CBSE कक्षा 12 भौतिकी (2026–27)
अध्याय 8 : विद्युतचुंबकीय तरंगें (Electromagnetic Waves)
20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. विद्युतचुंबकीय तरंगें क्या हैं? इनका उत्पादन कैसे होता है?
उत्तर:
विद्युतचुंबकीय तरंगें ऐसी तरंगें हैं जिनमें दोलनशील विद्युत क्षेत्र तथा चुंबकीय क्षेत्र होते हैं और जो बिना किसी भौतिक माध्यम के अंतरिक्ष में संचरित हो सकती हैं। इनका उत्पादन तब होता है जब कोई आवेशित कण त्वरित गति करता है या कंपन करता है। मैक्सवेल के सिद्धांत के अनुसार परिवर्ती विद्युत क्षेत्र चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है तथा परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है। ये दोनों क्षेत्र एक-दूसरे के लंबवत होते हैं तथा तरंग के रूप में आगे बढ़ते हैं। प्रकाश, रेडियो तरंगें, माइक्रोवेव, एक्स-किरणें तथा गामा किरणें विद्युतचुंबकीय तरंगों के उदाहरण हैं। ये निर्वात में (3 \times 10^8) मीटर/सेकंड की गति से चलती हैं।
प्रश्न 2. विद्युतचुंबकीय तरंगों की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
विद्युतचुंबकीय तरंगों की कई महत्वपूर्ण विशेषताएँ हैं। ये अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं जिनमें विद्युत क्षेत्र तथा चुंबकीय क्षेत्र एक-दूसरे तथा तरंग की गति की दिशा के लंबवत होते हैं। इन्हें संचरण के लिए किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती और ये निर्वात में भी चल सकती हैं। सभी विद्युतचुंबकीय तरंगें निर्वात में प्रकाश की गति से चलती हैं। ये ऊर्जा तथा संवेग का वहन करती हैं। इनमें परावर्तन, अपवर्तन, विवर्तन, व्यतिकरण तथा ध्रुवण जैसे गुण पाए जाते हैं। इनकी आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य इनके गुणों को निर्धारित करते हैं। इनका उत्पादन त्वरित आवेशों द्वारा होता है।
प्रश्न 3. विद्युतचुंबकीय तरंगों को अनुप्रस्थ तरंगें क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
विद्युतचुंबकीय तरंगों को अनुप्रस्थ तरंगें इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनमें विद्युत क्षेत्र और चुंबकीय क्षेत्र के दोलन तरंग के संचरण की दिशा के लंबवत होते हैं। यदि तरंग x-अक्ष की दिशा में चल रही हो तो विद्युत क्षेत्र y-अक्ष में तथा चुंबकीय क्षेत्र z-अक्ष में दोलित हो सकता है। इस प्रकार दोनों क्षेत्र एक-दूसरे के तथा तरंग की गति की दिशा के लंबवत होते हैं। यह अनुप्रस्थ तरंगों की प्रमुख पहचान है। इसके विपरीत अनुदैर्ध्य तरंगों में दोलन संचरण दिशा के समानांतर होते हैं। इसलिए विद्युतचुंबकीय तरंगों को शुद्ध अनुप्रस्थ तरंगें माना जाता है।
प्रश्न 4. विद्युतचुंबकीय तरंग में विद्युत क्षेत्र और चुंबकीय क्षेत्र के बीच क्या संबंध है?
उत्तर:
विद्युतचुंबकीय तरंग में विद्युत क्षेत्र (E) और चुंबकीय क्षेत्र (B) परस्पर लंबवत होते हैं तथा समान फेज में दोलन करते हैं। इनके परिमाणों के बीच संबंध निम्न है:
[
E = cB
]
जहाँ (c) निर्वात में प्रकाश का वेग है। इसका अर्थ है कि विद्युत क्षेत्र का परिमाण चुंबकीय क्षेत्र के परिमाण से (c) गुना अधिक होता है। दोनों क्षेत्र एक साथ अधिकतम तथा न्यूनतम मान प्राप्त करते हैं। तरंग की कुल ऊर्जा विद्युत तथा चुंबकीय क्षेत्रों के बीच समान रूप से वितरित रहती है। यह संबंध मैक्सवेल के विद्युतचुंबकीय सिद्धांत का महत्वपूर्ण परिणाम है।
प्रश्न 5. विद्युतचुंबकीय तरंगें निर्वात में कैसे संचरित हो सकती हैं?
उत्तर:
विद्युतचुंबकीय तरंगों को संचरण के लिए किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि ये कणों के कंपन पर निर्भर नहीं करतीं। इनमें विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र परस्पर एक-दूसरे को उत्पन्न करते रहते हैं। परिवर्ती विद्युत क्षेत्र चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है और परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है। यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है, जिससे तरंग अंतरिक्ष में आगे बढ़ती रहती है। ध्वनि जैसी यांत्रिक तरंगों को माध्यम की आवश्यकता होती है, जबकि विद्युतचुंबकीय तरंगें बिना माध्यम के भी संचरित हो सकती हैं। इसी कारण सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक निर्वात से होकर पहुँचता है।
प्रश्न 6. मैक्सवेल की विद्युतचुंबकीय तरंगों के संबंध में भविष्यवाणी क्या थी?
उत्तर:
जेम्स क्लार्क मैक्सवेल ने भविष्यवाणी की थी कि परिवर्ती विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र अंतरिक्ष में तरंगों के रूप में संचरित हो सकते हैं। उन्होंने गणितीय रूप से सिद्ध किया कि इन तरंगों का वेग प्रकाश के वेग के बराबर होता है। इससे उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि प्रकाश स्वयं एक विद्युतचुंबकीय तरंग है। मैक्सवेल के सिद्धांत ने विद्युत, चुंबकत्व और प्रकाशिकी को एकीकृत किया। बाद में हेनरिक हर्ट्ज़ ने प्रयोगों द्वारा विद्युतचुंबकीय तरंगों के अस्तित्व को सिद्ध किया। यह आधुनिक संचार तकनीक की नींव बना।
प्रश्न 7. विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम क्या है?
उत्तर:
विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम विद्युतचुंबकीय विकिरणों की संपूर्ण श्रेणी है, जिसे तरंगदैर्घ्य या आवृत्ति के आधार पर व्यवस्थित किया जाता है। इसमें रेडियो तरंगें, माइक्रोवेव, अवरक्त किरणें, दृश्य प्रकाश, पराबैंगनी किरणें, एक्स-किरणें तथा गामा किरणें शामिल हैं। रेडियो तरंगों की तरंगदैर्घ्य सबसे अधिक तथा आवृत्ति सबसे कम होती है, जबकि गामा किरणों की तरंगदैर्घ्य सबसे कम और आवृत्ति सबसे अधिक होती है। सभी विद्युतचुंबकीय तरंगें निर्वात में समान वेग से चलती हैं, परंतु उनकी ऊर्जा और उपयोग अलग-अलग होते हैं। विज्ञान, चिकित्सा और संचार में इनका व्यापक उपयोग होता है।
प्रश्न 8. रेडियो तरंगों और माइक्रोवेव में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
रेडियो तरंगें और माइक्रोवेव दोनों विद्युतचुंबकीय तरंगें हैं, लेकिन उनकी तरंगदैर्घ्य और उपयोग अलग-अलग हैं। रेडियो तरंगों की तरंगदैर्घ्य अधिक तथा आवृत्ति कम होती है। इनका उपयोग रेडियो प्रसारण, टेलीविजन प्रसारण और लंबी दूरी के संचार में किया जाता है। माइक्रोवेव की तरंगदैर्घ्य अपेक्षाकृत कम और आवृत्ति अधिक होती है। इनका उपयोग रडार, उपग्रह संचार, मोबाइल संचार और माइक्रोवेव ओवन में किया जाता है। माइक्रोवेव अधिक सूचना वहन कर सकती हैं, इसलिए आधुनिक संचार प्रणालियों में इनका विशेष महत्व है।
प्रश्न 9. अवरक्त (Infrared) किरणें क्या हैं? इनके उपयोग बताइए।
उत्तर:
अवरक्त किरणें ऐसी विद्युतचुंबकीय तरंगें हैं जिनकी तरंगदैर्घ्य दृश्य लाल प्रकाश से अधिक तथा माइक्रोवेव से कम होती है। ये गर्म वस्तुओं द्वारा उत्सर्जित होती हैं और ऊष्मा विकिरण के रूप में जानी जाती हैं। मानव आँख इन्हें नहीं देख सकती, लेकिन इनके प्रभाव को ऊष्मा के रूप में महसूस किया जा सकता है। इनका उपयोग टीवी रिमोट कंट्रोल, नाइट विज़न उपकरण, थर्मल कैमरों तथा चिकित्सा में फिजियोथेरेपी के लिए किया जाता है। मौसम विज्ञान और उपग्रह चित्रण में भी इनका महत्वपूर्ण उपयोग होता है।
प्रश्न 10. पराबैंगनी (Ultraviolet) किरणें क्या हैं? इनके उपयोग बताइए।
उत्तर:
पराबैंगनी किरणें ऐसी विद्युतचुंबकीय तरंगें हैं जिनकी तरंगदैर्घ्य दृश्य बैंगनी प्रकाश से कम तथा एक्स-किरणों से अधिक होती है। इनमें दृश्य प्रकाश की तुलना में अधिक ऊर्जा होती है। इनका उपयोग चिकित्सा उपकरणों को जीवाणुरहित करने, पानी को शुद्ध करने तथा नकली नोटों की पहचान करने में किया जाता है। सीमित मात्रा में सूर्य से प्राप्त पराबैंगनी किरणें शरीर में विटामिन-D के निर्माण में सहायता करती हैं। हालांकि अधिक मात्रा में इनके संपर्क से त्वचा कैंसर और आँखों को नुकसान हो सकता है। पृथ्वी की ओजोन परत इनकी हानिकारक मात्रा को रोकती है।
प्रश्न 11. एक्स-किरणें क्या हैं? इनके दो उपयोग लिखिए।
उत्तर:
एक्स-किरणें उच्च आवृत्ति तथा कम तरंगदैर्घ्य वाली विद्युतचुंबकीय तरंगें हैं। इनमें पदार्थों को भेदने की क्षमता अधिक होती है। ये शरीर के मुलायम ऊतकों से आसानी से गुजर जाती हैं, लेकिन हड्डियों द्वारा अवशोषित हो जाती हैं। इसी कारण इनका उपयोग चिकित्सा क्षेत्र में हड्डियों के फ्रैक्चर तथा दंत रोगों की जाँच के लिए किया जाता है। दूसरा प्रमुख उपयोग हवाई अड्डों पर सुरक्षा जाँच में होता है, जहाँ सामान की स्कैनिंग की जाती है। उद्योगों में भी धातुओं की आंतरिक दोषों की पहचान के लिए एक्स-किरणों का उपयोग किया जाता है।
प्रश्न 12. गामा किरणें क्या हैं? इनका उत्पादन कैसे होता है?
उत्तर:
गामा किरणें विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम की सबसे अधिक ऊर्जा वाली तरंगें हैं। इनकी तरंगदैर्घ्य अत्यंत कम तथा आवृत्ति अत्यधिक होती है। इनका उत्पादन रेडियोधर्मी पदार्थों के नाभिकीय विघटन तथा नाभिकीय अभिक्रियाओं के दौरान होता है। ये परमाणु के नाभिक से उत्पन्न होती हैं, जबकि एक्स-किरणें इलेक्ट्रॉनों से उत्पन्न होती हैं। गामा किरणों की भेदन क्षमता बहुत अधिक होती है। इनका उपयोग कैंसर के उपचार, चिकित्सा उपकरणों के विसंक्रमण तथा वैज्ञानिक अनुसंधान में किया जाता है। अधिक मात्रा में संपर्क मानव शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।
प्रश्न 13. विद्युतचुंबकीय तरंगों को बढ़ती हुई आवृत्ति के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
उत्तर:
बढ़ती हुई आवृत्ति के क्रम में विद्युतचुंबकीय तरंगों का क्रम निम्नलिखित है:
रेडियो तरंगें → माइक्रोवेव → अवरक्त किरणें → दृश्य प्रकाश → पराबैंगनी किरणें → एक्स-किरणें → गामा किरणें
इस क्रम में आवृत्ति बढ़ती जाती है तथा तरंगदैर्घ्य घटता जाता है। इनके बीच संबंध:
[
c = \nu \lambda
]
द्वारा व्यक्त किया जाता है। जहाँ (c) प्रकाश का वेग, (\nu) आवृत्ति तथा (\lambda) तरंगदैर्घ्य है। गामा किरणों की ऊर्जा सबसे अधिक तथा रेडियो तरंगों की सबसे कम होती है।
प्रश्न 14. रडार प्रणालियों में माइक्रोवेव का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर:
माइक्रोवेव का उपयोग रडार प्रणालियों में इसलिए किया जाता है क्योंकि उनकी तरंगदैर्घ्य कम तथा आवृत्ति अधिक होती है। वे लंबी दूरी तक कम ऊर्जा हानि के साथ यात्रा कर सकती हैं और विमान, जहाज तथा अन्य वस्तुओं से परावर्तित हो जाती हैं। रडार इन परावर्तित संकेतों का विश्लेषण करके वस्तु की दूरी, दिशा तथा गति का निर्धारण करता है। माइक्रोवेव बादलों, धुंध और हल्की वर्षा से भी गुजर सकती हैं, जिससे मौसम पूर्वानुमान और वायु यातायात नियंत्रण में सहायता मिलती है।
प्रश्न 15. संचार में विद्युतचुंबकीय तरंगों की भूमिका समझाइए।
उत्तर:
आधुनिक संचार प्रणाली का आधार विद्युतचुंबकीय तरंगें हैं। ध्वनि, चित्र और डेटा को विद्युत संकेतों में बदलकर विद्युतचुंबकीय तरंगों के माध्यम से भेजा जाता है। रेडियो तरंगों का उपयोग रेडियो एवं टीवी प्रसारण में किया जाता है। माइक्रोवेव उपग्रह संचार और मोबाइल नेटवर्क में प्रयुक्त होती हैं। दृश्य प्रकाश और अवरक्त किरणों का उपयोग ऑप्टिकल फाइबर संचार में किया जाता है। विद्युतचुंबकीय तरंगें प्रकाश की गति से यात्रा करती हैं और लंबी दूरी तक सूचना पहुँचाने में सक्षम होती हैं। इस कारण वैश्विक संचार और इंटरनेट व्यवस्था संभव हो पाई है।
प्रश्न 16. दृश्य प्रकाश को विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम का छोटा भाग क्यों माना जाता है?
उत्तर:
दृश्य प्रकाश विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम का केवल एक छोटा भाग है जिसकी तरंगदैर्घ्य लगभग 400 nm से 700 nm तक होती है। मानव आँख केवल इसी सीमित क्षेत्र की तरंगों को देख सकती है। इस सीमा के बाहर अवरक्त और पराबैंगनी विकिरण उपस्थित होते हैं, जिन्हें आँखें नहीं देख सकतीं। यद्यपि दृश्य प्रकाश स्पेक्ट्रम का बहुत छोटा भाग है, फिर भी यह मानव दृष्टि, फोटोग्राफी तथा प्रकाशीय उपकरणों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। शेष स्पेक्ट्रम भी संचार, चिकित्सा और वैज्ञानिक अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 17. विस्थापन धारा (Displacement Current) क्या है?
उत्तर:
विस्थापन धारा वह धारा है जो परिवर्ती विद्युत क्षेत्र के कारण उत्पन्न होती है। मैक्सवेल ने इसे एम्पियर के नियम में संशोधन करने के लिए प्रस्तुत किया था। जब संधारित्र (Capacitor) आवेशित हो रहा होता है, तब प्लेटों के बीच वास्तविक चालक धारा नहीं बहती, लेकिन विद्युत क्षेत्र परिवर्तित होता रहता है। मैक्सवेल ने बताया कि यह परिवर्ती विद्युत क्षेत्र चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है और धारा के समान प्रभाव दिखाता है। इसी को विस्थापन धारा कहते हैं। यह अवधारणा विद्युतचुंबकीय तरंगों के सिद्धांत की आधारशिला है।
प्रश्न 18. विद्युतचुंबकीय तरंगें ऊर्जा का वहन कैसे करती हैं?
उत्तर:
विद्युतचुंबकीय तरंगें अपने साथ ऊर्जा और संवेग लेकर चलती हैं। इनमें उपस्थित दोलनशील विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाते हैं। जब ये तरंगें किसी पदार्थ पर गिरती हैं, तो उनकी ऊर्जा अवशोषित, परावर्तित या संचारित हो सकती है। सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक ऊर्जा पहुँचाता है, जिससे जीवन संभव हो पाता है। माइक्रोवेव भोजन को गर्म करती हैं और रेडियो तरंगें सूचना का संचार करती हैं। इस प्रकार विद्युतचुंबकीय तरंगें ऊर्जा स्थानांतरण का एक प्रभावी माध्यम हैं।
प्रश्न 19. एक्स-किरणों की भेदन क्षमता दृश्य प्रकाश से अधिक क्यों होती है?
उत्तर:
एक्स-किरणों की आवृत्ति बहुत अधिक तथा तरंगदैर्घ्य बहुत कम होती है। अधिक आवृत्ति का अर्थ अधिक ऊर्जा होता है। इसी कारण एक्स-किरणें पदार्थों में गहराई तक प्रवेश कर सकती हैं। वे शरीर के मुलायम ऊतकों से आसानी से गुजर जाती हैं, जबकि हड्डियों द्वारा अवशोषित हो जाती हैं। इसके विपरीत दृश्य प्रकाश की ऊर्जा कम होती है और वह अधिकांश अपारदर्शी वस्तुओं से नहीं गुजर सकता। यही कारण है कि एक्स-किरणों का उपयोग चिकित्सा निदान, सुरक्षा जाँच तथा औद्योगिक निरीक्षण में किया जाता है।
प्रश्न 20. पराबैंगनी किरणों और एक्स-किरणों के हानिकारक प्रभाव बताइए।
उत्तर:
पराबैंगनी तथा एक्स-किरणें उच्च ऊर्जा वाली विद्युतचुंबकीय तरंगें हैं, इसलिए इनका अत्यधिक संपर्क हानिकारक हो सकता है। अधिक पराबैंगनी विकिरण त्वचा को नुकसान पहुँचाता है, सनबर्न उत्पन्न करता है तथा त्वचा कैंसर का कारण बन सकता है। यह आँखों को भी प्रभावित कर सकता है। एक्स-किरणें आयनीकरण करने वाली किरणें हैं, जो कोशिकाओं और DNA को क्षति पहुँचा सकती हैं। अत्यधिक संपर्क से आनुवंशिक परिवर्तन तथा कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इनके उपयोग के समय उचित सुरक्षा उपाय जैसे सनस्क्रीन, सुरक्षात्मक चश्मे तथा सीसा (Lead) की ढाल का प्रयोग आवश्यक होता है।
