नीचे CBSE Class 12 Chemistry (2026–27 syllabus) के Chapter 10: Amines से संबंधित 20 महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर दिए गए हैं। बोर्ड परीक्षा प्रश्नों के अनुसार तैयार किया गया है।


1. अमीन क्या होते हैं? वर्गीकरण लिखिए।

अमीन कार्बनिक यौगिकों का वह वर्ग है जो अमोनिया (NH₃) के व्युत्पन्न होते हैं, जिनमें एक या अधिक हाइड्रोजन परमाणु ऐल्किल या ऐरिल समूह द्वारा प्रतिस्थापित होते हैं। इन्हें तीन प्रकारों में बाँटा जाता है—
(1) प्राथमिक अमीन (1°): R–NH₂, जैसे CH₃NH₂
(2) द्वितीयक अमीन (2°): R₂NH, जैसे (CH₃)₂NH
(3) तृतीयक अमीन (3°): R₃N, जैसे (CH₃)₃N
अमीनों में नाइट्रोजन पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) इन्हें क्षारीय (basic) बनाता है। ये अमोनिया की तुलना में अधिक क्षारीय होते हैं क्योंकि ऐल्किल समूह +I प्रभाव द्वारा इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाते हैं।


2. अमीनों की क्षारीय प्रकृति समझाइए।

अमीन क्षारीय प्रकृति प्रदर्शित करते हैं क्योंकि नाइट्रोजन परमाणु पर एक lone pair उपस्थित होता है, जो प्रोटॉन (H⁺) को स्वीकार कर सकता है। जलीय विलयन में अमीन अमोनियम आयन बनाते हैं। ऐल्किल समूह इलेक्ट्रॉन दान (+I प्रभाव) करते हैं, जिससे नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ता है और प्रोटॉन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है। इसलिए ऐल्किल अमीन अमोनिया से अधिक क्षारीय होते हैं। हालाँकि, जलीय माध्यम में द्वितीयक अमीन सबसे अधिक क्षारीय होते हैं क्योंकि वे हाइड्रोजन बॉन्डिंग द्वारा अधिक स्थिर अमोनियम आयन बनाते हैं। तृतीयक अमीन कम घुलनशील होने के कारण अपेक्षाकृत कम क्षारीय होते हैं।


3. प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक अमीन में अंतर लिखिए।

प्राथमिक अमीन में एक ऐल्किल/ऐरिल समूह NH₂ से जुड़ा होता है, जैसे CH₃NH₂। द्वितीयक अमीन में दो समूह नाइट्रोजन से जुड़े होते हैं, जैसे (CH₃)₂NH। तृतीयक अमीन में तीन कार्बनिक समूह नाइट्रोजन से जुड़े होते हैं, जैसे (CH₃)₃N। प्राथमिक अमीन में हाइड्रोजन अधिक होने से हाइड्रोजन बॉन्डिंग अधिक होती है, जिससे क्वथनांक अधिक होता है। क्षारीयता के क्रम में जलीय माध्यम में 2° > 1° > 3° होता है। तृतीयक अमीन में steric hindrance अधिक होने के कारण प्रोटॉन ग्रहण करना कठिन होता है।


4. ऐनिलीन की क्षारीयता कम क्यों होती है?

ऐनिलीन (C₆H₅NH₂) में नाइट्रोजन का lone pair बेंजीन रिंग के साथ अनुनाद (resonance) में भाग लेता है। इससे lone pair की उपलब्धता कम हो जाती है और प्रोटॉन ग्रहण करने की क्षमता घट जाती है। इसके अलावा, बेंजीन रिंग का -I प्रभाव भी इलेक्ट्रॉन घनत्व को कम करता है। इसलिए ऐनिलीन ऐलिफैटिक अमीनों की तुलना में कम क्षारीय होती है। जलीय माध्यम में भी यह कमजोर आधार की तरह व्यवहार करती है। यह गुण अमीनों के संरचना-प्रभाव (structure-property relationship) को दर्शाता है।


5. कार्बिलामीन अभिक्रिया क्या है?

कार्बिलामीन अभिक्रिया प्राथमिक अमीनों की पहचान के लिए उपयोग की जाती है। इसमें प्राथमिक अमीन को क्लोरोफॉर्म (CHCl₃) और ऐल्कोहॉलिक KOH के साथ गर्म करने पर आइसोसाइनाइड (R–NC) बनता है, जिसकी तीव्र दुर्गंध होती है। यह अभिक्रिया केवल प्राथमिक ऐलिफैटिक और ऐरिल अमीन देते हैं, जबकि द्वितीयक और तृतीयक अमीन यह अभिक्रिया नहीं देते। यह एक महत्वपूर्ण गुणात्मक परीक्षण है जो अमीनों की पहचान में उपयोग होता है।


6. डाइऐजोटीकरण अभिक्रिया समझाइए।

जब प्राथमिक ऐरिल अमीन (जैसे ऐनिलीन) को 0–5°C पर NaNO₂ और HCl के साथ अभिक्रिया कराई जाती है, तो डाइऐजोनियम लवण बनता है। इसे डाइऐजोटीकरण अभिक्रिया कहते हैं। उदाहरण:
C₆H₅NH₂ + HNO₂ → C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + 2H₂O
यह लवण बहुत महत्वपूर्ण मध्यवर्ती है क्योंकि इससे कई अन्य यौगिक बनाए जा सकते हैं जैसे फिनॉल, हैलोबेंजीन आदि। यह अभिक्रिया केवल प्राथमिक ऐरिल अमीन देते हैं।


7. हॉफमैन ब्रोमामाइड अभिक्रिया क्या है?

इस अभिक्रिया में किसी अमाइड को Br₂ और NaOH के साथ गर्म करने पर प्राथमिक अमीन बनता है जिसमें एक कार्बन कम होता है। इसे हॉफमैन पुनर्विन्यास भी कहते हैं। उदाहरण:
RCONH₂ → RNH₂ + CO₂
यह अभिक्रिया कार्बन श्रृंखला को छोटा करने में उपयोगी है। इसमें नाइट्रोजन का पुनर्विन्यास होता है और आइसोसाइनेट मध्यवर्ती बनता है। यह कार्बनिक संश्लेषण में महत्वपूर्ण है।


8. ऐल्किल अमीन ऐनिलीन से अधिक क्षारीय क्यों होते हैं?

ऐल्किल अमीन में ऐल्किल समूह +I प्रभाव द्वारा नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाते हैं, जिससे प्रोटॉन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ जाती है। इसके विपरीत ऐनिलीन में lone pair बेंजीन रिंग के साथ resonance में चला जाता है जिससे उपलब्धता कम हो जाती है। इसलिए ऐल्किल अमीन अधिक क्षारीय होते हैं। जलीय माध्यम में भी ऐलिफैटिक अमीन मजबूत आधार होते हैं।


9. एसीटिलेशन अभिक्रिया क्या है?

जब अमीन को एसीटिक एनहाइड्राइड या एसीटिल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया कराई जाती है, तो अमाइड बनता है। इसे एसीटिलेशन कहते हैं। इससे अमीन की क्षारीयता कम हो जाती है क्योंकि lone pair अब कार्बोनिल समूह के साथ संयुग्मित हो जाता है। यह अभिक्रिया अमीनों की पहचान और सुरक्षा समूह (protecting group) के रूप में उपयोगी है।


10. ऐमीनों के क्वथनांक पर प्रभाव डालने वाले कारक क्या हैं?

अमीनों के क्वथनांक पर मुख्य रूप से हाइड्रोजन बॉन्डिंग और आणविक द्रव्यमान प्रभाव डालते हैं। प्राथमिक अमीन में दो हाइड्रोजन होने से अधिक हाइड्रोजन बॉन्डिंग होती है, इसलिए उनका क्वथनांक अधिक होता है। द्वितीयक अमीन में कम और तृतीयक में नहीं के बराबर हाइड्रोजन बॉन्डिंग होती है। इसलिए तृतीयक अमीन का क्वथनांक सबसे कम होता है।


11. अमीनों की पहचान के लिए ल्यूकास अभिकर्मक क्यों उपयोग नहीं होता?

ल्यूकास अभिकर्मक मुख्यतः ऐल्कोहॉल की पहचान के लिए उपयोग होता है, अमीनों के लिए नहीं। अमीन अलग प्रकार की अभिक्रियाएँ जैसे कार्बिलामीन और डाइऐजोटीकरण अभिक्रिया देते हैं। इसलिए ल्यूकास परीक्षण अमीनों की पहचान में उपयोगी नहीं है।


12. ऐमीनों में हाइड्रोजन बॉन्डिंग समझाइए।

प्राथमिक और द्वितीयक अमीन में नाइट्रोजन पर उपस्थित हाइड्रोजन के कारण अंतर-आणविक हाइड्रोजन बॉन्डिंग होती है। इससे क्वथनांक बढ़ता है और जल में घुलनशीलता बढ़ती है। तृतीयक अमीन में हाइड्रोजन नहीं होने के कारण हाइड्रोजन बॉन्डिंग नहीं होती, इसलिए उनका क्वथनांक कम होता है।


13. ऐनिलीन की नाइट्रेशन अभिक्रिया में मुख्य उत्पाद क्या होता है?

ऐनिलीन में –NH₂ समूह strongly activating होता है और ortho/para directing होता है। नाइट्रेशन में ortho और para उत्पाद प्रमुख रूप से बनते हैं। हालांकि यदि अमाइन protonated हो जाए तो meta product भी बन सकता है। इसलिए नियंत्रण स्थितियों में उत्पाद निर्भर करता है।


14. गेब्रियल फ्थैलिमाइड संश्लेषण क्या है?

यह विधि केवल प्राथमिक ऐलिफैटिक अमीन बनाने के लिए उपयोग होती है। इसमें फ्थैलिमाइड को KOH से प्रतिक्रिया कराकर अल्किल हलाइड के साथ अभिक्रिया कराई जाती है। इससे प्राथमिक अमीन बनता है और द्वितीयक/तृतीयक अमीन नहीं बनते। यह शुद्ध प्राथमिक अमीन बनाने की महत्वपूर्ण विधि है।


15. ऐमीनों में अनुनाद (resonance) का प्रभाव क्या है?

अनुनाद में lone pair delocalize हो जाता है, जिससे उसकी उपलब्धता कम हो जाती है। ऐनिलीन में यह प्रभाव स्पष्ट है, जिससे इसकी क्षारीयता कम होती है। यह संरचना और गुणों के बीच संबंध को दर्शाता है।


16. ऐमीनों का उपयोग लिखिए।

अमीनों का उपयोग दवाइयों, रंगों, पॉलिमर, कीटनाशकों और रबर उद्योग में होता है। ऐनिलीन से डाई उद्योग में रंग बनाए जाते हैं। औषधियों में कई अमीन यौगिक उपयोगी हैं।


17. ऐमीनों का सामान्य सूत्र क्या है?

ऐलिफैटिक अमीन का सामान्य सूत्र RNH₂, R₂NH और R₃N होता है। ऐरिल अमीन में NH₂ बेंजीन रिंग से जुड़ा होता है।


18. ऐमीनों की घुलनशीलता पर प्रभाव डालने वाले कारक क्या हैं?

कम कार्बन वाले अमीन जल में घुलनशील होते हैं क्योंकि वे H-बॉन्डिंग करते हैं। जैसे-जैसे कार्बन श्रृंखला बढ़ती है, घुलनशीलता घटती है।


19. ऐमीनों की तैयारी की विधियाँ लिखिए।

अमीनों की तैयारी रिडक्शन ऑफ नाइट्राइल्स, गेब्रियल संश्लेषण, हॉफमैन ब्रेकडाउन और नाइट्रो यौगिकों के अपचयन द्वारा की जाती है।


20. ऐमीनों का महत्व क्या है?

अमीन जैव रसायन में महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अमीनो अम्ल, प्रोटीन और न्यूरोट्रांसमीटर में पाए जाते हैं। यह जीवन के लिए आवश्यक यौगिक हैं।