CBSE कक्षा 12 मनोविज्ञान (Psychology)
अध्याय 7 : सामाजिक प्रभाव एवं समूह प्रक्रियाएँ (Social Influence and Group Processes)
20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
(प्रत्येक उत्तर लगभग 100–120 शब्द)
समूह, अनुरूपता, अनुपालन, आज्ञापालन, सामाजिक आलस्य, समूह ध्रुवीकरण, समूह संरचना, मानदंड, समूह चिंतन आदि इस अध्याय के प्रमुख विषय हैं।
1. सामाजिक प्रभाव (Social Influence) क्या है?
उत्तर:
सामाजिक प्रभाव वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी व्यक्ति के विचार, भावनाएँ और व्यवहार अन्य व्यक्तियों या समूहों से प्रभावित होते हैं। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, इसलिए वह परिवार, मित्रों, विद्यालय तथा समाज से निरंतर प्रभावित होता रहता है। सामाजिक प्रभाव के प्रमुख रूप अनुरूपता (Conformity), अनुपालन (Compliance) और आज्ञापालन (Obedience) हैं। कई बार व्यक्ति समूह की स्वीकृति प्राप्त करने या अस्वीकृति से बचने के लिए अपने व्यवहार में परिवर्तन कर लेता है। सामाजिक प्रभाव सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने में सहायक होता है, परन्तु अत्यधिक प्रभाव व्यक्ति की स्वतंत्र सोच को भी सीमित कर सकता है।
2. अनुरूपता (Conformity) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अनुरूपता सामाजिक प्रभाव का ऐसा रूप है जिसमें व्यक्ति समूह के मानदंडों, नियमों और अपेक्षाओं के अनुसार अपने व्यवहार या विचारों में परिवर्तन करता है। व्यक्ति ऐसा इसलिए करता है ताकि उसे समूह द्वारा स्वीकार किया जाए और सामाजिक अस्वीकृति से बचा जा सके। उदाहरण के लिए, विद्यालय में सभी विद्यार्थी निर्धारित वर्दी पहनते हैं क्योंकि यह समूह का मानदंड है। अनुरूपता समूह में एकता और अनुशासन बनाए रखने में सहायक होती है। इसके पीछे सूचनात्मक प्रभाव तथा मानकात्मक प्रभाव जैसे कारण कार्य करते हैं। यह सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण अंग है।
3. अनुपालन (Compliance) क्या है?
उत्तर:
अनुपालन सामाजिक प्रभाव का वह रूप है जिसमें व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति या समूह के अनुरोध को स्वीकार कर उसके अनुसार व्यवहार करता है, जबकि अनुरोध करने वाले के पास औपचारिक अधिकार नहीं होता। उदाहरण के लिए, मित्र के कहने पर किसी सामाजिक अभियान में भाग लेना अनुपालन कहलाता है। अनुपालन अक्सर शिष्टाचार, सामाजिक संबंधों या पारस्परिक सहयोग की भावना के कारण होता है। इसके लिए विभिन्न तकनीकों जैसे “फुट-इन-द-डोर” तथा “डोर-इन-द-फेस” तकनीक का प्रयोग किया जाता है। अनुपालन सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देता है और व्यक्तियों के बीच सकारात्मक संबंध विकसित करता है।
4. आज्ञापालन (Obedience) क्या है?
उत्तर:
आज्ञापालन वह सामाजिक प्रभाव है जिसमें व्यक्ति किसी अधिकार-संपन्न व्यक्ति या संस्था के आदेशों का पालन करता है। इसमें आदेश देने वाले के पास वैध शक्ति या अधिकार होता है। उदाहरण के लिए, छात्र शिक्षक के निर्देशों का पालन करते हैं और कर्मचारी अपने अधिकारी के आदेशों का पालन करते हैं। सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए आज्ञापालन आवश्यक है। हालांकि, अंधा आज्ञापालन कभी-कभी हानिकारक भी हो सकता है यदि व्यक्ति नैतिकता और विवेक की उपेक्षा कर दे। इसलिए आज्ञापालन के साथ-साथ नैतिक निर्णय क्षमता का होना भी महत्वपूर्ण है।
5. समूह (Group) की अवधारणा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
समूह दो या दो से अधिक व्यक्तियों का एक संगठित तंत्र है जो परस्पर संपर्क रखते हैं, एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं तथा समान उद्देश्यों और मानदंडों को साझा करते हैं। समूह के सदस्यों के बीच भूमिकाएँ, स्थिति और पारस्परिक अपेक्षाएँ होती हैं। परिवार, कक्षा और खेल टीम इसके उदाहरण हैं। समूह व्यक्ति को सुरक्षा, पहचान, आत्मसम्मान तथा सहयोग प्रदान करता है। समूहों के माध्यम से व्यक्ति सामाजिक कौशल विकसित करता है और सामूहिक लक्ष्यों की प्राप्ति करता है। इस प्रकार समूह सामाजिक जीवन की आधारभूत इकाई है।
6. समूह निर्माण के प्रमुख कारण बताइए।
उत्तर:
लोग विभिन्न कारणों से समूहों का निर्माण करते हैं। समूह व्यक्ति को सुरक्षा और संरक्षण प्रदान करता है। यह सामाजिक पहचान तथा आत्मसम्मान बढ़ाने में सहायक होता है। समूह के माध्यम से व्यक्ति अपनी सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। समान रुचियाँ, समान लक्ष्य, निकटता तथा समानता समूह निर्माण को प्रोत्साहित करती हैं। इसके अतिरिक्त, समूह ज्ञान और सूचना प्राप्त करने का माध्यम भी बनते हैं। सामूहिक प्रयास से कठिन कार्यों को आसानी से पूरा किया जा सकता है। इसलिए समूह व्यक्तिगत तथा सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
7. समूह संरचना (Group Structure) क्या है?
उत्तर:
समूह संरचना से तात्पर्य उन तत्वों से है जो समूह को व्यवस्थित और प्रभावी बनाते हैं। इसमें मुख्य रूप से भूमिकाएँ (Roles), मानदंड (Norms), स्थिति (Status) और सामंजस्यता (Cohesiveness) शामिल हैं। भूमिकाएँ सदस्यों के अपेक्षित व्यवहार को निर्धारित करती हैं, जबकि मानदंड समूह के व्यवहार संबंधी नियम होते हैं। स्थिति समूह में सदस्य की सामाजिक स्थिति को दर्शाती है। सामंजस्यता समूह के सदस्यों के बीच आकर्षण और एकता को व्यक्त करती है। एक सुदृढ़ समूह संरचना समूह के उद्देश्यों की प्राप्ति और सदस्यों के सहयोग को बढ़ाती है।
8. समूह मानदंड (Norms) क्या हैं?
उत्तर:
समूह मानदंड वे स्वीकृत नियम, मूल्य और व्यवहारिक अपेक्षाएँ हैं जिन्हें समूह के सदस्य मानते और पालन करते हैं। ये समूह के “अलिखित नियम” होते हैं जो यह निर्धारित करते हैं कि किसी परिस्थिति में सदस्य को कैसे व्यवहार करना चाहिए। उदाहरण के लिए, कक्षा में समय पर पहुँचना और अनुशासन बनाए रखना समूह मानदंड हो सकते हैं। मानदंड समूह में व्यवस्था, स्थिरता और सहयोग बनाए रखने में सहायक होते हैं। इनके पालन से समूह के सदस्यों में एकरूपता तथा सामंजस्य बना रहता है और समूह अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर पाता है।
9. समूह में भूमिकाओं (Roles) का महत्व बताइए।
उत्तर:
भूमिका किसी व्यक्ति से अपेक्षित व्यवहार का प्रतिरूप है जो उसे समूह में उसकी स्थिति के आधार पर प्राप्त होता है। प्रत्येक सदस्य की भूमिका अलग हो सकती है, जैसे नेता, सचिव, खिलाड़ी या छात्र। भूमिकाएँ कार्यों के स्पष्ट विभाजन में सहायता करती हैं तथा जिम्मेदारियों को निर्धारित करती हैं। इससे भ्रम और संघर्ष की संभावना कम होती है। जब सभी सदस्य अपनी भूमिकाओं का उचित निर्वहन करते हैं, तब समूह अधिक संगठित और प्रभावी बन जाता है। इसलिए भूमिकाएँ समूह के सुचारु संचालन और लक्ष्य प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
10. सामंजस्यता (Cohesiveness) क्या है?
उत्तर:
सामंजस्यता से तात्पर्य समूह के सदस्यों के बीच आकर्षण, एकता और जुड़ाव की भावना से है। जब सदस्य समूह के साथ गहरा लगाव महसूस करते हैं और समूह में बने रहने की इच्छा रखते हैं, तब समूह अधिक सामंजस्यपूर्ण माना जाता है। उच्च सामंजस्यता सहयोग, विश्वास और समूह की कार्यक्षमता को बढ़ाती है। हालांकि अत्यधिक सामंजस्यता कभी-कभी समूह चिंतन (Groupthink) जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती है, जहाँ सदस्य आलोचनात्मक सोच छोड़कर केवल सहमति पर जोर देते हैं। इसलिए संतुलित सामंजस्यता समूह की सफलता के लिए आवश्यक है।
11. सामाजिक आलस्य (Social Loafing) क्या है?
उत्तर:
सामाजिक आलस्य वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति समूह में कार्य करते समय अकेले कार्य करने की तुलना में कम प्रयास करता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि व्यक्ति सोचता है कि अन्य सदस्य कार्य पूरा कर लेंगे और उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी कम है। उदाहरण के लिए, समूह परियोजना में कुछ छात्र कम योगदान देते हैं। सामाजिक आलस्य समूह की कार्यक्षमता को कम कर सकता है। इसे कम करने के लिए व्यक्तिगत उत्तरदायित्व स्पष्ट करना, प्रत्येक सदस्य के योगदान का मूल्यांकन करना तथा समूह की सामंजस्यता बढ़ाना आवश्यक है।
12. सामाजिक आलस्य को कैसे कम किया जा सकता है?
उत्तर:
सामाजिक आलस्य को कम करने के लिए समूह के प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करना चाहिए। व्यक्तिगत योगदान को पहचानने और उसका मूल्यांकन करने से सदस्य अधिक उत्तरदायी बनते हैं। कार्य को महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण बनाना भी प्रेरणा बढ़ाता है। समूह के लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता विकसित करना तथा सदस्यों को यह महसूस कराना कि उनका योगदान आवश्यक है, सामाजिक आलस्य को कम करता है। समूह में सहयोग और सामंजस्यता बढ़ाने से भी सदस्य अधिक मेहनत करने लगते हैं और समूह की उत्पादकता में वृद्धि होती है।
13. समूह ध्रुवीकरण (Group Polarisation) क्या है?
उत्तर:
समूह ध्रुवीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें समूह चर्चा के बाद सदस्यों के विचार पहले की तुलना में अधिक मजबूत या चरम हो जाते हैं। चर्चा के दौरान समान विचार रखने वाले लोग एक-दूसरे के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करते हैं, जिससे समूह का सामूहिक निर्णय अधिक तीव्र हो जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी मुद्दे पर समूह पहले से थोड़ा पक्षधर है, तो चर्चा के बाद वह और अधिक पक्षधर हो सकता है। समूह ध्रुवीकरण निर्णय-निर्माण को प्रभावित करता है और कभी-कभी अतिवादी निर्णयों का कारण बन सकता है।
14. समूह चिंतन (Groupthink) क्या है?
उत्तर:
समूह चिंतन एक ऐसी स्थिति है जिसमें समूह के सदस्य सर्वसम्मति बनाए रखने के लिए आलोचनात्मक सोच और वैकल्पिक विचारों की उपेक्षा कर देते हैं। अत्यधिक सामंजस्यपूर्ण समूहों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। सदस्य समूह के निर्णय पर प्रश्न उठाने से बचते हैं और विरोधी विचारों को अनदेखा कर देते हैं। परिणामस्वरूप गलत या अव्यावहारिक निर्णय लिए जा सकते हैं। समूह चिंतन से बचने के लिए स्वतंत्र विचारों को प्रोत्साहित करना, बाहरी विशेषज्ञों की राय लेना तथा विभिन्न विकल्पों का निष्पक्ष मूल्यांकन करना आवश्यक है।
15. अंतःसमूह (In-group) और बाह्यसमूह (Out-group) में अंतर बताइए।
उत्तर:
अंतःसमूह वह समूह है जिससे व्यक्ति स्वयं को जुड़ा हुआ महसूस करता है और जिसके प्रति अपनापन रखता है। इसे सामान्यतः “हम” समूह कहा जाता है। इसके विपरीत, बाह्यसमूह वह समूह है जिससे व्यक्ति स्वयं को संबंधित नहीं मानता और जिसे “वे” समूह कहा जाता है। उदाहरण के लिए, अपनी विद्यालय की टीम अंतःसमूह हो सकती है जबकि प्रतिद्वंद्वी विद्यालय की टीम बाह्यसमूह हो सकती है। यह विभाजन कभी-कभी पक्षपात, प्रतिस्पर्धा और संघर्ष को जन्म देता है। सामाजिक संबंधों को समझने में इन दोनों अवधारणाओं का विशेष महत्व है।
16. औपचारिक और अनौपचारिक समूहों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
औपचारिक समूह वे होते हैं जिनका निर्माण किसी विशेष उद्देश्य या कार्य के लिए किया जाता है और जिनकी संरचना स्पष्ट होती है। विद्यालय समिति या कार्यालय की टीम इसके उदाहरण हैं। दूसरी ओर, अनौपचारिक समूह स्वाभाविक रूप से व्यक्तिगत संबंधों, समान रुचियों या मित्रता के आधार पर बनते हैं। मित्र मंडली इसका उदाहरण है। औपचारिक समूहों में नियम और भूमिकाएँ स्पष्ट होती हैं, जबकि अनौपचारिक समूह अधिक लचीले होते हैं। दोनों प्रकार के समूह व्यक्ति के सामाजिक और भावनात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
17. समूह संघर्ष (Group Conflict) के प्रमुख कारण बताइए।
उत्तर:
समूह संघर्ष कई कारणों से उत्पन्न हो सकता है। संचार की कमी या गलत संचार अविश्वास और संदेह को जन्म देता है। संसाधनों, सम्मान या अवसरों के लिए प्रतिस्पर्धा भी संघर्ष का कारण बनती है। एक समूह द्वारा दूसरे समूह को कमतर समझना तथा मानदंडों का उल्लंघन करना भी तनाव बढ़ाता है। “हम” और “वे” की भावना पक्षपातपूर्ण धारणाओं को जन्म देती है, जिससे संघर्ष बढ़ सकता है। इसके अतिरिक्त, असमानता की अनुभूति और प्रतिशोध की भावना भी समूह संघर्ष को बढ़ावा देती है।
18. नेतृत्व (Leadership) का महत्व बताइए।
उत्तर:
नेतृत्व वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक व्यक्ति समूह को दिशा देता है और उसके सदस्यों को लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रेरित करता है। प्रभावी नेता समूह के उद्देश्यों को स्पष्ट करता है, निर्णय लेने में सहायता करता है और सदस्यों के बीच समन्वय स्थापित करता है। नेतृत्व समूह की उत्पादकता, प्रेरणा और सामंजस्यता को बढ़ाता है। एक अच्छा नेता समस्याओं का समाधान खोजता है तथा सदस्यों की आवश्यकताओं को समझता है। इसलिए किसी भी समूह की सफलता में नेतृत्व की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
19. सहयोग (Cooperation) और प्रतिस्पर्धा (Competition) में अंतर बताइए।
उत्तर:
सहयोग वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति या समूह किसी साझा लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मिलकर कार्य करते हैं। इसमें पारस्परिक सहायता और सामूहिक प्रयास पर बल दिया जाता है। दूसरी ओर, प्रतिस्पर्धा में व्यक्ति या समूह एक-दूसरे से बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करते हैं ताकि सीमित संसाधनों या पुरस्कारों को प्राप्त किया जा सके। सहयोग समूह में एकता और सकारात्मक संबंध विकसित करता है, जबकि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कार्यकुशलता और उपलब्धि की प्रेरणा बढ़ा सकती है। दोनों सामाजिक जीवन के महत्वपूर्ण पहलू हैं और परिस्थितियों के अनुसार उपयोगी हो सकते हैं।
20. सामाजिक प्रभाव के अध्ययन का महत्व बताइए।
उत्तर:
सामाजिक प्रभाव का अध्ययन यह समझने में सहायता करता है कि लोग समूहों और समाज के प्रभाव में कैसे सोचते, महसूस करते और व्यवहार करते हैं। इससे अनुरूपता, अनुपालन, आज्ञापालन तथा समूह निर्णय जैसी प्रक्रियाओं को समझा जा सकता है। यह ज्ञान शिक्षा, प्रबंधन, नेतृत्व तथा सामाजिक संबंधों में उपयोगी होता है। सामाजिक प्रभाव का अध्ययन हमें समूह दबाव के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों की पहचान करने में भी मदद करता है। इसके माध्यम से व्यक्ति स्वतंत्र एवं जिम्मेदार निर्णय लेने की क्षमता विकसित कर सकता है और सामाजिक जीवन में बेहतर समायोजन स्थापित कर सकता है।
