CBSE कक्षा 12 अर्थशास्त्र (Macroeconomics)
अध्याय 4 – सरकारी बजट और अर्थव्यवस्था (Government Budget and the Economy)
2026-27 सत्र के अनुसार 20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

यह अध्याय CBSE 2026-27 पाठ्यक्रम में सरकारी बजट, उसके उद्देश्य, प्राप्तियों एवं व्ययों के वर्गीकरण तथा विभिन्न प्रकार के घाटों पर आधारित है।


1. सरकारी बजट क्या है?

उत्तर:
सरकारी बजट सरकार का वार्षिक वित्तीय विवरण होता है, जिसमें एक वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित आय और व्यय का विवरण दिया जाता है। भारत में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है। बजट के माध्यम से सरकार यह बताती है कि वह किन स्रोतों से धन प्राप्त करेगी तथा विभिन्न योजनाओं, प्रशासनिक कार्यों और विकास कार्यक्रमों पर कितना व्यय करेगी। बजट आर्थिक विकास, आय के पुनर्वितरण तथा आर्थिक स्थिरता बनाए रखने का महत्वपूर्ण साधन है। संसद की स्वीकृति के बाद ही बजट लागू किया जाता है।


2. सरकारी बजट के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?

उत्तर:
सरकारी बजट के प्रमुख उद्देश्य संसाधनों का कुशल आवंटन, आय एवं संपत्ति की असमानताओं को कम करना, आर्थिक स्थिरता बनाए रखना तथा आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना हैं। सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना जैसे क्षेत्रों में निवेश करके संसाधनों का उचित उपयोग सुनिश्चित करती है। कर नीति और सार्वजनिक व्यय के माध्यम से आय का पुनर्वितरण किया जाता है। बजट मुद्रास्फीति और बेरोजगारी जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में भी सहायता करता है। इस प्रकार बजट देश की आर्थिक नीतियों को लागू करने का महत्वपूर्ण साधन है।


3. राजस्व प्राप्तियाँ क्या हैं?

उत्तर:
वे प्राप्तियाँ जो सरकार को नियमित रूप से प्राप्त होती हैं और जिनसे न तो कोई देनदारी उत्पन्न होती है तथा न ही सरकारी परिसंपत्तियों में कमी आती है, राजस्व प्राप्तियाँ कहलाती हैं। इन्हें मुख्यतः कर राजस्व और गैर-कर राजस्व में बाँटा जाता है। आयकर, निगम कर तथा जीएसटी कर राजस्व के उदाहरण हैं, जबकि शुल्क, ब्याज, लाभांश और जुर्माना गैर-कर राजस्व के उदाहरण हैं। ये प्राप्तियाँ सरकार के दैनिक प्रशासनिक कार्यों और सामान्य खर्चों को पूरा करने में सहायता करती हैं।


4. कर राजस्व और गैर-कर राजस्व में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
कर राजस्व वह आय है जो सरकार नागरिकों और संस्थाओं से करों के रूप में प्राप्त करती है, जैसे आयकर, वस्तु एवं सेवा कर (GST) तथा सीमा शुल्क। दूसरी ओर, गैर-कर राजस्व वह आय है जो करों के अतिरिक्त स्रोतों से प्राप्त होती है, जैसे सार्वजनिक उपक्रमों का लाभांश, सरकारी ऋणों पर ब्याज, लाइसेंस शुल्क तथा जुर्माना। कर राजस्व सरकार की आय का प्रमुख स्रोत होता है, जबकि गैर-कर राजस्व सहायक स्रोत के रूप में कार्य करता है। दोनों मिलकर सरकार की राजस्व प्राप्तियों का निर्माण करते हैं।


5. पूंजीगत प्राप्तियाँ क्या हैं?

उत्तर:
वे प्राप्तियाँ जो सरकार की देनदारियों में वृद्धि करती हैं या उसकी परिसंपत्तियों में कमी लाती हैं, पूंजीगत प्राप्तियाँ कहलाती हैं। उदाहरण के लिए, सरकार द्वारा लिया गया ऋण, सार्वजनिक उपक्रमों के शेयरों की बिक्री तथा पुराने ऋणों की वसूली। इन प्राप्तियों का उपयोग मुख्यतः विकास परियोजनाओं और पूंजीगत व्ययों के लिए किया जाता है। पूंजीगत प्राप्तियाँ सरकार की वित्तीय स्थिति को प्रभावित करती हैं क्योंकि इनके कारण भविष्य में भुगतान की जिम्मेदारी उत्पन्न हो सकती है।


6. राजस्व व्यय क्या है?

उत्तर:
राजस्व व्यय वह व्यय है जिससे सरकार की परिसंपत्तियों में वृद्धि नहीं होती और न ही कोई नई संपत्ति निर्मित होती है। यह व्यय सरकार के सामान्य प्रशासन और सेवाओं के संचालन के लिए किया जाता है। सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान, अनुदान तथा सब्सिडी इसके प्रमुख उदाहरण हैं। राजस्व व्यय का उद्देश्य सरकारी कार्यों का नियमित संचालन बनाए रखना होता है। यह व्यय देश के विकास में अप्रत्यक्ष रूप से योगदान देता है, परंतु इससे प्रत्यक्ष रूप से कोई पूंजीगत संपत्ति निर्मित नहीं होती।


7. पूंजीगत व्यय क्या है?

उत्तर:
पूंजीगत व्यय वह व्यय है जिससे सरकार की परिसंपत्तियों में वृद्धि होती है या देनदारियों में कमी आती है। सड़क, पुल, अस्पताल, विद्यालय और अन्य आधारभूत संरचनाओं के निर्माण पर किया गया खर्च इसका उदाहरण है। सरकार द्वारा ऋण प्रदान करना भी पूंजीगत व्यय माना जाता है। यह व्यय दीर्घकालीन आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है क्योंकि इससे उत्पादन क्षमता और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होती है। इसलिए पूंजीगत व्यय को विकासात्मक व्यय भी कहा जाता है।


8. संतुलित बजट क्या है?

उत्तर:
जब किसी वित्तीय वर्ष में सरकार की कुल प्राप्तियाँ उसके कुल व्यय के बराबर होती हैं, तब उसे संतुलित बजट कहा जाता है। ऐसी स्थिति में सरकार को न तो अतिरिक्त ऋण लेने की आवश्यकता होती है और न ही कोई अधिशेष बचता है। संतुलित बजट वित्तीय अनुशासन को दर्शाता है तथा अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने में सहायक होता है। हालांकि विकासशील देशों में विकास कार्यों की आवश्यकता के कारण संतुलित बजट हमेशा व्यावहारिक नहीं माना जाता।


9. अधिशेष बजट क्या है?

उत्तर:
जब सरकार की कुल प्राप्तियाँ उसके कुल व्यय से अधिक होती हैं, तब अधिशेष बजट कहलाता है। इस स्थिति में सरकार के पास अतिरिक्त धन बचता है। अधिशेष बजट का उपयोग प्रायः मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है क्योंकि इससे अर्थव्यवस्था में कुल मांग कम होती है। हालांकि अत्यधिक अधिशेष बजट से विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए सरकार आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इसका उपयोग करती है।


10. घाटे का बजट क्या है?

उत्तर:
जब सरकार का कुल व्यय उसकी कुल प्राप्तियों से अधिक होता है, तब घाटे का बजट कहलाता है। ऐसी स्थिति में सरकार को ऋण लेना पड़ता है या अन्य स्रोतों से धन जुटाना पड़ता है। विकासशील देशों में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लिए अक्सर घाटे का बजट अपनाया जाता है। यदि घाटा अत्यधिक बढ़ जाए तो मुद्रास्फीति और ऋण भार जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए सरकार को घाटे के स्तर पर नियंत्रण रखना आवश्यक होता है।


11. बजटीय घाटा क्या है?

उत्तर:
बजटीय घाटा वह स्थिति है जब सरकार का कुल व्यय उसकी कुल प्राप्तियों से अधिक हो जाता है। यह सरकार की वित्तीय स्थिति का संकेतक है। बजटीय घाटे को पूरा करने के लिए सरकार ऋण ले सकती है या अन्य वित्तीय साधनों का उपयोग कर सकती है। लगातार बढ़ता हुआ बजटीय घाटा अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है क्योंकि इससे सरकारी ऋण और ब्याज भुगतान का भार बढ़ जाता है।


12. राजस्व घाटा क्या है?

उत्तर:
राजस्व घाटा तब उत्पन्न होता है जब सरकार का राजस्व व्यय उसकी राजस्व प्राप्तियों से अधिक होता है। यह दर्शाता है कि सरकार अपने नियमित खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त राजस्व अर्जित नहीं कर पा रही है। राजस्व घाटा आर्थिक दृष्टि से चिंताजनक माना जाता है क्योंकि इससे सरकार को दैनिक खर्चों के लिए भी उधार लेना पड़ सकता है। राजस्व घाटे को कम करने के लिए कर संग्रह बढ़ाना और अनावश्यक खर्चों को नियंत्रित करना आवश्यक होता है।


13. राजकोषीय घाटा क्या है?

उत्तर:
राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय और कुल प्राप्तियों (ऋणों को छोड़कर) के बीच का अंतर होता है। यह दर्शाता है कि सरकार को अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कितना ऋण लेना पड़ेगा। राजकोषीय घाटा सरकार की वित्तीय स्थिति का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। यदि यह बहुत अधिक हो जाए तो मुद्रास्फीति, ऋण भार और आर्थिक असंतुलन जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए सरकार इसके स्तर को नियंत्रित रखने का प्रयास करती है।


14. प्राथमिक घाटा क्या है?

उत्तर:
प्राथमिक घाटा राजकोषीय घाटे में से ब्याज भुगतान को घटाने पर प्राप्त होता है। यह बताता है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में सरकार की वास्तविक उधारी कितनी है। यदि प्राथमिक घाटा कम है तो इसका अर्थ है कि राजकोषीय घाटे का बड़ा भाग पुराने ऋणों के ब्याज भुगतान के कारण है। प्राथमिक घाटा सरकार की वर्तमान वित्तीय नीतियों की प्रभावशीलता को समझने में सहायक होता है।


15. प्रत्यक्ष कर क्या हैं?

उत्तर:
प्रत्यक्ष कर वे कर हैं जिनका भार और भुगतान एक ही व्यक्ति द्वारा किया जाता है। इन करों का बोझ किसी अन्य व्यक्ति पर स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। आयकर, निगम कर और संपत्ति कर इसके प्रमुख उदाहरण हैं। प्रत्यक्ष कर आय के अनुसार लगाए जाते हैं, इसलिए इन्हें न्यायसंगत माना जाता है। ये आय और संपत्ति की असमानताओं को कम करने में भी सहायक होते हैं।


16. अप्रत्यक्ष कर क्या हैं?

उत्तर:
अप्रत्यक्ष कर वे कर हैं जिनका भुगतान एक व्यक्ति करता है लेकिन उसका भार किसी अन्य व्यक्ति पर डाला जा सकता है। वस्तु एवं सेवा कर (GST), सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क इसके उदाहरण हैं। ये कर वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य में शामिल होते हैं, इसलिए उपभोक्ता अंततः इनका भार वहन करता है। अप्रत्यक्ष कर सरकार के लिए राजस्व का महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं।


17. आय के पुनर्वितरण में बजट की भूमिका समझाइए।

उत्तर:
सरकार बजट के माध्यम से आय और संपत्ति की असमानताओं को कम करने का प्रयास करती है। उच्च आय वाले लोगों पर अधिक कर लगाकर तथा गरीब और कमजोर वर्गों को सब्सिडी, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ प्रदान करके आय का पुनर्वितरण किया जाता है। शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास पर सरकारी व्यय भी सामाजिक न्याय को बढ़ावा देता है। इस प्रकार बजट आर्थिक समानता स्थापित करने का महत्वपूर्ण साधन है।


18. आर्थिक स्थिरता में बजट की भूमिका क्या है?

उत्तर:
बजट अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने का महत्वपूर्ण साधन है। मुद्रास्फीति की स्थिति में सरकार करों में वृद्धि और व्यय में कमी करके मांग को नियंत्रित कर सकती है। दूसरी ओर, मंदी या बेरोजगारी की स्थिति में सार्वजनिक व्यय बढ़ाकर और करों में कमी करके मांग तथा रोजगार को बढ़ावा दिया जा सकता है। इस प्रकार बजट आर्थिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में सहायता करता है।


19. संसाधनों के आवंटन में बजट की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
सरकार बजट के माध्यम से यह निर्धारित करती है कि उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किन क्षेत्रों में किया जाएगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, परिवहन तथा रक्षा जैसे क्षेत्रों में व्यय करके सरकार संसाधनों का उचित आवंटन सुनिश्चित करती है। इससे सार्वजनिक कल्याण बढ़ता है और आर्थिक विकास को गति मिलती है। बजट निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों के बीच संसाधनों के संतुलित वितरण में भी सहायता करता है।


20. सरकारी बजट आर्थिक विकास को कैसे बढ़ावा देता है?

उत्तर:
सरकार बजट के माध्यम से आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योगों में निवेश करती है, जिससे उत्पादन क्षमता और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। पूंजीगत व्यय आर्थिक विकास को गति देता है तथा निजी निवेश को भी प्रोत्साहित करता है। कर रियायतें और विकास योजनाएँ उद्यमिता को बढ़ावा देती हैं। इसके अतिरिक्त, सामाजिक क्षेत्र पर व्यय मानव संसाधन विकास में सहायता करता है। इस प्रकार सरकारी बजट देश की दीर्घकालीन आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण साधन है।