CBSE कक्षा 12 जीवविज्ञान (2026-27)
अध्याय 10 – जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके अनुप्रयोग (Biotechnology and Its Applications)
20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों में बीटी कपास, आरएनए इंटरफेरेंस, जीन थेरेपी, इंसुलिन उत्पादन, ट्रांसजेनिक जन्तु, बायोपायरेसी और जीईएसी जैसे विषय अत्यंत महत्वपूर्ण हैं तथा बोर्ड परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं।
1. Bt कपास (Bt Cotton) क्या है? इसका महत्व बताइए।
उत्तर:
Bt कपास एक आनुवंशिक रूप से परिवर्तित (GM) फसल है जिसमें Bacillus thuringiensis नामक जीवाणु के क्राय (Cry) जीन प्रविष्ट कराए जाते हैं। ये जीन ऐसे विषैले प्रोटीन बनाते हैं जो कपास की फसल को कीटों, विशेषकर बॉलवर्म से सुरक्षा प्रदान करते हैं। जब कीट पौधे को खाते हैं, तो उनके क्षारीय मध्यांत्र में यह प्रोटीन सक्रिय होकर आंत की कोशिकाओं को नष्ट कर देता है, जिससे कीट मर जाता है। इससे रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग कम होता है, उत्पादन बढ़ता है तथा पर्यावरण प्रदूषण घटता है। Bt कपास भारत की प्रमुख जैव प्रौद्योगिकीय उपलब्धियों में से एक है।
2. Cry प्रोटीन क्या हैं?
उत्तर:
Cry प्रोटीन ऐसे कीटनाशी प्रोटीन हैं जो Bacillus thuringiensis (Bt) जीवाणु द्वारा उत्पन्न किए जाते हैं। ये प्रोटीन क्राय (Cry) जीनों द्वारा नियंत्रित होते हैं। जीवाणु में यह प्रोटीन निष्क्रिय अवस्था में क्रिस्टल के रूप में पाया जाता है। जब कोई कीट पौधे को खाता है, तो उसके मध्यांत्र के क्षारीय वातावरण में यह सक्रिय विष में बदल जाता है। सक्रिय विष आंत की उपकला कोशिकाओं को नष्ट कर देता है, जिससे कीट की मृत्यु हो जाती है। विभिन्न Cry जीन अलग-अलग कीटों के विरुद्ध कार्य करते हैं। इन्हीं जीनों का उपयोग Bt कपास और अन्य GM फसलों के निर्माण में किया जाता है।
3. RNA इंटरफेरेंस (RNAi) क्या है?
उत्तर:
RNA इंटरफेरेंस (RNAi) एक जैविक प्रक्रिया है जिसमें किसी विशेष जीन की अभिव्यक्ति को रोका जाता है। इसमें द्विसूत्री RNA (dsRNA) संबंधित mRNA के साथ जुड़कर उसे निष्क्रिय कर देता है, जिससे प्रोटीन का निर्माण नहीं हो पाता। इस तकनीक का उपयोग पौधों को रोगजनकों और परजीवियों से बचाने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, तंबाकू पौधे में RNAi तकनीक द्वारा Meloidogyne incognita नामक निमेटोड के विरुद्ध प्रतिरोध विकसित किया गया। यह तकनीक कृषि में कीटनाशकों के उपयोग को कम करने तथा फसल सुरक्षा बढ़ाने में सहायक है।
4. आनुवंशिक रूप से परिवर्तित फसलें (GM Crops) क्या हैं?
उत्तर:
GM फसलें वे पौधे हैं जिनके जीनों में जैव प्रौद्योगिकी द्वारा परिवर्तन किया गया है। इनमें किसी अन्य जीव का उपयोगी जीन प्रविष्ट कर नई विशेषताएँ उत्पन्न की जाती हैं। GM फसलें कीट-प्रतिरोधी, रोग-प्रतिरोधी तथा सूखा एवं लवणीयता सहनशील हो सकती हैं। इनसे उत्पादन में वृद्धि, पोषण मूल्य में सुधार तथा रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग में कमी आती है। गोल्डन राइस और Bt कपास इसके प्रमुख उदाहरण हैं। यद्यपि इनके अनेक लाभ हैं, फिर भी इनके पर्यावरणीय प्रभावों और जैव विविधता पर संभावित प्रभावों का मूल्यांकन आवश्यक है।
5. जैव प्रौद्योगिकी द्वारा इंसुलिन का उत्पादन कैसे किया जाता है?
उत्तर:
मानव इंसुलिन के उत्पादन हेतु पुनर्संयोजित DNA तकनीक का उपयोग किया जाता है। मानव इंसुलिन की A और B श्रृंखलाओं के जीनों को अलग कर Escherichia coli जीवाणु में प्रविष्ट कराया जाता है। ये जीवाणु बड़ी मात्रा में दोनों श्रृंखलाओं का उत्पादन करते हैं। बाद में इन श्रृंखलाओं को शुद्ध करके प्रयोगशाला में जोड़ा जाता है, जिससे सक्रिय इंसुलिन प्राप्त होता है। इस प्रकार निर्मित इंसुलिन को ‘ह्यूमुलिन’ कहा जाता है। यह मधुमेह रोगियों के लिए सुरक्षित और प्रभावी है तथा पशु-आधारित इंसुलिन की तुलना में एलर्जी की संभावना कम होती है।
6. जीन थेरेपी क्या है?
उत्तर:
जीन थेरेपी एक ऐसी तकनीक है जिसमें किसी रोगी के दोषपूर्ण जीन को कार्यशील जीन द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है। इसका उद्देश्य आनुवंशिक रोगों का उपचार करना है। इसमें सामान्य जीन को उपयुक्त वाहक (वेक्टर) की सहायता से रोगी की कोशिकाओं में पहुँचाया जाता है। इससे कोशिकाएँ आवश्यक प्रोटीन बनाने लगती हैं और रोग के लक्षण कम हो जाते हैं। यह तकनीक मुख्यतः आनुवंशिक विकारों के उपचार में उपयोगी है। जीन थेरेपी आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक मानी जाती है।
7. ADA कमी (ADA Deficiency) क्या है?
उत्तर:
ADA कमी एक आनुवंशिक रोग है जो एडेनोसिन डीएमिनेज (ADA) एंजाइम की अनुपस्थिति के कारण होता है। इस एंजाइम की कमी से प्रतिरक्षा तंत्र सही प्रकार से कार्य नहीं कर पाता और रोगी बार-बार संक्रमण का शिकार होता है। यह रोग SCID (Severe Combined Immunodeficiency) का एक प्रकार है। ADA कमी के उपचार के लिए जीन थेरेपी का उपयोग किया गया था। इसमें ADA जीन की सामान्य प्रति रोगी की कोशिकाओं में प्रविष्ट कराई जाती है, जिससे एंजाइम का निर्माण पुनः शुरू हो जाता है। यह मानव में जीन थेरेपी का प्रारंभिक सफल उदाहरण है।
8. आणविक निदान (Molecular Diagnosis) क्या है?
उत्तर:
आणविक निदान ऐसी तकनीकों का समूह है जिनकी सहायता से रोगों का प्रारंभिक स्तर पर पता लगाया जाता है। इसमें DNA, RNA या प्रोटीन का विश्लेषण किया जाता है। PCR (Polymerase Chain Reaction) और ELISA प्रमुख तकनीकें हैं। PCR द्वारा रोगजनक के DNA की अल्प मात्रा का भी पता लगाया जा सकता है, जबकि ELISA एंटीजन या एंटीबॉडी की पहचान करता है। इन तकनीकों से रोग का शीघ्र निदान संभव होता है, जिससे समय पर उपचार शुरू किया जा सकता है। आधुनिक चिकित्सा में इनका अत्यधिक महत्व है।
9. PCR तकनीक का महत्व बताइए।
उत्तर:
PCR (Polymerase Chain Reaction) एक ऐसी तकनीक है जो DNA के किसी विशिष्ट खंड की लाखों प्रतियाँ बहुत कम समय में तैयार कर सकती है। यह तकनीक रोग निदान, आनुवंशिक परीक्षण, फॉरेंसिक विज्ञान तथा जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान में अत्यंत उपयोगी है। PCR की सहायता से HIV, कैंसर तथा आनुवंशिक रोगों का प्रारंभिक स्तर पर पता लगाया जा सकता है। इसकी उच्च संवेदनशीलता और सटीकता इसे आधुनिक आणविक जीवविज्ञान की महत्वपूर्ण तकनीक बनाती है।
10. ELISA तकनीक क्या है?
उत्तर:
ELISA (Enzyme Linked Immunosorbent Assay) एक प्रतिरक्षात्मक परीक्षण है जिसका उपयोग एंटीजन या एंटीबॉडी की पहचान के लिए किया जाता है। इसमें एंजाइम-संबद्ध एंटीबॉडी का उपयोग किया जाता है, जो लक्ष्य पदार्थ से जुड़कर रंग परिवर्तन उत्पन्न करती है। इस रंग परिवर्तन से रोग की उपस्थिति का पता चलता है। HIV, हेपेटाइटिस तथा अन्य संक्रामक रोगों के निदान में ELISA का व्यापक उपयोग होता है। यह तकनीक सरल, विश्वसनीय तथा अत्यधिक संवेदनशील मानी जाती है।
11. ट्रांसजेनिक जन्तु क्या हैं?
उत्तर:
ट्रांसजेनिक जन्तु वे जन्तु हैं जिनके जीनोम में किसी अन्य जीव का विदेशी जीन प्रविष्ट कराया गया हो। ये जन्तु विशेष गुणों को प्रदर्शित करते हैं तथा वैज्ञानिक अनुसंधान में उपयोग किए जाते हैं। चूहे, खरगोश, भेड़ और गाय इसके प्रमुख उदाहरण हैं। ट्रांसजेनिक जन्तुओं का उपयोग मानव रोगों के अध्ययन, औषधियों के परीक्षण तथा जैविक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। इनके माध्यम से वैज्ञानिक जीनों की कार्यप्रणाली तथा विभिन्न रोगों के उपचार संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करते हैं।
12. ट्रांसजेनिक जन्तुओं के उपयोग लिखिए।
उत्तर:
ट्रांसजेनिक जन्तुओं का उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधान, औषधि परीक्षण तथा जैविक उत्पादों के उत्पादन में किया जाता है। इनके माध्यम से मानव रोगों के कारणों और उपचार का अध्ययन किया जाता है। नई दवाओं की सुरक्षा एवं प्रभावशीलता की जाँच भी इन्हीं पर की जाती है। कुछ ट्रांसजेनिक जन्तु औषधीय प्रोटीन, हार्मोन तथा रक्त जमाव कारकों का उत्पादन करते हैं। इसके अतिरिक्त, पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थों के प्रभावों के अध्ययन में भी इनका उपयोग किया जाता है।
13. बायोपेटेंट (Biopatent) क्या है?
उत्तर:
बायोपेटेंट वह कानूनी अधिकार है जो किसी जैविक उत्पाद, प्रक्रिया या आविष्कार के निर्माता को प्रदान किया जाता है। इसके अंतर्गत आविष्कारक को सीमित अवधि तक अपने आविष्कार के उपयोग और व्यापार का विशेष अधिकार प्राप्त होता है। बायोपेटेंट अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करते हैं, क्योंकि इससे वैज्ञानिकों और संस्थानों को आर्थिक लाभ मिलता है। हालांकि, जैव संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के पेटेंट को लेकर कई नैतिक एवं कानूनी विवाद भी उत्पन्न होते हैं।
14. बायोपायरेसी (Biopiracy) क्या है?
उत्तर:
बायोपायरेसी का अर्थ है किसी देश या समुदाय के जैव संसाधनों तथा पारंपरिक ज्ञान का बिना अनुमति और उचित लाभ-वितरण के व्यावसायिक उपयोग करना। यह जैव विविधता और स्थानीय समुदायों के अधिकारों का उल्लंघन माना जाता है। उदाहरण के रूप में नीम, हल्दी और बासमती से संबंधित पेटेंट विवाद प्रसिद्ध हैं। बायोपायरेसी को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौते तथा राष्ट्रीय कानून बनाए गए हैं ताकि जैव संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभ का उचित वितरण सुनिश्चित किया जा सके।
15. GEAC का क्या कार्य है?
उत्तर:
GEAC (Genetic Engineering Appraisal Committee) भारत सरकार की एक नियामक संस्था है। इसका मुख्य कार्य आनुवंशिक रूप से परिवर्तित जीवों (GMOs) और उनसे संबंधित अनुसंधानों की सुरक्षा का मूल्यांकन करना है। यह संस्था GM फसलों के परीक्षण, उत्पादन तथा पर्यावरण में उनके उपयोग की अनुमति प्रदान करती है। GEAC यह सुनिश्चित करती है कि जैव प्रौद्योगिकी से जुड़े उत्पाद मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए सुरक्षित हों। इस प्रकार यह जैव सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
16. गोल्डन राइस क्या है?
उत्तर:
गोल्डन राइस एक आनुवंशिक रूप से परिवर्तित धान की किस्म है जिसमें बीटा-कैरोटीन का उत्पादन कराया गया है। बीटा-कैरोटीन मानव शरीर में विटामिन-A में परिवर्तित हो जाता है। इसका विकास विटामिन-A की कमी से होने वाले अंधत्व और कुपोषण को रोकने के लिए किया गया था। गोल्डन राइस विशेष रूप से उन क्षेत्रों में उपयोगी है जहाँ चावल मुख्य भोजन है और विटामिन-A की कमी व्यापक रूप से पाई जाती है। यह जैव सुदृढ़ीकरण (Biofortification) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
17. जैव सुदृढ़ीकरण (Biofortification) क्या है?
उत्तर:
जैव सुदृढ़ीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा फसलों के पोषण मूल्य को आनुवंशिक या पारंपरिक विधियों से बढ़ाया जाता है। इसका उद्देश्य आवश्यक विटामिन, खनिज तथा अन्य पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाना है। गोल्डन राइस इसका प्रमुख उदाहरण है, जिसमें विटामिन-A का स्तर बढ़ाया गया है। जैव सुदृढ़ीकरण कुपोषण की समस्या को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है तथा जनस्वास्थ्य सुधारने का प्रभावी उपाय माना जाता है।
18. जैव प्रौद्योगिकी के कृषि क्षेत्र में दो प्रमुख लाभ लिखिए।
उत्तर:
कृषि क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी के अनेक लाभ हैं। पहला, यह कीट एवं रोग प्रतिरोधी फसलों का विकास करती है, जिससे कीटनाशकों का उपयोग कम होता है। दूसरा, यह फसलों को सूखा, लवणीयता तथा ताप जैसे प्रतिकूल पर्यावरणीय कारकों के प्रति सहनशील बनाती है। इसके अतिरिक्त, फसल उत्पादन बढ़ता है, पोषण गुणवत्ता में सुधार होता है तथा कटाई के बाद होने वाली हानि कम होती है। इन लाभों के कारण जैव प्रौद्योगिकी आधुनिक कृषि का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।
19. जैव प्रौद्योगिकी के चिकित्सा क्षेत्र में अनुप्रयोग बताइए।
उत्तर:
चिकित्सा क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग दवाओं, टीकों, हार्मोनों तथा निदान तकनीकों के विकास में किया जाता है। पुनर्संयोजित इंसुलिन, जीन थेरेपी, वैक्सीन उत्पादन तथा आणविक निदान इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इसके माध्यम से आनुवंशिक रोगों के उपचार और संक्रामक रोगों की शीघ्र पहचान संभव हुई है। आधुनिक चिकित्सा में जैव प्रौद्योगिकी ने रोग प्रबंधन को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाया है।
20. जैव प्रौद्योगिकी से जुड़े नैतिक मुद्दे कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
जैव प्रौद्योगिकी से जुड़े प्रमुख नैतिक मुद्दों में GM फसलों की सुरक्षा, जैव विविधता पर प्रभाव, ट्रांसजेनिक जीवों का उपयोग, बायोपायरेसी तथा पेटेंट अधिकार शामिल हैं। कई बार यह चिंता व्यक्त की जाती है कि GM जीव पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, जैव संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से स्थानीय समुदायों के अधिकारों का हनन भी हो सकता है। इसलिए वैज्ञानिक प्रगति के साथ-साथ नैतिकता, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक हितों का ध्यान रखना आवश्यक है।
