CBSE कक्षा 12 राजनीति विज्ञान (समकालीन विश्व राजनीति)
अध्याय 3 – समकालीन दक्षिण एशिया
20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
यह अध्याय दक्षिण एशिया के देशों, लोकतंत्र, क्षेत्रीय सहयोग, संघर्षों तथा भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर केंद्रित है। इसमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मालदीव की राजनीतिक परिस्थितियों का अध्ययन किया जाता है।
1. दक्षिण एशिया से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
दक्षिण एशिया एशिया के दक्षिणी भाग में स्थित एक क्षेत्र है, जिसमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मालदीव शामिल हैं। यह क्षेत्र सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक विरासत तथा राजनीतिक जटिलताओं के लिए जाना जाता है। यहाँ की अधिकांश आबादी लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखती है, यद्यपि कई देशों ने सैन्य शासन, राजनीतिक अस्थिरता तथा जातीय संघर्षों का सामना किया है। दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए सार्क (SAARC) की स्थापना की गई। यह क्षेत्र विश्व राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है क्योंकि यहाँ जनसंख्या, संसाधनों और रणनीतिक महत्व का बड़ा प्रभाव है।
2. दक्षिण एशिया में लोकतंत्र की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
दक्षिण एशिया के अधिकांश देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था अपनाई गई है। यहाँ नियमित चुनाव, राजनीतिक दलों की भागीदारी तथा जनता की राजनीतिक चेतना लोकतंत्र की प्रमुख विशेषताएँ हैं। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जबकि नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका ने भी लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने का प्रयास किया है। हालांकि कई देशों में सैन्य हस्तक्षेप, राजनीतिक अस्थिरता और जातीय संघर्ष लोकतंत्र के सामने चुनौतियाँ रहे हैं। इसके बावजूद दक्षिण एशिया की जनता लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को प्राथमिकता देती है और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखती है।
3. पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थिति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पाकिस्तान ने स्वतंत्रता के बाद लोकतांत्रिक शासन और सैन्य शासन दोनों का अनुभव किया है। कई बार सेना ने सत्ता पर कब्ज़ा किया, जिसके कारण लोकतांत्रिक संस्थाएँ कमजोर हुईं। जनरल अयूब खान, याह्या खान, ज़िया-उल-हक और परवेज़ मुशर्रफ के शासनकाल इसके उदाहरण हैं। यद्यपि समय-समय पर चुनाव हुए और नागरिक सरकारें बनीं, फिर भी सेना और नौकरशाही का प्रभाव राजनीति में बना रहा। लोकतंत्र की मजबूती के लिए राजनीतिक दलों, न्यायपालिका और नागरिक समाज की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। वर्तमान में लोकतांत्रिक व्यवस्था को स्थिर बनाने के प्रयास जारी हैं।
4. बांग्लादेश के निर्माण के कारण बताइए।
उत्तर:
बांग्लादेश का निर्माण 1971 में हुआ। पूर्वी पाकिस्तान के लोगों को पश्चिमी पाकिस्तान द्वारा राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक भेदभाव का सामना करना पड़ता था। बंगाली भाषा और संस्कृति को पर्याप्त सम्मान नहीं दिया गया। 1970 के चुनावों में शेख मुजीबुर्रहमान की पार्टी को बहुमत मिला, लेकिन सत्ता हस्तांतरण नहीं हुआ। इसके परिणामस्वरूप संघर्ष शुरू हुआ और स्वतंत्रता आंदोलन तेज हो गया। भारत ने शरणार्थियों की समस्या तथा मानवीय आधार पर बांग्लादेश का समर्थन किया। अंततः 1971 के युद्ध के बाद बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित हुआ।
5. नेपाल में लोकतंत्र की स्थापना कैसे हुई?
उत्तर:
नेपाल में लंबे समय तक राजशाही शासन रहा। 1990 में जन आंदोलन के परिणामस्वरूप बहुदलीय लोकतंत्र की स्थापना हुई। बाद में राजशाही और लोकतांत्रिक शक्तियों के बीच संघर्ष जारी रहा। 2006 के जन आंदोलन ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत किया तथा राजा की शक्तियों को सीमित कर दिया। 2008 में नेपाल को संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया और राजशाही समाप्त कर दी गई। संविधान निर्माण की प्रक्रिया के बाद लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत किया गया। इस प्रकार नेपाल ने राजतंत्र से लोकतंत्र की ओर महत्वपूर्ण परिवर्तन किया।
6. श्रीलंका में जातीय संघर्ष के कारण क्या थे?
उत्तर:
श्रीलंका में सिंहली और तमिल समुदायों के बीच जातीय संघर्ष लंबे समय तक चला। स्वतंत्रता के बाद सरकार ने सिंहली भाषा और संस्कृति को अधिक महत्व दिया, जिससे तमिल समुदाय में असंतोष बढ़ा। शिक्षा और रोजगार में भी तमिलों को भेदभाव का अनुभव हुआ। इसके परिणामस्वरूप तमिल उग्रवादी संगठन लिट्टे (LTTE) का उदय हुआ, जिसने अलग तमिल राज्य की मांग की। कई वर्षों तक गृहयुद्ध चला, जिससे भारी जनहानि हुई। अंततः सरकार ने सैन्य कार्रवाई के माध्यम से संघर्ष को समाप्त किया, लेकिन राष्ट्रीय एकता और सामंजस्य की चुनौती बनी रही।
7. भूटान की राजनीतिक व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
भूटान दक्षिण एशिया का एक छोटा हिमालयी देश है। यहाँ लंबे समय तक राजशाही शासन रहा, लेकिन राजा ने स्वयं लोकतांत्रिक सुधारों की शुरुआत की। 2008 में भूटान ने लोकतांत्रिक संविधान अपनाया और संसदीय लोकतंत्र स्थापित किया। देश में नियमित चुनाव होते हैं और नागरिकों को राजनीतिक अधिकार प्राप्त हैं। भूटान ‘सकल राष्ट्रीय खुशी’ (Gross National Happiness) की अवधारणा के लिए प्रसिद्ध है, जो आर्थिक विकास के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन पर भी बल देती है। लोकतांत्रिक परिवर्तन शांतिपूर्ण तरीके से हुआ, जो भूटान की विशेष उपलब्धि मानी जाती है।
8. मालदीव में लोकतंत्र की स्थिति पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
मालदीव में लंबे समय तक एक ही नेतृत्व का प्रभुत्व रहा। राजनीतिक सुधारों और जन दबाव के परिणामस्वरूप बहुदलीय लोकतंत्र की स्थापना हुई। 2008 में नए संविधान के अंतर्गत लोकतांत्रिक चुनाव आयोजित किए गए। हालांकि राजनीतिक अस्थिरता, सत्ता संघर्ष और प्रशासनिक चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। मालदीव की राजनीति में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने के प्रयास जारी हैं। भारत और अन्य देशों ने भी लोकतांत्रिक विकास में सहयोग प्रदान किया है। लोकतंत्र के प्रति जनता की बढ़ती भागीदारी मालदीव की सकारात्मक उपलब्धि मानी जाती है।
9. भारत और पाकिस्तान के संबंधों में तनाव के प्रमुख कारण क्या हैं?
उत्तर:
भारत और पाकिस्तान के संबंधों में तनाव का मुख्य कारण जम्मू-कश्मीर विवाद है। इसके अतिरिक्त सीमा विवाद, आतंकवाद, जल बँटवारा तथा पारस्परिक अविश्वास भी तनाव के कारण हैं। दोनों देशों के बीच कई युद्ध हो चुके हैं और समय-समय पर सीमा पर संघर्ष की स्थिति बनी रहती है। हालांकि दोनों देशों ने शांति वार्ता, व्यापारिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के प्रयास भी किए हैं। स्थायी शांति के लिए विश्वास निर्माण तथा संवाद की निरंतरता आवश्यक है।
10. भारत और बांग्लादेश के संबंधों का महत्व बताइए।
उत्तर:
भारत और बांग्लादेश के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक आधार पर मजबूत हैं। 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, परिवहन और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है। सीमा प्रबंधन तथा नदी जल बँटवारे जैसे मुद्दों पर भी संवाद होता है। दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं। अच्छे संबंध दक्षिण एशिया में शांति और सहयोग को बढ़ावा देते हैं।
11. सार्क (SAARC) क्या है?
उत्तर:
सार्क अर्थात दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन की स्थापना 1985 में हुई। इसका उद्देश्य दक्षिण एशियाई देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके सदस्य भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव और अफगानिस्तान हैं। सार्क क्षेत्रीय विकास, गरीबी उन्मूलन तथा आपसी विश्वास बढ़ाने का प्रयास करता है। हालांकि राजनीतिक मतभेदों के कारण इसकी प्रगति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच सकी है, फिर भी यह दक्षिण एशिया में सहयोग का महत्वपूर्ण मंच है।
12. SAFTA का उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
SAFTA (South Asian Free Trade Area) दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करना और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से शुल्क दरों में कमी, व्यापार विस्तार तथा क्षेत्रीय आर्थिक विकास को प्रोत्साहन दिया जाता है। SAFTA दक्षिण एशियाई देशों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाने का प्रयास करता है। यह आर्थिक एकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
13. दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर:
दक्षिण एशिया में गरीबी, बेरोजगारी, जनसंख्या वृद्धि, पर्यावरणीय समस्याएँ और सुरक्षा चुनौतियाँ जैसी अनेक समान समस्याएँ हैं। इन समस्याओं का समाधान क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। सहयोग से व्यापार, निवेश, तकनीकी विकास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है। इससे आपसी विश्वास और शांति भी मजबूत होती है। सार्क जैसे संगठन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
14. दक्षिण एशिया में भारत की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा देश है, जिसकी जनसंख्या, अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। भारत ने क्षेत्रीय शांति, आर्थिक विकास और लोकतंत्र को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह पड़ोसी देशों को आर्थिक सहायता, तकनीकी सहयोग और मानवीय सहायता प्रदान करता है। हालांकि कुछ पड़ोसी देश भारत के प्रभुत्व को लेकर चिंतित भी रहते हैं। इसलिए भारत सहयोग और समानता के आधार पर संबंध विकसित करने का प्रयास करता है।
15. दक्षिण एशिया में लोकतंत्र के सामने प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
उत्तर:
दक्षिण एशिया में लोकतंत्र के सामने राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार, सैन्य हस्तक्षेप, जातीय संघर्ष, गरीबी और अशिक्षा जैसी चुनौतियाँ हैं। कई देशों में लोकतांत्रिक संस्थाएँ अभी भी पूरी तरह मजबूत नहीं हो पाई हैं। आर्थिक असमानता और सामाजिक विभाजन भी लोकतंत्र को प्रभावित करते हैं। इन चुनौतियों के बावजूद जनता लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखती है और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत बनाने का प्रयास करती है।
16. दक्षिण एशिया में आतंकवाद एक चुनौती क्यों है?
उत्तर:
आतंकवाद दक्षिण एशिया की सुरक्षा और विकास के लिए गंभीर चुनौती है। यह क्षेत्रीय शांति को प्रभावित करता है तथा देशों के बीच अविश्वास बढ़ाता है। आतंकवादी गतिविधियों के कारण आर्थिक विकास, पर्यटन और सामाजिक स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आतंकवाद से निपटने के लिए देशों को आपसी सहयोग, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान तथा संयुक्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता होती है। क्षेत्रीय शांति के लिए आतंकवाद का प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है।
17. भारत-नेपाल संबंधों का महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा धार्मिक संबंध हैं। दोनों देशों की खुली सीमा लोगों के आवागमन और व्यापार को सुगम बनाती है। भारत नेपाल का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और विकास परियोजनाओं में सहयोग करता है। जल संसाधन, ऊर्जा और सुरक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग है। अच्छे संबंध क्षेत्रीय स्थिरता और विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
18. दक्षिण एशिया में आर्थिक विकास की प्रमुख समस्याएँ क्या हैं?
उत्तर:
दक्षिण एशिया के देशों को गरीबी, बेरोजगारी, जनसंख्या वृद्धि, कम औद्योगिकीकरण और आधारभूत संरचना की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी भी विकास में बाधा बनती है। राजनीतिक अस्थिरता और क्षेत्रीय संघर्ष आर्थिक प्रगति को प्रभावित करते हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए क्षेत्रीय सहयोग और प्रभावी नीतियों की आवश्यकता है।
19. दक्षिण एशिया में शांति और सहयोग का महत्व बताइए।
उत्तर:
शांति और सहयोग से दक्षिण एशिया के देशों को आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और राजनीतिक स्थिरता प्राप्त होती है। सहयोग के माध्यम से व्यापार, निवेश, तकनीकी विकास तथा सांस्कृतिक संबंध मजबूत होते हैं। इससे क्षेत्रीय संघर्षों में कमी आती है और जनता के जीवन स्तर में सुधार होता है। सार्क जैसे मंच शांति और सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
20. ‘समकालीन दक्षिण एशिया’ अध्याय का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर:
इस अध्याय का मुख्य संदेश यह है कि दक्षिण एशिया विविधताओं से भरा क्षेत्र होने के बावजूद लोकतंत्र, विकास और क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में निरंतर प्रयास कर रहा है। विभिन्न देशों ने राजनीतिक चुनौतियों, संघर्षों और आर्थिक समस्याओं का सामना किया है, फिर भी लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता बनी हुई है। क्षेत्रीय सहयोग, आपसी विश्वास और शांतिपूर्ण संबंध दक्षिण एशिया के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं।
