CBSE कक्षा 12 समाजशास्त्र (Indian Society)

अध्याय 2: जनसांख्यिकीय संरचना (Demographic Structure)

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

जनसांख्यिकी जनसंख्या के आकार, संरचना, जन्म-दर, मृत्यु-दर, प्रवास, आयु-संरचना तथा लिंगानुपात का व्यवस्थित अध्ययन है। यह अध्याय भारत की जनसंख्या की संरचना, जनसंख्या वृद्धि, जनसांख्यिकीय संक्रमण, जनसंख्या नीति तथा जनसांख्यिकीय लाभांश जैसे महत्वपूर्ण विषयों को समझाता है।


1. जनसांख्यिकी (Demography) क्या है?

उत्तर:
जनसांख्यिकी वह विज्ञान है जो किसी देश या समाज की जनसंख्या का व्यवस्थित अध्ययन करता है। इसमें जनसंख्या का आकार, वृद्धि, जन्म-दर, मृत्यु-दर, प्रवास, आयु-संरचना तथा लिंगानुपात का विश्लेषण किया जाता है। यह शब्द यूनानी भाषा के दो शब्दों ‘डेमोस’ (जनता) और ‘ग्राफीन’ (वर्णन करना) से बना है। जनसांख्यिकी समाज की सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक स्थिति को समझने में सहायता करती है। जनगणना और सर्वेक्षण इसके प्रमुख स्रोत हैं। किसी भी देश की विकास योजनाओं के निर्माण में जनसांख्यिकीय आँकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।


2. औपचारिक जनसांख्यिकी और सामाजिक जनसांख्यिकी में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
औपचारिक जनसांख्यिकी जनसंख्या के सांख्यिकीय एवं गणितीय अध्ययन पर आधारित होती है। इसमें कुल जनसंख्या, आयु, लिंग, जन्म-दर, मृत्यु-दर आदि का मात्रात्मक विश्लेषण किया जाता है। दूसरी ओर सामाजिक जनसांख्यिकी जनसंख्या से जुड़े सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पहलुओं का अध्ययन करती है। यह जानने का प्रयास करती है कि जनसंख्या परिवर्तन समाज को कैसे प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक असमानता जैसे विषय सामाजिक जनसांख्यिकी के अंतर्गत आते हैं। दोनों मिलकर समाज की व्यापक समझ विकसित करते हैं।


3. माल्थस के जनसंख्या सिद्धांत की व्याख्या कीजिए।

उत्तर:
थॉमस माल्थस के अनुसार जनसंख्या ज्यामितीय अनुपात में बढ़ती है जबकि खाद्य उत्पादन अंकगणितीय अनुपात में बढ़ता है। इसलिए यदि जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण न हो तो भोजन की कमी, गरीबी, अकाल और बेरोजगारी जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। माल्थस ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए दो प्रकार के उपाय बताए—निवारक नियंत्रण (जैसे विलंबित विवाह) तथा सकारात्मक नियंत्रण (जैसे अकाल, महामारी)। यद्यपि आधुनिक तकनीक और कृषि विकास ने इस सिद्धांत की कई सीमाएँ उजागर की हैं, फिर भी यह जनसंख्या अध्ययन का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत माना जाता है।


4. जनसांख्यिकीय संक्रमण सिद्धांत क्या है?

उत्तर:
जनसांख्यिकीय संक्रमण सिद्धांत समाज के विकास के साथ जनसंख्या वृद्धि के विभिन्न चरणों को स्पष्ट करता है। प्रथम चरण में जन्म-दर और मृत्यु-दर दोनों उच्च होती हैं। दूसरे चरण में चिकित्सा सुविधाओं के कारण मृत्यु-दर घटती है लेकिन जन्म-दर उच्च रहती है, जिससे जनसंख्या तेजी से बढ़ती है। तीसरे चरण में जन्म-दर भी घटने लगती है और जनसंख्या वृद्धि नियंत्रित हो जाती है। विकसित देशों ने इस संक्रमण को पूरा कर लिया है, जबकि भारत जैसे विकासशील देश संक्रमण के उन्नत चरणों में हैं।


5. जन्म-दर (Birth Rate) क्या है?

उत्तर:
जन्म-दर किसी निश्चित क्षेत्र में एक वर्ष के दौरान प्रति 1000 जनसंख्या पर होने वाले जीवित जन्मों की संख्या को कहते हैं। यह जनसंख्या वृद्धि का एक प्रमुख संकेतक है। उच्च जन्म-दर वाले देशों में जनसंख्या तेजी से बढ़ती है, जबकि निम्न जन्म-दर वाले देशों में वृद्धि धीमी रहती है। जन्म-दर को शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएँ, आर्थिक स्थिति तथा सामाजिक परंपराएँ प्रभावित करती हैं। सरकारें परिवार नियोजन कार्यक्रमों के माध्यम से जन्म-दर को नियंत्रित करने का प्रयास करती हैं ताकि जनसंख्या और संसाधनों के बीच संतुलन बना रहे।


6. मृत्यु-दर (Death Rate) से क्या अभिप्राय है?

उत्तर:
मृत्यु-दर किसी निश्चित क्षेत्र में एक वर्ष के दौरान प्रति 1000 जनसंख्या पर होने वाली मृत्यु की संख्या को दर्शाती है। यह किसी समाज के स्वास्थ्य स्तर और जीवन-स्तर का महत्वपूर्ण संकेतक है। बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ, पोषण, स्वच्छता तथा शिक्षा मृत्यु-दर को कम करने में सहायक होती हैं। भारत में स्वतंत्रता के बाद स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से मृत्यु-दर में उल्लेखनीय कमी आई है। मृत्यु-दर और जन्म-दर के अंतर से जनसंख्या वृद्धि की दर निर्धारित होती है। इसलिए जनसंख्या अध्ययन में इसका विशेष महत्व है।


7. कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate) क्या है?

उत्तर:
कुल प्रजनन दर से तात्पर्य उन बच्चों की औसत संख्या से है जिन्हें एक महिला अपने प्रजनन काल (15–49 वर्ष) के दौरान जन्म देती है। यह किसी समाज में जनसंख्या वृद्धि की संभावनाओं को समझने का महत्वपूर्ण सूचक है। यदि प्रजनन दर अधिक हो तो जनसंख्या तेजी से बढ़ती है, जबकि कम प्रजनन दर जनसंख्या स्थिरता की ओर संकेत करती है। शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य सेवाएँ तथा परिवार नियोजन कार्यक्रम प्रजनन दर को प्रभावित करते हैं। भारत में समय के साथ कुल प्रजनन दर में कमी देखी गई है।


8. शिशु मृत्यु दर (IMR) क्या है?

उत्तर:
शिशु मृत्यु दर एक वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रति 1000 जीवित जन्मों पर होने वाली मृत्यु की संख्या को दर्शाती है। यह किसी देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और जीवन स्तर का महत्वपूर्ण संकेतक है। उच्च शिशु मृत्यु दर स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, कुपोषण तथा स्वच्छता की खराब स्थिति को दर्शाती है। शिशु टीकाकरण, मातृ स्वास्थ्य सेवाएँ तथा पोषण कार्यक्रम इसे कम करने में सहायक होते हैं। भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के कारण शिशु मृत्यु दर में निरंतर कमी आई है।


9. जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) क्या है?

उत्तर:
जीवन प्रत्याशा वह औसत आयु है, जितने वर्षों तक किसी व्यक्ति के जीवित रहने की संभावना होती है। यह किसी समाज के स्वास्थ्य, पोषण और जीवन स्तर का महत्वपूर्ण मापदंड है। बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ, स्वच्छ वातावरण और संतुलित आहार जीवन प्रत्याशा को बढ़ाते हैं। भारत में स्वतंत्रता के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के कारण जीवन प्रत्याशा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उच्च जीवन प्रत्याशा किसी समाज की सामाजिक और आर्थिक प्रगति का संकेत मानी जाती है।


10. लिंगानुपात (Sex Ratio) का अर्थ बताइए।

उत्तर:
लिंगानुपात प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या को दर्शाता है। यह किसी समाज में स्त्री-पुरुष संतुलन का महत्वपूर्ण सूचक है। भारत में लंबे समय तक लिंगानुपात चिंताजनक रहा क्योंकि कन्या भ्रूण हत्या, लैंगिक भेदभाव तथा पुत्र-प्राथमिकता जैसी समस्याएँ मौजूद थीं। सरकार द्वारा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से स्थिति सुधारने का प्रयास किया गया है। संतुलित लिंगानुपात सामाजिक समानता और स्वस्थ समाज के लिए आवश्यक माना जाता है।


11. आयु संरचना (Age Structure) क्या है?

उत्तर:
आयु संरचना से आशय जनसंख्या के विभिन्न आयु वर्गों में वितरण से है। सामान्यतः जनसंख्या को बाल वर्ग, कार्यशील वर्ग और वृद्ध वर्ग में विभाजित किया जाता है। आयु संरचना किसी देश की आर्थिक क्षमता तथा विकास की संभावनाओं को प्रभावित करती है। यदि कार्यशील आयु वर्ग अधिक हो तो उत्पादन और आर्थिक विकास की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं। वहीं वृद्ध और बाल जनसंख्या अधिक होने पर आश्रित जनसंख्या का भार बढ़ता है। इसलिए आयु संरचना का अध्ययन विकास योजनाओं के लिए आवश्यक है।


12. आश्रितता अनुपात (Dependency Ratio) क्या है?

उत्तर:
आश्रितता अनुपात उस अनुपात को कहते हैं जिसमें कार्य न करने वाली जनसंख्या (बच्चे और वृद्ध) की तुलना कार्यशील जनसंख्या से की जाती है। यदि आश्रित जनसंख्या अधिक हो तो कार्यशील वर्ग पर आर्थिक भार बढ़ जाता है। इसके विपरीत कम आश्रितता अनुपात आर्थिक विकास के लिए अनुकूल माना जाता है। यह सूचक किसी देश की आर्थिक योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा नीतियों और रोजगार रणनीतियों के निर्माण में उपयोगी होता है। भारत में युवा जनसंख्या की अधिकता के कारण आश्रितता अनुपात अपेक्षाकृत कम माना जाता है।


13. जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) क्या है?

उत्तर:
जब किसी देश में कार्यशील आयु वर्ग की जनसंख्या आश्रित जनसंख्या की तुलना में अधिक होती है, तो उसे जनसांख्यिकीय लाभांश कहा जाता है। यह स्थिति आर्थिक विकास के लिए अवसर प्रदान करती है क्योंकि अधिक लोग उत्पादन और रोजगार में योगदान दे सकते हैं। भारत को वर्तमान समय में जनसांख्यिकीय लाभांश प्राप्त है क्योंकि यहाँ युवाओं की संख्या अधिक है। यदि उन्हें उचित शिक्षा, कौशल और रोजगार उपलब्ध कराया जाए तो देश तीव्र आर्थिक विकास प्राप्त कर सकता है। इसलिए इसे भारत की महत्वपूर्ण शक्ति माना जाता है।


14. जनसंख्या घनत्व क्या है?

उत्तर:
जनसंख्या घनत्व किसी क्षेत्र के प्रति वर्ग किलोमीटर में रहने वाले लोगों की संख्या को दर्शाता है। यह बताता है कि किसी क्षेत्र में जनसंख्या कितनी सघन या विरल है। उच्च जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्रों में संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि कम घनत्व वाले क्षेत्रों में संसाधनों का उपयोग कम हो सकता है। भारत में जनसंख्या घनत्व राज्यों के अनुसार भिन्न-भिन्न है। जनसंख्या घनत्व का अध्ययन शहरीकरण, संसाधन प्रबंधन और विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।


15. भारत में जनगणना का महत्व बताइए।

उत्तर:
जनगणना किसी देश की जनसंख्या से संबंधित आधिकारिक आँकड़े प्रदान करती है। इसमें जनसंख्या का आकार, आयु, लिंग, शिक्षा, व्यवसाय तथा निवास संबंधी जानकारी एकत्र की जाती है। भारत में जनगणना प्रत्येक दस वर्ष में आयोजित की जाती है। यह सरकार को विकास योजनाएँ बनाने, संसाधनों का वितरण करने और सामाजिक समस्याओं को समझने में सहायता देती है। जनगणना के आँकड़े जनसांख्यिकी के अध्ययन का प्रमुख आधार हैं और नीति-निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।


16. ग्रामीण-नगरीय संरचना से क्या अभिप्राय है?

उत्तर:
ग्रामीण-नगरीय संरचना से आशय किसी देश की जनसंख्या के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में वितरण से है। भारत में लंबे समय तक अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती रही है, लेकिन औद्योगीकरण और शहरीकरण के कारण शहरी जनसंख्या में वृद्धि हुई है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की जीवनशैली, रोजगार, शिक्षा तथा सुविधाओं में अंतर पाया जाता है। यह संरचना आर्थिक विकास, संसाधन वितरण तथा सामाजिक परिवर्तन को प्रभावित करती है। इसलिए समाजशास्त्र में इसका विशेष महत्व है।


17. साक्षरता दर (Literacy Rate) का महत्व बताइए।

उत्तर:
साक्षरता दर उस जनसंख्या के प्रतिशत को दर्शाती है जो पढ़ने और लिखने में सक्षम है। यह किसी समाज के शैक्षिक विकास का महत्वपूर्ण संकेतक है। उच्च साक्षरता दर सामाजिक जागरूकता, रोजगार अवसरों और आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है। भारत में शिक्षा के विस्तार के कारण साक्षरता दर में निरंतर वृद्धि हुई है। महिलाओं की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने से सामाजिक समानता और परिवार के स्वास्थ्य स्तर में भी सुधार होता है। इसलिए साक्षरता किसी भी राष्ट्र के विकास का आधार मानी जाती है।


18. प्रवास (Migration) क्या है?

उत्तर:
प्रवास का अर्थ है लोगों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थायी या अस्थायी रूप से स्थानांतरण। यह ग्रामीण से शहरी, शहरी से ग्रामीण या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो सकता है। रोजगार, शिक्षा, विवाह, बेहतर जीवन-स्तर तथा प्राकृतिक आपदाएँ प्रवास के प्रमुख कारण हैं। प्रवास जनसंख्या संरचना, श्रम बाजार और सामाजिक संबंधों को प्रभावित करता है। भारत में ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर प्रवास एक महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय प्रवृत्ति है जिसने शहरीकरण को बढ़ावा दिया है।


19. भारत की जनसंख्या नीति के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं?

उत्तर:
भारत की जनसंख्या नीति का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि को संतुलित करना तथा लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। इसके अंतर्गत परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, महिला शिक्षा तथा प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा दिया जाता है। नीति का उद्देश्य जन्म-दर को नियंत्रित करना, शिशु मृत्यु दर को कम करना तथा जनसंख्या और संसाधनों के बीच संतुलन स्थापित करना है। यह नीति सतत विकास और सामाजिक कल्याण को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


20. समाजशास्त्र में जनसांख्यिकी का महत्व बताइए।

उत्तर:
समाजशास्त्र में जनसांख्यिकी का विशेष महत्व है क्योंकि यह समाज की संरचना और परिवर्तन को समझने का आधार प्रदान करती है। जनसंख्या का आकार, आयु-संरचना, लिंगानुपात, प्रवास तथा जन्म-मृत्यु दर सामाजिक संस्थाओं और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करते हैं। जनसांख्यिकीय आँकड़ों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक असमानता जैसी समस्याओं का विश्लेषण किया जा सकता है। इसलिए समाजशास्त्री सामाजिक परिवर्तन और विकास की व्याख्या के लिए जनसांख्यिकी का व्यापक उपयोग करते हैं।