यहाँ CBSE Class 12 Political Science (Contemporary World Politics)
Chapter 6 – पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन के लिए 20 महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर दिए गए हैं। यह उत्तर परीक्षा 2026–27 के लिए उपयुक्त, सरल और NCERT आधारित हैं।
1. सतत विकास (Sustainable Development) क्या है?
सतत विकास वह अवधारणा है जिसमें वर्तमान पीढ़ी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति इस प्रकार करती है कि भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता प्रभावित न हो। इसमें आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। यह विचार 1987 की ब्रुंडलैंड रिपोर्ट में प्रमुख रूप से सामने आया। इसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना और प्रदूषण को नियंत्रित करना है। आज वैश्विक राजनीति में यह एक महत्वपूर्ण सिद्धांत बन चुका है।
2. वैश्विक पर्यावरणीय समस्याएँ क्या हैं?
वैश्विक पर्यावरणीय समस्याएँ वे हैं जो किसी एक देश तक सीमित न होकर पूरे विश्व को प्रभावित करती हैं, जैसे जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, ओजोन परत क्षय और जैव विविधता का नुकसान। ये समस्याएँ औद्योगिकीकरण, वनों की कटाई और बढ़ते प्रदूषण के कारण उत्पन्न होती हैं। इनका समाधान केवल अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही संभव है। इसलिए पर्यावरणीय मुद्दे आज वैश्विक राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।
3. ‘कॉमन बट डिफरेंशिएटेड रिस्पॉन्सिबिलिटी’ क्या है?
यह सिद्धांत 1992 के रियो सम्मेलन में अपनाया गया था। इसका अर्थ है कि सभी देशों की पर्यावरण संरक्षण में जिम्मेदारी है, लेकिन विकसित देशों की जिम्मेदारी अधिक है क्योंकि उन्होंने अधिक प्रदूषण किया है। विकासशील देशों के पास संसाधनों की कमी होती है, इसलिए उन्हें छूट और सहायता मिलनी चाहिए। यह सिद्धांत न्याय और समानता पर आधारित है और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय समझौतों की नींव है।
4. वैश्विक साझा संसाधन (Global Commons) क्या हैं?
वैश्विक साझा संसाधन वे क्षेत्र हैं जो किसी एक देश के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते, जैसे वायुमंडल, समुद्र, अंटार्कटिका और बाह्य अंतरिक्ष। इनका उपयोग सभी देशों द्वारा साझा रूप से किया जाता है। इनके संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है क्योंकि इनका अत्यधिक दोहन पूरे विश्व को प्रभावित करता है। ये संसाधन वैश्विक पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
5. पर्यावरणीय राजनीति का महत्व क्या है?
पर्यावरणीय राजनीति का महत्व इसलिए बढ़ा है क्योंकि पर्यावरणीय समस्याएँ अब वैश्विक सुरक्षा और विकास से जुड़ गई हैं। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और संसाधनों की कमी ने देशों के बीच सहयोग और संघर्ष दोनों को जन्म दिया है। अंतरराष्ट्रीय संगठन जैसे UNEP और UNFCCC इन समस्याओं के समाधान में भूमिका निभाते हैं। इसलिए पर्यावरण आज अंतरराष्ट्रीय संबंधों का प्रमुख विषय बन गया है।
6. रियो पृथ्वी सम्मेलन (1992) का महत्व
1992 का रियो सम्मेलन पर्यावरणीय मुद्दों पर पहला बड़ा वैश्विक सम्मेलन था। इसमें सतत विकास, CBDR सिद्धांत और एजेंडा-21 को अपनाया गया। इस सम्मेलन ने पर्यावरण को वैश्विक राजनीति के केंद्र में ला दिया। इसमें जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता जैसे मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया। यह सम्मेलन पर्यावरणीय शासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।
7. क्योटो प्रोटोकॉल क्या है?
क्योटो प्रोटोकॉल 1997 में अपनाया गया एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसका उद्देश्य ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना है। इसमें विकसित देशों के लिए बाध्यकारी लक्ष्य निर्धारित किए गए। इसका मुख्य लक्ष्य वैश्विक तापमान वृद्धि को नियंत्रित करना है। यह जलवायु परिवर्तन से निपटने का एक महत्वपूर्ण वैश्विक प्रयास है, हालांकि कई देशों ने इसके क्रियान्वयन में चुनौतियाँ प्रस्तुत की हैं।
8. पर्यावरणीय क्षरण के कारण क्या हैं?
पर्यावरणीय क्षरण के प्रमुख कारणों में औद्योगिकीकरण, जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण और वनों की कटाई शामिल हैं। बढ़ता प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग भी इसका कारण है। ये कारक जल, वायु और भूमि प्रदूषण को बढ़ाते हैं। इसके परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता का नुकसान होता है। इससे मानव जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
9. गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की भूमिका
NGOs पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे लोगों में जागरूकता फैलाते हैं, सरकारों पर दबाव बनाते हैं और पर्यावरणीय आंदोलनों का समर्थन करते हैं। वे वृक्षारोपण, प्रदूषण नियंत्रण और संरक्षण परियोजनाएँ चलाते हैं। चिपको आंदोलन जैसे उदाहरणों में NGOs ने सक्रिय भूमिका निभाई। इनका उद्देश्य सतत विकास को बढ़ावा देना है।
10. विकसित और विकासशील देशों के बीच पर्यावरणीय विवाद
पर्यावरणीय मुद्दों पर विकसित और विकासशील देशों के बीच मतभेद हैं। विकसित देश उत्सर्जन कम करने पर जोर देते हैं, जबकि विकासशील देश विकास के लिए अधिक उत्सर्जन की आवश्यकता बताते हैं। विकासशील देशों का कहना है कि ऐतिहासिक प्रदूषण विकसित देशों ने किया है। इसलिए वे अधिक जिम्मेदारी और वित्तीय सहायता की मांग करते हैं।
11. प्राकृतिक संसाधनों का महत्व
प्राकृतिक संसाधन जैसे जल, वन, खनिज और ऊर्जा मानव जीवन के लिए आवश्यक हैं। ये आर्थिक विकास और औद्योगिक उत्पादन का आधार हैं। इनका सतत उपयोग आवश्यक है क्योंकि ये सीमित हैं। अत्यधिक दोहन से पर्यावरणीय असंतुलन उत्पन्न होता है। इसलिए इनके संरक्षण की आवश्यकता है।
12. ओजोन परत क्षय क्या है?
ओजोन परत पृथ्वी को हानिकारक UV किरणों से बचाती है। क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) के कारण यह परत क्षतिग्रस्त हो रही है। इससे त्वचा कैंसर और जलवायु परिवर्तन का खतरा बढ़ता है। 1987 का मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल इसके समाधान के लिए बनाया गया था। यह पर्यावरण संरक्षण का सफल अंतरराष्ट्रीय प्रयास है।
13. भारत का पर्यावरणीय दृष्टिकोण
भारत सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के पक्ष में है। भारत CBDR सिद्धांत का समर्थन करता है। यह विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर देता है। भारत अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय समझौतों में सक्रिय भाग लेता है। साथ ही यह गरीब देशों के लिए वित्तीय सहायता की मांग करता है।
14. पर्यावरणीय सुरक्षा का अर्थ
पर्यावरणीय सुरक्षा का अर्थ है प्राकृतिक संसाधनों और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना। इसका उद्देश्य मानव जीवन को सुरक्षित रखना है। इसमें प्रदूषण नियंत्रण, संसाधन संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटना शामिल है। यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
15. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि, बाढ़, सूखा और समुद्र स्तर में वृद्धि होती है। इससे कृषि, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। यह प्रवास और संसाधन संघर्ष को भी बढ़ाता है। इसका समाधान वैश्विक सहयोग से ही संभव है।
16. पर्यावरण आंदोलनों का महत्व
पर्यावरण आंदोलनों ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये आंदोलन सरकारों को पर्यावरण नीतियाँ बनाने के लिए प्रेरित करते हैं। चिपको आंदोलन और नर्मदा बचाओ आंदोलन इसके उदाहरण हैं। इनसे लोगों में जागरूकता बढ़ी है।
17. ‘पे प्रदूषक सिद्धांत’ क्या है?
इस सिद्धांत के अनुसार जो व्यक्ति या देश प्रदूषण करता है, उसे उसकी लागत वहन करनी चाहिए। यह पर्यावरणीय न्याय पर आधारित है। इसका उद्देश्य प्रदूषण को कम करना और जिम्मेदारी तय करना है। यह नीति विकसित देशों द्वारा अधिक समर्थित है।
18. जैव विविधता क्या है?
जैव विविधता का अर्थ है पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु और पौधों की विविधता। यह पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखती है। वनों की कटाई और प्रदूषण से यह खतरे में है। इसका संरक्षण आवश्यक है।
19. अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संगठनों की भूमिका
UNEP और UNFCCC जैसे संगठन पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये देशों के बीच सहयोग बढ़ाते हैं और नीतियाँ बनाते हैं। ये जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण नियंत्रण पर कार्य करते हैं। इनका उद्देश्य वैश्विक पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान करना है।
20. संसाधन संघर्ष क्या है?
संसाधन संघर्ष तब उत्पन्न होता है जब देशों या समूहों के बीच प्राकृतिक संसाधनों को लेकर प्रतिस्पर्धा होती है। यह जल, तेल और खनिज जैसे संसाधनों के लिए हो सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ सकता है। इसका समाधान सहयोग और न्यायपूर्ण वितरण है।
