CBSE कक्षा 12 व्यवसाय अध्ययन (Business Studies)

अध्याय 8 – नियंत्रण (Controlling)

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

नियंत्रण प्रबंधन का वह कार्य है जिसमें वास्तविक कार्य निष्पादन की तुलना निर्धारित मानकों से की जाती है तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं। इसके प्रमुख विषय हैं—नियंत्रण का अर्थ, महत्व, प्रक्रिया, नियोजन एवं नियंत्रण का संबंध, तथा प्रबंधकीय नियंत्रण की तकनीकें।


प्रश्न 1. नियंत्रण (Controlling) से क्या अभिप्राय है?

उत्तर:
नियंत्रण प्रबंधन का वह कार्य है जिसके अंतर्गत संगठन की वास्तविक उपलब्धियों की तुलना पूर्व निर्धारित मानकों से की जाती है। यदि किसी प्रकार का अंतर या विचलन पाया जाता है तो उसे दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं। नियंत्रण यह सुनिश्चित करता है कि संगठन की गतिविधियाँ योजनाओं के अनुसार संचालित हों। यह एक सतत, लक्ष्य-उन्मुख तथा सर्वव्यापी प्रक्रिया है। नियंत्रण केवल त्रुटियाँ खोजने का कार्य नहीं है, बल्कि भविष्य में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने का माध्यम भी है। इसके द्वारा संसाधनों का प्रभावी उपयोग तथा संगठनात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति संभव होती है।


2. नियंत्रण के दो प्रमुख उद्देश्य बताइए।

उत्तर:
नियंत्रण का पहला उद्देश्य संगठनात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करना है। इसके द्वारा वास्तविक प्रदर्शन को मापा जाता है और आवश्यक सुधार किए जाते हैं। दूसरा उद्देश्य संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित करना है। नियंत्रण प्रणाली अपव्यय, त्रुटियों तथा अनावश्यक खर्चों को कम करती है। इसके अतिरिक्त नियंत्रण कर्मचारियों को निर्धारित मानकों के अनुसार कार्य करने के लिए प्रेरित करता है तथा संगठन में अनुशासन बनाए रखता है। यह प्रबंधन को समय पर सही निर्णय लेने में सहायता प्रदान करता है और कार्यों के समन्वय को भी मजबूत बनाता है।


3. नियंत्रण को लक्ष्य-उन्मुख प्रक्रिया क्यों कहा जाता है?

उत्तर:
नियंत्रण को लक्ष्य-उन्मुख प्रक्रिया इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य संगठन के निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करना होता है। नियंत्रण की पूरी प्रक्रिया मानकों के निर्धारण, प्रदर्शन के मापन, तुलना तथा सुधारात्मक कार्रवाई पर आधारित होती है। जब वास्तविक परिणाम निर्धारित उद्देश्यों से भिन्न होते हैं, तब नियंत्रण प्रणाली आवश्यक सुधार करती है। इस प्रकार प्रत्येक नियंत्रण गतिविधि सीधे संगठन के लक्ष्यों से जुड़ी होती है। यदि लक्ष्य ही न हों तो नियंत्रण का कोई आधार नहीं रहेगा। इसलिए नियंत्रण का प्रत्येक चरण संगठन को उसके उद्देश्यों की ओर अग्रसर करता है।


4. नियोजन और नियंत्रण को प्रबंधन के ‘जुड़वाँ’ कार्य क्यों कहा जाता है?

उत्तर:
नियोजन और नियंत्रण एक-दूसरे पर निर्भर तथा पूरक कार्य हैं। नियोजन में उद्देश्यों और मानकों का निर्धारण किया जाता है, जबकि नियंत्रण यह सुनिश्चित करता है कि कार्य उन्हीं योजनाओं के अनुसार हो रहे हैं या नहीं। बिना नियोजन के नियंत्रण के लिए कोई मानक उपलब्ध नहीं होंगे और बिना नियंत्रण के योजनाओं की सफलता का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता। नियंत्रण के परिणाम भविष्य की योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में भी सहायता करते हैं। इस प्रकार दोनों कार्य एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं और संगठन की सफलता के लिए समान रूप से आवश्यक हैं।


5. नियंत्रण प्रक्रिया का पहला चरण कौन-सा है?

उत्तर:
नियंत्रण प्रक्रिया का पहला चरण प्रदर्शन मानकों (Performance Standards) का निर्धारण है। इस चरण में प्रबंधक यह तय करते हैं कि संगठन, विभाग या कर्मचारी से किस स्तर के प्रदर्शन की अपेक्षा है। ये मानक मात्रात्मक जैसे बिक्री, उत्पादन और लाभ हो सकते हैं, अथवा गुणात्मक जैसे ग्राहक संतुष्टि और कर्मचारी व्यवहार। निर्धारित मानक स्पष्ट, मापनीय और व्यावहारिक होने चाहिए। यही मानक आगे चलकर वास्तविक प्रदर्शन की तुलना का आधार बनते हैं। यदि मानक सही निर्धारित न किए जाएँ तो नियंत्रण प्रक्रिया प्रभावी नहीं हो सकती।


6. वास्तविक प्रदर्शन का मापन क्यों आवश्यक है?

उत्तर:
वास्तविक प्रदर्शन का मापन नियंत्रण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है क्योंकि इसके बिना यह ज्ञात नहीं किया जा सकता कि कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हो रहे हैं या नहीं। प्रदर्शन का मापन विभिन्न रिपोर्टों, निरीक्षण, नमूना परीक्षण तथा सांख्यिकीय आँकड़ों के माध्यम से किया जाता है। यह मापन प्रबंधकों को संगठन की वास्तविक स्थिति की जानकारी प्रदान करता है। यदि प्रदर्शन अपेक्षित स्तर से कम है तो सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। इसलिए प्रदर्शन मापन संगठन को सही दिशा में बनाए रखने तथा समय पर निर्णय लेने में सहायक होता है।


7. विचलन (Deviation) से क्या अभिप्राय है?

उत्तर:
विचलन का अर्थ वास्तविक प्रदर्शन और निर्धारित मानकों के बीच के अंतर से है। जब किसी कर्मचारी, विभाग या संगठन का प्रदर्शन तय किए गए मानकों से अधिक या कम होता है, तब उसे विचलन कहा जाता है। विचलन सकारात्मक अथवा नकारात्मक दोनों प्रकार का हो सकता है। नियंत्रण प्रक्रिया में विचलनों का विश्लेषण करके उनके कारणों का पता लगाया जाता है। यदि विचलन महत्वपूर्ण हो तो प्रबंधक सुधारात्मक कार्रवाई करते हैं। विचलनों का अध्ययन संगठन को अपनी कमियों को पहचानने तथा भविष्य में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने में सहायता देता है।


8. सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) क्या है?

उत्तर:
सुधारात्मक कार्रवाई नियंत्रण प्रक्रिया का अंतिम चरण है। जब वास्तविक प्रदर्शन और निर्धारित मानकों के बीच महत्वपूर्ण अंतर पाया जाता है, तब उस अंतर को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते हैं। इसमें कार्य विधियों में सुधार, कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना, संसाधनों का पुनर्विनियोजन या योजनाओं में संशोधन शामिल हो सकता है। सुधारात्मक कार्रवाई का उद्देश्य केवल वर्तमान त्रुटियों को दूर करना नहीं, बल्कि भविष्य में उनके पुनरावृत्ति को रोकना भी है। यह संगठन को अधिक कुशल एवं प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


9. नियंत्रण का संगठनात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति में क्या योगदान है?

उत्तर:
नियंत्रण संगठन को उसके निर्धारित लक्ष्यों की दिशा में बनाए रखता है। यह वास्तविक प्रदर्शन की निगरानी करता है और मानकों से होने वाले विचलनों की पहचान करता है। समय पर सुधारात्मक कदम उठाकर नियंत्रण यह सुनिश्चित करता है कि संसाधनों का उपयोग सही दिशा में हो। इससे त्रुटियाँ कम होती हैं तथा कार्य की गुणवत्ता बढ़ती है। नियंत्रण के माध्यम से प्रबंधक यह भी सुनिश्चित करते हैं कि सभी विभाग संगठन के उद्देश्यों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। इस प्रकार नियंत्रण संगठनात्मक लक्ष्यों की प्रभावी प्राप्ति का महत्वपूर्ण साधन है।


10. नियंत्रण संसाधनों के कुशल उपयोग में कैसे सहायता करता है?

उत्तर:
नियंत्रण संसाधनों के उपयोग पर निरंतर निगरानी रखता है। यह सुनिश्चित करता है कि मानव, वित्तीय तथा भौतिक संसाधनों का उपयोग निर्धारित मानकों के अनुसार हो रहा है। यदि किसी क्षेत्र में अपव्यय, त्रुटि या अक्षमता दिखाई देती है तो प्रबंधक तुरंत सुधारात्मक कदम उठा सकते हैं। इससे लागत में कमी आती है तथा उत्पादकता बढ़ती है। नियंत्रण संसाधनों के अनावश्यक उपयोग को रोकता है और संगठन की लाभप्रदता में वृद्धि करता है। इसलिए इसे संसाधनों के प्रभावी एवं कुशल उपयोग का महत्वपूर्ण साधन माना जाता है।


11. प्रबंधन द्वारा अपवाद (Management by Exception) क्या है?

उत्तर:
प्रबंधन द्वारा अपवाद एक ऐसी नियंत्रण तकनीक है जिसमें प्रबंधक केवल महत्वपूर्ण विचलनों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। सामान्य या छोटे विचलनों को अधीनस्थ स्तर पर ही निपटा दिया जाता है। इससे उच्च प्रबंधकों का समय और ऊर्जा बचती है तथा वे महत्वपूर्ण समस्याओं पर अधिक ध्यान दे पाते हैं। यह तकनीक नियंत्रण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और किफायती बनाती है। बड़े संगठनों में जहाँ अनेक गतिविधियाँ एक साथ चलती हैं, वहाँ यह सिद्धांत विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होता है।


12. नियंत्रण कर्मचारी प्रेरणा को कैसे बढ़ाता है?

उत्तर:
नियंत्रण प्रणाली कर्मचारियों के लिए स्पष्ट मानक और अपेक्षाएँ निर्धारित करती है। जब कर्मचारियों को यह पता होता है कि उनसे क्या अपेक्षा की जा रही है, तो वे अधिक जिम्मेदारी और दक्षता से कार्य करते हैं। प्रदर्शन का नियमित मूल्यांकन अच्छे कार्य करने वालों को पहचान और पुरस्कार प्रदान करने में सहायता करता है। इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है और वे बेहतर परिणाम देने के लिए प्रेरित होते हैं। नियंत्रण संगठन में अनुशासन तथा उत्तरदायित्व की भावना भी विकसित करता है, जिससे कार्यकुशलता में वृद्धि होती है।


13. व्यक्तिगत निरीक्षण (Personal Observation) क्या है?

उत्तर:
व्यक्तिगत निरीक्षण नियंत्रण की पारंपरिक तकनीक है जिसमें प्रबंधक स्वयं कार्यस्थल पर जाकर गतिविधियों का अवलोकन करता है। इसके माध्यम से वह कर्मचारियों के व्यवहार, कार्य की गुणवत्ता तथा कार्य वातावरण की वास्तविक जानकारी प्राप्त करता है। यह तकनीक त्वरित प्रतिक्रिया और प्रत्यक्ष संवाद का अवसर प्रदान करती है। हालांकि यह समय लेने वाली प्रक्रिया हो सकती है, फिर भी इससे प्रबंधक को वास्तविक स्थिति का सही आकलन करने में सहायता मिलती है। व्यक्तिगत निरीक्षण कर्मचारियों और प्रबंधकों के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने में भी सहायक होता है।


14. सांख्यिकीय रिपोर्ट (Statistical Reports) का महत्व बताइए।

उत्तर:
सांख्यिकीय रिपोर्ट नियंत्रण की एक महत्वपूर्ण पारंपरिक तकनीक है। इसमें संगठन के प्रदर्शन से संबंधित आँकड़ों को तालिकाओं, चार्टों और ग्राफों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इन रिपोर्टों के माध्यम से प्रबंधक उत्पादन, बिक्री, लागत तथा लाभ जैसे क्षेत्रों की प्रगति का विश्लेषण कर सकते हैं। सांख्यिकीय रिपोर्ट निर्णय लेने को अधिक वैज्ञानिक और वस्तुनिष्ठ बनाती हैं। यह प्रदर्शन में होने वाले परिवर्तनों को समझने तथा भविष्य की योजनाएँ बनाने में भी सहायक होती हैं। इसलिए आधुनिक संगठनों में इनका व्यापक उपयोग किया जाता है।


15. बजटीय नियंत्रण (Budgetary Control) क्या है?

उत्तर:
बजटीय नियंत्रण एक ऐसी तकनीक है जिसमें वास्तविक व्यय और आय की तुलना पूर्व निर्धारित बजट से की जाती है। बजट संगठन के विभिन्न विभागों के लिए वित्तीय लक्ष्य निर्धारित करता है। जब वास्तविक परिणाम बजट से भिन्न होते हैं, तो उनके कारणों का विश्लेषण किया जाता है और सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं। इससे लागत नियंत्रण, संसाधनों का उचित उपयोग तथा वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित होता है। बजटीय नियंत्रण संगठन को आर्थिक लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता करता है और भविष्य की वित्तीय योजना को अधिक प्रभावी बनाता है।


16. निवेश पर प्रतिफल (ROI) क्या है?

उत्तर:
निवेश पर प्रतिफल (Return on Investment – ROI) नियंत्रण की आधुनिक तकनीक है। यह मापता है कि संगठन द्वारा किए गए निवेश से कितना लाभ प्राप्त हुआ है। ROI की सहायता से विभिन्न परियोजनाओं या विभागों की कार्यकुशलता का मूल्यांकन किया जा सकता है। उच्च ROI यह दर्शाता है कि निवेश का उपयोग प्रभावी ढंग से किया गया है। यह तकनीक प्रबंधकों को निवेश संबंधी निर्णय लेने तथा संसाधनों के बेहतर आवंटन में सहायता प्रदान करती है। इसलिए वित्तीय प्रदर्शन का मूल्यांकन करने में ROI एक महत्वपूर्ण उपकरण माना जाता है।


17. अनुपात विश्लेषण (Ratio Analysis) क्या है?

उत्तर:
अनुपात विश्लेषण एक आधुनिक नियंत्रण तकनीक है जिसके माध्यम से वित्तीय विवरणों का अध्ययन किया जाता है। इसमें विभिन्न वित्तीय अनुपातों जैसे तरलता अनुपात, लाभप्रदता अनुपात, ऋण-इक्विटी अनुपात आदि की गणना की जाती है। ये अनुपात संगठन की वित्तीय स्थिति, लाभ अर्जित करने की क्षमता तथा भुगतान क्षमता का मूल्यांकन करने में सहायता करते हैं। अनुपात विश्लेषण प्रबंधकों और निवेशकों को संगठन के प्रदर्शन की स्पष्ट जानकारी प्रदान करता है। इसके आधार पर भविष्य की योजनाएँ तथा सुधारात्मक कदम निर्धारित किए जा सकते हैं।


18. उत्तरदायित्व लेखांकन (Responsibility Accounting) क्या है?

उत्तर:
उत्तरदायित्व लेखांकन एक ऐसी नियंत्रण तकनीक है जिसमें संगठन को विभिन्न उत्तरदायित्व केंद्रों में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक केंद्र का एक प्रबंधक उत्तरदायी होता है। ये केंद्र लागत केंद्र, राजस्व केंद्र, लाभ केंद्र और निवेश केंद्र हो सकते हैं। प्रत्येक केंद्र के प्रदर्शन का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाता है। इससे उत्तरदायित्व स्पष्ट होता है और प्रबंधकों की कार्यकुशलता का सही आकलन संभव होता है। यह तकनीक संगठन में जवाबदेही बढ़ाती है तथा संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्रोत्साहित करती है।


19. प्रबंधन अंकेक्षण (Management Audit) क्या है?

उत्तर:
प्रबंधन अंकेक्षण नियंत्रण की आधुनिक तकनीक है जिसमें संगठन की प्रबंधकीय नीतियों, प्रक्रियाओं तथा कार्यप्रणाली का व्यवस्थित मूल्यांकन किया जाता है। इसका उद्देश्य यह जांचना होता है कि प्रबंधन उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कितनी प्रभावशीलता और दक्षता से कर रहा है। प्रबंधन अंकेक्षण संगठन की कमजोरियों तथा सुधार के क्षेत्रों की पहचान करता है। इसके परिणामस्वरूप बेहतर निर्णय, अधिक उत्पादकता तथा उच्च संगठनात्मक प्रदर्शन प्राप्त किया जा सकता है। यह संगठन के दीर्घकालिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।


20. PERT और CPM का नियंत्रण में क्या महत्व है?

उत्तर:
PERT (Program Evaluation and Review Technique) तथा CPM (Critical Path Method) आधुनिक नियंत्रण तकनीकें हैं जिनका उपयोग परियोजनाओं की योजना, समय निर्धारण और निगरानी के लिए किया जाता है। ये तकनीकें परियोजना की विभिन्न गतिविधियों के बीच संबंधों का विश्लेषण करती हैं तथा महत्वपूर्ण मार्ग (Critical Path) की पहचान करती हैं। इनके माध्यम से परियोजना की प्रगति पर नियंत्रण रखा जा सकता है और संभावित विलंब का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। इससे समय और लागत दोनों की बचत होती है तथा परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने में सहायता मिलती है।