CBSE कक्षा 12 मनोविज्ञान (2026-27)

अध्याय 6 : अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान (Attitude and Social Cognition)

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

अभिवृत्ति, उसके घटक, निर्माण, परिवर्तन, पूर्वाग्रह, विभेदभाव, सामाजिक संज्ञान, स्कीमा तथा रूढ़धारणाएँ इस अध्याय के प्रमुख विषय हैं।


1. अभिवृत्ति (Attitude) से क्या तात्पर्य है?

उत्तर:
अभिवृत्ति व्यक्ति की किसी वस्तु, व्यक्ति, समूह या घटना के प्रति सकारात्मक, नकारात्मक अथवा तटस्थ मानसिक प्रवृत्ति होती है। यह हमारे विचारों, भावनाओं और व्यवहार को प्रभावित करती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी छात्र की पर्यावरण संरक्षण के प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति है, तो वह वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियानों में भाग लेगा। अभिवृत्तियाँ जन्मजात नहीं होतीं बल्कि अनुभव, शिक्षा, परिवार तथा समाज के प्रभाव से विकसित होती हैं। ये सामाजिक व्यवहार को दिशा देती हैं तथा निर्णय लेने में सहायता करती हैं। इसलिए मनोविज्ञान में अभिवृत्ति को सामाजिक व्यवहार का महत्वपूर्ण निर्धारक माना जाता है।


2. अभिवृत्ति के A-B-C घटकों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर:
अभिवृत्ति के तीन प्रमुख घटक होते हैं जिन्हें A-B-C मॉडल कहा जाता है। Affective (भावात्मक) घटक किसी विषय के प्रति हमारी भावनाओं को दर्शाता है। Behavioural (व्यवहारात्मक) घटक उस विषय के प्रति किए जाने वाले कार्यों या प्रतिक्रियाओं को व्यक्त करता है। Cognitive (संज्ञानात्मक) घटक व्यक्ति के विचारों, धारणाओं और विश्वासों से संबंधित होता है। उदाहरण के लिए, पर्यावरण संरक्षण के प्रति चिंता भावात्मक घटक है, पेड़ लगाना व्यवहारात्मक घटक है और यह विश्वास कि पेड़ प्रदूषण कम करते हैं, संज्ञानात्मक घटक है। ये तीनों मिलकर किसी व्यक्ति की अभिवृत्ति का निर्माण करते हैं।


3. अभिवृत्तियाँ कैसे निर्मित होती हैं?

उत्तर:
अभिवृत्तियों का निर्माण मुख्यतः सीखने की प्रक्रिया द्वारा होता है। परिवार, विद्यालय, मित्र समूह और मीडिया इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। व्यक्ति प्रत्यक्ष अनुभवों से भी अभिवृत्तियाँ विकसित करता है। पुरस्कार और दंड के माध्यम से भी कुछ व्यवहारों के प्रति सकारात्मक या नकारात्मक दृष्टिकोण बनता है। अनुकरण या मॉडलिंग के द्वारा बच्चे अपने माता-पिता और शिक्षकों की अभिवृत्तियाँ अपनाते हैं। सामाजिक मानदंड और सांस्कृतिक मूल्य भी अभिवृत्ति निर्माण को प्रभावित करते हैं। इस प्रकार व्यक्तिगत अनुभवों और सामाजिक प्रभावों के संयुक्त परिणामस्वरूप अभिवृत्तियों का विकास होता है।


4. अभिवृत्ति की ‘वैलेंस’ (Valence) क्या है?

उत्तर:
वैलेंस अभिवृत्ति की दिशा को दर्शाती है। यह बताती है कि किसी वस्तु, व्यक्ति या विचार के प्रति हमारी अभिवृत्ति सकारात्मक, नकारात्मक या तटस्थ है। यदि कोई व्यक्ति शिक्षा को प्रगति का साधन मानता है तो उसकी शिक्षा के प्रति सकारात्मक वैलेंस होगी। इसके विपरीत यदि कोई व्यक्ति किसी समूह के प्रति नकारात्मक भाव रखता है, तो उसकी वैलेंस नकारात्मक होगी। वैलेंस सामाजिक व्यवहार को प्रभावित करती है और यह निर्धारित करती है कि व्यक्ति किसी स्थिति में कैसी प्रतिक्रिया देगा। इसलिए वैलेंस अभिवृत्ति की एक महत्वपूर्ण विशेषता मानी जाती है।


5. अभिवृत्ति परिवर्तन (Attitude Change) क्या है?

उत्तर:
जब किसी व्यक्ति की किसी विषय के प्रति पहले से बनी हुई अभिवृत्ति में परिवर्तन आता है, तो इसे अभिवृत्ति परिवर्तन कहते हैं। यह परिवर्तन नई जानकारी, अनुभव, सामाजिक प्रभाव या प्रेरक संदेशों के कारण हो सकता है। उदाहरण के लिए, जंक फूड खाने वाला व्यक्ति स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त करने के बाद स्वस्थ भोजन के प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति विकसित कर सकता है। अभिवृत्ति परिवर्तन में संदेश की गुणवत्ता, संदेश देने वाले व्यक्ति की विश्वसनीयता और प्राप्तकर्ता की विशेषताएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह सामाजिक और व्यक्तिगत विकास की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।


6. संज्ञानात्मक विसंगति (Cognitive Dissonance) क्या है?

उत्तर:
संज्ञानात्मक विसंगति वह मानसिक असुविधा है जो तब उत्पन्न होती है जब व्यक्ति के दो विचार, विश्वास या व्यवहार एक-दूसरे से विरोधाभासी होते हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति इस असंगति को कम करने का प्रयास करता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति धूम्रपान को हानिकारक मानता है लेकिन स्वयं धूम्रपान करता है, तो उसके भीतर संज्ञानात्मक विसंगति उत्पन्न होगी। इस तनाव को कम करने के लिए वह या तो धूम्रपान छोड़ सकता है या अपने व्यवहार को उचित ठहराने का प्रयास कर सकता है। यह सिद्धांत अभिवृत्ति परिवर्तन को समझने में सहायक है।


7. पूर्वाग्रह (Prejudice) क्या है?

उत्तर:
पूर्वाग्रह किसी व्यक्ति या समूह के प्रति बिना पर्याप्त तथ्यात्मक आधार के बनाई गई सकारात्मक या नकारात्मक अभिवृत्ति है। यह प्रायः रूढ़धारणाओं और सामाजिक धारणाओं पर आधारित होता है। पूर्वाग्रह के कारण व्यक्ति दूसरों का निष्पक्ष मूल्यांकन नहीं कर पाता। उदाहरण के लिए, किसी जाति या धर्म के लोगों के बारे में नकारात्मक धारणाएँ रखना पूर्वाग्रह कहलाता है। पूर्वाग्रह सामाजिक संघर्ष, असमानता और भेदभाव को जन्म दे सकता है। इसलिए सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए पूर्वाग्रहों को कम करना आवश्यक है।


8. पूर्वाग्रह और विभेदभाव में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
पूर्वाग्रह एक मानसिक अभिवृत्ति है, जबकि विभेदभाव उस अभिवृत्ति पर आधारित व्यवहार है। पूर्वाग्रह में व्यक्ति किसी समूह के प्रति नकारात्मक विचार या भावना रखता है, परंतु विभेदभाव में वह उन विचारों को व्यवहार में व्यक्त करता है। उदाहरण के लिए, किसी समुदाय के प्रति नकारात्मक धारणा रखना पूर्वाग्रह है, जबकि उस समुदाय के लोगों को नौकरी या अवसर न देना विभेदभाव है। पूर्वाग्रह हमेशा विभेदभाव में परिवर्तित नहीं होता, लेकिन विभेदभाव प्रायः पूर्वाग्रह का परिणाम होता है। दोनों सामाजिक असमानता को बढ़ावा देते हैं।


9. रूढ़धारणा (Stereotype) क्या है?

उत्तर:
रूढ़धारणा किसी समूह के बारे में अत्यधिक सामान्यीकृत और अप्रमाणित विश्वास है। इसमें यह मान लिया जाता है कि समूह के सभी सदस्य समान गुणों वाले हैं। उदाहरण के लिए, यह मानना कि किसी विशेष क्षेत्र के सभी लोग आलसी होते हैं, एक रूढ़धारणा है। रूढ़धारणाएँ सामाजिक संज्ञान को सरल बनाती हैं, लेकिन वे अक्सर गलत और भ्रामक होती हैं। इनके कारण पूर्वाग्रह और विभेदभाव विकसित हो सकते हैं। इसलिए लोगों का मूल्यांकन व्यक्तिगत गुणों के आधार पर करना चाहिए, न कि रूढ़धारणाओं के आधार पर।


10. सामाजिक संज्ञान (Social Cognition) क्या है?

उत्तर:
सामाजिक संज्ञान उन मानसिक प्रक्रियाओं को संदर्भित करता है जिनके माध्यम से हम सामाजिक जानकारी को ग्रहण, व्याख्यायित, संग्रहीत और उपयोग करते हैं। यह हमें दूसरों के व्यवहार को समझने तथा सामाजिक परिस्थितियों का अर्थ निकालने में सहायता करता है। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति के चेहरे के भाव देखकर उसके मनोभावों का अनुमान लगाना सामाजिक संज्ञान का उदाहरण है। सामाजिक संज्ञान हमारी धारणाओं, निर्णयों और सामाजिक संबंधों को प्रभावित करता है। यह सामाजिक व्यवहार को समझने का एक महत्वपूर्ण आधार है।


11. स्कीमा (Schema) क्या है?

उत्तर:
स्कीमा एक मानसिक संरचना है जो किसी व्यक्ति, वस्तु या घटना के बारे में जानकारी को व्यवस्थित करने का कार्य करती है। यह हमें नई जानकारी को शीघ्रता से समझने और उसका अर्थ निकालने में सहायता करती है। उदाहरण के लिए, “अध्यापक” शब्द सुनते ही हमारे मन में उससे संबंधित कई विशेषताएँ उभर आती हैं। ये सभी मिलकर एक स्कीमा बनाती हैं। स्कीमा सामाजिक संज्ञान को सरल बनाती है, परंतु कभी-कभी गलत निष्कर्षों का कारण भी बन सकती है। इसलिए इनके उपयोग में सावधानी आवश्यक है।


12. मीडिया अभिवृत्ति निर्माण में कैसे सहायता करता है?

उत्तर:
मीडिया समाज में अभिवृत्तियों के निर्माण और परिवर्तन का एक प्रभावशाली माध्यम है। समाचार, विज्ञापन, चलचित्र और सोशल मीडिया लोगों के विचारों और भावनाओं को प्रभावित करते हैं। मीडिया किसी विषय के बारे में जानकारी देकर उसके प्रति सकारात्मक या नकारात्मक दृष्टिकोण विकसित कर सकता है। उदाहरण के लिए, पर्यावरण संरक्षण संबंधी अभियान लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं। इसी प्रकार भ्रामक जानकारी नकारात्मक अभिवृत्तियाँ भी उत्पन्न कर सकती है। इसलिए मीडिया का जिम्मेदार उपयोग अत्यंत आवश्यक है।


13. संतुलन सिद्धांत (Balance Theory) क्या है?

उत्तर:
संतुलन सिद्धांत के अनुसार व्यक्ति अपने विचारों और संबंधों में सामंजस्य बनाए रखना चाहता है। जब किसी व्यक्ति, वस्तु और विचार के बीच असंतुलन उत्पन्न होता है, तो व्यक्ति उसे संतुलित करने का प्रयास करता है। उदाहरण के लिए, यदि आप अपने मित्र को पसंद करते हैं और आपका मित्र किसी पुस्तक को पसंद करता है, तो संभव है कि आप भी उस पुस्तक के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करें। इस प्रकार व्यक्ति मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए अपनी अभिवृत्तियों में परिवर्तन करता है। यह सिद्धांत अभिवृत्ति परिवर्तन को समझाने में सहायक है।


14. संदर्भ समूह (Reference Group) का क्या महत्व है?

उत्तर:
संदर्भ समूह वे समूह होते हैं जिनके मानदंड, मूल्य और व्यवहार व्यक्ति को प्रभावित करते हैं। व्यक्ति अक्सर इन समूहों के अनुरूप अपनी अभिवृत्तियाँ विकसित करता है। किशोरावस्था में मित्र समूह विशेष रूप से प्रभावशाली होते हैं। यदि किसी समूह में शिक्षा को महत्व दिया जाता है, तो उसके सदस्य भी शिक्षा के प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति विकसित कर सकते हैं। संदर्भ समूह व्यक्ति को सामाजिक पहचान और अपनापन प्रदान करते हैं। इसलिए अभिवृत्ति निर्माण और सामाजिक व्यवहार के विकास में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।


15. अभिवृत्ति और व्यवहार का संबंध स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
अभिवृत्तियाँ सामान्यतः व्यवहार को प्रभावित करती हैं, लेकिन दोनों में हमेशा पूर्ण समानता नहीं होती। कई बार सामाजिक दबाव, परिस्थितियाँ या व्यक्तिगत हित व्यक्ति को अपनी अभिवृत्ति के विपरीत व्यवहार करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण का समर्थक हो सकता है, फिर भी सुविधा के कारण प्लास्टिक का उपयोग कर सकता है। इसलिए अभिवृत्ति व्यवहार को प्रभावित तो करती है, परंतु व्यवहार अन्य परिस्थितिजन्य कारकों से भी निर्धारित होता है। यही कारण है कि दोनों के बीच संबंध जटिल माना जाता है।


16. अभिवृत्ति की केंद्रीयता (Centrality) क्या है?

उत्तर:
केंद्रीयता से आशय व्यक्ति की अभिवृत्ति प्रणाली में किसी विशेष अभिवृत्ति के महत्व से है। कुछ अभिवृत्तियाँ व्यक्ति के जीवन और मूल्यों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होती हैं तथा अन्य अभिवृत्तियों और व्यवहारों को भी प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए, ईमानदारी के प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति व्यक्ति के अनेक निर्णयों को प्रभावित कर सकती है। जिन अभिवृत्तियों की केंद्रीयता अधिक होती है, उनमें परिवर्तन लाना अपेक्षाकृत कठिन होता है। इसलिए केंद्रीयता को अभिवृत्ति की एक महत्वपूर्ण विशेषता माना जाता है।


17. पूर्वाग्रह कम करने के दो उपाय लिखिए।

उत्तर:
पूर्वाग्रह कम करने के लिए विभिन्न सामाजिक और शैक्षिक उपाय अपनाए जा सकते हैं। पहला, विभिन्न समूहों के बीच सकारात्मक संपर्क और सहयोग बढ़ाना चाहिए ताकि लोग एक-दूसरे को बेहतर समझ सकें। दूसरा, शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से रूढ़धारणाओं तथा गलत धारणाओं को दूर करना चाहिए। समान अवसर, सामाजिक न्याय और सहिष्णुता को बढ़ावा देना भी आवश्यक है। जब लोग व्यक्तिगत स्तर पर एक-दूसरे को जानने लगते हैं, तो नकारात्मक धारणाएँ कम होने लगती हैं। इस प्रकार पूर्वाग्रहों को घटाकर सामाजिक सौहार्द स्थापित किया जा सकता है।


18. मूल्य (Values) और अभिवृत्ति में अंतर बताइए।

उत्तर:
मूल्य और अभिवृत्ति दोनों व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित करते हैं, लेकिन इनमें अंतर है। अभिवृत्ति किसी विशेष वस्तु, व्यक्ति या विषय के प्रति दृष्टिकोण को दर्शाती है, जबकि मूल्य जीवन के व्यापक आदर्शों और सिद्धांतों से संबंधित होते हैं। उदाहरण के लिए, ईमानदारी एक मूल्य है, जबकि किसी विशेष व्यक्ति के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण एक अभिवृत्ति है। मूल्य अपेक्षाकृत स्थायी होते हैं और व्यक्ति के जीवन दर्शन का आधार बनते हैं। अभिवृत्तियाँ मूल्यों से प्रभावित होती हैं और समय के साथ बदल भी सकती हैं।


19. प्रेरक संचार (Persuasive Communication) क्या है?

उत्तर:
प्रेरक संचार वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति की अभिवृत्ति या व्यवहार को प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है। इसमें संदेश, संदेशदाता और प्राप्तकर्ता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यदि संदेश स्पष्ट, विश्वसनीय और प्रभावशाली हो, तो अभिवृत्ति परिवर्तन की संभावना बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, स्वास्थ्य संबंधी विज्ञापन लोगों को धूम्रपान छोड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। प्रेरक संचार का उपयोग शिक्षा, विज्ञापन, राजनीति और सामाजिक अभियानों में व्यापक रूप से किया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों के विचारों और व्यवहारों में सकारात्मक परिवर्तन लाना होता है।


20. सामाजिक संज्ञान में रूढ़धारणाओं की भूमिका क्या है?

उत्तर:
रूढ़धारणाएँ सामाजिक संज्ञान की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया हैं। ये लोगों को दूसरों के बारे में शीघ्र निर्णय लेने में सहायता करती हैं, क्योंकि वे जानकारी को वर्गीकृत करने का सरल तरीका प्रदान करती हैं। हालांकि, ये निर्णय हमेशा सही नहीं होते। रूढ़धारणाओं के कारण व्यक्ति किसी समूह के सभी सदस्यों को एक समान समझने लगता है, जिससे गलत धारणाएँ और पूर्वाग्रह विकसित हो सकते हैं। इसलिए सामाजिक संज्ञान में रूढ़धारणाएँ समय और मानसिक प्रयास बचाती हैं, लेकिन इनके कारण निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता प्रभावित हो सकती है। अतः इनका उपयोग सावधानीपूर्वक करना चाहिए।