CBSE कक्षा 12 भौतिकी (2026–27)

अध्याय 9 – किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशीय यंत्र

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. प्रकाश के परावर्तन के नियम लिखिए। प्रकाशीय यंत्रों में परावर्तन का क्या महत्व है?

उत्तर:
प्रकाश का परावर्तन दो मुख्य नियमों का पालन करता है। पहला, आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलंब एक ही तल में स्थित होते हैं। दूसरा, आपतन कोण का मान परावर्तन कोण के बराबर होता है। परावर्तन का सिद्धांत अनेक प्रकाशीय यंत्रों जैसे समतल दर्पण, पेरिस्कोप, परावर्ती दूरदर्शी तथा कैलिडोस्कोप में उपयोग किया जाता है। समतल दर्पण आभासी प्रतिबिंब बनाता है, जबकि वक्र दर्पण वस्तु की स्थिति के अनुसार बड़ा या छोटा प्रतिबिंब बना सकते हैं। प्रकाश किरणों की दिशा बदलने तथा स्पष्ट प्रतिबिंब प्राप्त करने में परावर्तन अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


प्रश्न 2. दर्पण सूत्र क्या है? इसकी संकेत परिपाटी समझाइए।

उत्तर:
दर्पण सूत्र वस्तु दूरी (u), प्रतिबिंब दूरी (v) तथा फोकस दूरी (f) के बीच संबंध स्थापित करता है।

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कार्टेशियन संकेत परिपाटी के अनुसार सभी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव से मापी जाती हैं। आपतित प्रकाश की दिशा में मापी गई दूरियाँ धनात्मक तथा विपरीत दिशा में मापी गई दूरियाँ ऋणात्मक मानी जाती हैं। मुख्य अक्ष के ऊपर की ऊँचाई धनात्मक तथा नीचे की ऊँचाई ऋणात्मक मानी जाती है। यह संकेत परिपाटी संख्यात्मक प्रश्नों को हल करने में सहायक होती है तथा दर्पणों द्वारा बनने वाले प्रतिबिंबों का सही विश्लेषण करने में उपयोगी है।


प्रश्न 3. दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन क्या है? इसका सूत्र लिखिए।

उत्तर:
आवर्धन किसी प्रतिबिंब की ऊँचाई और वस्तु की ऊँचाई के अनुपात को कहते हैं। यह बताता है कि प्रतिबिंब वस्तु की तुलना में कितना बड़ा या छोटा है। दर्पण के लिए आवर्धन का सूत्र है:

[
m=\frac{h_i}{h_o}=-\frac{v}{u}
]

जहाँ (h_i) प्रतिबिंब की ऊँचाई, (h_o) वस्तु की ऊँचाई, (v) प्रतिबिंब दूरी तथा (u) वस्तु दूरी है। धनात्मक आवर्धन सीधा प्रतिबिंब तथा ऋणात्मक आवर्धन उल्टा प्रतिबिंब दर्शाता है। यदि आवर्धन 1 से अधिक हो तो प्रतिबिंब बड़ा और 1 से कम हो तो छोटा होता है। यह सिद्धांत विभिन्न प्रकाशीय यंत्रों में उपयोग किया जाता है।


प्रश्न 4. वास्तविक तथा आभासी प्रतिबिंब में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
वास्तविक प्रतिबिंब तब बनता है जब प्रकाश किरणें वास्तव में किसी बिंदु पर मिलती हैं। इसे पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है तथा यह सामान्यतः उल्टा होता है। उदाहरण के लिए अवतल दर्पण और उत्तल लेंस द्वारा बने प्रतिबिंब। दूसरी ओर, आभासी प्रतिबिंब तब बनता है जब प्रकाश किरणें किसी बिंदु से आती हुई प्रतीत होती हैं, जबकि वास्तव में वहाँ नहीं मिलतीं। इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता तथा यह सामान्यतः सीधा होता है। समतल दर्पण, उत्तल दर्पण तथा आवर्धक काँच द्वारा आभासी प्रतिबिंब बनते हैं।


प्रश्न 5. प्रकाश का अपवर्तन क्या है? स्नेल का नियम लिखिए।

उत्तर:
जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में तिरछे प्रवेश करता है और उसकी चाल बदलने के कारण उसकी दिशा बदल जाती है, तो इस घटना को अपवर्तन कहते हैं। अपवर्तन के कारण जल में रखी वस्तुएँ मुड़ी हुई दिखाई देती हैं तथा लेंसों में प्रतिबिंब बनते हैं। स्नेल के नियम के अनुसार किसी दो माध्यमों के लिए आपतन कोण की ज्या और अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात स्थिर रहता है।

[
n=\frac{\sin i}{\sin r}
]

जहाँ (n) अपवर्तनांक, (i) आपतन कोण तथा (r) अपवर्तन कोण है। यह नियम प्रकाशिकी का एक महत्वपूर्ण आधार है।


प्रश्न 6. अपवर्तनांक की परिभाषा दीजिए। इसे प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं?

उत्तर:
किसी माध्यम का अपवर्तनांक निर्वात में प्रकाश की चाल तथा उस माध्यम में प्रकाश की चाल के अनुपात को कहते हैं।

[
n=\frac{c}{v}
]

जहाँ (c) निर्वात में प्रकाश की चाल तथा (v) माध्यम में प्रकाश की चाल है। अधिक अपवर्तनांक वाले माध्यम में प्रकाश की चाल कम होती है। अपवर्तनांक माध्यम की प्रकृति, तापमान, दाब तथा प्रकाश की तरंगदैर्ध्य पर निर्भर करता है। सामान्यतः सघन माध्यमों का अपवर्तनांक अधिक होता है। अपवर्तनांक का उपयोग लेंसों, प्रिज्मों तथा अन्य प्रकाशीय यंत्रों के निर्माण और अध्ययन में किया जाता है।


प्रश्न 7. पूर्ण आंतरिक परावर्तन क्या है? इसकी आवश्यक शर्तें लिखिए।

उत्तर:
जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है और आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो जाता है, तब प्रकाश पूरी तरह सघन माध्यम में ही परावर्तित हो जाता है। इस घटना को पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं। इसके लिए दो शर्तें आवश्यक हैं। पहली, प्रकाश का सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना। दूसरी, आपतन कोण का क्रांतिक कोण से अधिक होना। इस सिद्धांत का उपयोग ऑप्टिकल फाइबर, पेरिस्कोप, दूरसंचार प्रणालियों तथा चिकित्सा उपकरणों में किया जाता है। यह प्रकाश ऊर्जा के न्यूनतम ह्रास के साथ संचरण को संभव बनाता है।


प्रश्न 8. क्रांतिक कोण क्या है? इसका अपवर्तनांक से संबंध बताइए।

उत्तर:
क्रांतिक कोण वह आपतन कोण है जिसके लिए विरल माध्यम में अपवर्तन कोण 90° हो जाता है। यदि आपतन कोण इससे अधिक हो जाए तो पूर्ण आंतरिक परावर्तन होने लगता है। क्रांतिक कोण तथा अपवर्तनांक के बीच संबंध निम्नलिखित है:

[
\sin C=\frac{1}{n}
]

जहाँ (C) क्रांतिक कोण तथा (n) सघन माध्यम का अपवर्तनांक है। जिन पदार्थों का अपवर्तनांक अधिक होता है उनका क्रांतिक कोण कम होता है। यह अवधारणा ऑप्टिकल फाइबर तथा अन्य प्रकाशीय उपकरणों के अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण है।


प्रश्न 9. ऑप्टिकल फाइबर का सिद्धांत एवं कार्यविधि समझाइए।

उत्तर:
ऑप्टिकल फाइबर एक पतला पारदर्शी काँच या प्लास्टिक का तार होता है जो प्रकाश संकेतों को लंबी दूरी तक पहुँचाता है। यह पूर्ण आंतरिक परावर्तन के सिद्धांत पर कार्य करता है। इसमें एक कोर तथा उसके चारों ओर कम अपवर्तनांक वाली क्लैडिंग होती है। प्रकाश किरणें कोर के भीतर बार-बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन करती हैं और आगे बढ़ती रहती हैं। इससे ऊर्जा का ह्रास बहुत कम होता है। ऑप्टिकल फाइबर का उपयोग इंटरनेट, दूरसंचार, चिकित्सा एंडोस्कोपी तथा वैज्ञानिक अनुसंधान में किया जाता है। यह तेज तथा विश्वसनीय संचार प्रदान करता है।


प्रश्न 10. लेंस सूत्र लिखिए तथा इसका महत्व बताइए।

उत्तर:
लेंस सूत्र वस्तु दूरी, प्रतिबिंब दूरी तथा फोकस दूरी के बीच संबंध स्थापित करता है।

\frac{1}{f}=\frac{1}{v}-\frac{1}{u}

यह सूत्र उत्तल तथा अवतल दोनों प्रकार के लेंसों के लिए लागू होता है। उचित संकेत परिपाटी का उपयोग करके किसी भी वस्तु की स्थिति के लिए प्रतिबिंब की स्थिति ज्ञात की जा सकती है। यह सूत्र संख्यात्मक प्रश्नों को हल करने तथा कैमरा, सूक्ष्मदर्शी, दूरदर्शी और चश्मों जैसे उपकरणों के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।


प्रश्न 11. लेंस की शक्ति क्या होती है? इसका SI मात्रक लिखिए।

उत्तर:
लेंस की शक्ति उसकी प्रकाश किरणों को अभिसारित या अपसारित करने की क्षमता का माप है। इसे लेंस की फोकस दूरी (मीटर में) के व्युत्क्रम के रूप में परिभाषित किया जाता है।

[
P=\frac{1}{f}
]

जहाँ (P) शक्ति तथा (f) फोकस दूरी है। इसका SI मात्रक डायोप्टर (D) है। उत्तल लेंस की शक्ति धनात्मक तथा अवतल लेंस की शक्ति ऋणात्मक होती है। कम फोकस दूरी वाले लेंस की शक्ति अधिक होती है। नेत्र दोषों के सुधार में लेंस की शक्ति का विशेष महत्व है।


प्रश्न 12. उत्तल तथा अवतल लेंस में अंतर बताइए।

उत्तर:
उत्तल लेंस बीच में मोटा तथा किनारों पर पतला होता है। यह समानांतर प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर अभिसारित करता है, इसलिए इसे अभिसारी लेंस कहते हैं। अवतल लेंस बीच में पतला तथा किनारों पर मोटा होता है। यह प्रकाश किरणों को अपसारित करता है, इसलिए इसे अपसारी लेंस कहते हैं। उत्तल लेंस वास्तविक और आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बना सकता है, जबकि अवतल लेंस हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है। दोनों लेंसों का उपयोग विभिन्न प्रकाशीय यंत्रों में किया जाता है।


प्रश्न 13. प्रकाश का विक्षेपण क्या है? प्रिज्म की सहायता से समझाइए।

उत्तर:
जब श्वेत प्रकाश प्रिज्म से होकर गुजरता है और अपने विभिन्न रंगों में विभाजित हो जाता है, तो इस घटना को विक्षेपण कहते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि विभिन्न रंगों की तरंगदैर्ध्य अलग-अलग होती है और प्रत्येक रंग का अपवर्तनांक भी अलग होता है। बैंगनी रंग का विचलन सबसे अधिक तथा लाल रंग का सबसे कम होता है। इससे VIBGYOR रंगों का स्पेक्ट्रम प्राप्त होता है। विक्षेपण सिद्ध करता है कि श्वेत प्रकाश कई रंगों का मिश्रण है। इंद्रधनुष का निर्माण भी इसी सिद्धांत पर आधारित है।


प्रश्न 14. प्रिज्म में विचलन कोण क्या होता है?

उत्तर:
प्रिज्म से गुजरने के बाद आपतित किरण और निर्गत किरण के बीच बने कोण को विचलन कोण कहते हैं। यह दर्शाता है कि प्रिज्म ने प्रकाश की दिशा को कितना बदल दिया है। विचलन कोण प्रिज्म के कोण, पदार्थ के अपवर्तनांक तथा प्रकाश की तरंगदैर्ध्य पर निर्भर करता है। प्रत्येक रंग का विचलन अलग होता है। एक विशेष स्थिति में विचलन न्यूनतम हो जाता है जिसे न्यूनतम विचलन कहते हैं। इस सिद्धांत का उपयोग प्रिज्म के अपवर्तनांक ज्ञात करने में किया जाता है।


प्रश्न 15. सरल सूक्ष्मदर्शी का सिद्धांत एवं कार्यविधि समझाइए।

उत्तर:
सरल सूक्ष्मदर्शी एक कम फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस से बना होता है। इसका उपयोग छोटी वस्तुओं को बड़ा करके देखने के लिए किया जाता है। वस्तु को लेंस और उसके फोकस के बीच रखा जाता है। लेंस वस्तु का सीधा, आभासी तथा आवर्धित प्रतिबिंब बनाता है। आवर्धन की मात्रा लेंस की फोकस दूरी पर निर्भर करती है। जितनी कम फोकस दूरी होगी, उतना अधिक आवर्धन प्राप्त होगा। इसका उपयोग घड़ीसाजों, जौहरियों तथा जीवविज्ञान प्रयोगशालाओं में किया जाता है।


प्रश्न 16. संयुक्त सूक्ष्मदर्शी की संरचना एवं कार्यविधि समझाइए।

उत्तर:
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में दो उत्तल लेंस होते हैं—अभिदृश्यक (Objective) तथा नेत्रिका (Eyepiece)। अभिदृश्यक लेंस वस्तु का वास्तविक, उल्टा तथा आवर्धित प्रतिबिंब बनाता है। यह प्रतिबिंब नेत्रिका के लिए वस्तु का कार्य करता है। नेत्रिका इस प्रतिबिंब को और अधिक बड़ा करके अंतिम आभासी प्रतिबिंब बनाती है। दो चरणों में आवर्धन होने के कारण इसकी आवर्धन क्षमता बहुत अधिक होती है। इसका उपयोग सूक्ष्म जीवों, कोशिकाओं तथा ऊतकों के अध्ययन में किया जाता है।


प्रश्न 17. खगोलीय दूरदर्शी क्या है? इसका उपयोग लिखिए।

उत्तर:
खगोलीय दूरदर्शी एक प्रकाशीय यंत्र है जिसका उपयोग तारों, ग्रहों तथा अन्य खगोलीय पिंडों को देखने के लिए किया जाता है। इसमें एक बड़े फोकस दूरी वाला अभिदृश्यक तथा कम फोकस दूरी वाली नेत्रिका होती है। अभिदृश्यक दूर स्थित वस्तुओं से आने वाले प्रकाश को एकत्रित कर वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है। नेत्रिका इस प्रतिबिंब को आवर्धित करके अंतिम आभासी प्रतिबिंब प्रदान करती है। इसकी सहायता से दूर स्थित खगोलीय पिंडों का विस्तृत अध्ययन संभव होता है।


प्रश्न 18. दृष्टि दोष क्या हैं? प्रमुख दृष्टि दोषों के नाम लिखिए।

उत्तर:
जब नेत्र प्रकाश को ठीक प्रकार से रेटिना पर केंद्रित नहीं कर पाता, तब दृष्टि दोष उत्पन्न होते हैं। इसके कारण वस्तुएँ धुंधली दिखाई देती हैं। प्रमुख दृष्टि दोष हैं—निकट दृष्टिदोष (Myopia), दूर दृष्टिदोष (Hypermetropia), वृद्धावस्था दृष्टिदोष (Presbyopia) तथा दृष्टिवैषम्य (Astigmatism)। इन दोषों का कारण नेत्रगोलक के आकार में परिवर्तन या नेत्र लेंस की शक्ति में असामान्यता हो सकता है। उचित लेंसों वाले चश्मों या कॉन्टैक्ट लेंसों द्वारा इन दोषों का सुधार किया जा सकता है।


प्रश्न 19. निकट दृष्टिदोष (Myopia) क्या है? इसका सुधार कैसे किया जाता है?

उत्तर:
निकट दृष्टिदोष में व्यक्ति निकट की वस्तुओं को स्पष्ट देख सकता है, लेकिन दूर की वस्तुएँ धुंधली दिखाई देती हैं। यह दोष तब उत्पन्न होता है जब नेत्रगोलक सामान्य से अधिक लंबा हो जाता है या नेत्र लेंस की अभिसरण शक्ति बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप दूर की वस्तुओं का प्रतिबिंब रेटिना के सामने बनता है। इस दोष को उचित फोकस दूरी वाले अवतल लेंस द्वारा ठीक किया जाता है। अवतल लेंस प्रकाश किरणों को अपसारित करके प्रतिबिंब को रेटिना पर बनने में सहायता करता है।


प्रश्न 20. दूर दृष्टिदोष (Hypermetropia) क्या है? इसका सुधार कैसे किया जाता है?

उत्तर:
दूर दृष्टिदोष में व्यक्ति दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देख सकता है, लेकिन निकट की वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता। यह दोष तब उत्पन्न होता है जब नेत्रगोलक सामान्य से छोटा हो या नेत्र लेंस की अभिसरण शक्ति कम हो जाए। परिणामस्वरूप निकट की वस्तुओं का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है। इस दोष को उचित शक्ति वाले उत्तल लेंस द्वारा ठीक किया जाता है। उत्तल लेंस प्रकाश किरणों को पहले से अभिसारित करके प्रतिबिंब को रेटिना पर बनने में सहायता करता है, जिससे निकट की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई देती हैं।