CBSE कक्षा 12 जीवविज्ञान (Biology)
अध्याय 3 – जनन स्वास्थ्य (Reproductive Health)
2026-27 सत्र के अनुसार 20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके उत्तर दिए गए हैं। प्रश्न NCERT आधारित हैं तथा बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। अध्याय में जनन स्वास्थ्य, RCH कार्यक्रम, गर्भनिरोधक विधियाँ, MTP, STDs, अम्नियोसेंटेसिस तथा ART (IVF, ZIFT, GIFT) प्रमुख विषय हैं।
1. जनन स्वास्थ्य (Reproductive Health) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार जनन स्वास्थ्य का अर्थ केवल रोगों की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि प्रजनन से संबंधित शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं सामाजिक कल्याण की पूर्ण अवस्था है। जनन स्वास्थ्य का उद्देश्य व्यक्तियों को सुरक्षित यौन जीवन, स्वस्थ संतानोत्पत्ति तथा परिवार नियोजन संबंधी उचित जानकारी प्रदान करना है। जनन स्वास्थ्य कार्यक्रम समाज में यौन रोगों की रोकथाम, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संरक्षण तथा जनसंख्या नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके माध्यम से लोगों में प्रजनन संबंधी जागरूकता बढ़ती है और स्वस्थ समाज के निर्माण में सहायता मिलती है।
2. RCH कार्यक्रम क्या है? इसके दो प्रमुख उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:
RCH (Reproductive and Child Health) कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया एक स्वास्थ्य कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य जनन स्वास्थ्य और बाल स्वास्थ्य में सुधार करना है। इसके अंतर्गत परिवार नियोजन, सुरक्षित मातृत्व, शिशु देखभाल तथा यौन स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता को बढ़ावा दिया जाता है। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं—
- मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना।
- लोगों को गर्भनिरोधक उपायों एवं यौन रोगों की रोकथाम के बारे में शिक्षित करना।
यह कार्यक्रम स्वस्थ परिवार एवं स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
3. जनसंख्या विस्फोट (Population Explosion) के दो कारण बताइए।
उत्तर:
जनसंख्या विस्फोट से तात्पर्य जनसंख्या में अत्यधिक एवं तीव्र वृद्धि से है। इसके मुख्य कारण हैं—
- चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के कारण मृत्यु दर में कमी।
- जन्म दर का अपेक्षाकृत अधिक होना।
इसके अतिरिक्त बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ, टीकाकरण कार्यक्रम और खाद्य उत्पादन में वृद्धि भी जनसंख्या वृद्धि के लिए उत्तरदायी हैं। जनसंख्या विस्फोट के कारण संसाधनों पर दबाव बढ़ता है तथा बेरोजगारी, गरीबी और पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। इसलिए परिवार नियोजन एवं जनसंख्या नियंत्रण उपायों की आवश्यकता होती है।
4. प्राकृतिक गर्भनिरोधक विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्राकृतिक गर्भनिरोधक विधियाँ वे उपाय हैं जिनमें किसी औषधि या उपकरण का उपयोग नहीं किया जाता। इनमें मुख्यतः—
- Periodic Abstinence – अंडोत्सर्जन अवधि में यौन संबंध न बनाना।
- Withdrawal Method (Coitus Interruptus) – स्खलन से पूर्व लिंग को बाहर निकाल लेना।
- Lactational Amenorrhea – स्तनपान के दौरान अंडोत्सर्जन का अस्थायी रूप से रुक जाना।
इन विधियों में कोई दुष्प्रभाव नहीं होता, परंतु इनकी सफलता दर अन्य गर्भनिरोधक उपायों की तुलना में कम होती है। इसलिए इनका उपयोग सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए।
5. बाधा (Barrier) गर्भनिरोधक विधियों के लाभ लिखिए।
उत्तर:
Barrier विधियों में कंडोम, डायाफ्राम एवं सर्वाइकल कैप का उपयोग किया जाता है। इनके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—
- शुक्राणुओं को अंडाणु तक पहुँचने से रोकते हैं।
- अवांछित गर्भधारण को रोकते हैं।
- HIV/AIDS सहित कई यौन संचारित रोगों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
- उपयोग में सरल एवं सस्ते होते हैं।
- इनसे हार्मोनल दुष्प्रभाव नहीं होते।
विशेष रूप से कंडोम को जनसंख्या नियंत्रण और STD रोकथाम का प्रभावी साधन माना जाता है।
6. IUD (Intra Uterine Device) क्या है? इसके उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
IUD ऐसे गर्भनिरोधक उपकरण हैं जिन्हें गर्भाशय में स्थापित किया जाता है ताकि निषेचन या आरोपण को रोका जा सके। ये शुक्राणुओं की गतिशीलता को कम करते हैं तथा गर्भधारण की संभावना घटाते हैं।
उदाहरण—
- Copper-T
- Cu-7
- Multiload-375
कुछ IUD हार्मोन भी छोड़ते हैं जो गर्भाशय की आंतरिक परत को निषेचन के लिए अनुपयुक्त बना देते हैं। IUD लंबे समय तक प्रभावी रहते हैं तथा महिलाओं में लोकप्रिय गर्भनिरोधक साधन हैं।
7. मौखिक गर्भनिरोधक गोलियाँ कैसे कार्य करती हैं?
उत्तर:
मौखिक गर्भनिरोधक गोलियों में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन होते हैं। ये अंडोत्सर्जन (Ovulation) को रोकती हैं तथा गर्भाशय की आंतरिक परत में ऐसे परिवर्तन उत्पन्न करती हैं जिससे निषेचित अंडाणु का आरोपण नहीं हो पाता। ये गोलियाँ गर्भाशय ग्रीवा के श्लेष्म को भी गाढ़ा कर देती हैं, जिससे शुक्राणुओं का प्रवेश कठिन हो जाता है। नियमित एवं चिकित्सकीय सलाह के अनुसार सेवन करने पर ये अत्यधिक प्रभावी गर्भनिरोधक विधि मानी जाती हैं।
8. नसबंदी (Sterilization) क्या है?
उत्तर:
नसबंदी एक स्थायी गर्भनिरोधक विधि है। पुरुषों में इसे वासेक्टॉमी (Vasectomy) तथा महिलाओं में ट्यूबेक्टॉमी (Tubectomy) कहा जाता है। वासेक्टॉमी में शुक्रवाहिनी (Vas deferens) को काटकर बाँध दिया जाता है, जबकि ट्यूबेक्टॉमी में फैलोपियन नलिकाओं को काटकर बाँधा जाता है। इससे शुक्राणु और अंडाणु का मिलन नहीं हो पाता तथा गर्भधारण रुक जाता है। यह विधि उन दंपत्तियों के लिए उपयुक्त है जो भविष्य में संतान नहीं चाहते।
9. MTP क्या है? इसकी आवश्यकता क्यों पड़ती है?
उत्तर:
MTP (Medical Termination of Pregnancy) का अर्थ चिकित्सकीय रूप से गर्भ का समापन करना है। इसका उपयोग अवांछित गर्भधारण, भ्रूण में गंभीर विकृतियों या माँ के स्वास्थ्य को खतरा होने की स्थिति में किया जाता है। प्रारंभिक गर्भावस्था में प्रशिक्षित चिकित्सकों द्वारा सुरक्षित रूप से MTP किया जा सकता है। यह महिलाओं के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करता है। हालांकि इसका उपयोग केवल वैध एवं चिकित्सकीय कारणों से ही किया जाना चाहिए।
10. अम्नियोसेंटेसिस क्या है? भारत में इसका दुरुपयोग क्यों प्रतिबंधित है?
उत्तर:
अम्नियोसेंटेसिस एक प्रसवपूर्व परीक्षण है जिसमें भ्रूणीय कोशिकाओं का अध्ययन कर आनुवंशिक विकारों का पता लगाया जाता है। पहले इसका उपयोग भ्रूण के लिंग निर्धारण के लिए भी किया जाता था। भारत में कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए लिंग निर्धारण हेतु अम्नियोसेंटेसिस का उपयोग प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह सामाजिक संतुलन बनाए रखने तथा लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त करने के लिए आवश्यक कदम है।
11. STD क्या हैं? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
STD (Sexually Transmitted Diseases) वे रोग हैं जो मुख्यतः यौन संपर्क द्वारा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलते हैं। ये बैक्टीरिया, वायरस या अन्य सूक्ष्मजीवों द्वारा उत्पन्न होते हैं।
उदाहरण—
- गोनोरिया (Gonorrhoea)
- सिफिलिस (Syphilis)
इसके अतिरिक्त HIV/AIDS, जननांग हर्पीज एवं हेपेटाइटिस-B भी महत्वपूर्ण यौन संचारित रोग हैं। समय पर पहचान एवं उपचार से इन रोगों के दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है।
12. HIV संक्रमण से बचाव के उपाय लिखिए।
उत्तर:
HIV संक्रमण से बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाने चाहिए—
- सुरक्षित यौन संबंध एवं कंडोम का प्रयोग।
- संक्रमित रक्त का उपयोग न करना।
- केवल निष्फल (sterilized) सुई एवं सिरिंज का प्रयोग।
- संक्रमित व्यक्ति के रक्त या शारीरिक द्रवों के संपर्क से बचना।
- जागरूकता एवं नियमित स्वास्थ्य परीक्षण।
इन उपायों द्वारा HIV संक्रमण के प्रसार को प्रभावी रूप से रोका जा सकता है तथा समाज को सुरक्षित बनाया जा सकता है।
13. बांझपन (Infertility) क्या है?
उत्तर:
जब कोई दंपत्ति नियमित एवं असुरक्षित यौन संबंध के बावजूद लंबे समय तक संतान उत्पन्न करने में असमर्थ रहता है, तो इस स्थिति को बांझपन या Infertility कहते हैं। इसके कारण पुरुष या महिला दोनों में हो सकते हैं। हार्मोनल असंतुलन, जनन अंगों की विकृतियाँ, संक्रमण तथा आनुवंशिक कारण इसके प्रमुख कारण हैं। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने विभिन्न सहायक प्रजनन तकनीकों (ART) के माध्यम से ऐसे दंपत्तियों को संतान प्राप्ति की आशा प्रदान की है।
14. IVF क्या है?
उत्तर:
IVF (In Vitro Fertilization) एक सहायक प्रजनन तकनीक है जिसमें महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु का निषेचन प्रयोगशाला में कराया जाता है। निषेचित भ्रूण को कुछ समय तक विकसित कर महिला के गर्भाशय में स्थापित कर दिया जाता है। इसे सामान्यतः “टेस्ट-ट्यूब बेबी तकनीक” कहा जाता है। यह उन दंपत्तियों के लिए उपयोगी है जो प्राकृतिक रूप से गर्भधारण नहीं कर पाते हैं।
15. ZIFT और GIFT में अंतर लिखिए।
उत्तर:
ZIFT (Zygote Intra Fallopian Transfer) में प्रयोगशाला में निषेचित युग्मनज (zygote) को फैलोपियन नलिका में स्थानांतरित किया जाता है।
GIFT (Gamete Intra Fallopian Transfer) में अंडाणु और शुक्राणु को सीधे फैलोपियन नलिका में स्थानांतरित किया जाता है जहाँ निषेचन शरीर के अंदर होता है।
दोनों तकनीकें बांझपन के उपचार में उपयोगी हैं, परंतु ZIFT में निषेचन शरीर के बाहर और GIFT में शरीर के भीतर होता है।
16. परिवार नियोजन की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर:
परिवार नियोजन का उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना तथा परिवार के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। इसके माध्यम से माता एवं शिशु के स्वास्थ्य की रक्षा होती है, संसाधनों का उचित उपयोग संभव होता है तथा बच्चों को बेहतर शिक्षा और पोषण मिल पाता है। परिवार नियोजन से जनसंख्या विस्फोट, बेरोजगारी एवं संसाधनों की कमी जैसी समस्याओं को कम करने में सहायता मिलती है। इसलिए यह सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
17. किशोरावस्था में यौन शिक्षा का महत्व बताइए।
उत्तर:
यौन शिक्षा किशोरों को शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तनों की सही जानकारी प्रदान करती है। इससे वे यौन संचारित रोगों, अवांछित गर्भधारण और यौन शोषण जैसी समस्याओं से बच सकते हैं। यौन शिक्षा जिम्मेदार व्यवहार, लैंगिक समानता तथा स्वस्थ सामाजिक संबंधों को बढ़ावा देती है। इसके माध्यम से युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होता है और वे प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी सही निर्णय लेने में सक्षम बनते हैं।
18. कॉपर-टी गर्भनिरोधक के रूप में कैसे कार्य करती है?
उत्तर:
कॉपर-टी एक तांबा युक्त IUD है जिसे गर्भाशय में स्थापित किया जाता है। इससे निकलने वाले तांबे के आयन शुक्राणुओं की गतिशीलता एवं निषेचन क्षमता को कम कर देते हैं। साथ ही यह गर्भाशय में ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न करता है जिससे निषेचित अंडाणु का आरोपण कठिन हो जाता है। यह लंबी अवधि तक प्रभावी रहने वाला, सुरक्षित एवं लोकप्रिय गर्भनिरोधक साधन है।
19. ART (Assisted Reproductive Technologies) का महत्व बताइए।
उत्तर:
ART ऐसी आधुनिक तकनीकों का समूह है जो बांझ दंपत्तियों को संतान प्राप्ति में सहायता प्रदान करती हैं। IVF, ZIFT, GIFT तथा ICSI इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इन तकनीकों द्वारा निषेचन, भ्रूण विकास तथा भ्रूण स्थानांतरण की प्रक्रिया को नियंत्रित किया जाता है। ART ने उन दंपत्तियों के लिए आशा की नई किरण प्रदान की है जो प्राकृतिक रूप से संतान उत्पन्न करने में असमर्थ हैं।
20. यौन संचारित रोगों के प्रारंभिक निदान का महत्व बताइए।
उत्तर:
यौन संचारित रोगों का प्रारंभिक निदान अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि समय पर उपचार से रोग के प्रसार और जटिलताओं को रोका जा सकता है। प्रारंभिक पहचान से रोगी को उचित चिकित्सा मिलती है तथा बांझपन, गर्भावस्था संबंधी समस्याओं और गंभीर संक्रमणों का जोखिम कम होता है। HIV/AIDS जैसे रोगों में शीघ्र निदान रोग नियंत्रण और जीवन गुणवत्ता सुधारने में सहायक होता है। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच और जागरूकता आवश्यक है।
