CBSE कक्षा 12 जीवविज्ञान (2026-27)
अध्याय 11 – जीव एवं समष्टियाँ (Organisms and Populations)
20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
यह अध्याय जीवों और उनके पर्यावरण, अनुकूलन, जनसंख्या वृद्धि तथा विभिन्न जनसंख्या अंतःक्रियाओं पर आधारित है। CBSE 2026-27 पाठ्यक्रम में जनसंख्या गुण, वृद्धि मॉडल तथा परस्पर संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
1. जीवों को प्रभावित करने वाले प्रमुख अजैविक कारक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
जीवों के वितरण, वृद्धि और जीवित रहने पर अनेक अजैविक कारकों का प्रभाव पड़ता है। इनमें तापमान, जल, प्रकाश तथा मृदा प्रमुख हैं। तापमान एंजाइमों की क्रियाशीलता और उपापचय को प्रभावित करता है। जल सभी जैविक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक है तथा इसकी उपलब्धता जीवों के वितरण को नियंत्रित करती है। प्रकाश प्रकाश संश्लेषण, पुष्पन तथा व्यवहारिक गतिविधियों को प्रभावित करता है। मृदा की संरचना, pH, खनिज तथा जलधारण क्षमता पौधों की वृद्धि निर्धारित करती है। विभिन्न जीव इन कारकों के प्रति अलग-अलग सहनशीलता रखते हैं, जिसके कारण उनका विशिष्ट आवास निर्धारित होता है।
2. नियामक (Regulators) और अनुरूपक (Conformers) में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
नियामक वे जीव हैं जो बाह्य परिस्थितियों में परिवर्तन होने पर भी अपने शरीर की आंतरिक दशाओं को स्थिर बनाए रखते हैं। उदाहरण के लिए स्तनधारी एवं पक्षी शरीर का तापमान नियंत्रित रखते हैं। इसके विपरीत अनुरूपक जीव अपने शरीर की दशाओं को पर्यावरण के अनुसार बदल लेते हैं। अधिकांश अकशेरुकी तथा जलीय जीव इसी श्रेणी में आते हैं। नियामकों को अधिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है, जबकि अनुरूपकों में ऊर्जा की आवश्यकता कम होती है। यह अनुकूलन जीवों को विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में जीवित रहने में सहायता करता है।
3. प्रवास (Migration) क्या है? इसका महत्व बताइए।
उत्तर:
प्रवास जीवों द्वारा प्रतिकूल परिस्थितियों से बचने के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक अस्थायी रूप से जाने की प्रक्रिया है। यह सामान्यतः भोजन, प्रजनन या अनुकूल जलवायु की खोज में किया जाता है। उदाहरण के लिए साइबेरियाई सारस सर्दियों में भारत आते हैं। प्रवास जीवों को अत्यधिक तापमान, भोजन की कमी तथा अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाता है। यह उनकी उत्तरजीविता और प्रजनन सफलता को बढ़ाता है। प्रवास पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रति एक महत्वपूर्ण व्यवहारिक अनुकूलन माना जाता है।
4. कंगारू चूहे (Kangaroo Rat) के मरुस्थलीय अनुकूलनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कंगारू चूहा मरुस्थलीय क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक विशेष रूप से अनुकूलित जीव है। यह कभी भी सीधे पानी नहीं पीता। इसे आवश्यक जल अपने भोजन के ऑक्सीकरण से प्राप्त होता है। इसके वृक्क अत्यधिक सघन मूत्र बनाते हैं, जिससे जल की हानि न्यूनतम होती है। यह दिन में बिलों में रहता है और रात्रि में सक्रिय होता है, जिससे वाष्पोत्सर्जन कम होता है। इसका शरीर मरुस्थलीय गर्मी और जल-अभाव की परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए विशेष रूप से अनुकूलित है।
5. जनसंख्या (Population) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में रहने वाले एक ही प्रजाति के सभी व्यक्तियों के समूह को जनसंख्या कहते हैं। जनसंख्या की अपनी विशिष्ट विशेषताएँ होती हैं, जैसे जन्मदर, मृत्यु-दर, लिंग अनुपात और आयु संरचना। ये विशेषताएँ किसी एक जीव में नहीं पाई जातीं बल्कि पूरी जनसंख्या का गुण होती हैं। उदाहरण के लिए किसी जंगल में रहने वाले सभी हिरण एक जनसंख्या का निर्माण करते हैं। पारिस्थितिकी में जनसंख्या का अध्ययन जीवों की संख्या, वितरण तथा उनके भविष्य के परिवर्तन को समझने के लिए किया जाता है।
6. जन्मदर (Natality) और मृत्यु-दर (Mortality) क्या हैं?
उत्तर:
जन्मदर किसी जनसंख्या में एक निश्चित समय में जन्म लेने वाले नए व्यक्तियों की संख्या को दर्शाती है। यह जनसंख्या वृद्धि का प्रमुख कारक है। मृत्यु-दर उसी अवधि में मरने वाले व्यक्तियों की संख्या को दर्शाती है। यदि जन्मदर मृत्यु-दर से अधिक होती है तो जनसंख्या बढ़ती है, जबकि मृत्यु-दर अधिक होने पर जनसंख्या घटती है। ये दोनों जनसंख्या के आकार और घनत्व को नियंत्रित करने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं। पारिस्थितिकीविद् इनका उपयोग जनसंख्या की गतिशीलता को समझने के लिए करते हैं।
7. आयु पिरामिड (Age Pyramid) क्या है?
उत्तर:
आयु पिरामिड किसी जनसंख्या की आयु संरचना का चित्रात्मक प्रदर्शन है। इसमें पूर्व-प्रजनन, प्रजनन तथा पश्च-प्रजनन आयु वर्गों का अनुपात दर्शाया जाता है। बढ़ती हुई जनसंख्या में पिरामिड त्रिकोणीय होता है, स्थिर जनसंख्या में घंटी के आकार का तथा घटती हुई जनसंख्या में कलश के आकार का होता है। आयु पिरामिड जनसंख्या की भविष्य की वृद्धि और स्थिरता का अनुमान लगाने में सहायक होता है। यह जनसंख्या अध्ययन का एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
8. जनसंख्या घनत्व (Population Density) का महत्व बताइए।
उत्तर:
किसी निश्चित क्षेत्र या आयतन में उपस्थित व्यक्तियों की संख्या को जनसंख्या घनत्व कहते हैं। यह किसी जनसंख्या की वास्तविक स्थिति को समझने का महत्वपूर्ण मापदंड है। जनसंख्या घनत्व से संसाधनों पर दबाव, प्रतिस्पर्धा और जीवों के वितरण का अनुमान लगाया जा सकता है। कुछ परिस्थितियों में घनत्व को संख्या के स्थान पर जैवभार या प्रतिशत आवरण द्वारा भी व्यक्त किया जाता है। संरक्षण जीवविज्ञान और वन्यजीव प्रबंधन में इसका विशेष महत्व है।
9. घातीय वृद्धि (Exponential Growth) क्या है?
उत्तर:
जब संसाधन असीमित हों और जनसंख्या पर कोई प्रतिबंध न हो, तब जनसंख्या तेजी से बढ़ती है जिसे घातीय वृद्धि कहते हैं। इसमें वृद्धि दर जनसंख्या के आकार के समानुपाती होती है। इसका ग्राफ J-आकार का होता है। इस प्रकार की वृद्धि प्रकृति में लंबे समय तक नहीं बनी रहती क्योंकि संसाधन सीमित होते हैं। प्रारंभिक चरण में बैक्टीरिया तथा अन्य सूक्ष्मजीव अक्सर इस प्रकार की वृद्धि प्रदर्शित करते हैं।
10. लॉजिस्टिक वृद्धि (Logistic Growth) क्या है?
उत्तर:
जब संसाधन सीमित होते हैं तो जनसंख्या अनंत काल तक नहीं बढ़ सकती। ऐसी स्थिति में वृद्धि धीरे-धीरे कम हो जाती है और अंततः वहन क्षमता (Carrying Capacity) के निकट स्थिर हो जाती है। इसे लॉजिस्टिक वृद्धि कहते हैं। इसका ग्राफ S-आकार या सिग्मॉइड होता है। यह प्रकृति में अधिक सामान्य वृद्धि मॉडल है। वहन क्षमता वह अधिकतम जनसंख्या है जिसे कोई पर्यावरण लंबे समय तक सहन कर सकता है।
11. वहन क्षमता (Carrying Capacity) क्या है?
उत्तर:
वहन क्षमता किसी पर्यावरण द्वारा लंबे समय तक समर्थित की जा सकने वाली अधिकतम जनसंख्या है। इसे K द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। भोजन, जल, स्थान और अन्य संसाधनों की उपलब्धता वहन क्षमता को निर्धारित करती है। जब जनसंख्या K के निकट पहुँचती है, तो वृद्धि दर कम हो जाती है। वहन क्षमता पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रत्येक आवास की वहन क्षमता अलग-अलग होती है।
12. परभक्षण (Predation) क्या है?
उत्तर:
परभक्षण दो प्रजातियों के बीच होने वाली ऐसी अंतःक्रिया है जिसमें एक जीव (परभक्षी) दूसरे जीव (शिकार) को पकड़कर खाता है। यह जनसंख्या नियंत्रण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए शेर और हिरण का संबंध। परभक्षी कमजोर और रोगग्रस्त जीवों को हटाकर प्राकृतिक चयन को बढ़ावा देते हैं। यह जैव विविधता के संरक्षण में भी सहायक होता है।
13. प्रतियोगिता (Competition) क्या है?
उत्तर:
जब दो जीव या प्रजातियाँ समान संसाधनों के लिए संघर्ष करती हैं, तो उसे प्रतियोगिता कहते हैं। संसाधनों में भोजन, जल, प्रकाश और स्थान शामिल हो सकते हैं। प्रतियोगिता अंतःप्रजातीय या अंतरप्रजातीय हो सकती है। इसका परिणाम किसी एक प्रजाति की संख्या में कमी या उसके विस्थापन के रूप में हो सकता है। प्रतियोगिता प्राकृतिक चयन को प्रभावित करती है तथा जीवों में नए अनुकूलनों के विकास को बढ़ावा देती है।
14. परजीविता (Parasitism) का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
परजीविता एक ऐसी अंतःक्रिया है जिसमें एक जीव (परजीवी) लाभ प्राप्त करता है जबकि दूसरा जीव (पोषक) हानि उठाता है। परजीवी भोजन और आश्रय के लिए पोषक पर निर्भर रहता है। उदाहरण के लिए फीता कृमि मानव आंत में तथा अमरबेल पौधों पर परजीवी के रूप में रहती है। परजीवियों में विशेष अनुकूलन पाए जाते हैं जो उन्हें पोषक के शरीर में जीवित रहने में सहायता करते हैं। यह संबंध पारिस्थितिकी में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
15. सहजीविता (Mutualism) क्या है?
उत्तर:
सहजीविता दो प्रजातियों के बीच ऐसा संबंध है जिसमें दोनों को लाभ होता है। उदाहरण के लिए लाइकेन में कवक और शैवाल का संबंध। शैवाल भोजन बनाता है जबकि कवक जल और खनिज उपलब्ध कराता है। इसी प्रकार दलहनी पौधों की जड़ों और राइजोबियम जीवाणुओं के बीच भी सहजीवी संबंध पाया जाता है। यह संबंध दोनों जीवों की उत्तरजीविता और वृद्धि में सहायक होता है तथा पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
16. सहभोजिता (Commensalism) क्या है?
उत्तर:
सहभोजिता ऐसी अंतःक्रिया है जिसमें एक जीव लाभ प्राप्त करता है जबकि दूसरा न तो लाभान्वित होता है और न ही प्रभावित होता है। उदाहरण के लिए वृक्षों पर उगने वाले एपिफाइट पौधे। इन्हें आश्रय और प्रकाश मिलता है जबकि वृक्ष को कोई विशेष लाभ या हानि नहीं होती। यह संबंध प्रकृति में व्यापक रूप से पाया जाता है और विभिन्न प्रजातियों के सह-अस्तित्व को दर्शाता है।
17. ऐलेन का नियम (Allen’s Rule) क्या है?
उत्तर:
ऐलेन के नियम के अनुसार ठंडे क्षेत्रों में रहने वाले स्तनधारियों के कान, पूँछ और अंग अपेक्षाकृत छोटे होते हैं, जबकि गर्म क्षेत्रों में ये भाग बड़े होते हैं। इससे शरीर की सतह क्षेत्र नियंत्रित होता है और ऊष्मा हानि कम या अधिक की जा सकती है। उदाहरण के लिए आर्कटिक लोमड़ी के कान छोटे होते हैं जबकि रेगिस्तानी लोमड़ी के कान बड़े होते हैं। यह तापीय अनुकूलन का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
18. डायपॉज़ (Diapause) क्या है?
उत्तर:
डायपॉज़ प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों में वृद्धि और विकास के अस्थायी रुकने की अवस्था है। यह सामान्यतः कीटों तथा कुछ अन्य अकशेरुकी जीवों में पाई जाती है। इस अवस्था में उपापचय दर कम हो जाती है और जीव ऊर्जा की बचत करता है। अनुकूल परिस्थितियाँ लौटने पर विकास पुनः प्रारंभ हो जाता है। यह जीवों की उत्तरजीविता सुनिश्चित करने वाला एक महत्वपूर्ण अनुकूलन है।
19. यूरीथर्मल एवं स्टेनोथर्मल जीवों में अंतर बताइए।
उत्तर:
यूरीथर्मल जीव व्यापक तापमान सीमा को सहन कर सकते हैं। उदाहरण के लिए अधिकांश स्तनधारी और कई मछलियाँ। इसके विपरीत स्टेनोथर्मल जीव केवल सीमित तापमान सीमा में ही जीवित रह सकते हैं। उदाहरण के लिए कुछ उष्णकटिबंधीय समुद्री जीव। जलवायु परिवर्तन की परिस्थितियों में यूरीथर्मल जीवों की उत्तरजीविता की संभावना अधिक होती है। यह वर्गीकरण जीवों की ताप सहनशीलता को समझने में सहायक है।
20. जनसंख्या वृद्धि को प्रभावित करने वाले चार प्रमुख कारक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
जनसंख्या वृद्धि मुख्यतः चार कारकों से प्रभावित होती है—जन्मदर (Natality), मृत्यु-दर (Mortality), आप्रवासन (Immigration) और उत्प्रवासन (Emigration)। जन्मदर और आप्रवासन जनसंख्या के आकार को बढ़ाते हैं, जबकि मृत्यु-दर और उत्प्रवासन इसे कम करते हैं। इन चारों कारकों के संयुक्त प्रभाव से किसी क्षेत्र की जनसंख्या में परिवर्तन होता है। पारिस्थितिकी में इन्हें जनसंख्या गतिकी के मूल घटक माना जाता है। इनके अध्ययन से भविष्य की जनसंख्या प्रवृत्तियों का अनुमान लगाया जा सकता है।
