CBSE कक्षा 12 राजनीति विज्ञान (Contemporary World Politics)
अध्याय 2: समकालीन शक्ति केन्द्र (Contemporary Centres of Power)
20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
यह अध्याय यूरोपीय संघ (EU), आसियान (ASEAN), चीन के उदय तथा जापान और दक्षिण कोरिया जैसे आर्थिक शक्ति केन्द्रों पर आधारित है।
1. समकालीन शक्ति केन्द्र से क्या आशय है?
उत्तर:
शीत युद्ध की समाप्ति और सोवियत संघ के विघटन के बाद विश्व राजनीति में कई नए शक्ति केन्द्र उभरे। इन्हें समकालीन शक्ति केन्द्र कहा जाता है। ये ऐसे देश या क्षेत्रीय संगठन हैं जो आर्थिक, राजनीतिक, सैन्य तथा कूटनीतिक प्रभाव रखते हैं। यूरोपीय संघ (EU), आसियान (ASEAN), चीन, जापान और दक्षिण कोरिया इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इन शक्ति केन्द्रों ने विश्व राजनीति को बहुध्रुवीय बनाने में योगदान दिया है। इनके कारण अमेरिका की एकाधिकारवादी स्थिति को चुनौती मिली और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सहयोग तथा प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़े। आधुनिक विश्व व्यवस्था में इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
2. यूरोपीय संघ (EU) की स्थापना क्यों की गई?
उत्तर:
यूरोपीय संघ की स्थापना यूरोप में शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोपीय देशों ने महसूस किया कि परस्पर सहयोग से भविष्य के युद्धों को रोका जा सकता है। 1957 में यूरोपीय आर्थिक समुदाय (EEC) का गठन हुआ, जो आगे चलकर 1992 की मास्ट्रिख्ट संधि के माध्यम से यूरोपीय संघ बना। EU ने सदस्य देशों के बीच मुक्त व्यापार, साझा बाजार और राजनीतिक सहयोग को बढ़ावा दिया। आज यह विश्व का एक प्रमुख आर्थिक और राजनीतिक संगठन है तथा वैश्विक निर्णयों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
3. यूरोपीय संघ की प्रमुख उपलब्धियाँ बताइए।
उत्तर:
यूरोपीय संघ की सबसे बड़ी उपलब्धि यूरोप में स्थायी शांति और सहयोग स्थापित करना है। इसने सदस्य देशों के बीच सीमा शुल्क समाप्त करके साझा बाजार का निर्माण किया। कई देशों ने ‘यूरो’ नामक समान मुद्रा अपनाई, जिससे व्यापार और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा मिला। EU ने मानवाधिकारों, लोकतंत्र और पर्यावरण संरक्षण को भी प्रोत्साहित किया। इसके अतिरिक्त यह संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावशाली भूमिका निभाता है। यूरोपीय संघ आज विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक इकाइयों में से एक है और वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण शक्ति केन्द्र माना जाता है।
4. ‘यूरो’ क्या है और इसका महत्व क्या है?
उत्तर:
यूरो यूरोपीय संघ के कई सदस्य देशों द्वारा अपनाई गई साझा मुद्रा है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग और व्यापार को आसान बनाना था। यूरो के कारण मुद्रा विनिमय की समस्या कम हुई और व्यापारिक लागत घटी। इससे यूरोपीय अर्थव्यवस्था अधिक एकीकृत और मजबूत बनी। यूरो आज विश्व की प्रमुख मुद्राओं में से एक है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है। साझा मुद्रा होने के कारण यूरोपीय देशों के बीच आर्थिक स्थिरता और सहयोग को भी बढ़ावा मिला। इस प्रकार यूरो यूरोपीय एकीकरण का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
5. ASEAN क्या है?
उत्तर:
ASEAN का पूरा नाम ‘Association of Southeast Asian Nations’ है। इसकी स्थापना 1967 में बैंकॉक घोषणा के माध्यम से पाँच देशों—इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड—द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय शांति, आर्थिक विकास और सहयोग को बढ़ावा देना था। वर्तमान में ASEAN दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रमुख देशों का संगठन है। यह व्यापार, सुरक्षा, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग के क्षेत्रों में कार्य करता है। ASEAN ने सदस्य देशों के बीच विश्वास और सहयोग को मजबूत किया है तथा क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
6. ‘ASEAN Way’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
‘ASEAN Way’ ASEAN देशों द्वारा अपनाई गई कार्यशैली को दर्शाता है। इसका आधार संवाद, सहमति, सहयोग और गैर-हस्तक्षेप की नीति है। ASEAN के सदस्य देश विवादों का समाधान बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से करते हैं। यह पद्धति राष्ट्रीय संप्रभुता के सम्मान तथा आपसी विश्वास पर आधारित है। ASEAN Way के कारण सदस्य देशों के बीच स्थिरता बनी रही और संगठन सफलतापूर्वक आगे बढ़ा। यह पद्धति विश्व राजनीति में क्षेत्रीय सहयोग का एक अनूठा उदाहरण मानी जाती है। इसी के माध्यम से ASEAN ने आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को मजबूत किया है।
7. ASEAN के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं?
उत्तर:
ASEAN का मुख्य उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशिया में शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। यह सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को प्रोत्साहित करता है। संगठन क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखने और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान खोजने का प्रयास करता है। ASEAN शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाता है। इसके अतिरिक्त यह वैश्विक मंचों पर सदस्य देशों के हितों का प्रतिनिधित्व करता है। ASEAN ने क्षेत्रीय एकीकरण को मजबूत किया है और दक्षिण-पूर्व एशिया को विश्व अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है।
8. चीन के आर्थिक उदय के प्रमुख कारण बताइए।
उत्तर:
चीन के आर्थिक उदय का प्रमुख कारण 1978 के बाद लागू किए गए आर्थिक सुधार हैं। चीन ने कृषि, उद्योग और व्यापार के क्षेत्रों में उदारीकरण की नीति अपनाई। विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) की स्थापना से विदेशी निवेश आकर्षित हुआ। सरकार ने आधुनिक तकनीक और निर्यात-उन्मुख उद्योगों को बढ़ावा दिया। विशाल जनसंख्या और सस्ते श्रम ने भी आर्थिक विकास में सहायता की। परिणामस्वरूप चीन विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया। आज वह वैश्विक व्यापार, विनिर्माण और निवेश का प्रमुख केन्द्र है तथा विश्व राजनीति में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।
9. विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) क्या हैं?
उत्तर:
विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) ऐसे क्षेत्र होते हैं जहाँ उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विशेष सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं। चीन ने आर्थिक सुधारों के दौरान SEZ स्थापित किए, जिनमें विदेशी निवेशकों को कर रियायतें और आधुनिक आधारभूत सुविधाएँ दी गईं। इन क्षेत्रों में उद्योगों का तेजी से विकास हुआ और निर्यात बढ़ा। SEZ ने रोजगार के अवसर पैदा किए तथा चीन को वैश्विक विनिर्माण केन्द्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही कारण है कि चीन की आर्थिक प्रगति में SEZ को एक महत्वपूर्ण साधन माना जाता है।
10. चीन विश्व की आर्थिक शक्ति कैसे बना?
उत्तर:
चीन ने आर्थिक सुधार, विदेशी निवेश और निर्यात-आधारित विकास मॉडल के माध्यम से आर्थिक शक्ति का दर्जा प्राप्त किया। उसने आधुनिक उद्योगों, तकनीकी विकास और आधारभूत संरचना पर विशेष ध्यान दिया। चीन ने वैश्विक बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत की और बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया। विश्व व्यापार संगठन (WTO) में शामिल होने के बाद उसका व्यापार और अधिक बढ़ा। आज चीन इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और उपभोक्ता वस्तुओं का प्रमुख उत्पादक है। उसकी आर्थिक सफलता ने उसे विश्व राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अधिक प्रभावशाली बना दिया है।
11. जापान को आर्थिक महाशक्ति क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
जापान को आर्थिक महाशक्ति इसलिए कहा जाता है क्योंकि उसने सीमित प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद तकनीकी विकास और औद्योगिक उत्पादन के आधार पर तीव्र आर्थिक प्रगति की। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान ने शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक उद्योगों पर विशेष ध्यान दिया। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रोबोटिक्स के क्षेत्र में जापान विश्व में अग्रणी बना। उसकी अर्थव्यवस्था लंबे समय तक विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रही। जापान की तकनीकी क्षमता और आर्थिक प्रभाव उसे विश्व राजनीति का एक महत्वपूर्ण शक्ति केन्द्र बनाते हैं।
12. दक्षिण कोरिया के विकास के प्रमुख कारण क्या हैं?
उत्तर:
दक्षिण कोरिया ने शिक्षा, तकनीक और औद्योगीकरण के माध्यम से तीव्र विकास किया। सरकार ने निर्यात-उन्मुख औद्योगिक नीति अपनाई और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा दिया। इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और ऑटोमोबाइल उद्योगों में दक्षिण कोरिया ने उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। विदेशी व्यापार और निवेश ने भी उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया। आज दक्षिण कोरिया एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और वैश्विक स्तर पर तकनीकी नवाचार के लिए प्रसिद्ध है। उसकी आर्थिक उपलब्धियाँ उसे समकालीन शक्ति केन्द्रों में महत्वपूर्ण स्थान प्रदान करती हैं।
13. बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था क्या है?
उत्तर:
बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था वह स्थिति है जिसमें विश्व राजनीति पर किसी एक देश का प्रभुत्व नहीं होता, बल्कि कई शक्तिशाली देश और संगठन प्रभाव डालते हैं। शीत युद्ध के बाद यूरोपीय संघ, चीन, जापान और ASEAN जैसे शक्ति केन्द्र उभरे, जिससे विश्व व्यवस्था बहुध्रुवीय बनी। इस व्यवस्था में विभिन्न देश और क्षेत्रीय संगठन वैश्विक निर्णयों को प्रभावित करते हैं। बहुध्रुवीयता अंतरराष्ट्रीय सहयोग, संतुलन और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती है। इससे छोटे देशों को भी अपने हितों की रक्षा करने के अवसर मिलते हैं और विश्व राजनीति अधिक संतुलित बनती है।
14. यूरोपीय संघ को ‘अधिराष्ट्रीय संगठन’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
यूरोपीय संघ को अधिराष्ट्रीय संगठन इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके सदस्य देश कुछ महत्वपूर्ण अधिकार और निर्णय लेने की शक्तियाँ साझा संस्थाओं को सौंपते हैं। यूरोपीय संसद, यूरोपीय आयोग और यूरोपीय न्यायालय जैसे संस्थान सदस्य देशों के लिए नीतियाँ बनाते हैं। कई मामलों में इनके निर्णय सदस्य देशों पर बाध्यकारी होते हैं। यह व्यवस्था सामान्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अलग है, जहाँ सदस्य देशों की संप्रभुता पूरी तरह स्वतंत्र रहती है। इस कारण यूरोपीय संघ को विश्व का सबसे सफल अधिराष्ट्रीय संगठन माना जाता है।
15. ASEAN क्षेत्रीय मंच (ARF) का महत्व बताइए।
उत्तर:
ASEAN क्षेत्रीय मंच (ARF) एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और राजनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच विश्वास निर्माण करना तथा क्षेत्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान खोजना है। ARF सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर संवाद और सहयोग को प्रोत्साहित करता है। यह आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय संघर्षों जैसे विषयों पर चर्चा का महत्वपूर्ण मंच है। ARF के माध्यम से ASEAN ने अपनी अंतरराष्ट्रीय भूमिका को मजबूत किया है और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में योगदान दिया है।
16. चीन और भारत के संबंधों का महत्व बताइए।
उत्तर:
भारत और चीन एशिया की दो प्रमुख उभरती शक्तियाँ हैं। दोनों देशों की बड़ी जनसंख्या, विशाल बाजार और बढ़ती अर्थव्यवस्थाएँ उन्हें वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण बनाती हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगातार बढ़े हैं। साथ ही सीमा विवाद और कुछ राजनीतिक मतभेद भी मौजूद हैं। इसके बावजूद दोनों देश BRICS और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग करते हैं। भारत-चीन संबंध एशिया की स्थिरता और वैश्विक आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि दोनों देश सहयोग बढ़ाएँ तो क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
17. समकालीन विश्व राजनीति में क्षेत्रीय संगठनों का महत्व क्या है?
उत्तर:
क्षेत्रीय संगठन सदस्य देशों के बीच सहयोग, विकास और सुरक्षा को बढ़ावा देते हैं। यूरोपीय संघ और ASEAN इसके प्रमुख उदाहरण हैं। ये संगठन व्यापार, निवेश, शिक्षा, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाते हैं। क्षेत्रीय संगठन विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वैश्वीकरण के दौर में इन संगठनों का महत्व और बढ़ गया है क्योंकि वे सामूहिक रूप से वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। इस प्रकार क्षेत्रीय संगठन विश्व राजनीति में शक्ति और सहयोग के महत्वपूर्ण केन्द्र बन गए हैं।
18. चीन के उदय का विश्व राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
चीन के उदय ने विश्व राजनीति में शक्ति संतुलन को प्रभावित किया है। उसकी आर्थिक और सैन्य शक्ति में वृद्धि के कारण वह वैश्विक मामलों में अधिक प्रभावशाली बन गया है। चीन अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और विकास परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उसके उदय से बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूती मिली है। साथ ही अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है। चीन का प्रभाव एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका तक फैल चुका है। इसलिए उसका उदय समकालीन विश्व राजनीति की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना जाता है।
19. EU और ASEAN में कोई दो अंतर लिखिए।
उत्तर:
EU और ASEAN दोनों क्षेत्रीय संगठन हैं, लेकिन उनकी संरचना और कार्यप्रणाली में अंतर है। EU एक अधिराष्ट्रीय संगठन है जहाँ सदस्य देश कई मामलों में साझा नीतियाँ अपनाते हैं, जबकि ASEAN राष्ट्रीय संप्रभुता और सहमति पर आधारित संगठन है। EU ने यूरो जैसी साझा मुद्रा अपनाई है, जबकि ASEAN में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। EU का राजनीतिक और आर्थिक एकीकरण अधिक गहरा है, जबकि ASEAN मुख्यतः सहयोग और संवाद पर आधारित है। फिर भी दोनों संगठन क्षेत्रीय शांति और विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
20. समकालीन शक्ति केन्द्रों ने विश्व राजनीति को कैसे प्रभावित किया है?
उत्तर:
समकालीन शक्ति केन्द्रों ने विश्व राजनीति को अधिक बहुध्रुवीय और संतुलित बनाया है। यूरोपीय संघ, ASEAN, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे केन्द्रों ने आर्थिक विकास, क्षेत्रीय सहयोग और वैश्विक निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन शक्ति केन्द्रों के उदय से किसी एक देश का प्रभुत्व कम हुआ और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संतुलन आया। उन्होंने वैश्विक व्यापार, निवेश और कूटनीति को नई दिशा दी है। साथ ही, इन केन्द्रों ने क्षेत्रीय सहयोग और शांति को बढ़ावा देकर विश्व राजनीति को अधिक स्थिर और गतिशील बनाया है।
