CBSE कक्षा 12 इतिहास (2026-27)

अध्याय 11: महात्मा गांधी और राष्ट्रवादी आंदोलन (Civil Disobedience and Beyond)

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

यह अध्याय गांधीजी के नेतृत्व, सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, दांडी मार्च, भारत छोड़ो आंदोलन तथा राष्ट्रीय आंदोलन में जनभागीदारी पर केंद्रित है।


1. महात्मा गांधी को भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का जननेता क्यों कहा जाता है?

उत्तर:
महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को अभिजात वर्ग की सीमाओं से निकालकर जनआंदोलन बना दिया। उन्होंने किसानों, मजदूरों, महिलाओं, विद्यार्थियों तथा व्यापारियों को स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ा। गांधीजी ने सत्याग्रह और अहिंसा को संघर्ष का आधार बनाया, जिससे आम जनता बिना हिंसा के ब्रिटिश शासन का विरोध कर सकी। उनके नेतृत्व में असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा भारत छोड़ो आंदोलन जैसे बड़े जनआंदोलन हुए। उन्होंने खादी, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। इस प्रकार गांधीजी ने राष्ट्रीय आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन प्रदान किया और स्वतंत्रता संघर्ष को नई दिशा दी।


2. सत्याग्रह से गांधीजी का क्या आशय था?

उत्तर:
सत्याग्रह गांधीजी की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक पद्धति थी। इसका अर्थ है सत्य और न्याय के लिए अहिंसक संघर्ष करना। गांधीजी का विश्वास था कि अन्याय का विरोध हिंसा से नहीं बल्कि नैतिक शक्ति और आत्मबल से किया जाना चाहिए। सत्याग्रही अपने विरोधी को शत्रु नहीं मानता बल्कि उसे सत्य का बोध कराने का प्रयास करता है। सत्याग्रह में त्याग, आत्मअनुशासन, धैर्य और अहिंसा का विशेष महत्व है। दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी ने इस पद्धति का प्रयोग किया और बाद में भारत में भी इसे राष्ट्रीय आंदोलन का आधार बनाया। सत्याग्रह ने लाखों भारतीयों को स्वतंत्रता संघर्ष में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।


3. चंपारण सत्याग्रह का महत्व बताइए।

उत्तर:
1917 का चंपारण सत्याग्रह गांधीजी का भारत में पहला सफल सत्याग्रह था। बिहार के चंपारण जिले में अंग्रेज नील उत्पादकों द्वारा किसानों का शोषण किया जा रहा था। किसानों को जबरन नील की खेती करने के लिए बाध्य किया जाता था। गांधीजी ने किसानों की समस्याओं का अध्ययन किया और शांतिपूर्ण आंदोलन चलाया। उनके प्रयासों से सरकार को जांच समिति बनानी पड़ी और किसानों को राहत मिली। इस आंदोलन ने गांधीजी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। साथ ही यह सिद्ध हुआ कि अहिंसक संघर्ष के माध्यम से भी अन्याय का विरोध सफलतापूर्वक किया जा सकता है। चंपारण सत्याग्रह ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की।


4. खेड़ा सत्याग्रह क्यों शुरू किया गया था?

उत्तर:
1918 में गुजरात के खेड़ा जिले में अकाल और फसल की बर्बादी के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब हो गई थी। इसके बावजूद ब्रिटिश सरकार उनसे पूरा भूमि कर वसूलना चाहती थी। गांधीजी ने किसानों का समर्थन किया और कर न देने का शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू किया। किसानों ने एकजुट होकर सरकार का विरोध किया। अंततः सरकार को झुकना पड़ा और कर वसूली में राहत देनी पड़ी। खेड़ा सत्याग्रह ने किसानों में आत्मविश्वास बढ़ाया और गांधीजी के नेतृत्व को मजबूत किया। इस आंदोलन ने यह सिद्ध किया कि संगठित और अहिंसक संघर्ष से जनता अपने अधिकार प्राप्त कर सकती है।


5. अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन का महत्व क्या था?

उत्तर:
1918 में अहमदाबाद के कपड़ा मिल मजदूरों और मिल मालिकों के बीच वेतन वृद्धि को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। गांधीजी ने मजदूरों का समर्थन किया और शांतिपूर्ण हड़ताल का मार्ग अपनाया। उन्होंने मजदूरों को अनुशासन और अहिंसा बनाए रखने की सलाह दी। जब स्थिति जटिल हुई तो गांधीजी ने अनशन भी किया। अंततः मिल मालिकों को मजदूरों की मांगें स्वीकार करनी पड़ीं। यह आंदोलन महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे गांधीजी ने मजदूर वर्ग का विश्वास प्राप्त किया। साथ ही यह सिद्ध हुआ कि श्रमिक समस्याओं का समाधान भी सत्याग्रह और अहिंसा के माध्यम से किया जा सकता है।


6. रॉलेट एक्ट का भारतीयों ने विरोध क्यों किया?

उत्तर:
1919 में ब्रिटिश सरकार ने रॉलेट एक्ट पारित किया। इस कानून के तहत सरकार किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमे के गिरफ्तार कर सकती थी तथा उसे जेल में रख सकती थी। भारतीयों ने इसे नागरिक स्वतंत्रताओं पर हमला माना। गांधीजी ने इसके विरोध में देशव्यापी सत्याग्रह और हड़ताल का आह्वान किया। जनता ने व्यापक रूप से आंदोलन में भाग लिया। इस कानून के कारण लोगों में ब्रिटिश शासन के प्रति असंतोष और बढ़ गया। रॉलेट एक्ट ने राष्ट्रीय आंदोलन को नई गति प्रदान की और गांधीजी को राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


7. असहयोग आंदोलन के प्रमुख उद्देश्य क्या थे?

उत्तर:
असहयोग आंदोलन 1920 में गांधीजी के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ। इसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के साथ सहयोग समाप्त करके उसे कमजोर करना था। आंदोलन के अंतर्गत सरकारी विद्यालयों, अदालतों, परिषदों तथा विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया गया। लोगों को खादी अपनाने और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया। गांधीजी का मानना था कि यदि भारतीय जनता अंग्रेजों का सहयोग बंद कर दे तो ब्रिटिश शासन स्वयं कमजोर हो जाएगा। इस आंदोलन ने राष्ट्रीय आंदोलन को जनआंदोलन का रूप दिया और लाखों लोगों को स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ा।


8. चौरी-चौरा घटना क्या थी और इसका प्रभाव क्या पड़ा?

उत्तर:
फरवरी 1922 में उत्तर प्रदेश के चौरी-चौरा में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक संघर्ष हुआ। क्रोधित भीड़ ने एक पुलिस थाने में आग लगा दी, जिससे कई पुलिसकर्मियों की मृत्यु हो गई। गांधीजी अहिंसा के कट्टर समर्थक थे। उन्होंने माना कि आंदोलन हिंसक दिशा में जा रहा है, इसलिए असहयोग आंदोलन को वापस लेने का निर्णय लिया। इस निर्णय से कई नेता निराश हुए, लेकिन गांधीजी का विश्वास था कि स्वतंत्रता संघर्ष का आधार अहिंसा ही होना चाहिए। चौरी-चौरा घटना ने गांधीजी की अहिंसा के प्रति प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया।


9. दांडी मार्च का उद्देश्य क्या था?

उत्तर:
दांडी मार्च 1930 में नमक कानून के विरोध में आयोजित किया गया था। ब्रिटिश सरकार ने नमक उत्पादन और बिक्री पर एकाधिकार स्थापित कर रखा था। गांधीजी ने इसे अन्यायपूर्ण माना और साबरमती आश्रम से दांडी तक लगभग 240 मील की यात्रा की। दांडी पहुँचकर उन्होंने समुद्र के पानी से नमक बनाकर कानून तोड़ा। यह घटना सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत बनी। दांडी मार्च ने राष्ट्रीय आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई तथा लाखों भारतीयों को ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष के लिए प्रेरित किया।


10. सविनय अवज्ञा आंदोलन क्या था?

उत्तर:
सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930 में गांधीजी द्वारा प्रारंभ किया गया एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आंदोलन था। इसका उद्देश्य अन्यायपूर्ण ब्रिटिश कानूनों का शांतिपूर्ण उल्लंघन करना था। नमक कानून तोड़ना इसका प्रमुख प्रतीक था। आंदोलन के दौरान लोगों ने कर न देने, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने तथा सरकारी संस्थाओं से दूरी बनाने जैसे कदम उठाए। इस आंदोलन में महिलाओं, किसानों और विद्यार्थियों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। ब्रिटिश सरकार ने दमनकारी नीतियाँ अपनाईं, लेकिन आंदोलन जारी रहा। सविनय अवज्ञा आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष को व्यापक जनसमर्थन प्रदान किया।


11. गांधी-इरविन समझौता क्या था?

उत्तर:
1931 में गांधीजी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच गांधी-इरविन समझौता हुआ। इस समझौते के तहत सरकार ने राजनीतिक कैदियों को रिहा करने और शांतिपूर्ण गतिविधियों की अनुमति देने का आश्वासन दिया। बदले में गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित करने पर सहमति व्यक्त की। इसके बाद गांधीजी ने लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया। यद्यपि सम्मेलन से कोई ठोस परिणाम नहीं निकला, फिर भी यह समझौता राष्ट्रीय आंदोलन और ब्रिटिश सरकार के बीच संवाद का महत्वपूर्ण प्रयास माना जाता है।


12. गोलमेज सम्मेलनों का उद्देश्य क्या था?

उत्तर:
गोलमेज सम्मेलन 1930 से 1932 के बीच लंदन में आयोजित किए गए। इनका उद्देश्य भारत के संवैधानिक भविष्य पर चर्चा करना था। प्रथम सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया। गांधी-इरविन समझौते के बाद गांधीजी द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन में विभिन्न समुदायों और राजनीतिक समूहों के हितों पर चर्चा हुई। हालांकि भारतीय स्वतंत्रता की मांग पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसके बावजूद गोलमेज सम्मेलनों ने भारतीय राजनीतिक प्रश्नों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता दिलाई।


13. भारत छोड़ो आंदोलन क्यों प्रारंभ किया गया?

उत्तर:
1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान गांधीजी ने भारत छोड़ो आंदोलन प्रारंभ किया। उनका मानना था कि ब्रिटिश शासन को तुरंत भारत छोड़ देना चाहिए। मुंबई में कांग्रेस अधिवेशन में “करो या मरो” का नारा दिया गया। आंदोलन का उद्देश्य पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त करना था। ब्रिटिश सरकार ने गांधीजी सहित अनेक नेताओं को गिरफ्तार कर लिया, फिर भी जनता ने आंदोलन जारी रखा। यह आंदोलन स्वतंत्रता संघर्ष का अंतिम और सबसे व्यापक जनआंदोलन सिद्ध हुआ। इसने ब्रिटिश शासन को यह महसूस करा दिया कि भारत पर अधिक समय तक शासन करना संभव नहीं है।


14. “करो या मरो” नारे का महत्व बताइए।

उत्तर:
“करो या मरो” का नारा गांधीजी ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान दिया था। इसका अर्थ था कि भारतीयों को स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए पूर्ण समर्पण के साथ संघर्ष करना चाहिए। यह नारा लोगों में उत्साह, साहस और आत्मविश्वास भरने वाला था। इसके माध्यम से गांधीजी ने स्पष्ट किया कि अब स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए निर्णायक संघर्ष का समय आ गया है। इस नारे ने पूरे देश में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत किया और लाखों भारतीयों को स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।


15. गांधीजी ने खादी को क्यों बढ़ावा दिया?

उत्तर:
गांधीजी ने खादी को स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का प्रतीक माना। उनका उद्देश्य भारतीयों को विदेशी कपड़ों के बहिष्कार के लिए प्रेरित करना था। खादी के उपयोग से ग्रामीण उद्योगों को प्रोत्साहन मिला और रोजगार के अवसर बढ़े। चरखा राष्ट्रीय आंदोलन का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया। गांधीजी का मानना था कि खादी अपनाने से आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त होगी और ब्रिटिश उद्योगों पर निर्भरता कम होगी। इस प्रकार खादी केवल वस्त्र नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता, स्वावलंबन और स्वतंत्रता संघर्ष का प्रतीक बन गई।


16. राष्ट्रीय आंदोलन में महिलाओं की भूमिका का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
महिलाओं ने गांधीजी के नेतृत्व में राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। उन्होंने विदेशी वस्त्रों और शराब की दुकानों के बहिष्कार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दांडी मार्च और सविनय अवज्ञा आंदोलन में अनेक महिलाओं ने भाग लिया। उन्होंने सभाओं, जुलूसों और सत्याग्रहों का नेतृत्व भी किया। गांधीजी का विश्वास था कि महिलाएँ अहिंसा और त्याग की भावना से आंदोलन को मजबूत बना सकती हैं। महिलाओं की भागीदारी ने राष्ट्रीय आंदोलन को व्यापक सामाजिक आधार प्रदान किया और भारतीय समाज में उनकी स्थिति को भी सुदृढ़ किया।


17. गांधीजी के अनुसार अहिंसा का महत्व क्या था?

उत्तर:
गांधीजी अहिंसा को केवल राजनीतिक रणनीति नहीं बल्कि जीवन का सिद्धांत मानते थे। उनका विश्वास था कि हिंसा से घृणा और विनाश बढ़ता है, जबकि अहिंसा से नैतिक शक्ति विकसित होती है। अहिंसा के माध्यम से विरोधी के हृदय परिवर्तन का प्रयास किया जाता है। गांधीजी ने स्वतंत्रता संघर्ष में अहिंसा को आधार बनाकर लाखों लोगों को जोड़ा। उनका मानना था कि सच्ची विजय बल प्रयोग से नहीं बल्कि सत्य और प्रेम से प्राप्त होती है। यही कारण है कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन विश्व इतिहास में एक अनोखे अहिंसक संघर्ष के रूप में जाना जाता है।


18. गांधीजी ने हरिजन आंदोलन क्यों चलाया?

उत्तर:
गांधीजी समाज में व्याप्त अस्पृश्यता को एक गंभीर सामाजिक बुराई मानते थे। उन्होंने दलितों को “हरिजन” अर्थात् ईश्वर के बच्चे कहा। उनका उद्देश्य समाज में समानता और सामाजिक न्याय स्थापित करना था। गांधीजी ने मंदिर प्रवेश, शिक्षा और सामाजिक अधिकारों के लिए अभियान चलाए। उन्होंने लोगों से जातिगत भेदभाव समाप्त करने का आग्रह किया। हरिजन आंदोलन के माध्यम से गांधीजी ने सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का प्रयास किया। उनका मानना था कि सामाजिक समानता के बिना वास्तविक स्वतंत्रता अधूरी है।


19. इतिहासकार गांधीजी के जीवन का अध्ययन किन स्रोतों से करते हैं?

उत्तर:
इतिहासकार गांधीजी के जीवन और राष्ट्रीय आंदोलन के अध्ययन के लिए विभिन्न स्रोतों का उपयोग करते हैं। इनमें सरकारी अभिलेख, पुलिस रिपोर्टें, प्रशासनिक दस्तावेज, समाचार पत्र, पत्रिकाएँ, गांधीजी के पत्र, भाषण तथा आत्मकथात्मक लेख शामिल हैं। गांधीजी द्वारा प्रकाशित पत्रों और अखबारों से उनके विचारों की जानकारी मिलती है। इसके अतिरिक्त समकालीन नेताओं के संस्मरण और सरकारी रिपोर्टें भी महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इन स्रोतों के माध्यम से इतिहासकार गांधीजी की भूमिका, उनके विचारों और राष्ट्रीय आंदोलन की प्रकृति को समझते हैं।


20. भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में गांधीजी का योगदान स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
महात्मा गांधी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा और व्यापक जनाधार प्रदान किया। उन्होंने सत्याग्रह, अहिंसा और जनसहभागिता को संघर्ष का आधार बनाया। चंपारण, खेड़ा, असहयोग, सविनय अवज्ञा तथा भारत छोड़ो आंदोलन जैसे आंदोलनों के माध्यम से उन्होंने लाखों भारतीयों को स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ा। गांधीजी ने सामाजिक सुधार, स्वदेशी, खादी और राष्ट्रीय एकता पर भी बल दिया। उनकी नीतियों ने भारतीय जनता में आत्मविश्वास और राष्ट्रीय चेतना का विकास किया। स्वतंत्रता प्राप्ति में उनके नेतृत्व और विचारों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसके कारण उन्हें राष्ट्रपिता कहा जाता है।