CBSE कक्षा 12 व्यवसाय अध्ययन (Business Studies)
अध्याय 10 – वित्तीय बाजार (Financial Markets)
सत्र 2026–27 के नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम के अनुसार
अध्याय में वित्तीय बाजार, मुद्रा बाजार, पूंजी बाजार, प्राथमिक एवं द्वितीयक बाजार, स्टॉक एक्सचेंज तथा SEBI जैसे विषय शामिल हैं।


1. वित्तीय बाजार (Financial Market) से क्या अभिप्राय है?

उत्तर:
वित्तीय बाजार वह तंत्र है जो बचतकर्ताओं और धन की आवश्यकता रखने वालों के बीच सेतु का कार्य करता है। इसके माध्यम से अर्थव्यवस्था में उपलब्ध बचतों को उत्पादक निवेशों की ओर निर्देशित किया जाता है। वित्तीय बाजार पूंजी निर्माण को बढ़ावा देता है तथा निवेशकों और कंपनियों को लेन-देन का मंच प्रदान करता है। यह संसाधनों के कुशल आवंटन में सहायता करता है, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलती है। वित्तीय बाजार निवेशकों को विभिन्न निवेश विकल्प उपलब्ध कराता है तथा व्यवसायों को धन जुटाने में सहायता प्रदान करता है। इसलिए आधुनिक अर्थव्यवस्था में इसका अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।


2. वित्तीय बाजार के कोई दो प्रमुख कार्य बताइए।

उत्तर:
वित्तीय बाजार के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—

  1. बचतों का संकलन एवं निवेश: यह लोगों की बचतों को एकत्रित करके उन्हें उत्पादक कार्यों में निवेश करने में सहायता करता है।
  2. तरलता प्रदान करना: निवेशक अपने वित्तीय साधनों को आसानी से नकद में परिवर्तित कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त वित्तीय बाजार मूल्य निर्धारण में सहायता करता है तथा लेन-देन की लागत को कम करता है। इससे निवेशकों और उद्यमों दोनों को लाभ प्राप्त होता है। एक प्रभावी वित्तीय बाजार आर्थिक विकास तथा पूंजी निर्माण को प्रोत्साहित करता है और निवेश प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित एवं सुरक्षित बनाता है।


3. मुद्रा बाजार (Money Market) क्या है?

उत्तर:
मुद्रा बाजार वह वित्तीय बाजार है जिसमें एक वर्ष से कम अवधि के अल्पकालीन कोषों का लेन-देन किया जाता है। इसका उद्देश्य सरकार, बैंकों तथा व्यावसायिक संस्थाओं की अल्पकालीन वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करना होता है। मुद्रा बाजार में ट्रेजरी बिल, कॉल मनी, वाणिज्यिक पत्र (Commercial Paper), जमा प्रमाणपत्र (Certificate of Deposit) आदि साधनों का व्यापार किया जाता है। यह बाजार वित्तीय संस्थाओं को अल्पकालीन तरलता उपलब्ध कराता है तथा अर्थव्यवस्था में धन के प्रवाह को संतुलित बनाए रखने में सहायता करता है।


4. पूंजी बाजार (Capital Market) का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
पूंजी बाजार वह वित्तीय बाजार है जहाँ मध्यम एवं दीर्घकालीन अवधि के कोषों का लेन-देन किया जाता है। कंपनियाँ अपने विस्तार, आधुनिकीकरण एवं नई परियोजनाओं के लिए पूंजी बाजार से धन जुटाती हैं। इसमें शेयर, डिबेंचर, बॉण्ड तथा अन्य प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय किया जाता है। पूंजी बाजार दो भागों—प्राथमिक बाजार और द्वितीयक बाजार—में विभाजित होता है। यह निवेशकों को निवेश के अवसर प्रदान करता है तथा उद्योगों के विकास के लिए आवश्यक पूंजी उपलब्ध कराता है। इस प्रकार यह आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण साधन है।


5. मुद्रा बाजार और पूंजी बाजार में दो अंतर बताइए।

उत्तर:
मुद्रा बाजार और पूंजी बाजार में निम्न अंतर हैं—

  1. अवधि: मुद्रा बाजार में एक वर्ष से कम अवधि के कोषों का लेन-देन होता है, जबकि पूंजी बाजार में एक वर्ष से अधिक अवधि के कोषों का लेन-देन होता है।
  2. साधन: मुद्रा बाजार में ट्रेजरी बिल और वाणिज्यिक पत्र जैसे साधन होते हैं, जबकि पूंजी बाजार में शेयर और डिबेंचर जैसे साधन शामिल होते हैं।

मुद्रा बाजार मुख्यतः अल्पकालीन तरलता प्रदान करता है, जबकि पूंजी बाजार दीर्घकालीन निवेश एवं पूंजी निर्माण को प्रोत्साहित करता है।


6. प्राथमिक बाजार (Primary Market) क्या है?

उत्तर:
प्राथमिक बाजार वह बाजार है जहाँ नई प्रतिभूतियाँ पहली बार जनता के समक्ष जारी की जाती हैं। जब कोई कंपनी शेयर या डिबेंचर जारी करके पूंजी जुटाती है, तो वह प्राथमिक बाजार का उपयोग करती है। निवेशक सीधे कंपनी से प्रतिभूतियाँ खरीदते हैं, इसलिए प्राप्त धनराशि कंपनी को मिलती है। इसे ‘नया निर्गम बाजार’ भी कहा जाता है। कंपनियाँ अपने विस्तार, नई परियोजनाओं और वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु प्राथमिक बाजार का उपयोग करती हैं। यह पूंजी निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


7. द्वितीयक बाजार (Secondary Market) क्या है?

उत्तर:
द्वितीयक बाजार वह बाजार है जहाँ पहले से जारी की गई प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय किया जाता है। इसमें निवेशक आपस में शेयरों और डिबेंचरों का व्यापार करते हैं तथा कंपनी को कोई प्रत्यक्ष धन प्राप्त नहीं होता। स्टॉक एक्सचेंज द्वितीयक बाजार का प्रमुख उदाहरण है। यह बाजार निवेशकों को तरलता प्रदान करता है क्योंकि वे अपनी प्रतिभूतियों को आवश्यकता पड़ने पर बेच सकते हैं। साथ ही यह प्रतिभूतियों के बाजार मूल्य निर्धारण में भी सहायता करता है। इसलिए निवेशकों के लिए द्वितीयक बाजार अत्यंत उपयोगी है।


8. प्राथमिक बाजार और द्वितीयक बाजार में अंतर बताइए।

उत्तर:
प्राथमिक बाजार में नई प्रतिभूतियाँ जारी की जाती हैं, जबकि द्वितीयक बाजार में पुरानी प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय होता है। प्राथमिक बाजार में निवेशक सीधे कंपनी से प्रतिभूतियाँ खरीदते हैं और धन कंपनी को प्राप्त होता है। इसके विपरीत, द्वितीयक बाजार में निवेशकों के बीच लेन-देन होता है तथा कंपनी को धन नहीं मिलता। प्राथमिक बाजार पूंजी जुटाने का माध्यम है, जबकि द्वितीयक बाजार निवेशकों को तरलता प्रदान करता है। दोनों बाजार पूंजी बाजार के महत्वपूर्ण भाग हैं और वित्तीय प्रणाली को प्रभावी बनाते हैं।


9. स्टॉक एक्सचेंज का अर्थ बताइए।

उत्तर:
स्टॉक एक्सचेंज एक संगठित बाजार है जहाँ सूचीबद्ध प्रतिभूतियों जैसे शेयरों और डिबेंचरों का क्रय-विक्रय किया जाता है। यह निवेशकों और कंपनियों के बीच विश्वास तथा पारदर्शिता स्थापित करता है। स्टॉक एक्सचेंज निवेशकों को प्रतिभूतियों की खरीद और बिक्री की सुविधा प्रदान करता है तथा बाजार में तरलता बनाए रखता है। यह प्रतिभूतियों के मूल्य निर्धारण में भी सहायता करता है। आधुनिक अर्थव्यवस्था में स्टॉक एक्सचेंज पूंजी बाजार का एक महत्वपूर्ण अंग है जो निवेश और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करता है।


10. स्टॉक एक्सचेंज के कोई दो कार्य लिखिए।

उत्तर:
स्टॉक एक्सचेंज के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—

  1. प्रतिभूतियों को तरलता प्रदान करना: निवेशक अपनी प्रतिभूतियों को आसानी से बेच सकते हैं।
  2. मूल्य निर्धारण में सहायता: मांग और पूर्ति के आधार पर प्रतिभूतियों का उचित मूल्य निर्धारित होता है।

इसके अतिरिक्त स्टॉक एक्सचेंज निवेशकों के हितों की रक्षा करता है तथा कंपनियों को पूंजी जुटाने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। इससे वित्तीय प्रणाली अधिक व्यवस्थित और विश्वसनीय बनती है।


11. SEBI का पूरा नाम क्या है?

उत्तर:
SEBI का पूरा नाम भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India) है। इसकी स्थापना प्रतिभूति बाजार को विनियमित करने तथा निवेशकों के हितों की रक्षा करने के लिए की गई थी। SEBI शेयर बाजार में पारदर्शिता बनाए रखता है और अनुचित व्यापारिक गतिविधियों पर नियंत्रण रखता है। यह कंपनियों, स्टॉक एक्सचेंजों तथा मध्यस्थों की गतिविधियों की निगरानी करता है। SEBI का मुख्य उद्देश्य निवेशकों का विश्वास बनाए रखना तथा प्रतिभूति बाजार का स्वस्थ विकास सुनिश्चित करना है।


12. SEBI के कोई दो उद्देश्य बताइए।

उत्तर:
SEBI के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—

  1. निवेशकों के हितों की रक्षा करना।
  2. प्रतिभूति बाजार के विकास और विनियमन को सुनिश्चित करना।

SEBI यह सुनिश्चित करता है कि बाजार में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे। यह धोखाधड़ी, अंदरूनी व्यापार (Insider Trading) तथा अन्य अनुचित गतिविधियों को रोकता है। इसके माध्यम से निवेशकों का विश्वास बढ़ता है और पूंजी बाजार अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करता है।


13. ट्रेजरी बिल (Treasury Bill) क्या है?

उत्तर:
ट्रेजरी बिल अल्पकालीन सरकारी प्रतिभूति है जिसे केंद्र सरकार अपनी अस्थायी वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जारी करती है। इसकी परिपक्वता अवधि सामान्यतः 91 दिन, 182 दिन या 364 दिन होती है। यह सुरक्षित निवेश माना जाता है क्योंकि इसके भुगतान की गारंटी सरकार द्वारा दी जाती है। ट्रेजरी बिल मुद्रा बाजार का महत्वपूर्ण साधन है और बैंक, वित्तीय संस्थाएँ तथा निवेशक इसमें निवेश करते हैं। इससे सरकार को अल्पकालीन धन प्राप्त होता है तथा निवेशकों को सुरक्षित निवेश का अवसर मिलता है।


14. वाणिज्यिक पत्र (Commercial Paper) क्या है?

उत्तर:
वाणिज्यिक पत्र एक अल्पकालीन, असुरक्षित प्रतिज्ञा पत्र है जिसे बड़ी और वित्तीय रूप से मजबूत कंपनियाँ अपनी कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जारी करती हैं। यह मुद्रा बाजार का एक महत्वपूर्ण साधन है। इसकी परिपक्वता अवधि सामान्यतः कुछ दिनों से लेकर एक वर्ष तक हो सकती है। चूँकि यह असुरक्षित होता है, इसलिए केवल उच्च साख वाली कंपनियाँ ही इसे जारी कर सकती हैं। वाणिज्यिक पत्र कंपनियों के लिए बैंक ऋण की तुलना में कम लागत पर धन जुटाने का माध्यम बनता है।


15. जमा प्रमाणपत्र (Certificate of Deposit) क्या है?

उत्तर:
जमा प्रमाणपत्र (CD) एक परक्राम्य अल्पकालीन साधन है जिसे वाणिज्यिक बैंक तथा वित्तीय संस्थाएँ धन जुटाने के लिए जारी करती हैं। यह निश्चित अवधि और निश्चित ब्याज दर वाला निवेश साधन होता है। निवेशक निर्धारित समय के लिए अपनी राशि जमा करते हैं और परिपक्वता पर मूलधन के साथ ब्याज प्राप्त करते हैं। यह मुद्रा बाजार का महत्वपूर्ण साधन है तथा संस्थागत निवेशकों द्वारा व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। इससे बैंकों को अतिरिक्त धन प्राप्त होता है और निवेशकों को सुरक्षित निवेश का अवसर मिलता है।


16. कॉल मनी (Call Money) क्या है?

उत्तर:
कॉल मनी वह अल्पकालीन धन है जो एक दिन से लेकर अधिकतम 14 दिनों तक की अवधि के लिए उधार लिया या दिया जाता है। इसका उपयोग मुख्यतः बैंक और वित्तीय संस्थाएँ अपनी अस्थायी नकदी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए करती हैं। कॉल मनी बाजार मुद्रा बाजार का महत्वपूर्ण भाग है। इसमें ब्याज दरें मांग और आपूर्ति के आधार पर बदलती रहती हैं। यह बैंकिंग प्रणाली में तरलता बनाए रखने में सहायता करता है तथा अल्पकालीन वित्तीय असंतुलन को दूर करने का प्रभावी साधन है।


17. निवेशकों के लिए SEBI क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर:
SEBI निवेशकों के हितों की रक्षा करने वाली प्रमुख नियामक संस्था है। यह सुनिश्चित करता है कि कंपनियाँ निवेशकों को सही और पूर्ण जानकारी प्रदान करें। SEBI धोखाधड़ी, मूल्य हेरफेर तथा अंदरूनी व्यापार जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण रखता है। इसके नियमों के कारण प्रतिभूति बाजार में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहती है। निवेशकों की शिकायतों के समाधान की व्यवस्था भी SEBI द्वारा की जाती है। परिणामस्वरूप निवेशकों का विश्वास बढ़ता है और वे सुरक्षित वातावरण में निवेश कर पाते हैं।


18. NSE का महत्व बताइए।

उत्तर:
NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) भारत का प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज है जो आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्रणाली प्रदान करता है। यह निवेशकों को देशभर से ऑनलाइन प्रतिभूतियों के क्रय-विक्रय की सुविधा देता है। NSE पारदर्शिता, दक्षता तथा त्वरित लेन-देन सुनिश्चित करता है। इसके माध्यम से प्रतिभूतियों के मूल्य का निष्पक्ष निर्धारण होता है तथा निवेशकों को अधिक सुरक्षा प्राप्त होती है। आधुनिक तकनीक आधारित प्रणाली के कारण NSE भारतीय पूंजी बाजार के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।


19. स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग प्रक्रिया का पहला चरण क्या होता है?

उत्तर:
स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग प्रक्रिया का पहला चरण ब्रोकर का चयन करना है। निवेशक स्वयं सीधे स्टॉक एक्सचेंज में व्यापार नहीं कर सकता, इसलिए उसे SEBI द्वारा पंजीकृत ब्रोकर की सेवाएँ लेनी पड़ती हैं। निवेशक ब्रोकर को शेयर खरीदने या बेचने का आदेश देता है। इसके बाद ब्रोकर इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्रणाली के माध्यम से आदेश निष्पादित करता है। उचित ब्रोकर का चयन सुरक्षित और प्रभावी निवेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।


20. वित्तीय बाजार आर्थिक विकास में कैसे सहायक है?

उत्तर:
वित्तीय बाजार बचतकर्ताओं और निवेशकों के बीच प्रभावी संबंध स्थापित करके आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है। यह बचतों को उत्पादक निवेशों में परिवर्तित करता है, जिससे उद्योगों को आवश्यक पूंजी प्राप्त होती है। वित्तीय बाजार पूंजी निर्माण, रोजगार सृजन और उत्पादन वृद्धि में सहायता करता है। साथ ही यह निवेशकों को सुरक्षित और लाभदायक निवेश अवसर प्रदान करता है। संसाधनों के कुशल आवंटन तथा वित्तीय लेन-देन की सुविधा के कारण वित्तीय बाजार किसी भी देश की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बन जाता है।