यहाँ CBSE कक्षा 12 भूगोल (भारत: लोग और अर्थव्यवस्था)
अध्याय 4 – जल संसाधन (Water Resources)
20 महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर दिए गए हैं।


1. जल संसाधन क्या हैं?

जल संसाधन वे प्राकृतिक स्रोत हैं जिनसे मनुष्य को पानी प्राप्त होता है, जैसे नदियाँ, झीलें, तालाब और भूमिगत जल। भारत में ये संसाधन कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। देश में जल का सबसे अधिक उपयोग कृषि क्षेत्र में होता है। हालांकि जल संसाधन प्रचुर मात्रा में हैं, फिर भी असमान वितरण और अत्यधिक दोहन के कारण जल संकट उत्पन्न होता है। इसलिए जल संसाधनों का संरक्षण और सतत उपयोग आवश्यक है।


2. भारत में जल की कमी के प्रमुख कारण क्या हैं?

भारत में जल की कमी के कई कारण हैं। पहला, जनसंख्या वृद्धि के कारण जल की मांग बढ़ रही है। दूसरा, कृषि में अत्यधिक सिंचाई के कारण भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है। तीसरा, औद्योगिक और घरेलू प्रदूषण जल स्रोतों को अनुपयोगी बना रहा है। चौथा, वर्षा का असमान वितरण भी जल संकट का कारण है। इन सभी कारणों से कई क्षेत्रों में जल की गंभीर कमी देखी जाती है।


3. सतही जल और भूमिगत जल में अंतर बताइए।

सतही जल वह जल है जो नदियों, झीलों, तालाबों और जलाशयों में पाया जाता है। इसका उपयोग सीधे किया जा सकता है। भूमिगत जल वह जल है जो भूमि के नीचे एक्वीफर में संग्रहीत रहता है और कुओं, नलकूपों द्वारा निकाला जाता है। सतही जल वर्षा पर निर्भर होता है जबकि भूमिगत जल धीरे-धीरे पुनर्भरण होता है। दोनों ही संसाधन कृषि और घरेलू उपयोग के लिए आवश्यक हैं, लेकिन अत्यधिक उपयोग से दोनों प्रभावित होते हैं।


4. जल प्रदूषण के प्रमुख स्रोत क्या हैं?

जल प्रदूषण के मुख्य स्रोत औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि में उपयोग होने वाले रसायन और घरेलू सीवेज हैं। कारखानों से निकलने वाले रसायन नदियों में मिलकर जल को विषैला बनाते हैं। खेतों से बहने वाले कीटनाशक और उर्वरक भी जल को प्रदूषित करते हैं। शहरी क्षेत्रों का गंदा पानी नदियों और झीलों में गिरता है। इससे जलजनित रोग फैलते हैं और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।


5. भारत में प्रमुख जल संकट वाले क्षेत्र कौन-से हैं?

भारत में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु और दिल्ली जैसे क्षेत्र जल संकट से प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों में वर्षा कम होती है और भूजल का अत्यधिक दोहन किया जाता है। कृषि में अधिक सिंचाई के कारण जल स्तर लगातार गिर रहा है। शहरीकरण और औद्योगीकरण ने भी जल की मांग बढ़ा दी है। इन कारणों से इन क्षेत्रों में जल की गंभीर समस्या उत्पन्न हुई है।


6. जल संरक्षण क्यों आवश्यक है?

जल संरक्षण इसलिए आवश्यक है क्योंकि जल एक सीमित संसाधन है। यदि इसका अत्यधिक उपयोग किया गया तो भविष्य में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो सकता है। कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए जल आवश्यक है। जल संरक्षण से पर्यावरण संतुलन बना रहता है। वर्षा जल संचयन और पुनर्भरण जैसी तकनीकों से जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।


7. वर्षा जल संचयन क्या है?

वर्षा जल संचयन वह प्रक्रिया है जिसमें वर्षा के पानी को इकट्ठा करके उसे भविष्य के उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाता है। इसे छतों, टैंकों और तालाबों में संग्रहित किया जाता है। इससे भूजल स्तर बढ़ता है और जल संकट कम होता है। यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उपयोगी है। भारत के कई राज्यों में यह प्रणाली सफलतापूर्वक अपनाई जा रही है।


8. जल संसाधनों के प्रमुख उपयोग क्या हैं?

जल संसाधनों का उपयोग मुख्यतः कृषि, उद्योग और घरेलू कार्यों में होता है। कृषि क्षेत्र सबसे अधिक जल का उपयोग करता है, विशेषकर सिंचाई के लिए। उद्योगों में उत्पादन प्रक्रिया के लिए जल आवश्यक होता है। घरेलू उपयोग में पीने, सफाई और अन्य दैनिक कार्य शामिल हैं। इसके अलावा जल विद्युत उत्पादन में भी इसका उपयोग किया जाता है।


9. जल संकट क्या है?

जब किसी क्षेत्र में जल की मांग आपूर्ति से अधिक हो जाती है, तो उसे जल संकट कहते हैं। यह स्थिति अत्यधिक जनसंख्या, भूजल दोहन और प्रदूषण के कारण उत्पन्न होती है। जल संकट कृषि उत्पादन और मानव जीवन को प्रभावित करता है। भारत के कई हिस्सों में यह समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। इसके समाधान के लिए जल संरक्षण आवश्यक है।


10. भारत में प्रमुख नदी घाटियाँ कौन-सी हैं?

भारत में गंगा, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी प्रमुख नदी घाटियाँ हैं। गंगा और ब्रह्मपुत्र घाटियाँ जल संसाधनों में समृद्ध हैं। ये घाटियाँ कृषि, सिंचाई और जल परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन नदियों से लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। हालांकि प्रदूषण और अति उपयोग इनके लिए चुनौती है।


11. जल प्रदूषण के प्रभाव बताइए।

जल प्रदूषण से जलजनित रोग जैसे हैजा और डायरिया फैलते हैं। यह जलीय जीवों को भी नुकसान पहुँचाता है। प्रदूषित जल पीने योग्य नहीं रहता। कृषि उत्पादन पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके कारण पर्यावरण असंतुलन उत्पन्न होता है और मानव स्वास्थ्य प्रभावित होता है।


12. भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन क्या है?

भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन तब होता है जब पानी को प्राकृतिक पुनर्भरण की तुलना में तेजी से निकाला जाता है। इससे जल स्तर गिर जाता है। पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में यह समस्या गंभीर है। इससे भविष्य में जल की कमी हो सकती है। इसलिए नियंत्रित उपयोग आवश्यक है।


13. जल संरक्षण की प्रमुख विधियाँ क्या हैं?

जल संरक्षण की प्रमुख विधियों में वर्षा जल संचयन, वाटरशेड प्रबंधन, ड्रिप सिंचाई और टपक सिंचाई शामिल हैं। ये विधियाँ जल की बचत करती हैं और भूजल को पुनर्भरित करती हैं। इससे कृषि उत्पादन भी बढ़ता है। यह सतत विकास के लिए आवश्यक है।


14. वाटरशेड प्रबंधन क्या है?

वाटरशेड प्रबंधन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें जलग्रहण क्षेत्र के जल और भूमि संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाता है। इसका उद्देश्य जल संरक्षण और भूमि सुधार है। इसमें स्थानीय समुदाय की भागीदारी महत्वपूर्ण होती है। इससे जल संसाधनों का सतत उपयोग संभव होता है।


15. बहुउद्देशीय नदी परियोजनाएँ क्या हैं?

बहुउद्देशीय नदी परियोजनाएँ वे योजनाएँ हैं जिनमें नदियों का उपयोग सिंचाई, जल विद्युत, बाढ़ नियंत्रण और जल आपूर्ति के लिए किया जाता है। जैसे भाखड़ा नांगल परियोजना। ये परियोजनाएँ विकास में सहायक हैं। हालांकि इनके पर्यावरणीय प्रभाव भी होते हैं।


16. जल प्रदूषण के प्रमुख कारण क्या हैं?

जल प्रदूषण के प्रमुख कारण औद्योगिक अपशिष्ट, घरेलू सीवेज, कृषि रसायन और धार्मिक गतिविधियाँ हैं। ये सभी जल स्रोतों को प्रदूषित करते हैं। इससे जल की गुणवत्ता खराब होती है। यह मानव और पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक है।


17. जल विद्युत क्या है?

जल विद्युत वह ऊर्जा है जो बहते पानी से उत्पन्न की जाती है। इसमें बांधों के माध्यम से जल का उपयोग किया जाता है। यह नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है। इससे प्रदूषण कम होता है और ऊर्जा उत्पादन में मदद मिलती है।


18. भारत में जल संसाधनों का असमान वितरण क्यों है?

भारत में वर्षा का वितरण असमान है, इसलिए जल संसाधनों का वितरण भी असमान है। कुछ क्षेत्रों में अधिक वर्षा होती है जबकि कुछ क्षेत्र सूखे रहते हैं। इसके अलावा भौगोलिक संरचना भी प्रभाव डालती है। इससे जल संकट बढ़ता है।


19. जल संसाधनों का महत्व बताइए।

जल संसाधन जीवन के लिए आवश्यक हैं। ये कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जल से खाद्य उत्पादन और आर्थिक विकास संभव होता है। यह पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी सहायक है।


20. जल संकट के समाधान क्या हैं?

जल संकट के समाधान में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, पुनर्चक्रण, और जागरूकता शामिल हैं। सरकार द्वारा भी कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं। सतत उपयोग और वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर जल संकट को कम किया जा सकता है।