CBSE कक्षा 12 जीवविज्ञान (2026–27)

अध्याय 2: मानव जनन (Human Reproduction)

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

1. मानव नर जनन तंत्र के मुख्य अंगों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
मानव नर जनन तंत्र में वृषण (Testes), सहायक नलिकाएँ, सहायक ग्रंथियाँ तथा बाह्य जननांग शामिल होते हैं। वृषण अंडकोश में स्थित होते हैं और शुक्राणुओं तथा टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का निर्माण करते हैं। शुक्राणु एपिडिडिमिस में परिपक्व होते हैं तथा वास डिफरेंस द्वारा आगे ले जाए जाते हैं। वीर्य पुटिका, प्रोस्टेट तथा बल्बोयूरेथ्रल ग्रंथियाँ अपने स्राव मिलाकर वीर्य का निर्माण करती हैं। लिंग (Penis) मैथुन एवं वीर्य के निष्कासन का कार्य करता है। इन सभी अंगों की समन्वित क्रिया से नर जनन प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न होती है।


2. मानव मादा जनन तंत्र के प्रमुख भागों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
मादा जनन तंत्र में अंडाशय (Ovaries), अंडवाहिनी (Fallopian Tubes), गर्भाशय (Uterus), गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) तथा योनि (Vagina) शामिल हैं। अंडाशय अंडाणु तथा एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बनाते हैं। अंडवाहिनी अंडाणु को अंडाशय से गर्भाशय तक पहुँचाती है तथा निषेचन का स्थान होती है। गर्भाशय भ्रूण के विकास का स्थान है। गर्भाशय ग्रीवा गर्भाशय और योनि को जोड़ती है। योनि मैथुन, प्रसव तथा मासिक धर्म के दौरान मार्ग का कार्य करती है। ये सभी अंग प्रजनन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


3. शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) क्या है? संक्षेप में समझाइए।

उत्तर:
शुक्राणुजनन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा वृषणों की शुक्रजनक नलिकाओं में शुक्राणुओं का निर्माण होता है। यह प्रक्रिया यौवनावस्था में प्रारंभ होती है। सबसे पहले स्पर्मेटोगोनिया कोशिकाएँ विभाजित होकर प्राथमिक शुक्राणु कोशिकाएँ बनाती हैं। ये अर्धसूत्री विभाजन द्वारा द्वितीयक शुक्राणु कोशिकाएँ तथा फिर स्पर्मेटिड बनाती हैं। स्पर्मेटिड रूपांतरण के बाद परिपक्व शुक्राणु में बदल जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को FSH तथा टेस्टोस्टेरोन नियंत्रित करते हैं। शुक्राणुजनन मानव प्रजनन की आधारभूत प्रक्रिया है।


4. अंडजनन (Oogenesis) की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
अंडजनन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा अंडाशय में अंडाणुओं का निर्माण होता है। यह प्रक्रिया भ्रूण अवस्था में ही प्रारंभ हो जाती है। ओगोनिया कोशिकाएँ प्राथमिक अंडाणु बनाती हैं, जो प्रोफेज-I में रुक जाती हैं। यौवन के बाद प्रत्येक मासिक चक्र में एक प्राथमिक अंडाणु विभाजन पूरा करता है और द्वितीयक अंडाणु बनाता है। निषेचन होने पर ही दूसरा अर्धसूत्री विभाजन पूर्ण होता है और परिपक्व अंडाणु बनता है। इस प्रक्रिया में ध्रुवीय पिंड भी बनते हैं। अंडजनन से प्रत्येक चक्र में सामान्यतः एक अंडाणु प्राप्त होता है।


5. शुक्राणु की संरचना का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
शुक्राणु मानव नर युग्मक है जो सूक्ष्म तथा गतिशील होता है। इसकी संरचना चार भागों में विभाजित होती है—शीर्ष (Head), गर्दन (Neck), मध्य भाग (Middle Piece) तथा पूँछ (Tail)। शीर्ष में केंद्रक और एक्रोसोम होता है। एक्रोसोम में एंजाइम होते हैं जो अंडाणु के आवरण को भेदने में सहायता करते हैं। मध्य भाग में अनेक माइटोकॉन्ड्रिया होते हैं जो गति के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं। पूँछ शुक्राणु को तैरने में सहायता करती है। इसकी विशेष संरचना निषेचन की प्रक्रिया को सफल बनाती है।


6. अंडाशयी चक्र (Ovarian Cycle) क्या है?

उत्तर:
अंडाशयी चक्र अंडाशय में होने वाले चक्रीय परिवर्तनों को दर्शाता है। यह लगभग 28 दिनों का होता है। प्रथम चरण फॉलिक्युलर चरण है, जिसमें ग्राफियन पुटिका विकसित होती है। लगभग 14वें दिन LH हार्मोन के प्रभाव से अंडोत्सर्ग (Ovulation) होता है। इसके बाद ल्यूटियल चरण प्रारंभ होता है, जिसमें कॉर्पस ल्यूटियम बनता है और प्रोजेस्टेरोन का स्राव करता है। यदि निषेचन नहीं होता तो कॉर्पस ल्यूटियम नष्ट हो जाता है और नया चक्र प्रारंभ हो जाता है। यह चक्र प्रजनन क्षमता को नियंत्रित करता है।


7. मासिक धर्म चक्र के विभिन्न चरणों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
मासिक धर्म चक्र लगभग 28 दिनों का होता है। पहला चरण मासिक धर्म चरण है, जिसमें गर्भाशय की आंतरिक परत निकल जाती है। दूसरा चरण प्रोलिफेरेटिव चरण है, जिसमें एंडोमेट्रियम पुनः विकसित होता है। तीसरा चरण अंडोत्सर्ग चरण है, जिसमें परिपक्व अंडाणु मुक्त होता है। चौथा चरण स्रावी चरण है, जिसमें प्रोजेस्टेरोन के प्रभाव से गर्भाशय संभावित गर्भधारण के लिए तैयार होता है। यदि निषेचन नहीं होता, तो हार्मोन स्तर घट जाता है और पुनः मासिक धर्म प्रारंभ हो जाता है।


8. निषेचन (Fertilization) क्या है?

उत्तर:
निषेचन वह प्रक्रिया है जिसमें नर युग्मक (शुक्राणु) और मादा युग्मक (अंडाणु) का संलयन होता है। यह सामान्यतः अंडवाहिनी के एम्पुला भाग में होता है। एक शुक्राणु अंडाणु के आवरण को भेदकर उसके केंद्रक से मिल जाता है। इससे द्विगुणित युग्मनज (Zygote) बनता है। निषेचन से गुणसूत्रों की संख्या पुनः स्थापित हो जाती है तथा नए जीव के विकास की शुरुआत होती है। यह लैंगिक प्रजनन की सबसे महत्वपूर्ण घटना है।


9. भ्रूण आरोपण (Implantation) क्या है?

उत्तर:
निषेचन के बाद युग्मनज लगातार विभाजित होकर ब्लास्टोसिस्ट बनाता है। लगभग 6–7 दिन बाद यह गर्भाशय की मोटी एंडोमेट्रियल परत से जुड़ जाता है। इसी प्रक्रिया को आरोपण कहा जाता है। आरोपण के बाद भ्रूण को माँ के शरीर से पोषण एवं ऑक्सीजन मिलने लगती है। गर्भावस्था की सफल शुरुआत के लिए आरोपण आवश्यक है। यदि आरोपण नहीं होता, तो गर्भधारण संभव नहीं हो पाता। यह मानव प्रजनन की एक महत्वपूर्ण अवस्था है।


10. अपरा (Placenta) का महत्व बताइए।

उत्तर:
अपरा एक अस्थायी संरचना है जो गर्भावस्था के दौरान भ्रूण और माता को जोड़ती है। यह भ्रूण को ऑक्सीजन, पोषक तत्व और जल प्रदान करती है तथा अपशिष्ट पदार्थों को माता के रक्त में भेजती है। अपरा hCG, hPL, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन भी स्रावित करती है। यह भ्रूण की सुरक्षा और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अपरा के बिना भ्रूण का सामान्य विकास संभव नहीं है। इसलिए इसे गर्भावस्था का जीवन-समर्थन तंत्र कहा जाता है।


11. गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान होने वाले प्रमुख परिवर्तन बताइए।

उत्तर:
गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में अनेक शारीरिक एवं हार्मोनल परिवर्तन होते हैं। गर्भाशय का आकार बढ़ता है तथा स्तन दुग्ध उत्पादन के लिए विकसित होते हैं। प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। शरीर में रक्त की मात्रा तथा चयापचय दर भी बढ़ती है। भ्रूण के विकास के साथ पेट का आकार बढ़ता है। गर्भावस्था के दौरान पोषण की आवश्यकता भी अधिक हो जाती है। ये परिवर्तन भ्रूण के स्वस्थ विकास और प्रसव की तैयारी के लिए आवश्यक होते हैं।


12. प्रसव (Parturition) की प्रक्रिया समझाइए।

उत्तर:
प्रसव वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पूर्ण विकसित भ्रूण गर्भाशय से बाहर आता है। यह गर्भावस्था के लगभग 280 दिनों बाद होता है। प्रसव के समय ऑक्सीटोसिन हार्मोन गर्भाशय की मांसपेशियों में संकुचन उत्पन्न करता है। ये संकुचन क्रमशः तीव्र होते जाते हैं और गर्भाशय ग्रीवा फैलने लगती है। अंततः शिशु जन्म मार्ग से बाहर निकलता है। शिशु के जन्म के बाद अपरा भी बाहर निकल जाती है। यह प्रक्रिया हार्मोन तथा तंत्रिका संकेतों के समन्वय से नियंत्रित होती है।


13. दुग्धस्रवण (Lactation) क्या है?

उत्तर:
दुग्धस्रवण प्रसव के बाद स्तन ग्रंथियों द्वारा दूध के उत्पादन और स्राव की प्रक्रिया है। प्रोलैक्टिन हार्मोन दूध के निर्माण को उत्तेजित करता है, जबकि ऑक्सीटोसिन दूध के निष्कासन में सहायता करता है। जन्म के प्रारंभिक दिनों में निकलने वाला पीला गाढ़ा दूध कोलोस्ट्रम कहलाता है। इसमें प्रोटीन और प्रतिरक्षी प्रचुर मात्रा में होते हैं जो नवजात को संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। दुग्धस्रवण नवजात के पोषण और प्रतिरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


14. कोलोस्ट्रम क्या है और इसका महत्व क्या है?

उत्तर:
कोलोस्ट्रम प्रसव के बाद स्तनों से निकलने वाला पहला पीला और गाढ़ा दूध है। यह प्रोटीन, विटामिन तथा प्रतिरक्षी (Antibodies) से भरपूर होता है। विशेष रूप से इसमें IgA प्रतिरक्षी अधिक मात्रा में पाए जाते हैं जो नवजात को अनेक रोगों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। कोलोस्ट्रम नवजात की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है तथा पाचन तंत्र के विकास में सहायता करता है। इसलिए जन्म के तुरंत बाद शिशु को माँ का पहला दूध अवश्य पिलाना चाहिए।


15. कॉर्पस ल्यूटियम क्या है?

उत्तर:
अंडोत्सर्ग के बाद फटी हुई ग्राफियन पुटिका कॉर्पस ल्यूटियम में परिवर्तित हो जाती है। यह एक अस्थायी अंतःस्रावी संरचना है जो मुख्यतः प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्राव करती है। प्रोजेस्टेरोन गर्भाशय की एंडोमेट्रियल परत को भ्रूण के आरोपण और विकास के लिए तैयार करता है। यदि निषेचन नहीं होता तो कॉर्पस ल्यूटियम नष्ट हो जाता है। गर्भधारण होने पर यह कुछ समय तक सक्रिय रहता है और गर्भावस्था बनाए रखने में सहायता करता है।


16. मानव युग्मनज (Zygote) क्या है?

उत्तर:
युग्मनज वह प्रथम द्विगुणित कोशिका है जो निषेचन के परिणामस्वरूप बनती है। इसमें माता और पिता दोनों के गुणसूत्र उपस्थित होते हैं। युग्मनज लगातार समसूत्री विभाजन द्वारा विभाजित होकर मोरुला और फिर ब्लास्टोसिस्ट बनाता है। यही आगे चलकर भ्रूण में विकसित होता है। युग्मनज में नए जीव की संपूर्ण आनुवंशिक जानकारी मौजूद होती है। इसलिए इसे नए जीवन की शुरुआत माना जाता है। मानव विकास की पूरी प्रक्रिया इसी कोशिका से प्रारंभ होती है।


17. एक्रोसोम का कार्य क्या है?

उत्तर:
एक्रोसोम शुक्राणु के शीर्ष भाग में स्थित टोपी जैसी संरचना है। यह गोल्जी काय से उत्पन्न होती है और इसमें अनेक हाइड्रोलाइटिक एंजाइम उपस्थित होते हैं। निषेचन के समय ये एंजाइम अंडाणु के बाहरी आवरणों को घोलने में सहायता करते हैं। इससे शुक्राणु अंडाणु के भीतर प्रवेश कर पाता है। यदि एक्रोसोम कार्य न करे तो निषेचन संभव नहीं होगा। अतः यह सफल निषेचन के लिए अत्यंत आवश्यक संरचना है।


18. भ्रूण विकास के प्रारंभिक चरणों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
निषेचन के बाद युग्मनज लगातार विभाजित होकर दो, चार, आठ तथा अनेक कोशिकाओं वाली अवस्था बनाता है। इसके बाद मोरुला बनती है, जो आगे ब्लास्टोसिस्ट में परिवर्तित हो जाती है। ब्लास्टोसिस्ट में बाहरी ट्रोफोब्लास्ट तथा आंतरिक कोशिका समूह होता है। यह गर्भाशय में पहुँचकर आरोपित हो जाता है। आरोपण के बाद भ्रूणीय विकास प्रारंभ होता है और विभिन्न अंगों का निर्माण होने लगता है। ये प्रारंभिक चरण स्वस्थ भ्रूण निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।


19. मानव प्रजनन में FSH और LH हार्मोन की भूमिका बताइए।

उत्तर:
FSH (Follicle Stimulating Hormone) तथा LH (Luteinizing Hormone) पीयूष ग्रंथि द्वारा स्रावित होते हैं। पुरुषों में FSH शुक्राणुजनन को प्रोत्साहित करता है जबकि LH टेस्टोस्टेरोन के स्राव को उत्तेजित करता है। महिलाओं में FSH अंडाशयी पुटिकाओं के विकास में सहायता करता है। LH अंडोत्सर्ग को प्रेरित करता है तथा कॉर्पस ल्यूटियम के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ये दोनों हार्मोन मानव जनन तंत्र के सामान्य कार्य और प्रजनन क्षमता के लिए आवश्यक हैं।


20. जुड़वाँ बच्चों के प्रकारों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
जुड़वाँ बच्चे मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—समान (Identical) और असमान (Fraternal)। समान जुड़वाँ एक ही युग्मनज के विभाजन से बनते हैं, इसलिए उनका आनुवंशिक संगठन समान होता है और उनका लिंग भी समान होता है। असमान जुड़वाँ दो अलग-अलग अंडाणुओं के दो अलग शुक्राणुओं द्वारा निषेचित होने से बनते हैं। इनका आनुवंशिक संगठन अलग होता है और इनका लिंग समान या भिन्न हो सकता है। मानव प्रजनन में दोनों प्रकार के जुड़वाँ बच्चों का विशेष महत्व है।