CBSE कक्षा 12 रसायन विज्ञान (2026–27)
अध्याय 1: विलयन (Solutions)
20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
विलयन अध्याय में विलयनों के प्रकार, सांद्रता की अभिव्यक्तियाँ, राउल्ट का नियम, हेनरी का नियम, आदर्श एवं अनादर्श विलयन, तथा अणुसंख्य गुणधर्म (Colligative Properties) प्रमुख विषय हैं।
1. विलयन क्या है? इसके प्रमुख प्रकार बताइए।
उत्तर:
विलयन दो या दो से अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण होता है जिसमें एक पदार्थ विलेय तथा दूसरा विलायक कहलाता है। विलायक वह घटक है जिसकी मात्रा अधिक होती है, जबकि विलेय कम मात्रा में उपस्थित रहता है। विलयनों को भौतिक अवस्था के आधार पर गैसीय, द्रव एवं ठोस विलयनों में वर्गीकृत किया जाता है। उदाहरण के लिए, वायु गैसीय विलयन है, नमक का पानी द्रव विलयन है तथा पीतल (तांबा + जस्ता) ठोस विलयन है। समांगी होने के कारण विलयन के प्रत्येक भाग का संघटन समान होता है। रसायन विज्ञान तथा उद्योगों में विलयनों का अत्यधिक महत्व है क्योंकि अधिकांश रासायनिक अभिक्रियाएँ विलयन अवस्था में होती हैं।
2. मोल अंश (Mole Fraction) क्या है?
उत्तर:
मोल अंश किसी घटक के मोलों की संख्या तथा विलयन में उपस्थित कुल मोलों की संख्या के अनुपात को कहते हैं। यदि किसी विलयन में घटक A के मोल (n_A) तथा कुल मोल (n_A+n_B) हों, तो A का मोल अंश (X_A = n_A/(n_A+n_B)) होगा। मोल अंश एक विमाहीन राशि है तथा तापमान से प्रभावित नहीं होती। यह सांद्रता व्यक्त करने की एक महत्वपूर्ण विधि है क्योंकि इसमें आयतन परिवर्तन का प्रभाव नहीं पड़ता। आदर्श विलयनों एवं राउल्ट के नियम के अध्ययन में मोल अंश का व्यापक उपयोग किया जाता है। गैसों और द्रवों के मिश्रणों में भी मोल अंश महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
3. मोललता (Molality) और मोलरता (Molarity) में अंतर लिखिए।
उत्तर:
मोललता किसी विलयन में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या प्रति किलोग्राम विलायक के रूप में व्यक्त की जाती है, जबकि मोलरता विलेय के मोलों की संख्या प्रति लीटर विलयन होती है। मोललता का सूत्र (m = \frac{n}{kg;of;solvent}) तथा मोलरता का सूत्र (M = \frac{n}{L;of;solution}) है। तापमान परिवर्तन से मोलरता प्रभावित होती है क्योंकि आयतन बदल सकता है, जबकि मोललता तापमान से स्वतंत्र रहती है क्योंकि द्रव्यमान स्थिर रहता है। अणुसंख्य गुणधर्मों की गणनाओं में सामान्यतः मोललता का उपयोग किया जाता है। यह अंतर बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।
4. हेनरी का नियम क्या है?
उत्तर:
हेनरी के नियम के अनुसार किसी द्रव में घुली गैस की विलेयता उस गैस के आंशिक दाब के समानुपाती होती है। गणितीय रूप में इसे (p = k_H x) द्वारा व्यक्त किया जाता है, जहाँ (p) गैस का आंशिक दाब, (k_H) हेनरी नियतांक तथा (x) गैस का मोल अंश है। यह नियम गैसों की विलेयता को समझने में सहायक है। शीतल पेयों में कार्बन डाइऑक्साइड का अधिक दाब पर घुलना तथा गहरे समुद्र में गोताखोरों से संबंधित समस्याएँ हेनरी के नियम के अनुप्रयोग हैं। यह नियम केवल कम दाब और तनु विलयनों पर लागू होता है।
5. राउल्ट का नियम लिखिए।
उत्तर:
राउल्ट के नियम के अनुसार किसी आदर्श विलयन में उपस्थित वाष्पशील घटक का आंशिक वाष्प दाब उसके मोल अंश तथा शुद्ध अवस्था के वाष्प दाब के गुणनफल के बराबर होता है। इसे (P_A = X_A P_A^0) द्वारा व्यक्त किया जाता है। इस नियम के अनुसार विलेय मिलाने पर विलायक का वाष्प दाब कम हो जाता है। आदर्श विलयन वे होते हैं जो राउल्ट के नियम का पूर्णतः पालन करते हैं। बेंजीन-टोल्यून जैसे मिश्रण इसके उदाहरण हैं। राउल्ट का नियम अणुसंख्य गुणधर्मों तथा वाष्प दाब में कमी की व्याख्या करने का आधार प्रदान करता है।
6. आदर्श एवं अनादर्श विलयन में अंतर बताइए।
उत्तर:
आदर्श विलयन वे होते हैं जो सभी सांद्रताओं पर राउल्ट के नियम का पालन करते हैं। इनमें A-A, B-B तथा A-B अणुओं के मध्य आकर्षण बल लगभग समान होते हैं तथा मिश्रण के समय ऊष्मा परिवर्तन नहीं होता। दूसरी ओर, अनादर्श विलयन राउल्ट के नियम से विचलन प्रदर्शित करते हैं। इनमें आकर्षण बल असमान होते हैं तथा मिश्रण के समय ऊष्मा एवं आयतन परिवर्तन हो सकता है। एथेनॉल-जल मिश्रण अनादर्श विलयन का उदाहरण है। अनादर्श विलयन धनात्मक या ऋणात्मक विचलन दिखा सकते हैं। यह विषय बोर्ड परीक्षा के सैद्धांतिक प्रश्नों में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
7. धनात्मक विचलन क्या है?
उत्तर:
जब कोई विलयन राउल्ट के नियम द्वारा अपेक्षित वाष्प दाब से अधिक वाष्प दाब प्रदर्शित करता है, तो उसे धनात्मक विचलन कहते हैं। ऐसा तब होता है जब विभिन्न अणुओं के बीच आकर्षण बल समान अणुओं के आकर्षण बल से कम होते हैं। परिणामस्वरूप अणु आसानी से वाष्प अवस्था में चले जाते हैं। एथेनॉल और एसीटोन का मिश्रण धनात्मक विचलन का उदाहरण है। ऐसे विलयनों में मिश्रण के समय ऊष्मा का अवशोषण होता है तथा आयतन में वृद्धि हो सकती है। इस प्रकार के विलयनों में न्यूनतम क्वथनांक एजियोट्रोप बनने की संभावना रहती है।
8. ऋणात्मक विचलन क्या है?
उत्तर:
जब किसी विलयन का वाष्प दाब राउल्ट के नियम द्वारा अनुमानित मान से कम होता है, तो इसे ऋणात्मक विचलन कहते हैं। यह तब होता है जब विभिन्न अणुओं के बीच आकर्षण बल अधिक मजबूत होते हैं। परिणामस्वरूप अणुओं का वाष्प अवस्था में जाना कठिन हो जाता है और वाष्प दाब कम हो जाता है। क्लोरोफॉर्म और एसीटोन का मिश्रण इसका उदाहरण है। ऐसे विलयनों में ऊष्मा का उत्सर्जन होता है तथा आयतन में कमी हो सकती है। ऋणात्मक विचलन वाले विलयन अधिकतम क्वथनांक एजियोट्रोप बना सकते हैं।
9. अणुसंख्य गुणधर्म (Colligative Properties) क्या हैं?
उत्तर:
वे गुणधर्म जो केवल विलयन में उपस्थित विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं, न कि उनकी प्रकृति पर, अणुसंख्य गुणधर्म कहलाते हैं। प्रमुख अणुसंख्य गुणधर्म हैं—वाष्प दाब का सापेक्ष अवनमन, क्वथनांक में वृद्धि, हिमांक में अवनमन तथा परासरण दाब। इन गुणधर्मों का उपयोग अज्ञात पदार्थों के आणविक द्रव्यमान निर्धारण में किया जाता है। अणुसंख्य गुणधर्म तनु विलयनों में विशेष रूप से लागू होते हैं। बोर्ड परीक्षा में इनकी परिभाषा, उदाहरण तथा अनुप्रयोग अक्सर पूछे जाते हैं।
10. वाष्प दाब का सापेक्ष अवनमन क्या है?
उत्तर:
जब किसी अवाष्पशील विलेय को विलायक में मिलाया जाता है, तो विलायक का वाष्प दाब कम हो जाता है। वाष्प दाब में हुई कमी तथा शुद्ध विलायक के वाष्प दाब के अनुपात को वाष्प दाब का सापेक्ष अवनमन कहते हैं। यह विलेय के मोल अंश के बराबर होता है। यह अणुसंख्य गुणधर्मों में से एक है तथा राउल्ट के नियम पर आधारित है। इसका उपयोग आणविक द्रव्यमान ज्ञात करने में किया जाता है। विलेय की प्रकृति चाहे जो हो, यदि कणों की संख्या समान हो तो प्रभाव समान रहेगा।
11. क्वथनांक में वृद्धि को समझाइए।
उत्तर:
अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलायक का वाष्प दाब कम हो जाता है। इसलिए विलयन को वायुमंडलीय दाब के बराबर वाष्प दाब प्राप्त करने के लिए अधिक तापमान की आवश्यकता होती है। परिणामस्वरूप विलयन का क्वथनांक बढ़ जाता है। इसे क्वथनांक में वृद्धि कहते हैं। इसे (\Delta T_b = K_b m) से व्यक्त किया जाता है, जहाँ (K_b) मोलल क्वथनांक वृद्धि नियतांक तथा (m) मोललता है। यह अणुसंख्य गुणधर्म है तथा केवल विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करता है। इसके आधार पर आणविक द्रव्यमान ज्ञात किया जाता है।
12. हिमांक में अवनमन क्या है?
उत्तर:
किसी अवाष्पशील विलेय को विलायक में घोलने पर विलयन का हिमांक शुद्ध विलायक की तुलना में कम हो जाता है। इस घटना को हिमांक में अवनमन कहते हैं। इसे (\Delta T_f = K_f m) द्वारा व्यक्त किया जाता है। यहाँ (K_f) मोलल हिमांक अवनमन नियतांक तथा (m) मोललता है। सड़क पर बर्फ पिघलाने के लिए नमक का उपयोग तथा कार रेडिएटर में एंटीफ्रीज का प्रयोग इसके व्यावहारिक उदाहरण हैं। यह अणुसंख्य गुणधर्म है और विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करता है।
13. परासरण (Osmosis) क्या है?
उत्तर:
अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से विलायक अणुओं का कम सांद्रता वाले विलयन से अधिक सांद्रता वाले विलयन की ओर स्वतः प्रवाह परासरण कहलाता है। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक संतुलन स्थापित न हो जाए। जीवित कोशिकाओं में जल के परिवहन में परासरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पौधों की जड़ों द्वारा जल का अवशोषण तथा रक्त कोशिकाओं का व्यवहार इसके उदाहरण हैं। परासरण की अवधारणा परासरण दाब तथा विपरीत परासरण जैसी प्रक्रियाओं को समझने का आधार है।
14. परासरण दाब क्या है?
उत्तर:
परासरण को रोकने के लिए विलयन पर लगाया गया न्यूनतम बाह्य दाब परासरण दाब कहलाता है। इसे (\pi = CRT) द्वारा व्यक्त किया जाता है, जहाँ (C) सांद्रता, (R) गैस नियतांक तथा (T) तापमान है। यह अणुसंख्य गुणधर्मों में से सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसके द्वारा उच्च आणविक द्रव्यमान वाले पदार्थों का द्रव्यमान ज्ञात किया जा सकता है। जैविक प्रणालियों में कोशिकाओं की संरचना बनाए रखने में परासरण दाब की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
15. विपरीत परासरण (Reverse Osmosis) क्या है?
उत्तर:
जब किसी सांद्र विलयन पर उसके परासरण दाब से अधिक दाब लगाया जाता है, तो विलायक अणु अधिक सांद्रता वाले विलयन से कम सांद्रता वाले भाग की ओर प्रवाहित होते हैं। इस प्रक्रिया को विपरीत परासरण कहते हैं। इसका उपयोग समुद्री जल को शुद्ध पेयजल में बदलने के लिए किया जाता है। आधुनिक जल शोधन संयंत्रों में RO तकनीक इसी सिद्धांत पर कार्य करती है। यह प्रक्रिया जल से अशुद्धियाँ एवं लवण हटाने में अत्यंत प्रभावी है।
16. वैन्ट हॉफ गुणांक (i) क्या है?
उत्तर:
वैन्ट हॉफ गुणांक विलयन में वास्तविक कणों की संख्या तथा अपेक्षित कणों की संख्या के अनुपात को दर्शाता है। इसे (i = \frac{Observed;Property}{Calculated;Property}) द्वारा व्यक्त किया जाता है। यदि विलेय आयनीकरण करता है तो (i>1) तथा यदि साहचर्य (association) करता है तो (i<1) होता है। यह असामान्य आणविक द्रव्यमान की व्याख्या करता है। NaCl जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए वैन्ट हॉफ गुणांक 1 से अधिक पाया जाता है। अणुसंख्य गुणधर्मों की गणनाओं में इसका विशेष महत्व है।
17. असामान्य आणविक द्रव्यमान क्या है?
उत्तर:
जब अणुसंख्य गुणधर्मों से प्राप्त आणविक द्रव्यमान का मान वास्तविक आणविक द्रव्यमान से भिन्न होता है, तो उसे असामान्य आणविक द्रव्यमान कहते हैं। इसका मुख्य कारण विलेय का आयनीकरण या साहचर्य होता है। उदाहरण के लिए, NaCl जल में आयनों में टूट जाता है, जिससे कणों की संख्या बढ़ जाती है और प्राप्त आणविक द्रव्यमान कम दिखाई देता है। इसके विपरीत एसीटिक अम्ल बेंजीन में द्विक बनाता है, जिससे कणों की संख्या घट जाती है। इस समस्या को वैन्ट हॉफ गुणांक की सहायता से समझाया जाता है।
18. एजियोट्रोप क्या हैं?
उत्तर:
ऐसे द्रव मिश्रण जिनका संघटन द्रव तथा वाष्प दोनों अवस्थाओं में समान रहता है और जिन्हें साधारण आसवन द्वारा पृथक नहीं किया जा सकता, एजियोट्रोप कहलाते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं—न्यूनतम क्वथनांक एजियोट्रोप तथा अधिकतम क्वथनांक एजियोट्रोप। एथेनॉल-जल मिश्रण न्यूनतम क्वथनांक एजियोट्रोप का उदाहरण है। एजियोट्रोप अनादर्श विलयनों में बनते हैं तथा औद्योगिक पृथक्करण प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके अध्ययन से राउल्ट के नियम से विचलन को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
19. आदर्श विलयन की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
आदर्श विलयन राउल्ट के नियम का सभी सांद्रताओं पर पालन करते हैं। इनमें मिश्रण के समय ऊष्मा परिवर्तन नहीं होता अर्थात् (\Delta H_{mix}=0) होता है। साथ ही आयतन परिवर्तन भी नहीं होता अर्थात् (\Delta V_{mix}=0) रहता है। विभिन्न प्रकार के अणुओं के मध्य आकर्षण बल लगभग समान होते हैं। ऐसे विलयनों में कोई विशेष रासायनिक अंतःक्रिया नहीं होती। बेंजीन और टोल्यून का मिश्रण आदर्श विलयन का प्रमुख उदाहरण है। इनकी अवधारणा राउल्ट के नियम तथा वाष्प-दाब संबंधी अध्ययनों का आधार है।
20. विलयन अध्याय का बोर्ड परीक्षा में महत्व बताइए।
उत्तर:
विलयन अध्याय कक्षा 12 रसायन विज्ञान का अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें सांद्रता की इकाइयाँ, हेनरी का नियम, राउल्ट का नियम, आदर्श एवं अनादर्श विलयन तथा अणुसंख्य गुणधर्म जैसे विषय शामिल हैं। बोर्ड परीक्षाओं में इस अध्याय से प्रायः 2–5 अंकों के संख्यात्मक तथा सैद्धांतिक प्रश्न पूछे जाते हैं। विशेष रूप से मोललता, मोलरता, परासरण दाब, हिमांक अवनमन तथा वैन्ट हॉफ गुणांक आधारित प्रश्न महत्वपूर्ण हैं। इस अध्याय की अच्छी तैयारी से विद्यार्थी संख्यात्मक प्रश्नों में उच्च अंक प्राप्त कर सकते हैं तथा भौतिक रसायन के अन्य अध्यायों को भी बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।
