क्या है?
उत्तर:
सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों का विकास करना है जहाँ वर्षा कम होती है और सूखे की स्थिति बनी रहती है। इसकी शुरुआत चौथी पंचवर्षीय योजना में हुई थी। इसमें जल संरक्षण, भूमि विकास, वनीकरण और सिंचाई सुविधाओं पर ध्यान दिया जाता है। इसका मुख्य लक्ष्य कृषि उत्पादन बढ़ाना और रोजगार के अवसर पैदा करना है।
9. भारत में पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम का उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
इस कार्यक्रम का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों का समग्र विकास करना है। पर्वतीय क्षेत्रों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ होती हैं, इसलिए इन क्षेत्रों में कृषि, बागवानी, पशुपालन और लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जाता है। यह कार्यक्रम संसाधनों के सही उपयोग और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार पर केंद्रित है।
10. भौमौर क्षेत्र में एकीकृत जनजातीय विकास परियोजना क्या है?
उत्तर:
यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के भौमौर क्षेत्र में शुरू की गई थी जहाँ गद्दी जनजाति निवास करती है। इस क्षेत्र में कठिन जलवायु और सीमित संसाधन हैं। इस परियोजना का उद्देश्य जनजातीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार करना, कृषि विकास करना और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराना है। यह क्षेत्रीय विकास का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
11. भारत में नियोजन आयोग का क्या कार्य था?
उत्तर:
नियोजन आयोग भारत में विकास योजनाएँ बनाने वाली सर्वोच्च संस्था थी। इसका कार्य देश की आर्थिक और सामाजिक विकास योजनाएँ तैयार करना और उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करना था। यह पंचवर्षीय योजनाओं का निर्माण करता था। इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते थे। 2015 में इसे समाप्त कर नीति आयोग (NITI Aayog) बनाया गया।
12. नीति आयोग (NITI Aayog) की भूमिका क्या है?
उत्तर:
नीति आयोग भारत सरकार की वर्तमान नीति निर्माण संस्था है। यह सहकारी संघवाद को बढ़ावा देता है और राज्यों को विकास में शामिल करता है। इसका उद्देश्य नवाचार, सतत विकास और नीति निर्माण में सुधार करना है। यह पुराने नियोजन आयोग की तुलना में अधिक लचीला और आधुनिक संस्थान है।
13. क्षेत्रीय असमानताओं का क्या अर्थ है?
उत्तर:
क्षेत्रीय असमानता का अर्थ है किसी देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच विकास स्तर में अंतर होना। कुछ क्षेत्र विकसित होते हैं जबकि कुछ पिछड़े रह जाते हैं। यह अंतर आय, रोजगार, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं में देखा जाता है। इसे कम करने के लिए क्षेत्रीय नियोजन अपनाया जाता है।
14. सतत विकास की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर:
तेजी से बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण और प्रदूषण के कारण प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ गया है। इसलिए सतत विकास आवश्यक है ताकि संसाधनों का संतुलित उपयोग हो और पर्यावरण सुरक्षित रहे। यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधन बचाने में मदद करता है।
15. इंदिरा गांधी नहर कमांड क्षेत्र का महत्व क्या है?
उत्तर:
यह भारत की सबसे बड़ी नहर परियोजनाओं में से एक है जो राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों को सिंचाई सुविधा प्रदान करती है। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई है और मरुस्थलीय क्षेत्रों का विकास हुआ है। हालांकि इसके कारण जलभराव और मिट्टी की लवणता जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न हुई हैं।
16. संसाधन संरक्षण क्यों जरूरी है?
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं और उनका अत्यधिक उपयोग भविष्य में संकट पैदा कर सकता है। इसलिए संसाधनों का संरक्षण आवश्यक है। यह सतत विकास का आधार है और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
17. विकास और पर्यावरण के बीच संबंध बताइए।
उत्तर:
विकास और पर्यावरण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। विकास के लिए संसाधनों की आवश्यकता होती है लेकिन अत्यधिक उपयोग पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता है। इसलिए दोनों के बीच संतुलन जरूरी है। सतत विकास इस संतुलन को बनाए रखने का प्रयास करता है।
18. लक्षित समूह कार्यक्रम क्या हैं?
उत्तर:
ये कार्यक्रम विशेष सामाजिक समूहों जैसे छोटे किसान, सीमांत किसान और जनजातियों के विकास के लिए बनाए जाते हैं। इनका उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों को सहायता प्रदान करना है।
19. हरित विकास (Green Development) क्या है?
उत्तर:
हरित विकास का अर्थ है ऐसा विकास जो पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाए। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा, वनीकरण और प्रदूषण नियंत्रण पर ध्यान दिया जाता है। यह सतत विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
20. भारत में योजनाबद्ध विकास के लाभ बताइए।
उत्तर:
योजनाबद्ध विकास से आर्थिक स्थिरता, रोजगार सृजन और संसाधनों का उचित उपयोग संभव हुआ है। इससे कृषि और औद्योगिक क्षेत्र में सुधार हुआ है। यह क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में भी सहायक रहा है।
