CBSE कक्षा 12 भौतिकी (2026–27)

अध्याय 10 : तरंग प्रकाशिकी (Wave Optics)

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर


प्रश्न 1. तरंगाग्र (Wavefront) क्या है? इसके प्रकार बताइए।

उत्तर:
तरंगाग्र वह काल्पनिक सतह है जिसके सभी बिंदु किसी निश्चित समय पर समान कला (Phase) में कंपन करते हैं। यह प्रकाश तरंग के प्रसार की दिशा को दर्शाता है। तरंगाग्र का सिद्धांत ह्यूजेंस के सिद्धांत का आधार है। मुख्यतः तीन प्रकार के तरंगाग्र होते हैं—(1) गोलाकार तरंगाग्र, जो बिंदु स्रोत से उत्पन्न होता है; (2) बेलनाकार तरंगाग्र, जो रेखीय स्रोत से उत्पन्न होता है; तथा (3) समतलीय तरंगाग्र, जो बहुत दूर स्थित स्रोत से प्राप्त होता है। तरंगाग्र की अवधारणा प्रकाश के परावर्तन, अपवर्तन, व्यतिकरण तथा विवर्तन जैसी घटनाओं को समझने में अत्यंत उपयोगी है।


प्रश्न 2. ह्यूजेंस का सिद्धांत (Huygens’ Principle) लिखिए।

उत्तर:
ह्यूजेंस के सिद्धांत के अनुसार किसी तरंगाग्र का प्रत्येक बिंदु द्वितीयक तरंगिकाओं (Secondary Wavelets) का स्रोत होता है। ये तरंगिकाएँ सभी दिशाओं में समान वेग से फैलती हैं। किसी निश्चित समय के बाद इन द्वितीयक तरंगिकाओं को स्पर्श करने वाली सामान्य स्पर्शरेखा (Envelope) नया तरंगाग्र बनाती है। यह सिद्धांत प्रकाश के तरंग स्वरूप को स्पष्ट करता है तथा प्रकाश के परावर्तन और अपवर्तन के नियमों की व्याख्या करता है। ह्यूजेंस का सिद्धांत प्रकाशिकी में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके आधार पर तरंगों के प्रसार को सरलता से समझा जा सकता है।


प्रश्न 3. ह्यूजेंस का सिद्धांत परावर्तन के नियम की व्याख्या कैसे करता है?

उत्तर:
ह्यूजेंस के सिद्धांत के अनुसार आपतित तरंगाग्र का प्रत्येक बिंदु द्वितीयक तरंगिकाओं का स्रोत होता है। जब ये तरंगिकाएँ परावर्तक सतह से टकराती हैं, तब परावर्तित तरंगाग्र बनता है। ज्यामितीय निर्माण द्वारा यह सिद्ध किया जा सकता है कि आपतन कोण और परावर्तन कोण समान होते हैं। साथ ही, आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलंब एक ही तल में स्थित रहते हैं। इस प्रकार ह्यूजेंस का सिद्धांत परावर्तन के दोनों नियमों की सफलतापूर्वक व्याख्या करता है और यह दर्शाता है कि प्रकाश का व्यवहार तरंगों के समान है।


प्रश्न 4. प्रकाश के सुसंगत स्रोत (Coherent Sources) क्या होते हैं?

उत्तर:
वे स्रोत जो समान आवृत्ति की तरंगें उत्पन्न करते हैं तथा जिनके बीच कला-अंतर (Phase Difference) समय के साथ स्थिर रहता है, सुसंगत स्रोत कहलाते हैं। व्यतिकरण प्राप्त करने के लिए सुसंगत स्रोत आवश्यक होते हैं। स्वतंत्र प्रकाश स्रोत सामान्यतः सुसंगत नहीं होते क्योंकि उनका कला-अंतर लगातार बदलता रहता है। यंग के द्वि-रंध्र प्रयोग में एक ही स्रोत से प्राप्त प्रकाश द्वारा दो सुसंगत स्रोत बनाए जाते हैं। सुसंगतता के कारण उज्ज्वल और अंधकार पट्टियाँ स्थिर बनी रहती हैं और स्पष्ट व्यतिकरण प्रतिरूप प्राप्त होता है।


प्रश्न 5. प्रकाश का व्यतिकरण (Interference) क्या है?

उत्तर:
जब दो या दो से अधिक सुसंगत प्रकाश तरंगें अध्यारोपित होती हैं, तो कुछ स्थानों पर प्रकाश की तीव्रता बढ़ जाती है तथा कुछ स्थानों पर घट जाती है। इस घटना को प्रकाश का व्यतिकरण कहते हैं। जहाँ तरंगें समान कला में मिलती हैं वहाँ रचनात्मक व्यतिकरण होकर उज्ज्वल पट्टी बनती है, जबकि विपरीत कला में मिलने पर विनाशी व्यतिकरण होकर अंधकार पट्टी बनती है। व्यतिकरण प्रकाश के तरंग स्वरूप का महत्वपूर्ण प्रमाण है। यंग के द्वि-रंध्र प्रयोग द्वारा इस घटना को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया गया था।


प्रश्न 6. स्थायी व्यतिकरण के लिए आवश्यक शर्तें लिखिए।

उत्तर:
स्थायी व्यतिकरण प्राप्त करने के लिए प्रकाश स्रोतों का सुसंगत होना आवश्यक है, अर्थात् उनकी आवृत्ति समान हो तथा कला-अंतर स्थिर रहे। स्रोतों से निकलने वाली तरंगों का आयाम लगभग समान होना चाहिए ताकि पट्टियाँ स्पष्ट दिखाई दें। प्रकाश एकवर्णी (Monochromatic) होना चाहिए जिससे विभिन्न तरंगदैर्घ्यों के कारण प्रतिरूप मिश्रित न हो। स्रोतों के बीच की दूरी कम तथा पर्दा उपयुक्त दूरी पर होना चाहिए। इन सभी शर्तों के पूरा होने पर स्पष्ट और स्थायी व्यतिकरण प्रतिरूप प्राप्त होता है।


प्रश्न 7. यंग के द्वि-रंध्र प्रयोग का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
यंग के द्वि-रंध्र प्रयोग में एकवर्णी प्रकाश को दो संकीर्ण रंध्रों पर डाला जाता है। ये दोनों रंध्र सुसंगत स्रोतों का कार्य करते हैं। इनसे निकलने वाली प्रकाश तरंगें पर्दे पर अध्यारोपित होकर व्यतिकरण उत्पन्न करती हैं। परिणामस्वरूप उज्ज्वल और अंधकार पट्टियों का क्रमिक प्रतिरूप दिखाई देता है। उज्ज्वल पट्टियाँ रचनात्मक व्यतिकरण तथा अंधकार पट्टियाँ विनाशी व्यतिकरण के कारण बनती हैं। इस प्रयोग ने प्रकाश के तरंग सिद्धांत को मजबूत आधार प्रदान किया और यह सिद्ध किया कि प्रकाश तरंगों की भाँति व्यवहार करता है।


प्रश्न 8. पट्टी चौड़ाई (Fringe Width) क्या है? इसका सूत्र लिखिए।

उत्तर:
व्यतिकरण प्रतिरूप में दो क्रमागत उज्ज्वल पट्टियों अथवा दो क्रमागत अंधकार पट्टियों के बीच की दूरी को पट्टी चौड़ाई कहते हैं। इसे β से प्रदर्शित किया जाता है। इसका सूत्र है:

\beta=\frac{\lambda D}{d}

जहाँ λ प्रकाश की तरंगदैर्घ्य, D रंध्रों और पर्दे के बीच की दूरी तथा d दोनों रंध्रों के बीच की दूरी है। पट्टी चौड़ाई तरंगदैर्घ्य और पर्दे की दूरी के समानुपाती तथा रंध्रों के बीच की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है।


प्रश्न 9. यदि प्रकाश की तरंगदैर्घ्य बढ़ा दी जाए तो पट्टी चौड़ाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

उत्तर:
पट्टी चौड़ाई का मान प्रकाश की तरंगदैर्घ्य के सीधे समानुपाती होता है। इसलिए यदि प्रकाश की तरंगदैर्घ्य बढ़ाई जाती है, तो पट्टी चौड़ाई भी बढ़ जाती है। इसका अर्थ है कि दो क्रमागत उज्ज्वल अथवा अंधकार पट्टियों के बीच की दूरी अधिक हो जाएगी। उदाहरण के लिए, लाल प्रकाश की तरंगदैर्घ्य नीले प्रकाश से अधिक होती है, इसलिए लाल प्रकाश में पट्टियाँ अधिक चौड़ी प्राप्त होती हैं। यह संबंध यंग के द्वि-रंध्र प्रयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


प्रश्न 10. यंग का द्वि-रंध्र प्रयोग प्रकाश के तरंग स्वरूप को कैसे सिद्ध करता है?

उत्तर:
यंग के द्वि-रंध्र प्रयोग में प्राप्त व्यतिकरण प्रतिरूप यह दर्शाता है कि प्रकाश तरंगों की भाँति अध्यारोपण करता है। यदि प्रकाश केवल कणों से बना होता, तो उज्ज्वल और अंधकार पट्टियों का निर्माण संभव नहीं होता। रचनात्मक और विनाशी व्यतिकरण के कारण बनने वाली पट्टियाँ स्पष्ट रूप से प्रकाश के तरंग व्यवहार का प्रमाण देती हैं। इस प्रयोग ने न्यूटन के कण सिद्धांत की सीमाओं को उजागर किया तथा ह्यूजेंस के तरंग सिद्धांत को वैज्ञानिक समर्थन प्रदान किया।


प्रश्न 11. प्रकाश का विवर्तन (Diffraction) क्या है?

उत्तर:
जब प्रकाश किसी संकीर्ण छिद्र से गुजरता है या किसी अवरोध के किनारों से होकर निकलता है, तब वह सीधी रेखा में चलने के बजाय मुड़कर फैल जाता है। इस घटना को विवर्तन कहते हैं। विवर्तन तब अधिक स्पष्ट होता है जब छिद्र का आकार प्रकाश की तरंगदैर्घ्य के तुलनीय हो। यह घटना प्रकाश के तरंग स्वरूप का महत्वपूर्ण प्रमाण है। विवर्तन के कारण प्रकाश उन क्षेत्रों में भी पहुँच सकता है जहाँ सामान्यतः उसकी अपेक्षा नहीं की जाती।


प्रश्न 12. एकल रंध्र (Single Slit) का विवर्तन प्रतिरूप क्या होता है?

उत्तर:
एकल रंध्र से उत्पन्न विवर्तन प्रतिरूप में एक अत्यंत चमकीला और चौड़ा केंद्रीय अधिकतम (Central Maximum) दिखाई देता है, जिसके दोनों ओर कम तीव्रता वाली उज्ज्वल तथा अंधकार पट्टियाँ क्रमशः स्थित होती हैं। केंद्रीय अधिकतम सबसे अधिक तीव्र और सबसे चौड़ा होता है क्योंकि इसमें अधिकतम प्रकाश ऊर्जा केंद्रित होती है। जैसे-जैसे केंद्र से दूर जाते हैं, पट्टियों की तीव्रता घटती जाती है। यह प्रतिरूप इस कारण बनता है क्योंकि रंध्र के विभिन्न भागों से निकलने वाली तरंगें आपस में व्यतिकरण करती हैं। यह घटना प्रकाश के तरंग स्वरूप का स्पष्ट प्रमाण है और यह दर्शाती है कि प्रकाश सरल रेखा में न चलकर तरंगों की तरह फैलता है।


प्रश्न 13. विवर्तन में केंद्रीय अधिकतम अन्य अधिकतमों से अधिक चौड़ा क्यों होता है?

उत्तर:
एकल रंध्र विवर्तन में केंद्रीय अधिकतम का विस्तार अन्य अधिकतमों की तुलना में लगभग दोगुना होता है क्योंकि यह प्रथम न्यूनतमों (First Minima) के बीच स्थित होता है। केंद्रीय अधिकतम में रंध्र के सभी भागों से आने वाली तरंगें समान फेज में मिलती हैं, जिसके कारण अधिकतम रचनात्मक व्यतिकरण होता है। इसलिए यहाँ प्रकाश की तीव्रता सबसे अधिक होती है। इसके विपरीत अन्य अधिकतमों में आंशिक विनाशी व्यतिकरण होने के कारण तीव्रता कम हो जाती है। इस कारण केंद्रीय अधिकतम अधिक चमकीला और चौड़ा दिखाई देता है, जबकि अन्य अधिकतम संकरे और कम तीव्र होते हैं।


प्रश्न 14. व्यतिकरण और विवर्तन में अंतर लिखिए।

उत्तर:
व्यतिकरण दो या अधिक सुसंगत प्रकाश स्रोतों से उत्पन्न तरंगों के अध्यारोपण से होता है, जबकि विवर्तन एक ही तरंगाग्र के विभिन्न भागों के बीच होने वाले अध्यारोपण से उत्पन्न होता है। व्यतिकरण में पट्टियाँ सामान्यतः समान चौड़ाई और समान तीव्रता की होती हैं, जबकि विवर्तन में केंद्रीय अधिकतम सबसे चमकीला और सबसे चौड़ा होता है। व्यतिकरण के लिए दो अलग-अलग सुसंगत स्रोत आवश्यक होते हैं, परंतु विवर्तन एक ही रंध्र या अवरोध से भी हो सकता है। व्यतिकरण में पट्टियाँ नियमित होती हैं, जबकि विवर्तन में तीव्रता असमान होती है। दोनों घटनाएँ प्रकाश के तरंग स्वरूप को सिद्ध करती हैं।


प्रश्न 15. प्रकाश का ध्रुवण (Polarization) क्या है?

उत्तर:
प्रकाश का ध्रुवण वह घटना है जिसमें प्रकाश तरंगों के दोलन (vibrations) को केवल एक ही तल तक सीमित कर दिया जाता है जो तरंग के संचरण की दिशा के लंबवत होता है। सामान्य प्रकाश में दोलन सभी दिशाओं में होते हैं, इसलिए उसे अध्रुवित प्रकाश कहते हैं। जब ये दोलन केवल एक तल में सीमित हो जाते हैं, तो प्रकाश ध्रुवित कहलाता है। ध्रुवण यह सिद्ध करता है कि प्रकाश एक अनुप्रस्थ तरंग (Transverse Wave) है क्योंकि केवल अनुप्रस्थ तरंगों का ही ध्रुवण संभव होता है। यह घटना आधुनिक प्रकाशिकी में अत्यंत उपयोगी है, जैसे धूप के चश्मे, कैमरा और LCD स्क्रीन में।


प्रश्न 16. समतल ध्रुवित प्रकाश (Plane Polarized Light) क्या है?

उत्तर:
समतल ध्रुवित प्रकाश वह प्रकाश है जिसमें प्रकाश तरंगों के सभी दोलन केवल एक निश्चित तल में होते हैं जो प्रकाश के संचरण की दिशा के लंबवत होता है। इसे पोलरॉइड जैसे उपकरणों की सहायता से प्राप्त किया जाता है। सामान्य प्रकाश को ध्रुवण प्रक्रिया द्वारा समतल ध्रुवित प्रकाश में बदला जाता है। इस प्रकार के प्रकाश में कंपन की दिशा नियंत्रित हो जाती है। यह घटना यह प्रमाणित करती है कि प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है, क्योंकि केवल अनुप्रस्थ तरंगों में ही कंपन की दिशा को सीमित किया जा सकता है। इसका उपयोग चकाचौंध कम करने और दृश्य गुणवत्ता बढ़ाने में किया जाता है।


प्रश्न 17. ब्रूस्टर का नियम (Brewster’s Law) लिखिए।

उत्तर:
ब्रूस्टर के नियम के अनुसार जब अध्रुवित प्रकाश किसी पारदर्शी सतह पर एक विशेष कोण पर आपतित होता है, तो परावर्तित प्रकाश पूर्णतः ध्रुवित हो जाता है। इस विशेष कोण को ब्रूस्टर कोण कहते हैं। इसका सूत्र है:

\tan i_p=\mu

जहाँ (i_p) ब्रूस्टर कोण तथा (μ) माध्यम का अपवर्तनांक है। इस स्थिति में परावर्तित और अपवर्तित किरणें एक-दूसरे के लंबवत होती हैं। यह नियम ध्रुवण उपकरणों के निर्माण और चमक कम करने वाली तकनीकों में उपयोग किया जाता है। यह प्रकाश के तरंग स्वरूप को समझने में भी महत्वपूर्ण है।


प्रश्न 18. पोलरॉइड के दो उपयोग लिखिए।

उत्तर:
पोलरॉइड ऐसे पदार्थ होते हैं जो प्रकाश को ध्रुवित करने में सक्षम होते हैं। इनका उपयोग दैनिक जीवन तथा वैज्ञानिक उपकरणों में व्यापक रूप से होता है। पहला उपयोग धूप के चश्मों में किया जाता है, जहाँ यह सड़क, पानी या बर्फ से आने वाली चमक (glare) को कम करता है। दूसरा उपयोग फोटोग्राफी में किया जाता है, जिससे अनचाही परावर्तित रोशनी हटाकर चित्र की गुणवत्ता बढ़ाई जाती है। इसके अतिरिक्त LCD स्क्रीन, 3D चश्मे तथा ऑप्टिकल उपकरणों में भी इनका उपयोग होता है। पोलरॉइड प्रकाश की दिशा को नियंत्रित करने में अत्यंत उपयोगी हैं।


प्रश्न 19. ध्वनि तरंगों का ध्रुवण क्यों नहीं किया जा सकता?

उत्तर:
ध्वनि तरंगों का ध्रुवण नहीं किया जा सकता क्योंकि ये अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal Waves) होती हैं। अनुदैर्ध्य तरंगों में कणों का दोलन तरंग के संचरण की दिशा के समानांतर होता है। ध्रुवण के लिए दोलनों का एक निश्चित तल में सीमित होना आवश्यक होता है, जो केवल अनुप्रस्थ तरंगों में संभव है। चूँकि ध्वनि तरंगों में कंपन की दिशा को सीमित नहीं किया जा सकता, इसलिए उनका ध्रुवण संभव नहीं है। यह अंतर तरंगों के प्रकार को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और यह भी सिद्ध करता है कि प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है।


प्रश्न 20. विवर्तन प्रकाश के तरंग सिद्धांत को कैसे समर्थन देता है?

उत्तर:
विवर्तन प्रकाश के तरंग सिद्धांत को इसलिए समर्थन देता है क्योंकि यह दिखाता है कि प्रकाश अवरोधों के किनारों से मुड़कर फैल सकता है। यह गुण केवल तरंगों में पाया जाता है, कणों में नहीं। विवर्तन प्रतिरूप में केंद्रीय अधिकतम तथा अन्य न्यून तीव्रता वाली पट्टियाँ प्राप्त होती हैं, जो विभिन्न तरंगों के अध्यारोपण से बनती हैं। यह घटना तब अधिक स्पष्ट होती है जब छिद्र का आकार तरंगदैर्घ्य के तुलनीय होता है। इसलिए विवर्तन स्पष्ट रूप से सिद्ध करता है कि प्रकाश तरंगों की तरह व्यवहार करता है और तरंग सिद्धांत को मजबूत आधार प्रदान करता है।