CBSE कक्षा 12 जीवविज्ञान (2026-27)
अध्याय 8 – सूक्ष्मजीव मानव कल्याण में (Microbes in Human Welfare)
20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
1. सूक्ष्मजीवों का मानव कल्याण में क्या महत्व है?
उत्तर:
सूक्ष्मजीव मानव जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनका उपयोग खाद्य पदार्थों के निर्माण, औद्योगिक उत्पादों के उत्पादन, अपशिष्ट जल शोधन, जैव उर्वरकों तथा जैव नियंत्रण एजेंटों के रूप में किया जाता है। लैक्टिक अम्ल जीवाणु दूध को दही में परिवर्तित करते हैं, जबकि यीस्ट का उपयोग ब्रेड तथा मदिरा निर्माण में होता है। कुछ सूक्ष्मजीव एंटीबायोटिक, एंजाइम तथा कार्बनिक अम्लों का उत्पादन करते हैं। कृषि में जैव उर्वरक और जैव नियंत्रण एजेंट पर्यावरण-अनुकूल विकल्प प्रदान करते हैं। इस प्रकार सूक्ष्मजीव मानव स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग तथा पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
2. लैक्टिक अम्ल जीवाणु (LAB) दूध को दही में कैसे परिवर्तित करते हैं?
उत्तर:
लैक्टिक अम्ल जीवाणु (LAB), जैसे Lactobacillus, दूध में उपस्थित लैक्टोज को लैक्टिक अम्ल में परिवर्तित करते हैं। इस अम्ल के कारण दूध के प्रोटीन जम जाते हैं और दही बनता है। दही का पोषण मूल्य दूध की तुलना में अधिक होता है क्योंकि इसमें विटामिन B₁₂ की मात्रा बढ़ जाती है। LAB मानव आंत्र में लाभकारी जीवाणुओं की संख्या बढ़ाकर रोगजनक सूक्ष्मजीवों को नियंत्रित करते हैं। इसलिए दही केवल पौष्टिक भोजन ही नहीं बल्कि एक प्राकृतिक प्रोबायोटिक भी है जो पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में सहायता करता है।
3. इडली और डोसा के निर्माण में सूक्ष्मजीवों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इडली और डोसा के घोल को कुछ घंटों तक रखा जाता है जिससे उसमें किण्वन (Fermentation) होता है। यह प्रक्रिया मुख्यतः जीवाणुओं द्वारा सम्पन्न होती है। किण्वन के दौरान सूक्ष्मजीव कार्बन डाइऑक्साइड तथा अन्य पदार्थ उत्पन्न करते हैं जिससे घोल फूल जाता है और मुलायम बनता है। इस प्रक्रिया से भोजन का स्वाद, सुगंध तथा पाचन क्षमता बढ़ जाती है। किण्वित खाद्य पदार्थों में पोषक तत्वों की उपलब्धता भी बढ़ती है। इसलिए इडली और डोसा जैसे खाद्य पदार्थों के निर्माण में सूक्ष्मजीवों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
4. यीस्ट द्वारा ब्रेड निर्माण की प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर:
ब्रेड निर्माण में Saccharomyces cerevisiae नामक यीस्ट का उपयोग किया जाता है। यह आटे में उपस्थित शर्करा का किण्वन करके कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न करता है। गैस के बुलबुले आटे को फुला देते हैं, जिससे ब्रेड नरम और स्पंजी बनती है। किण्वन के दौरान कुछ कार्बनिक यौगिक भी बनते हैं जो ब्रेड को विशिष्ट स्वाद और सुगंध प्रदान करते हैं। बेकिंग के समय यीस्ट नष्ट हो जाता है, परंतु उसके द्वारा उत्पन्न गैस के कारण ब्रेड का आकार बना रहता है। यह सूक्ष्मजीवों के उपयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
5. औद्योगिक उत्पादन में किण्वक (Fermentor) का क्या महत्व है?
उत्तर:
किण्वक बड़े आकार के विशेष पात्र होते हैं जिनमें सूक्ष्मजीवों को नियंत्रित परिस्थितियों में विकसित किया जाता है। इनमें तापमान, pH, ऑक्सीजन तथा पोषक तत्वों की उचित व्यवस्था होती है। किण्वकों का उपयोग एंटीबायोटिक, एंजाइम, जैव सक्रिय अणुओं तथा अल्कोहल जैसे उत्पादों के बड़े पैमाने पर उत्पादन हेतु किया जाता है। नियंत्रित वातावरण के कारण उत्पाद की गुणवत्ता तथा मात्रा दोनों में वृद्धि होती है। आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी उद्योगों में किण्वकों का विशेष महत्व है क्योंकि इनके बिना बड़े स्तर पर सूक्ष्मजीवी उत्पादों का निर्माण संभव नहीं है।
6. प्रतिजैविक (Antibiotics) क्या हैं? पेनिसिलिन का उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
प्रतिजैविक ऐसे रासायनिक पदार्थ हैं जो रोगजनक सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकते हैं या उन्हें नष्ट कर देते हैं। पेनिसिलिन पहला खोजा गया प्रतिजैविक है जिसे Penicillium नामक कवक से प्राप्त किया गया था। इसकी खोज 1928 में Alexander Fleming ने की थी। पेनिसिलिन अनेक जीवाणुजनित रोगों के उपचार में प्रभावी सिद्ध हुई। प्रतिजैविकों ने चिकित्सा विज्ञान में क्रांति ला दी और संक्रामक रोगों से होने वाली मृत्यु दर को काफी कम किया। वर्तमान में विभिन्न सूक्ष्मजीवों से अनेक प्रकार की प्रतिजैविक दवाएँ प्राप्त की जाती हैं।
7. स्ट्रेप्टोकाइनेज का चिकित्सीय महत्व बताइए।
उत्तर:
स्ट्रेप्टोकाइनेज एक जैव सक्रिय अणु है जो Streptococcus जीवाणु द्वारा उत्पन्न किया जाता है। इसका उपयोग रक्त वाहिकाओं में बने थक्कों को घोलने के लिए किया जाता है। हृदयाघात (Heart Attack) के रोगियों में यह दवा विशेष रूप से उपयोगी होती है क्योंकि यह रक्त प्रवाह को पुनः सामान्य बनाने में सहायता करती है। स्ट्रेप्टोकाइनेज को “Clot Buster” भी कहा जाता है। आधुनिक चिकित्सा में इसका व्यापक उपयोग किया जाता है और यह सूक्ष्मजीवों से प्राप्त महत्वपूर्ण चिकित्सीय उत्पादों में से एक है।
8. साइक्लोस्पोरिन-A क्या है और इसका उपयोग कहाँ किया जाता है?
उत्तर:
साइक्लोस्पोरिन-A एक जैव सक्रिय अणु है जो Trichoderma polysporum नामक कवक से प्राप्त किया जाता है। यह एक प्रतिरक्षा-दमनकारी (Immunosuppressive) औषधि है। इसका उपयोग अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplantation) के बाद रोगी के शरीर द्वारा प्रत्यारोपित अंग को अस्वीकार करने की संभावना को कम करने के लिए किया जाता है। यह प्रतिरक्षा तंत्र की गतिविधि को नियंत्रित करता है। आधुनिक चिकित्सा में किडनी, लिवर तथा हृदय प्रत्यारोपण के बाद इस औषधि का व्यापक उपयोग किया जाता है।
9. स्टेटिन (Statins) क्या हैं?
उत्तर:
स्टेटिन ऐसे जैव सक्रिय पदार्थ हैं जो रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने में सहायता करते हैं। इनका उत्पादन Monascus purpureus नामक यीस्ट द्वारा किया जाता है। स्टेटिन एंजाइम HMG-CoA रिडक्टेज की क्रिया को रोकते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल संश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। परिणामस्वरूप रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर घटता है और हृदय रोगों का जोखिम कम होता है। इसलिए स्टेटिन आधुनिक चिकित्सा में व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली महत्वपूर्ण औषधियाँ हैं।
10. मल-जल (Sewage) उपचार में सूक्ष्मजीवों की भूमिका बताइए।
उत्तर:
मल-जल उपचार में सूक्ष्मजीव कार्बनिक अपशिष्टों को विघटित करके जल को शुद्ध बनाते हैं। प्राथमिक उपचार के बाद मल-जल को वातित टैंकों में भेजा जाता है जहाँ जीवाणु और कवक कार्बनिक पदार्थों का अपघटन करते हैं। इनके समूह को फ्लॉक (Floc) कहा जाता है। ये सूक्ष्मजीव जैविक ऑक्सीजन माँग (BOD) को कम करते हैं। इसके बाद अवायवीय पाचन में अन्य सूक्ष्मजीव शेष पदार्थों को विघटित करते हैं। इस प्रकार सूक्ष्मजीव प्रदूषण नियंत्रण तथा स्वच्छ पर्यावरण बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
11. BOD क्या है? इसका महत्व बताइए।
उत्तर:
BOD (Biochemical Oxygen Demand) अर्थात जैविक ऑक्सीजन माँग, जल में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों को विघटित करने के लिए सूक्ष्मजीवों द्वारा आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा है। यदि BOD अधिक हो तो इसका अर्थ है कि जल में कार्बनिक प्रदूषण अधिक है। मल-जल उपचार का मुख्य उद्देश्य BOD को कम करना होता है। उपचारित जल का BOD कम होने पर वह पर्यावरण में छोड़ने योग्य माना जाता है। इसलिए BOD जल की गुणवत्ता तथा प्रदूषण स्तर का महत्वपूर्ण सूचक है।
12. फ्लॉक (Floc) क्या होते हैं?
उत्तर:
फ्लॉक जीवाणुओं, कवकों तथा अन्य सूक्ष्मजीवों के समूह होते हैं जो श्लेष्मा (Mucus) से जुड़े रहते हैं। ये मल-जल उपचार संयंत्रों के वातित टैंकों में बनते हैं। फ्लॉक कार्बनिक अपशिष्ट पदार्थों का अपघटन करके जल की BOD कम करते हैं। इनके निर्माण से जल की शुद्धि प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो जाती है। जब फ्लॉक पर्याप्त मात्रा में बन जाते हैं तो उन्हें अवसादन टैंक में भेजा जाता है, जहाँ वे नीचे बैठ जाते हैं और सक्रिय अवमल (Activated Sludge) बनाते हैं।
13. बायोगैस क्या है?
उत्तर:
बायोगैस एक ज्वलनशील गैस मिश्रण है जो कार्बनिक अपशिष्टों के अवायवीय अपघटन से उत्पन्न होता है। इसमें मुख्यतः मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड तथा थोड़ी मात्रा में हाइड्रोजन सल्फाइड होती है। इसका उत्पादन मीथेनोजेन जीवाणुओं द्वारा किया जाता है। बायोगैस का उपयोग ईंधन के रूप में खाना पकाने, प्रकाश तथा बिजली उत्पादन में किया जाता है। यह नवीकरणीय ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है तथा पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में सहायक है।
14. मीथेनोजेन क्या हैं?
उत्तर:
मीथेनोजेन ऐसे अवायवीय सूक्ष्मजीव हैं जो कार्बनिक पदार्थों के अपघटन के दौरान मीथेन गैस उत्पन्न करते हैं। Methanobacterium इसका प्रमुख उदाहरण है। ये दलदली क्षेत्रों, गोबर तथा जुगाली करने वाले पशुओं के रूमेन में पाए जाते हैं। बायोगैस संयंत्रों में मीथेनोजेन कार्बनिक अपशिष्टों को विघटित करके बायोगैस उत्पन्न करते हैं। इनके कारण ऊर्जा उत्पादन संभव होता है तथा अपशिष्ट पदार्थों का उपयोगी रूपांतरण किया जा सकता है।
15. जैव नियंत्रण (Biocontrol) क्या है?
उत्तर:
जैव नियंत्रण वह विधि है जिसमें कीटों, रोगों और खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए जीवित जीवों या उनके उत्पादों का उपयोग किया जाता है। यह रासायनिक कीटनाशकों का पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है। जैव नियंत्रण एजेंट प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं तथा मिट्टी और जल प्रदूषण को कम करते हैं। इससे लाभकारी जीवों को कम नुकसान पहुँचता है। आधुनिक सतत कृषि में जैव नियंत्रण का महत्व तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि यह सुरक्षित तथा टिकाऊ कृषि पद्धति को प्रोत्साहित करता है।
16. बैसिलस थुरिन्जिएन्सिस (Bt) का महत्व बताइए।
उत्तर:
Bacillus thuringiensis (Bt) एक जीवाणु है जिसका उपयोग जैव नियंत्रण एजेंट के रूप में किया जाता है। यह विशेष प्रकार का विषाक्त प्रोटीन बनाता है जो कुछ कीटों के लार्वा को नष्ट कर देता है। Bt आधारित जैव कीटनाशक पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित होते हैं क्योंकि वे लक्षित कीटों पर ही प्रभाव डालते हैं। कृषि में इसका उपयोग रासायनिक कीटनाशकों की आवश्यकता कम करता है तथा फसलों की सुरक्षा में सहायता करता है।
17. बेकुलोवायरस (Baculovirus) का उपयोग बताइए।
उत्तर:
बेकुलोवायरस ऐसे विषाणु हैं जिनका उपयोग कीट नियंत्रण के लिए किया जाता है। ये केवल विशेष कीटों को संक्रमित करते हैं और मनुष्यों, पौधों तथा अन्य लाभकारी जीवों को हानि नहीं पहुँचाते। इसलिए इन्हें पर्यावरण-अनुकूल जैव नियंत्रण एजेंट माना जाता है। कृषि में इनके उपयोग से रासायनिक कीटनाशकों की मात्रा कम होती है और जैव विविधता सुरक्षित रहती है। सतत कृषि प्रणाली में बेकुलोवायरस का महत्व निरंतर बढ़ रहा है।
18. जैव उर्वरक (Biofertilizers) क्या हैं?
उत्तर:
जैव उर्वरक ऐसे सूक्ष्मजीव हैं जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं और पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं। ये रासायनिक उर्वरकों के प्राकृतिक विकल्प हैं। जैव उर्वरक नाइट्रोजन स्थिरीकरण, फॉस्फेट घुलनशीलता तथा पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने का कार्य करते हैं। इनके उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है तथा पर्यावरण प्रदूषण कम होता है। सतत कृषि और जैविक खेती में इनका विशेष महत्व है।
19. राइजोबियम (Rhizobium) का कृषि में क्या महत्व है?
उत्तर:
Rhizobium एक नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाला जीवाणु है जो दलहनी पौधों की जड़ों में गांठें बनाकर रहता है। यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पौधों द्वारा उपयोग योग्य यौगिकों में परिवर्तित करता है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और रासायनिक नाइट्रोजन उर्वरकों की आवश्यकता कम हो जाती है। यह सहजीवी संबंध पौधे और जीवाणु दोनों के लिए लाभदायक होता है। कृषि उत्पादन बढ़ाने तथा टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में इसका महत्वपूर्ण योगदान है।
20. माइकोराइजा (Mycorrhiza) क्या है? इसके लाभ लिखिए।
उत्तर:
माइकोराइजा कवक और पौधों की जड़ों के बीच पाया जाने वाला सहजीवी संबंध है। इसमें कवक जड़ों के साथ जुड़कर जल तथा खनिज लवणों के अवशोषण में सहायता करता है। बदले में पौधा कवक को भोजन प्रदान करता है। माइकोराइजा पौधों की वृद्धि बढ़ाने, रोग प्रतिरोधकता सुधारने तथा सूखा सहनशीलता बढ़ाने में सहायक है। यह फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्वों के अवशोषण को भी बढ़ाता है। इसलिए इसे महत्वपूर्ण जैव उर्वरक माना जाता है।
