नीचे CBSE कक्षा 12 (राजनीति विज्ञान) की पुस्तक “Politics in India Since Independence”, अध्याय 7 “Recent Developments in Indian Politics” के आधार पर 20 महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर दिए गए हैं।


1. 1989 के बाद भारतीय राजनीति में कौन-से प्रमुख परिवर्तन हुए?

1989 के बाद भारतीय राजनीति में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। सबसे पहले कांग्रेस की एकदलीय प्रभुत्व की स्थिति समाप्त हो गई और गठबंधन राजनीति का युग शुरू हुआ। दूसरी ओर क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ा और वे राष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा बने। मंडल आयोग की सिफारिशों के लागू होने से पिछड़ी जातियों की राजनीति को नई दिशा मिली। इसके साथ ही आर्थिक उदारीकरण की नीति अपनाई गई, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक बाजार से जुड़ गई। राम मंदिर आंदोलन और बाबरी मस्जिद विध्वंस जैसे घटनाक्रमों ने सांप्रदायिक राजनीति को बढ़ावा दिया। इन सभी घटनाओं ने भारतीय लोकतंत्र को अधिक जटिल और बहु-आयामी बना दिया।


2. गठबंधन सरकारों के उदय के कारण बताइए।

गठबंधन सरकारों का उदय इसलिए हुआ क्योंकि 1989 के बाद किसी भी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पा रहा था। कांग्रेस का एकछत्र प्रभुत्व समाप्त हो गया और भाजपा, क्षेत्रीय दल तथा अन्य छोटे दल मजबूत हो गए। क्षेत्रीय आकांक्षाओं के बढ़ने से राज्य स्तरीय दलों की भूमिका बढ़ी, जैसे DMK, TDP आदि। इसके परिणामस्वरूप केंद्र में सरकार बनाने के लिए कई दलों को साथ आना पड़ा। राष्ट्रीय मोर्चा, NDA और UPA जैसे गठबंधन इसका उदाहरण हैं। गठबंधन सरकारों ने लोकतंत्र को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाया, लेकिन कभी-कभी अस्थिरता और नीति निर्माण में समझौते की समस्या भी उत्पन्न हुई।


3. मंडल आयोग की सिफारिशों का भारतीय राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा?

मंडल आयोग की सिफारिशें 1990 में लागू होने के बाद भारतीय राजनीति में बड़ा परिवर्तन आया। आयोग ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27% आरक्षण देने की सिफारिश की थी। इससे सामाजिक न्याय और समानता की राजनीति को बल मिला। हालांकि इसके विरोध में व्यापक आंदोलन भी हुए, जिससे समाज में तनाव पैदा हुआ। इसके लागू होने से जाति आधारित राजनीति मजबूत हुई और पिछड़े वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला। कई क्षेत्रीय दलों ने OBC वोट बैंक को आधार बनाकर अपनी स्थिति मजबूत की। इसने भारतीय राजनीति को सामाजिक न्याय और पहचान की राजनीति की ओर मोड़ दिया।


4. उदारीकरण की नीति से भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा?

1991 के बाद भारत ने उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) की नीति अपनाई। इससे अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेश बढ़ा और औद्योगिक विकास तेज हुआ। कई क्षेत्रों में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ी, जिससे प्रतिस्पर्धा और उत्पादकता में सुधार हुआ। सूचना प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्र में तीव्र विकास हुआ। हालांकि, इसके साथ असमानता भी बढ़ी क्योंकि सभी वर्गों को समान लाभ नहीं मिला। ग्रामीण क्षेत्रों पर इसका प्रभाव सीमित रहा। उदारीकरण ने भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ा, लेकिन सामाजिक और आर्थिक संतुलन की चुनौतियाँ भी उत्पन्न कीं।


5. बाबरी मस्जिद विध्वंस का राजनीतिक प्रभाव क्या था?

6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस ने भारतीय राजनीति में गहरा प्रभाव डाला। इससे देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ा और कई राज्यों में दंगे हुए। इस घटना ने धर्म आधारित राजनीति को तेज कर दिया और भाजपा जैसे दलों की राजनीतिक स्थिति मजबूत हुई। साथ ही कांग्रेस और अन्य दलों की राजनीति पर भी असर पड़ा। इस घटना ने भारतीय लोकतंत्र में धर्मनिरपेक्षता पर गंभीर प्रश्न उठाए। इसके बाद चुनावी राजनीति में सांप्रदायिक मुद्दों की भूमिका बढ़ गई। यह घटना भारतीय राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हुई।


6. क्षेत्रीय दलों के उदय के कारण बताइए।

क्षेत्रीय दलों का उदय विभिन्न कारणों से हुआ। सबसे महत्वपूर्ण कारण क्षेत्रीय आकांक्षाओं का बढ़ना था, जैसे भाषा, संस्कृति और विकास की मांग। केंद्र सरकार की नीतियों से असंतोष ने भी क्षेत्रीय दलों को बढ़ावा दिया। पंजाब, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और असम जैसे राज्यों में क्षेत्रीय दल मजबूत हुए। इसके अलावा कांग्रेस के कमजोर होने से राजनीतिक खालीपन उत्पन्न हुआ। इन दलों ने स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर उठाया। इससे भारतीय राजनीति अधिक संघीय और बहुदलीय बन गई।


7. गठबंधन राजनीति की विशेषताएँ लिखिए।

गठबंधन राजनीति में कई दल मिलकर सरकार बनाते हैं क्योंकि किसी एक दल को बहुमत नहीं मिलता। इसमें विभिन्न विचारधाराओं वाले दल एक साथ काम करते हैं। यह व्यवस्था अधिक लोकतांत्रिक और प्रतिनिधित्वपूर्ण होती है। लेकिन इसमें निर्णय लेने में देरी और समझौते की समस्या होती है। गठबंधन सरकारें स्थिरता के लिए सहयोग पर निर्भर करती हैं। भारत में NDA और UPA इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इस प्रणाली ने क्षेत्रीय दलों को राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका दी।


8. 1989 को भारतीय राजनीति में “टर्निंग पॉइंट” क्यों कहा जाता है?

1989 को टर्निंग पॉइंट इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके बाद कांग्रेस का एकदलीय प्रभुत्व समाप्त हो गया। राष्ट्रीय राजनीति में गठबंधन सरकारों का युग शुरू हुआ। मंडल आयोग और मंडल राजनीति ने सामाजिक न्याय को केंद्र में ला दिया। राम जन्मभूमि आंदोलन ने धार्मिक राजनीति को बढ़ावा दिया। साथ ही आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत हुई। इन सभी घटनाओं ने भारतीय राजनीति की दिशा और स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया।


9. नई आर्थिक नीति (1991) के प्रमुख उद्देश्य क्या थे?

नई आर्थिक नीति का मुख्य उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को संकट से बाहर निकालना था। इसके तहत उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण को अपनाया गया। सरकार ने लाइसेंस राज को कम किया और विदेशी निवेश को प्रोत्साहन दिया। सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका को सीमित किया गया। इसका उद्देश्य आर्थिक विकास की गति बढ़ाना और वैश्विक बाजार से जुड़ना था। इस नीति ने आर्थिक संरचना को आधुनिक बनाया लेकिन असमानता की चुनौती भी बढ़ाई।


10. भारतीय राजनीति में सामाजिक न्याय की भूमिका समझाइए।

भारतीय राजनीति में सामाजिक न्याय एक महत्वपूर्ण विचार बन गया है, विशेषकर मंडल आयोग के बाद। पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को राजनीतिक एजेंडा में शामिल किया गया। आरक्षण नीति ने शिक्षा और रोजगार में समान अवसर प्रदान किए। विभिन्न राजनीतिक दलों ने सामाजिक न्याय को अपने चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया। इससे राजनीति अधिक समावेशी बनी। हालांकि, कभी-कभी जातिगत विभाजन भी बढ़ा, लेकिन कुल मिलाकर यह लोकतंत्र को मजबूत करने वाला तत्व बना।


11. राष्ट्रीय मोर्चा सरकार के बारे में बताइए।

राष्ट्रीय मोर्चा सरकार 1989 में गठित हुई, जिसमें जनता दल और कई क्षेत्रीय दल शामिल थे। वी.पी. सिंह इसके प्रधानमंत्री बने। यह सरकार कांग्रेस के पतन के बाद बनी पहली गठबंधन सरकार थी। इस सरकार ने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू किया। हालांकि, यह सरकार राजनीतिक अस्थिरता के कारण अधिक समय तक नहीं चल सकी। इसके बावजूद इसने भारतीय राजनीति में गठबंधन युग की शुरुआत की।


12. बहुदलीय प्रणाली के क्या लाभ हैं?

बहुदलीय प्रणाली में कई राजनीतिक दल भाग लेते हैं, जिससे लोकतंत्र अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनता है। इसमें विभिन्न विचारधाराओं और समूहों को स्थान मिलता है। यह प्रणाली क्षेत्रीय और सामाजिक विविधता को सम्मान देती है। हालांकि इससे सरकारें कभी-कभी अस्थिर भी हो सकती हैं। भारत में यह प्रणाली विभिन्न सामाजिक समूहों को राजनीतिक भागीदारी देती है और लोकतंत्र को मजबूत करती है।


13. 1990 के दशक में जातीय राजनीति का क्या महत्व बढ़ा?

1990 के दशक में जातीय राजनीति का महत्व बढ़ा क्योंकि मंडल आयोग की सिफारिशें लागू हुईं। इससे OBC समुदाय को राजनीतिक पहचान मिली। विभिन्न दलों ने जातीय आधार पर समर्थन जुटाना शुरू किया। इससे चुनावी राजनीति में जाति एक प्रमुख कारक बन गई। हालांकि इससे सामाजिक विभाजन भी बढ़ा, लेकिन यह सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।


14. गठबंधन सरकारों की चुनौतियाँ क्या हैं?

गठबंधन सरकारों में कई दल होने के कारण निर्णय लेना कठिन हो जाता है। विचारधारा में अंतर होने से नीति निर्माण में समझौते करने पड़ते हैं। इससे सरकार की स्थिरता प्रभावित होती है। कभी-कभी छोटे दल सरकार को अस्थिर कर सकते हैं। फिर भी यह प्रणाली विविधता को प्रतिनिधित्व देती है।


15. भाजपा के उदय के कारण बताइए।

भाजपा के उदय के पीछे कई कारण थे। राम मंदिर आंदोलन ने इसे व्यापक समर्थन दिया। कांग्रेस की कमजोरी और भ्रष्टाचार के आरोपों ने भी इसे बढ़ावा दिया। हिंदुत्व की विचारधारा ने इसे नई पहचान दी। इसके साथ ही गठबंधन राजनीति में इसकी भूमिका बढ़ी और यह NDA का प्रमुख हिस्सा बनी।


16. कांग्रेस के पतन के कारण क्या थे?

कांग्रेस के पतन के कारणों में आंतरिक गुटबाजी, नेतृत्व संकट और भ्रष्टाचार के आरोप शामिल थे। क्षेत्रीय दलों का उदय भी इसका एक बड़ा कारण था। 1989 के बाद कांग्रेस को बहुमत नहीं मिल पाया। सामाजिक और राजनीतिक बदलावों ने भी इसकी स्थिति कमजोर की।


17. 1990 के दशक में भारत की राजनीति का स्वरूप कैसा था?

1990 के दशक में भारत की राजनीति बहुदलीय और गठबंधन आधारित हो गई। सामाजिक न्याय और पहचान की राजनीति महत्वपूर्ण हो गई। आर्थिक सुधारों ने नई दिशा दी। क्षेत्रीय दलों की भूमिका बढ़ी और केंद्र सरकारें गठबंधन पर निर्भर रहने लगीं।


18. क्षेत्रीय असंतोष के कारण क्या हैं?

क्षेत्रीय असंतोष के कारण विकास में असमानता, सांस्कृतिक पहचान की उपेक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कमी हैं। कई राज्यों में विशेष दर्जे की मांग उठी। इससे क्षेत्रीय आंदोलन और दलों का उदय हुआ।


19. लोकतंत्र पर गठबंधन राजनीति का प्रभाव क्या है?

गठबंधन राजनीति ने लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाया। विभिन्न दलों को सत्ता में भागीदारी मिली। लेकिन इससे अस्थिरता और समझौते की राजनीति भी बढ़ी। यह भारतीय लोकतंत्र की विविधता को दर्शाती है।


20. 1989 के बाद भारतीय राजनीति में प्रमुख प्रवृत्तियाँ क्या थीं?

1989 के बाद प्रमुख प्रवृत्तियाँ थीं—गठबंधन राजनीति, क्षेत्रीय दलों का उदय, सामाजिक न्याय की राजनीति, आर्थिक उदारीकरण और सांप्रदायिक राजनीति का बढ़ना। इन प्रवृत्तियों ने भारतीय राजनीति को अधिक जटिल और प्रतिस्पर्धी बना दिया।