CBSE कक्षा 12 जीवविज्ञान (2026-27)
अध्याय 9 – जैव प्रौद्योगिकी : सिद्धांत एवं प्रक्रम
20 महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
जैव प्रौद्योगिकी के इस अध्याय में आनुवंशिक अभियांत्रिकी, पुनर्संयोजित डीएनए तकनीक, प्रतिबंधन एंजाइम, क्लोनिंग वेक्टर, पीसीआर तथा जैव अभिक्रियकों जैसे विषय प्रमुख हैं। ये प्रश्न NCERT आधारित तथा बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
1. जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) क्या है? इसके दो प्रमुख सिद्धांत लिखिए।
उत्तर:
जैव प्रौद्योगिकी वह विज्ञान है जिसमें जीवित जीवों, कोशिकाओं अथवा उनके एंजाइमों का उपयोग मानव कल्याण हेतु उपयोगी उत्पादों एवं सेवाओं के निर्माण में किया जाता है। आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी दो मुख्य सिद्धांतों पर आधारित है। पहला, आनुवंशिक अभियांत्रिकी (Genetic Engineering), जिसके द्वारा डीएनए अथवा आरएनए में परिवर्तन कर वांछित गुणों वाले जीव विकसित किए जाते हैं। दूसरा, निर्जीवाणु (Sterile) परिस्थितियों का संरक्षण, जिससे केवल इच्छित सूक्ष्मजीवों या कोशिकाओं की वृद्धि हो और बड़े पैमाने पर एंटीबायोटिक्स, वैक्सीन तथा एंजाइम जैसे उत्पाद प्राप्त किए जा सकें। यही सिद्धांत आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी की आधारशिला हैं।
2. आनुवंशिक अभियांत्रिकी से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
आनुवंशिक अभियांत्रिकी वह तकनीक है जिसमें किसी जीव के आनुवंशिक पदार्थ (डीएनए या आरएनए) की संरचना में परिवर्तन किया जाता है। इस प्रक्रिया में इच्छित जीन को अलग करके किसी अन्य जीव में स्थानांतरित किया जाता है, जिससे उसके गुणों में परिवर्तन हो जाता है। उदाहरण के लिए, मानव इंसुलिन जीन को जीवाणु में प्रविष्ट कराकर इंसुलिन का उत्पादन कराया जाता है। इस तकनीक द्वारा रोग प्रतिरोधी फसलें, औषधीय प्रोटीन तथा ट्रांसजेनिक जीव विकसित किए जाते हैं। आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी का अधिकांश भाग आनुवंशिक अभियांत्रिकी पर आधारित है।
3. प्रतिबंधन एंजाइम (Restriction Enzyme) क्या होते हैं?
उत्तर:
प्रतिबंधन एंजाइम ऐसे विशिष्ट एंजाइम हैं जो डीएनए को निश्चित पहचान अनुक्रमों (Recognition Sites) पर काटते हैं। इन्हें “आणविक कैंची” भी कहा जाता है। ये बैक्टीरिया में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं और विदेशी डीएनए से रक्षा करते हैं। उदाहरण के लिए, EcoRI नामक एंजाइम विशेष न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम को पहचानकर डीएनए को काटता है। इन एंजाइमों का उपयोग पुनर्संयोजित डीएनए तकनीक में इच्छित जीन को अलग करने तथा वेक्टर डीएनए को काटने में किया जाता है। इनके बिना आनुवंशिक अभियांत्रिकी संभव नहीं है।
4. पैलिन्ड्रोमिक अनुक्रम (Palindromic Sequence) क्या है?
उत्तर:
पैलिन्ड्रोमिक अनुक्रम वह डीएनए अनुक्रम होता है जिसे दोनों पूरक स्ट्रैण्डों पर 5′ से 3′ दिशा में पढ़ने पर समान क्रम प्राप्त होता है। उदाहरण के लिए, GAATTC एक प्रसिद्ध पैलिन्ड्रोमिक अनुक्रम है जिसे EcoRI एंजाइम पहचानता है। प्रतिबंधन एंजाइम ऐसे ही विशिष्ट अनुक्रमों पर कार्य करते हैं और डीएनए को काटते हैं। पुनर्संयोजित डीएनए तकनीक में इन अनुक्रमों का अत्यधिक महत्व है क्योंकि इनके माध्यम से जीनों को सटीक स्थानों पर काटकर जोड़ा जा सकता है।
5. क्लोनिंग वेक्टर क्या है?
उत्तर:
क्लोनिंग वेक्टर वह डीएनए अणु होता है जो इच्छित जीन को एक जीव से दूसरे जीव में स्थानांतरित करने का कार्य करता है। सामान्यतः प्लाज्मिड तथा बैक्टीरियोफेज वेक्टर के रूप में प्रयुक्त होते हैं। एक अच्छे वेक्टर में प्रतिकृति उद्गम (Ori), चयन सूचक (Selectable Marker) तथा प्रतिबंधन स्थल उपस्थित होते हैं। इच्छित जीन को वेक्टर में जोड़कर उसे पोषक जीवाणु में प्रवेश कराया जाता है। वेक्टर जीन की प्रतिकृति बनवाकर उसकी अनेक प्रतियाँ उत्पन्न करता है। इसलिए इसे “वाहक डीएनए” भी कहा जाता है।
6. pBR322 वेक्टर की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
pBR322 एक प्रसिद्ध प्लाज्मिड क्लोनिंग वेक्टर है जिसका उपयोग पुनर्संयोजित डीएनए तकनीक में किया जाता है। इसमें प्रतिकृति उद्गम (Ori), एम्पिसिलिन प्रतिरोध जीन तथा टेट्रासाइक्लिन प्रतिरोध जीन उपस्थित होते हैं। ये जीन चयन सूचक के रूप में कार्य करते हैं और परिवर्तित कोशिकाओं की पहचान में सहायता करते हैं। इसमें अनेक प्रतिबंधन स्थल भी पाए जाते हैं जहाँ विदेशी डीएनए को जोड़ा जा सकता है। इसकी संरचना सरल होने के कारण यह शोध कार्यों में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
7. डीएनए लाइगेज़ (DNA Ligase) का कार्य बताइए।
उत्तर:
डीएनए लाइगेज़ वह एंजाइम है जो दो डीएनए खंडों को जोड़ने का कार्य करता है। जब प्रतिबंधन एंजाइम डीएनए को काटते हैं, तब बने हुए टुकड़ों को पुनः जोड़ने के लिए डीएनए लाइगेज़ का उपयोग किया जाता है। पुनर्संयोजित डीएनए तकनीक में इच्छित जीन को वेक्टर डीएनए में जोड़ने का कार्य यही एंजाइम करता है। यह फॉस्फोडाइएस्टर बंध बनाकर दोनों डीएनए खंडों को स्थायी रूप से जोड़ देता है। इसलिए इसे “आणविक गोंद” भी कहा जाता है।
8. जेल वैद्युतकणसंचलन (Gel Electrophoresis) क्या है?
उत्तर:
जेल वैद्युतकणसंचलन एक तकनीक है जिसके द्वारा विभिन्न आकार के डीएनए खंडों को अलग किया जाता है। इसमें एगारोज जेल का उपयोग किया जाता है। डीएनए ऋणात्मक आवेशित होने के कारण विद्युत क्षेत्र में धनात्मक ध्रुव की ओर गति करता है। छोटे डीएनए खंड बड़े खंडों की तुलना में अधिक तेजी से आगे बढ़ते हैं। इस प्रकार आकार के आधार पर डीएनए खंड पृथक हो जाते हैं। बाद में इन्हें एथीडियम ब्रोमाइड से रंगकर पराबैंगनी प्रकाश में देखा जाता है।
9. PCR का पूर्ण रूप एवं महत्व लिखिए।
उत्तर:
PCR का पूर्ण रूप Polymerase Chain Reaction है। यह तकनीक किसी विशेष डीएनए खंड की लाखों प्रतियाँ बनाने के लिए प्रयुक्त होती है। इसमें डीनैचुरेशन, एनीलिंग तथा एक्सटेंशन तीन प्रमुख चरण होते हैं। Taq Polymerase एंजाइम उच्च तापमान पर कार्य करता है और डीएनए संश्लेषण कराता है। PCR का उपयोग रोग निदान, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग, आनुवंशिक अनुसंधान तथा अपराध विज्ञान में किया जाता है। कम मात्रा में उपलब्ध डीएनए को बढ़ाने में यह तकनीक अत्यंत उपयोगी है।
10. Taq Polymerase क्या है?
उत्तर:
Taq Polymerase एक ऊष्मारोधी डीएनए पॉलिमरेज़ एंजाइम है जो Thermus aquaticus नामक जीवाणु से प्राप्त किया जाता है। यह उच्च तापमान पर भी सक्रिय रहता है, इसलिए PCR तकनीक में इसका उपयोग किया जाता है। PCR के दौरान तापमान बार-बार बढ़ाया और घटाया जाता है, किंतु Taq Polymerase नष्ट नहीं होता। यह प्राइमर से प्रारंभ होकर नए डीएनए स्ट्रैण्ड का निर्माण करता है। इस एंजाइम की खोज ने आणविक जीवविज्ञान में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है।
11. Competent Cell क्या होती है?
उत्तर:
Competent Cell वह कोशिका होती है जो बाहरी डीएनए को ग्रहण करने में सक्षम होती है। सामान्यतः जीवाणु कोशिकाएँ विदेशी डीएनए को आसानी से स्वीकार नहीं करतीं। इसलिए उन्हें विशेष रासायनिक उपचार, जैसे कैल्शियम क्लोराइड, द्वारा सक्षम बनाया जाता है। इसके बाद हीट-शॉक देकर पुनर्संयोजित प्लाज्मिड कोशिका में प्रवेश कराया जाता है। इस प्रक्रिया को Transformation कहा जाता है। सक्षम कोशिकाएँ आनुवंशिक अभियांत्रिकी के प्रयोगों में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
12. Transformation क्या है?
उत्तर:
Transformation वह प्रक्रिया है जिसमें विदेशी या पुनर्संयोजित डीएनए को पोषक जीवाणु कोशिका में प्रविष्ट कराया जाता है। इस प्रक्रिया के लिए कोशिकाओं को पहले Competent बनाया जाता है। इसके बाद पुनर्संयोजित प्लाज्मिड को कोशिका में प्रवेश कराया जाता है। जब यह डीएनए कोशिका के अंदर जाकर प्रतिकृति बनाता है और अभिव्यक्त होता है, तब कोशिका परिवर्तित (Transformed) कहलाती है। जैव प्रौद्योगिकी में यह एक महत्वपूर्ण चरण है क्योंकि इसी से इच्छित जीन की वृद्धि संभव होती है।
13. जैव अभिक्रियक (Bioreactor) क्या है?
उत्तर:
जैव अभिक्रियक एक बड़ा पात्र होता है जिसमें सूक्ष्मजीवों, पौध कोशिकाओं या पशु कोशिकाओं को नियंत्रित परिस्थितियों में विकसित किया जाता है। इसमें तापमान, pH, ऑक्सीजन तथा पोषक तत्वों का नियंत्रण किया जाता है। जैव अभिक्रियकों का उपयोग बड़े पैमाने पर एंजाइम, एंटीबायोटिक्स, वैक्सीन तथा अन्य जैव उत्पादों के उत्पादन के लिए किया जाता है। आधुनिक जैव उद्योगों में स्टिरर्ड-टैंक बायोरिएक्टर सबसे अधिक उपयोग किए जाते हैं।
14. Downstream Processing क्या है?
उत्तर:
Downstream Processing वह प्रक्रिया है जिसमें जैव अभिक्रियक से प्राप्त उत्पादों को पृथक, शुद्ध तथा उपयोग योग्य बनाया जाता है। इसमें पृथक्करण, शुद्धीकरण, गुणवत्ता परीक्षण तथा पैकेजिंग जैसे चरण शामिल होते हैं। उदाहरण के लिए, इंसुलिन उत्पादन के बाद उसे शुद्ध करके औषधि के रूप में तैयार किया जाता है। उत्पाद की गुणवत्ता तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस चरण का अत्यधिक महत्व है। यह जैव प्रौद्योगिकी उत्पादन प्रक्रिया का अंतिम चरण माना जाता है।
15. पुनर्संयोजित डीएनए (rDNA) क्या है?
उत्तर:
पुनर्संयोजित डीएनए वह कृत्रिम डीएनए अणु है जो दो भिन्न स्रोतों से प्राप्त डीएनए खंडों को जोड़कर बनाया जाता है। इच्छित जीन को प्रतिबंधन एंजाइमों द्वारा काटकर वेक्टर डीएनए में जोड़ा जाता है। डीएनए लाइगेज़ इस जोड़ने की प्रक्रिया को पूर्ण करता है। इस प्रकार निर्मित डीएनए को पुनर्संयोजित डीएनए कहते हैं। इसका उपयोग मानव इंसुलिन, वैक्सीन तथा अन्य उपयोगी जैव उत्पादों के निर्माण में किया जाता है।
16. चयन सूचक (Selectable Marker) क्या है?
उत्तर:
चयन सूचक ऐसे जीन होते हैं जो परिवर्तित तथा अपरिवर्तित कोशिकाओं में अंतर करने में सहायता करते हैं। सामान्यतः ये एंटीबायोटिक प्रतिरोध जीन होते हैं। जब पुनर्संयोजित प्लाज्मिड कोशिका में प्रवेश करता है, तब कोशिका विशेष एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधी बन जाती है। ऐसी कोशिकाओं को आसानी से पहचाना और अलग किया जा सकता है। pBR322 में एम्पिसिलिन तथा टेट्रासाइक्लिन प्रतिरोध जीन चयन सूचक के रूप में कार्य करते हैं।
17. Origin of Replication (Ori) का महत्व लिखिए।
उत्तर:
Origin of Replication (Ori) वह विशिष्ट स्थान है जहाँ से डीएनए की प्रतिकृति प्रारंभ होती है। क्लोनिंग वेक्टर में Ori का होना आवश्यक है क्योंकि यही वेक्टर को पोषक कोशिका के भीतर प्रतिकृति बनाने में सक्षम बनाता है। Ori की सहायता से विदेशी जीन की भी अनेक प्रतियाँ बनती हैं। यदि वेक्टर में Ori उपस्थित न हो तो डीएनए का गुणन संभव नहीं होगा। इसलिए यह किसी भी क्लोनिंग वेक्टर का आवश्यक घटक है।
18. Chitinase का उपयोग किस कार्य में किया जाता है?
उत्तर:
Chitinase एक एंजाइम है जो काइटिन का अपघटन करता है। काइटिन कवकों की कोशिका भित्ति का मुख्य घटक होता है। पुनर्संयोजित डीएनए तकनीक में कवकीय कोशिकाओं से डीएनए पृथक करने के लिए Chitinase का उपयोग किया जाता है। यह कोशिका भित्ति को तोड़कर डीएनए को मुक्त कर देता है। इस प्रकार डीएनए पृथक्करण की प्रक्रिया सरल और प्रभावी बन जाती है। जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाओं में इसका व्यापक उपयोग होता है।
19. प्लाज्मिड क्या है?
उत्तर:
प्लाज्मिड जीवाणुओं में पाया जाने वाला छोटा, वृत्ताकार एवं द्विसूत्री डीएनए अणु है जो मुख्य गुणसूत्र से स्वतंत्र रूप से प्रतिकृति बनाता है। प्लाज्मिड में प्रायः एंटीबायोटिक प्रतिरोध जीन उपस्थित होते हैं। जैव प्रौद्योगिकी में इन्हें क्लोनिंग वेक्टर के रूप में प्रयोग किया जाता है क्योंकि इनमें विदेशी डीएनए आसानी से जोड़ा जा सकता है। pBR322 तथा pUC19 इसके प्रमुख उदाहरण हैं। प्लाज्मिड आनुवंशिक अभियांत्रिकी का एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
20. पुनर्संयोजित डीएनए तकनीक के प्रमुख चरण लिखिए।
उत्तर:
पुनर्संयोजित डीएनए तकनीक में कई क्रमिक चरण शामिल होते हैं। सबसे पहले इच्छित जीन तथा वेक्टर डीएनए को पृथक किया जाता है। इसके बाद प्रतिबंधन एंजाइमों द्वारा दोनों को काटा जाता है। डीएनए लाइगेज़ की सहायता से इच्छित जीन को वेक्टर में जोड़कर पुनर्संयोजित डीएनए बनाया जाता है। फिर इसे सक्षम पोषक कोशिका में प्रविष्ट कराया जाता है। परिवर्तित कोशिकाओं का चयन कर उनकी वृद्धि कराई जाती है तथा अंत में इच्छित उत्पाद प्राप्त किया जाता है। यही आधुनिक आनुवंशिक अभियांत्रिकी की मूल प्रक्रिया है।
