CBSE कक्षा 12 जीवविज्ञान (Biology)

अध्याय 6 : विकास (Evolution)

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

1. जैविक विकास (Evolution) क्या है?

उत्तर:
जैविक विकास वह क्रमिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीवों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी परिवर्तन होते हैं और नए जीवों की उत्पत्ति होती है। विकास के कारण जीव अपने पर्यावरण के अनुसार अनुकूलित होते हैं। यह प्रक्रिया लाखों वर्षों तक चलती है। विकास के प्रमुख स्रोत आनुवंशिक विविधता, उत्परिवर्तन, प्राकृतिक वरण तथा आनुवंशिक बहाव हैं। विकास के प्रमाण जीवाश्म, तुलनात्मक शरीर रचना, भ्रूणीय अध्ययन तथा आणविक जीवविज्ञान से प्राप्त होते हैं। विकास यह दर्शाता है कि वर्तमान जीवों का उद्भव पूर्वज जीवों से हुआ है और सभी जीव किसी न किसी स्तर पर एक-दूसरे से संबंधित हैं।


2. लैमार्कवाद (Lamarckism) की व्याख्या कीजिए।

उत्तर:
लैमार्क ने विकास का सिद्धांत प्रस्तुत करते हुए कहा कि जीव अपने जीवनकाल में अर्जित लक्षणों को अपनी संतानों में स्थानांतरित करते हैं। इसे “अर्जित गुणों की वंशागति” कहा जाता है। उदाहरण के लिए, लैमार्क के अनुसार जिराफ़ ने ऊँचे वृक्षों की पत्तियाँ खाने के लिए अपनी गर्दन को लगातार फैलाया, जिससे उसकी गर्दन लंबी हो गई और यह गुण अगली पीढ़ियों में स्थानांतरित होता गया। यद्यपि आधुनिक आनुवंशिकी ने इस सिद्धांत को स्वीकार नहीं किया, फिर भी विकास संबंधी विचारों को आगे बढ़ाने में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा। लैमार्कवाद विकास के प्रारंभिक सिद्धांतों में से एक माना जाता है।


3. डार्विन के प्राकृतिक वरण (Natural Selection) सिद्धांत का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
चार्ल्स डार्विन ने प्राकृतिक वरण का सिद्धांत प्रस्तुत किया। उनके अनुसार जीवों में प्राकृतिक रूप से विविधताएँ पाई जाती हैं। संसाधनों की सीमित उपलब्धता के कारण जीवों के बीच अस्तित्व के लिए संघर्ष होता है। जो जीव पर्यावरण के प्रति अधिक अनुकूलित होते हैं, वे जीवित रहते हैं और प्रजनन करते हैं। उनके लाभकारी लक्षण अगली पीढ़ियों में स्थानांतरित हो जाते हैं। समय के साथ ऐसे लक्षण जनसंख्या में बढ़ते जाते हैं और नई प्रजातियों का निर्माण हो सकता है। इस सिद्धांत को “योग्यतम की उत्तरजीविता” भी कहा जाता है। यह आधुनिक विकासवाद का आधार माना जाता है।


4. जीवाश्म (Fossils) विकास के प्रमाण कैसे हैं?

उत्तर:
जीवाश्म प्राचीन जीवों के संरक्षित अवशेष या छाप होते हैं, जो चट्टानों में पाए जाते हैं। वे पृथ्वी पर जीवन के इतिहास का अध्ययन करने में सहायता करते हैं। जीवाश्मों से ज्ञात होता है कि समय के साथ जीवों में परिवर्तन हुए हैं। विभिन्न भूवैज्ञानिक स्तरों में पाए गए जीवाश्म विकास की क्रमिक प्रक्रिया को दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, घोड़े के जीवाश्म उसके आकार और संरचना में हुए क्रमिक परिवर्तनों को प्रदर्शित करते हैं। जीवाश्मों के अध्ययन से विलुप्त प्रजातियों तथा वर्तमान जीवों के बीच संबंध स्थापित किया जा सकता है। इसलिए जीवाश्म विकास के महत्वपूर्ण प्रमाण माने जाते हैं।


5. समजात अंग (Homologous Organs) क्या हैं?

उत्तर:
समजात अंग वे अंग होते हैं जिनकी मूल संरचना और भ्रूणीय उत्पत्ति समान होती है, लेकिन उनके कार्य अलग-अलग हो सकते हैं। ये अंग समान पूर्वज की ओर संकेत करते हैं और अपसारी विकास (Divergent Evolution) का प्रमाण हैं। उदाहरण के लिए, मनुष्य का हाथ, व्हेल का फ्लिपर, घोड़े का अग्रपाद तथा चमगादड़ का पंख संरचनात्मक रूप से समान होते हैं, परंतु उनके कार्य भिन्न होते हैं। समजात अंग यह सिद्ध करते हैं कि विभिन्न जीवों का विकास किसी सामान्य पूर्वज से हुआ है। अतः ये विकासवाद के महत्वपूर्ण संरचनात्मक प्रमाण हैं।


6. समरूप अंग (Analogous Organs) क्या हैं?

उत्तर:
समरूप अंग वे अंग होते हैं जिनके कार्य समान होते हैं, लेकिन उनकी संरचना और उत्पत्ति भिन्न होती है। ये अभिसारी विकास (Convergent Evolution) के उदाहरण हैं। उदाहरण के लिए, पक्षियों के पंख और तितली के पंख दोनों उड़ने का कार्य करते हैं, किंतु उनकी संरचना और विकासात्मक उत्पत्ति अलग होती है। इसी प्रकार डॉल्फिन और शार्क का शरीर आकार में समान दिखाई देता है, परंतु उनका विकास अलग-अलग समूहों से हुआ है। समरूप अंग यह दर्शाते हैं कि समान पर्यावरणीय परिस्थितियों में अलग-अलग जीव समान प्रकार के अनुकूलन विकसित कर सकते हैं।


7. आणविक विकास (Molecular Evolution) क्या है?

उत्तर:
आणविक विकास जीवों के डीएनए, आरएनए और प्रोटीनों में समय के साथ होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन है। विभिन्न जीवों के जीन और प्रोटीनों की तुलना करके उनके विकासात्मक संबंधों का पता लगाया जाता है। उदाहरण के लिए, मनुष्य और चिंपैंजी के डीएनए में अत्यधिक समानता पाई जाती है, जो उनके निकट संबंध को दर्शाती है। आणविक जीवविज्ञान ने विकासवाद के लिए सशक्त प्रमाण प्रदान किए हैं। इससे यह भी सिद्ध हुआ है कि सभी जीवों का आनुवंशिक आधार समान है और उनका विकास किसी सामान्य पूर्वज से हुआ है।


8. हार्डी-वीनबर्ग सिद्धांत क्या है?

उत्तर:
हार्डी-वीनबर्ग सिद्धांत के अनुसार यदि किसी जनसंख्या में उत्परिवर्तन, प्राकृतिक वरण, प्रवास, आनुवंशिक बहाव तथा लैंगिक चयन जैसे कारक कार्य नहीं करते, तो जीन आवृत्ति पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थिर बनी रहती है। इसे आनुवंशिक संतुलन कहा जाता है। इस सिद्धांत का गणितीय रूप p² + 2pq + q² = 1 है। यदि जीन आवृत्ति में परिवर्तन होता है, तो यह विकास का संकेत माना जाता है। यह सिद्धांत विकासीय परिवर्तनों को समझने तथा जनसंख्या आनुवंशिकी के अध्ययन में अत्यंत उपयोगी है।


9. आनुवंशिक बहाव (Genetic Drift) क्या है?

उत्तर:
आनुवंशिक बहाव वह प्रक्रिया है जिसमें किसी छोटी जनसंख्या में संयोगवश जीन आवृत्तियों में परिवर्तन हो जाता है। यह परिवर्तन प्राकृतिक वरण के कारण नहीं बल्कि आकस्मिक घटनाओं के कारण होता है। छोटी आबादी में इसका प्रभाव अधिक देखा जाता है। आनुवंशिक बहाव के कारण कुछ जीन पूरी तरह समाप्त हो सकते हैं या अत्यधिक बढ़ सकते हैं। “संस्थापक प्रभाव” (Founder Effect) तथा “बॉटलनेक प्रभाव” इसके प्रमुख उदाहरण हैं। यह प्रक्रिया नई प्रजातियों के निर्माण और जनसंख्या में आनुवंशिक विविधता को प्रभावित कर सकती है।


10. उत्परिवर्तन (Mutation) विकास में कैसे सहायक है?

उत्तर:
उत्परिवर्तन जीन या गुणसूत्रों में होने वाला स्थायी परिवर्तन है। यह नई आनुवंशिक विविधता उत्पन्न करता है, जो विकास का मूल आधार है। अधिकांश उत्परिवर्तन तटस्थ या हानिकारक हो सकते हैं, लेकिन कुछ लाभकारी उत्परिवर्तन जीवों को पर्यावरण के प्रति बेहतर अनुकूलन प्रदान करते हैं। प्राकृतिक वरण ऐसे लाभकारी परिवर्तनों को चुनता है और उन्हें जनसंख्या में बढ़ावा देता है। समय के साथ इन परिवर्तनों के संचय से नई प्रजातियों का विकास हो सकता है। इसलिए उत्परिवर्तन को विकास का महत्वपूर्ण कच्चा माल माना जाता है।


11. कृत्रिम वरण (Artificial Selection) क्या है?

उत्तर:
कृत्रिम वरण वह प्रक्रिया है जिसमें मनुष्य अपनी आवश्यकताओं के अनुसार वांछित गुणों वाले जीवों का चयन करके उनका प्रजनन कराता है। उदाहरण के लिए, उच्च दूध उत्पादन वाली गायों, अधिक उपज देने वाली फसलों तथा विभिन्न नस्लों के कुत्तों का विकास कृत्रिम वरण द्वारा किया गया है। यह प्रक्रिया प्राकृतिक वरण से भिन्न है क्योंकि इसमें चयन का कार्य प्रकृति नहीं बल्कि मनुष्य करता है। कृत्रिम वरण यह सिद्ध करता है कि चयन के माध्यम से जीवों में परिवर्तन संभव है और यही विचार डार्विन के प्राकृतिक वरण सिद्धांत को समझने में सहायक बना।


12. औद्योगिक अतिकृष्णता (Industrial Melanism) क्या है?

उत्तर:
औद्योगिक अतिकृष्णता प्राकृतिक वरण का एक प्रसिद्ध उदाहरण है। इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति से पहले हल्के रंग के पेपरड मॉथ अधिक पाए जाते थे क्योंकि वे पेड़ों की छाल पर आसानी से छिप जाते थे। औद्योगिक प्रदूषण के कारण पेड़ों की छाल काली हो गई, जिससे गहरे रंग के मॉथ को संरक्षण मिलने लगा। परिणामस्वरूप उनकी संख्या बढ़ गई जबकि हल्के रंग के मॉथ कम हो गए। बाद में प्रदूषण कम होने पर फिर से हल्के रंग के मॉथ की संख्या बढ़ने लगी। यह घटना प्राकृतिक वरण के प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।


13. अनुकूली विकिरण (Adaptive Radiation) क्या है?

उत्तर:
अनुकूली विकिरण वह प्रक्रिया है जिसमें एक सामान्य पूर्वज से अनेक नई प्रजातियाँ विकसित होती हैं, जो विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलित होती हैं। इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण डार्विन के फिंच पक्षी हैं, जो गलापागोस द्वीपों पर पाए जाते हैं। विभिन्न द्वीपों में उपलब्ध भोजन के अनुसार उनकी चोंच के आकार और संरचना में विविधता विकसित हुई। इसी प्रकार ऑस्ट्रेलिया के मार्सुपियल स्तनधारी भी अनुकूली विकिरण का उदाहरण हैं। यह प्रक्रिया दर्शाती है कि एक ही पूर्वज से विभिन्न पर्यावरणीय दबावों के कारण कई नई प्रजातियाँ विकसित हो सकती हैं।


14. मानव विकास का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर:
मानव विकास की प्रक्रिया करोड़ों वर्षों में हुई। प्रारंभिक प्राइमेट्स से विकसित होकर ड्रायोपिथेकस और रामापिथेकस जैसे पूर्वज उत्पन्न हुए। इनके बाद ऑस्ट्रेलोपिथेकस, होमो हैबिलिस, होमो इरेक्टस और निएंडरथल मानव का विकास हुआ। अंततः लगभग 2 लाख वर्ष पूर्व आधुनिक मानव अर्थात होमो सेपियन्स का उद्भव हुआ। विकास के दौरान मस्तिष्क का आकार बढ़ा, सीधा चलना विकसित हुआ तथा उपकरणों का उपयोग शुरू हुआ। मानव विकास के अध्ययन में जीवाश्मों और आणविक प्रमाणों का महत्वपूर्ण योगदान है। यह प्रक्रिया विकासवाद के सबसे महत्वपूर्ण उदाहरणों में से एक है।


15. अस्तित्व के लिए संघर्ष (Struggle for Existence) क्या है?

उत्तर:
डार्विन के अनुसार पृथ्वी पर संसाधन सीमित हैं, जबकि जीवों की संख्या तेजी से बढ़ती है। इसलिए भोजन, स्थान, जल और साथी प्राप्त करने के लिए जीवों के बीच संघर्ष होता है। यह संघर्ष तीन प्रकार का हो सकता है—अंतःप्रजातीय, अंतरप्रजातीय और पर्यावरणीय संघर्ष। जो जीव पर्यावरण के अनुकूल होते हैं, उनके जीवित रहने और प्रजनन की संभावना अधिक होती है। इस प्रकार लाभकारी गुणों वाले जीव अगली पीढ़ी में अधिक संख्या में पाए जाते हैं। अस्तित्व के लिए संघर्ष प्राकृतिक वरण की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार है।


16. जैव-भौगोलिक प्रमाण (Biogeographical Evidence) क्या हैं?

उत्तर:
जैव-भौगोलिक अध्ययन विभिन्न क्षेत्रों में जीवों के वितरण का अध्ययन करता है। विभिन्न महाद्वीपों पर पाए जाने वाले जीवों की समानता और भिन्नता विकास के महत्वपूर्ण प्रमाण प्रदान करती है। उदाहरण के लिए, ऑस्ट्रेलिया में मार्सुपियल स्तनधारियों की अधिकता तथा अन्य महाद्वीपों में उनकी अनुपस्थिति विकासात्मक इतिहास को दर्शाती है। गलापागोस द्वीपों के फिंच पक्षियों में पाई जाने वाली विविधता भी इसका उदाहरण है। जैव-भौगोलिक प्रमाण यह दर्शाते हैं कि भौगोलिक अलगाव नई प्रजातियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और विकास को प्रभावित करता है।


17. अपसारी विकास (Divergent Evolution) क्या है?

उत्तर:
अपसारी विकास वह प्रक्रिया है जिसमें एक सामान्य पूर्वज से विभिन्न प्रजातियाँ विकसित होती हैं और समय के साथ उनकी संरचना तथा कार्यों में भिन्नता आ जाती है। यह प्रक्रिया समजात अंगों द्वारा प्रदर्शित होती है। उदाहरण के लिए, मनुष्य का हाथ, चमगादड़ का पंख, व्हेल का फ्लिपर और घोड़े का अग्रपाद समान पूर्वज से विकसित हुए हैं, लेकिन उनके कार्य अलग-अलग हैं। अपसारी विकास यह दर्शाता है कि विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियाँ जीवों को अलग-अलग दिशाओं में विकसित होने के लिए प्रेरित करती हैं। यह विकासवाद का महत्वपूर्ण प्रमाण है।


18. अभिसारी विकास (Convergent Evolution) क्या है?

उत्तर:
अभिसारी विकास वह प्रक्रिया है जिसमें असंबंधित जीव समान पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण समान प्रकार के लक्षण विकसित कर लेते हैं। इससे समरूप अंगों का निर्माण होता है। उदाहरण के लिए, पक्षियों और कीटों के पंख तथा डॉल्फिन और शार्क का सुव्यवस्थित शरीर अभिसारी विकास के उदाहरण हैं। इन जीवों की उत्पत्ति अलग-अलग पूर्वजों से हुई है, लेकिन समान जीवन-शैली और पर्यावरण के कारण इनमें समान विशेषताएँ विकसित हुई हैं। यह प्रक्रिया दर्शाती है कि प्राकृतिक वरण विभिन्न जीव समूहों में समान प्रकार के अनुकूलन उत्पन्न कर सकता है।


19. प्रजातिकरण (Speciation) क्या है?

उत्तर:
प्रजातिकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा नई प्रजातियों का निर्माण होता है। यह तब होता है जब किसी जनसंख्या के समूहों के बीच प्रजनन संबंध समाप्त हो जाते हैं और उनमें आनुवंशिक अंतर बढ़ने लगते हैं। भौगोलिक अलगाव, उत्परिवर्तन, प्राकृतिक वरण तथा आनुवंशिक बहाव इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समय के साथ ये समूह इतने भिन्न हो जाते हैं कि वे आपस में सफल प्रजनन नहीं कर पाते। इस प्रकार नई प्रजातियों का निर्माण होता है। प्रजातिकरण विकास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना जाता है।


20. विकासवाद में डीएनए अध्ययन का महत्व बताइए।

उत्तर:
डीएनए अध्ययन ने विकासवाद को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया है। विभिन्न जीवों के डीएनए अनुक्रमों की तुलना करके उनके विकासीय संबंधों का पता लगाया जाता है। जिन जीवों के डीएनए में अधिक समानता होती है, उनका विकासीय संबंध अधिक निकट माना जाता है। उदाहरण के लिए, मनुष्य और चिंपैंजी के डीएनए में लगभग 98–99% समानता पाई जाती है। आणविक घड़ी (Molecular Clock) तकनीक द्वारा यह अनुमान लगाया जा सकता है कि दो प्रजातियाँ कब अलग हुई थीं। इसलिए डीएनए विश्लेषण आधुनिक विकासवाद के सबसे सशक्त प्रमाणों में से एक है।