यहाँ CBSE Class 12 Chemistry (Organic Chemistry)
Chapter 8: Alcohols, Phenols and Ethers के अनुसार 20 महत्वपूर्ण 2–3 मार्क्स के प्रश्न-उत्तर (लगभग 100–120 शब्द प्रत्येक) दिए गए हैं। ये उत्तर परीक्षा-उन्मुख और 2026–27 सत्र के लिए उपयोगी हैं।


1. अल्कोहल की परिभाषा एवं वर्गीकरण लिखिए।

अल्कोहल वे कार्बनिक यौगिक हैं जिनमें -OH (हाइड्रॉक्सिल) समूह संतृप्त कार्बन से जुड़ा होता है। इन्हें कार्बन के प्रकार के आधार पर 1°, 2° और 3° अल्कोहल में बाँटा जाता है। यदि -OH वाला कार्बन केवल एक कार्बन से जुड़ा हो तो वह 1° अल्कोहल होता है। दो कार्बनों से जुड़ा होने पर 2° और तीन कार्बनों से जुड़ा होने पर 3° अल्कोहल कहलाता है। उदाहरण: एथेनॉल (1°), आइसोप्रोपेनॉल (2°)। अल्कोहल ध्रुवीय होते हैं और हाइड्रोजन बॉन्डिंग के कारण उच्च क्वथनांक दिखाते हैं।


2. फिनोल और अल्कोहल में अंतर लिखिए।

फिनोल में -OH समूह सीधे बेंजीन रिंग से जुड़ा होता है जबकि अल्कोहल में -OH एलिफैटिक कार्बन से जुड़ा होता है। फिनोल अधिक अम्लीय होता है क्योंकि फिनॉक्साइड आयन रेज़ोनेंस द्वारा स्थिर हो जाता है। अल्कोहल अपेक्षाकृत कम अम्लीय होते हैं क्योंकि एल्कॉक्साइड आयन में रेज़ोनेंस स्थिरीकरण नहीं होता। फिनोल का क्वथनांक अधिक होता है क्योंकि यह मजबूत हाइड्रोजन बॉन्डिंग बनाता है। दोनों यौगिक भौतिक और रासायनिक गुणों में स्पष्ट अंतर दिखाते हैं।


3. ईथर की संरचना एवं तैयारी लिखिए।

ईथर वे यौगिक हैं जिनमें R–O–R’ समूह होता है। ये दो एल्काइल या एरिल समूहों से ऑक्सीजन द्वारा जुड़े होते हैं। ईथर बनाने की प्रमुख विधि Williamson synthesis है जिसमें सोडियम एल्कॉक्साइड अल्काइल हैलाइड से अभिक्रिया करता है। उदाहरण: RONa + R’X → ROR’ + NaX। ईथर अपेक्षाकृत कम क्रियाशील होते हैं और कार्बनिक विलायक के रूप में उपयोग होते हैं। इनके क्वथनांक अल्कोहल से कम होते हैं क्योंकि इनमें हाइड्रोजन बॉन्डिंग नहीं होती।


4. अल्कोहल का निर्जलीकरण क्या है?

अल्कोहल का निर्जलीकरण एक ऐसी अभिक्रिया है जिसमें सांद्र H₂SO₄ की उपस्थिति में अल्कोहल से जल अणु निकलकर एल्कीन बनता है। यह 443 K पर होता है। उदाहरण: एथेनॉल → एथीन + जल। यह अभिक्रिया E1 प्रकार की होती है जिसमें पहले कार्बोकैटायन बनता है। अधिक स्थिर कार्बोकैटायन बनने पर प्रतिक्रिया तेज होती है। यह कार्बनिक संश्लेषण में एल्कीन बनाने की महत्वपूर्ण विधि है।


5. फिनोल की अम्लीय प्रकृति समझाइए।

फिनोल अल्कोहल की तुलना में अधिक अम्लीय होता है क्योंकि फिनॉक्साइड आयन रेज़ोनेंस द्वारा स्थिर होता है। जब फिनोल H⁺ छोड़ता है तो बनने वाला आयन बेंजीन रिंग में फैल जाता है, जिससे स्थिरता बढ़ती है। इसके विपरीत अल्कॉक्साइड आयन में रेज़ोनेंस नहीं होता, इसलिए वह कम स्थिर होता है। इलेक्ट्रॉन खींचने वाले समूह (–NO₂) अम्लीयता बढ़ाते हैं जबकि इलेक्ट्रॉन देने वाले समूह (–CH₃) इसे घटाते हैं।


6. अल्कोहल का ऑक्सीकरण समझाइए।

प्राथमिक अल्कोहल का ऑक्सीकरण पहले एल्डिहाइड और फिर कार्बोक्सिलिक अम्ल बनाता है। द्वितीयक अल्कोहल से कीटोन बनता है जबकि तृतीयक अल्कोहल आसानी से ऑक्सीकरण नहीं होते। इसके लिए KMnO₄ या K₂Cr₂O₇ जैसे ऑक्सीकारक उपयोग किए जाते हैं। यह अभिक्रिया कार्बन-ऑक्सीजन बंध के टूटने और नए ऑक्सीजन युक्त यौगिक बनने पर आधारित होती है।


7. ईथर के भौतिक गुण लिखिए।

ईथर रंगहीन, कम ध्रुवीय और अपेक्षाकृत कम क्वथनांक वाले होते हैं। इनमें हाइड्रोजन बॉन्डिंग नहीं होती, इसलिए ये अल्कोहल की तुलना में अधिक वाष्पशील होते हैं। ये जल में सीमित घुलनशील होते हैं लेकिन कार्बनिक विलायकों में अच्छे से घुलते हैं। ईथर का उपयोग एनेस्थेटिक और विलायक के रूप में किया जाता है।


8. फिनोल की तैयारी बताइए।

फिनोल बनाने की प्रमुख विधि क्यूमीन प्रक्रिया है। इसमें बेंजीन और प्रोपीन से क्यूमीन बनता है, जिसे ऑक्सीकरण करने पर क्यूमीन हाइड्रोपरऑक्साइड बनता है। इसे अम्लीय माध्यम में तोड़ने पर फिनोल और एसीटोन प्राप्त होते हैं। यह औद्योगिक स्तर पर फिनोल उत्पादन की प्रमुख विधि है।


9. ईथर का विघटन (Cleavage) क्या है?

ईथर का विघटन HI या HBr के साथ गरम करने पर होता है। इसमें C–O बंध टूट जाता है और अल्कोहल तथा अल्काइल हैलाइड बनते हैं। उदाहरण: R–O–R’ + HI → R–I + R’–OH। यदि अधिक HI लिया जाए तो दोनों तरफ हैलाइड बन सकते हैं।


10. हाइड्रोजन बॉन्डिंग क्या है?

जब H परमाणु F, O या N जैसे उच्च विद्युतऋणात्मक तत्व से जुड़ा होता है तो वह दूसरे अणु के साथ आकर्षण बल बनाता है, इसे हाइड्रोजन बॉन्डिंग कहते हैं। अल्कोहल में यह मौजूद होती है, इसलिए उनका क्वथनांक अधिक होता है। ईथर में यह अनुपस्थित होती है।


11. फिनोल की इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया लिखिए।

फिनोल बेंजीन रिंग होने के कारण इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन देता है। -OH समूह रिंग को सक्रिय करता है और ऑर्थो तथा पैरा स्थिति पर प्रतिस्थापन बढ़ाता है। उदाहरण: ब्रोमिनेशन से 2,4,6-ट्राइब्रोमोफिनोल बनता है।


12. अल्कोहल का IUPAC नामकरण समझाइए।

अल्कोहल के नाम में एल्केन का अंतिम “e” हटाकर “ol” लगाया जाता है। कार्बन श्रृंखला को उस तरफ से नंबर दिया जाता है जहाँ -OH समूह निकट हो। उदाहरण: CH₃CH₂OH → Ethanol। यदि कई -OH हों तो diol, triol लगाया जाता है।


13. ईथर के उपयोग लिखिए।

ईथर का उपयोग विलायक के रूप में, एनेस्थेटिक के रूप में और कार्बनिक अभिक्रियाओं में माध्यम के रूप में किया जाता है। डाइएथाइल ईथर पुराने समय में शल्य चिकित्सा में एनेस्थीसिया के रूप में उपयोग होता था।


14. फिनोल और अल्कोहल की अम्लीयता की तुलना करें।

फिनोल अधिक अम्लीय है क्योंकि फिनॉक्साइड आयन रेज़ोनेंस द्वारा स्थिर होता है। अल्कोहल में बनने वाला अल्कॉक्साइड आयन अस्थिर होता है, इसलिए वह कम अम्लीय होता है।


15. अल्कोहल का निर्जलीकरण तंत्र लिखिए।

पहले अल्कोहल का प्रोटोनन होता है, फिर जल निकलकर कार्बोकैटायन बनता है। अंत में H⁺ निकलने से एल्कीन बनता है। यह E1 तंत्र है।


16. ईथर का सामान्य सूत्र लिखिए।

ईथर का सामान्य सूत्र R–O–R’ होता है। इसमें R और R’ समान या भिन्न हो सकते हैं।


17. अल्कोहल के उपयोग लिखिए।

अल्कोहल का उपयोग विलायक, ईंधन, एंटीसेप्टिक और औद्योगिक रसायनों के निर्माण में होता है।


18. फिनोल की संरचना बताइए।

फिनोल में -OH समूह सीधे बेंजीन रिंग से जुड़ा होता है, जिससे यह एरोमैटिक यौगिक बनता है।


19. ईथर की कमी प्रतिक्रियाशीलता का कारण बताइए।

ईथर में हाइड्रोजन बॉन्डिंग नहीं होती और C–O बंध स्थिर होता है, इसलिए यह कम प्रतिक्रियाशील होता है।


20. अल्कोहल और ईथर के बीच अंतर लिखिए।

अल्कोहल में -OH समूह होता है जबकि ईथर में R–O–R संरचना होती है। अल्कोहल हाइड्रोजन बॉन्डिंग करता है, ईथर नहीं करता।