सीबीएसई कक्षा 12 भौतिकी (2026–27)
अध्याय 7 : प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current)
20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
1. प्रत्यावर्ती धारा (AC) क्या है? यह दिष्ट धारा (DC) से कैसे भिन्न है?
उत्तर:
प्रत्यावर्ती धारा (AC) वह विद्युत धारा है जिसका परिमाण तथा दिशा समय के साथ आवर्ती रूप से बदलते रहते हैं। इसे (I = I_0 \sin \omega t) द्वारा व्यक्त किया जाता है। AC में इलेक्ट्रॉन आगे-पीछे दोलन करते हैं, जबकि दिष्ट धारा (DC) केवल एक दिशा में प्रवाहित होती है और उसका परिमाण लगभग स्थिर रहता है। AC को लंबी दूरी तक विद्युत ऊर्जा के संचरण के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है क्योंकि इसके वोल्टेज को ट्रांसफॉर्मर द्वारा आसानी से बढ़ाया या घटाया जा सकता है। भारत में घरेलू विद्युत आपूर्ति 50 Hz आवृत्ति वाली AC होती है।
2. प्रत्यावर्ती धारा का RMS मान क्या होता है?
उत्तर:
RMS (Root Mean Square) मान वह प्रभावी मान है जो किसी प्रतिरोध में उतनी ही ऊष्मा उत्पन्न करता है जितनी समान समय में वही मान की दिष्ट धारा उत्पन्न करती है। इसे AC का प्रभावी मान भी कहते हैं।
[
I_{rms}=\frac{I_0}{\sqrt{2}}
]
जहाँ (I_0) अधिकतम धारा है। इसी प्रकार,
[
V_{rms}=\frac{V_0}{\sqrt{2}}
]
RMS मान का उपयोग AC परिपथों में वोल्टेज और धारा को मापने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, 220 V AC का अर्थ 220 V RMS है, न कि अधिकतम वोल्टेज।
3. प्रेरकीय रिएक्टेंस (Inductive Reactance) क्या है? इसका सूत्र लिखिए।
उत्तर:
प्रेरकीय रिएक्टेंस वह विरोध है जो एक प्रेरक (Inductor) प्रत्यावर्ती धारा के प्रवाह के प्रति प्रस्तुत करता है। AC के कारण बदलता हुआ चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है, जिससे स्व-प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) पैदा होता है जो धारा के परिवर्तन का विरोध करता है।
[
X_L=\omega L=2\pi fL
]
जहाँ (L) प्रेरकत्व तथा (f) आवृत्ति है। इसकी इकाई ओम (Ω) है। प्रेरकीय रिएक्टेंस आवृत्ति बढ़ने पर बढ़ता है। इसलिए प्रेरक उच्च आवृत्ति वाली धाराओं का अधिक विरोध करता है। शुद्ध प्रेरकीय परिपथ में धारा, वोल्टेज से 90° पीछे रहती है।
4. धारिता रिएक्टेंस (Capacitive Reactance) क्या है? इसका सूत्र लिखिए।
उत्तर:
धारिता रिएक्टेंस वह विरोध है जो एक संधारित्र (Capacitor) प्रत्यावर्ती धारा के प्रवाह के प्रति प्रस्तुत करता है। AC के दौरान संधारित्र लगातार आवेशित और निरावेशित होता रहता है।
[
X_C=\frac{1}{\omega C}
=\frac{1}{2\pi fC}
]
जहाँ (C) धारिता तथा (f) आवृत्ति है। इसकी इकाई ओम (Ω) है। धारिता रिएक्टेंस आवृत्ति बढ़ने पर घटता है। अतः संधारित्र उच्च आवृत्ति वाली धाराओं को अधिक आसानी से गुजरने देता है। शुद्ध धारिता परिपथ में धारा, वोल्टेज से 90° आगे रहती है।
5. शुद्ध प्रतिरोधी AC परिपथ में कला-अंतर (Phase Difference) समझाइए।
उत्तर:
जब किसी शुद्ध प्रतिरोध के सिरों पर प्रत्यावर्ती वोल्टेज लगाया जाता है, तब ओम का नियम प्रत्येक क्षण लागू होता है। धारा और वोल्टेज दोनों एक साथ अपने अधिकतम, न्यूनतम तथा शून्य मान प्राप्त करते हैं।
[
\phi = 0^\circ
]
अर्थात् धारा और वोल्टेज समान कला में होते हैं। इस स्थिति में शक्ति गुणांक ((\cos \phi)) का मान 1 होता है तथा औसत शक्ति अधिकतम होती है। प्रतिरोध द्वारा प्राप्त संपूर्ण विद्युत ऊर्जा ऊष्मा में परिवर्तित हो जाती है।
6. शुद्ध प्रेरकीय परिपथ में धारा, वोल्टेज से पीछे क्यों रहती है?
उत्तर:
जब AC किसी प्रेरक से प्रवाहित होती है, तब बदलती हुई धारा के कारण बदलता हुआ चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। यह क्षेत्र स्व-प्रेरित EMF उत्पन्न करता है जो धारा में परिवर्तन का विरोध करता है। परिणामस्वरूप धारा तुरंत नहीं बढ़ पाती और वोल्टेज से पीछे रह जाती है।
[
\phi = 90^\circ
]
अर्थात् धारा वोल्टेज से एक-चौथाई चक्र पीछे रहती है। शुद्ध प्रेरकीय परिपथ में औसत शक्ति शून्य होती है क्योंकि ऊर्जा चुंबकीय क्षेत्र में संग्रहित होकर पुनः स्रोत को लौट जाती है।
7. शुद्ध धारिता परिपथ में धारा, वोल्टेज से आगे क्यों रहती है?
उत्तर:
संधारित्र में धारा उसके प्लेटों को आवेशित करने के लिए आवश्यक होती है। जैसे ही AC वोल्टेज लगाया जाता है, धारा प्रवाहित होने लगती है और संधारित्र आवेशित होने लगता है। इसलिए धारा अपना अधिकतम मान वोल्टेज से पहले प्राप्त कर लेती है।
[
\phi = 90^\circ
]
अर्थात् धारा वोल्टेज से 90° आगे रहती है। इस परिपथ में औसत शक्ति शून्य होती है क्योंकि ऊर्जा विद्युत क्षेत्र में संग्रहित होकर बाद में स्रोत को वापस मिल जाती है।
8. प्रतिबाधा (Impedance) क्या है?
उत्तर:
प्रतिबाधा AC परिपथ द्वारा धारा के प्रवाह के प्रति प्रस्तुत कुल विरोध है। इसे (Z) द्वारा दर्शाया जाता है। इसमें प्रतिरोध तथा रिएक्टेंस दोनों शामिल होते हैं।
[
Z=\sqrt{R^2+(X_L-X_C)^2}
]
इसकी इकाई ओम (Ω) है। AC परिपथ में धारा का मान
[
I=\frac{V}{Z}
]
से प्राप्त होता है। प्रतिबाधा जितनी अधिक होगी, धारा उतनी कम होगी। AC परिपथों के विश्लेषण में प्रतिबाधा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।
9. श्रेणी LCR परिपथ क्या है?
उत्तर:
श्रेणी LCR परिपथ वह परिपथ है जिसमें प्रतिरोध (R), प्रेरक (L) तथा संधारित्र (C) श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं। इसमें तीनों अवयवों से समान धारा प्रवाहित होती है। प्रतिरोध ऊर्जा का अपव्यय करता है जबकि प्रेरक और संधारित्र ऊर्जा को क्रमशः चुंबकीय तथा विद्युत क्षेत्रों में संग्रहित करते हैं।
[
Z=\sqrt{R^2+(X_L-X_C)^2}
]
यह परिपथ प्रेरकीय, धारितीय अथवा प्रतिरोधी व्यवहार प्रदर्शित कर सकता है। इसका उपयोग रेडियो ट्यूनिंग तथा संचार उपकरणों में किया जाता है।
10. अनुनाद (Resonance) क्या है?
उत्तर:
श्रेणी LCR परिपथ में जब प्रेरकीय रिएक्टेंस और धारिता रिएक्टेंस बराबर हो जाते हैं, तब अनुनाद की स्थिति उत्पन्न होती है।
[
X_L=X_C
]
इस अवस्था में परिपथ की प्रतिबाधा न्यूनतम तथा धारा अधिकतम हो जाती है।
[
Z=R
]
अनुनाद पर वोल्टेज और धारा समान कला में होते हैं तथा शक्ति गुणांक 1 हो जाता है। रेडियो, टेलीविजन तथा संचार प्रणालियों में वांछित आवृत्ति चुनने के लिए अनुनाद का उपयोग किया जाता है।
11. अनुनादी आवृत्ति (Resonant Frequency) क्या है?
उत्तर:
जिस आवृत्ति पर LCR परिपथ में अनुनाद उत्पन्न होता है, उसे अनुनादी आवृत्ति कहते हैं।
f_r=\frac{1}{2\pi\sqrt{LC}}
इस आवृत्ति पर प्रेरकीय तथा धारिता रिएक्टेंस बराबर होते हैं। परिणामस्वरूप प्रतिबाधा न्यूनतम तथा धारा अधिकतम हो जाती है। यह आवृत्ति केवल प्रेरकत्व और धारिता पर निर्भर करती है तथा रेडियो ट्यूनिंग में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
12. शक्ति गुणांक (Power Factor) क्या है?
उत्तर:
AC परिपथ में वोल्टेज और धारा के बीच के कला कोण के कोसाइन को शक्ति गुणांक कहते हैं।
[
\text{Power Factor}=\cos\phi
]
औसत शक्ति का सूत्र है:
[
P=V_{rms}I_{rms}\cos\phi
]
शक्ति गुणांक का मान 1 होने पर परिपथ सबसे अधिक दक्ष होता है। उद्योगों में संधारित्रों का उपयोग शक्ति गुणांक सुधारने के लिए किया जाता है जिससे ऊर्जा हानि कम होती है।
13. वाटरहित धारा (Wattless Current) क्या है?
उत्तर:
वह धारा जो परिपथ में प्रवाहित तो होती है परंतु कोई औसत शक्ति व्यय नहीं करती, वाटरहित धारा कहलाती है। यह शुद्ध प्रेरकीय या शुद्ध धारिता परिपथ में पाई जाती है।
[
P=V_{rms}I_{rms}\cos90^\circ=0
]
इस स्थिति में ऊर्जा केवल स्रोत और परिपथ के बीच आदान-प्रदान करती है। कोई उपयोगी कार्य नहीं होता। वाटरहित धारा विद्युत संचरण में अवांछनीय मानी जाती है क्योंकि यह धारा बढ़ाती है लेकिन उपयोगी शक्ति नहीं देती।
14. ट्रांसफॉर्मर का सिद्धांत लिखिए।
उत्तर:
ट्रांसफॉर्मर अन्योन्य प्रेरण (Mutual Induction) के सिद्धांत पर कार्य करता है। जब प्राथमिक कुंडली में AC प्रवाहित होती है, तो परिवर्ती चुंबकीय फ्लक्स उत्पन्न होता है। यह फ्लक्स द्वितीयक कुंडली से जुड़कर उसमें प्रेरित EMF उत्पन्न करता है।
ट्रांसफॉर्मर केवल AC पर कार्य करता है क्योंकि इसके लिए परिवर्ती चुंबकीय फ्लक्स आवश्यक होता है। इसका उपयोग वोल्टेज को बढ़ाने या घटाने तथा विद्युत शक्ति के कुशल संचरण में किया जाता है।
15. स्टेप-अप और स्टेप-डाउन ट्रांसफॉर्मर में अंतर बताइए।
उत्तर:
स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर वोल्टेज बढ़ाता तथा धारा घटाता है। इसमें द्वितीयक कुंडली के चक्करों की संख्या प्राथमिक कुंडली से अधिक होती है।
[
N_s>N_p
]
स्टेप-डाउन ट्रांसफॉर्मर वोल्टेज घटाता तथा धारा बढ़ाता है।
[
N_s<N_p
]
स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर विद्युत उत्पादन केंद्रों पर तथा स्टेप-डाउन ट्रांसफॉर्मर उपभोक्ताओं के निकट उपयोग किए जाते हैं। दोनों अन्योन्य प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करते हैं।
16. ट्रांसफॉर्मर में होने वाली दो ऊर्जा हानियाँ तथा उनके निवारण लिखिए।
उत्तर:
- एडी धारा हानि (Eddy Current Loss): कोर में उत्पन्न एडी धाराओं से ऊष्मा पैदा होती है। इसे पतली-पतली लैमिनेटेड चादरों का उपयोग करके कम किया जाता है।
- हिस्टैरिसिस हानि (Hysteresis Loss): बार-बार चुंबकीकरण और विचुंबकीकरण से ऊर्जा हानि होती है। इसे सिलिकॉन स्टील या नरम लोहे का उपयोग करके कम किया जाता है।
इन हानियों को कम करके ट्रांसफॉर्मर की दक्षता बढ़ाई जाती है।
17. लंबी दूरी तक विद्युत संचरण के लिए AC को क्यों प्राथमिकता दी जाती है?
उत्तर:
AC के वोल्टेज को ट्रांसफॉर्मर द्वारा आसानी से बढ़ाया या घटाया जा सकता है। विद्युत शक्ति के संचरण के समय वोल्टेज बढ़ाकर धारा को कम कर दिया जाता है।
[
P=I^2R
]
इससे धारा कम होने के कारण ऊर्जा हानि बहुत कम हो जाती है। उपभोक्ताओं तक पहुँचने पर वोल्टेज को सुरक्षित स्तर तक घटा दिया जाता है। यही कारण है कि AC संचरण DC की अपेक्षा अधिक किफायती और प्रभावी है।
18. LC दोलन क्या हैं?
उत्तर:
LC परिपथ में संधारित्र और प्रेरक के बीच ऊर्जा का निरंतर आदान-प्रदान होता है, जिसे LC दोलन कहते हैं। प्रारंभ में संधारित्र में विद्युत ऊर्जा संचित होती है। यह ऊर्जा प्रेरक में चुंबकीय ऊर्जा में परिवर्तित होती है। बाद में चुंबकीय ऊर्जा पुनः विद्युत ऊर्जा में बदल जाती है।
आदर्श स्थिति में ये दोलन अनंत समय तक चलते रहते हैं, किंतु वास्तविक परिपथ में प्रतिरोध के कारण धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं। LC दोलन रेडियो और संचार प्रणालियों का आधार हैं।
19. AC परिपथ में कला कोण (Phase Angle) का महत्व क्या है?
उत्तर:
कला कोण ((\phi)) धारा और वोल्टेज के बीच कोणीय अंतर को दर्शाता है। यह बताता है कि परिपथ प्रतिरोधी, प्रेरकीय या धारितीय है।
- प्रतिरोधी परिपथ: (\phi = 0^\circ)
- प्रेरकीय परिपथ: (\phi = 90^\circ)
- धारितीय परिपथ: (\phi = -90^\circ)
कला कोण शक्ति गुणांक तथा औसत शक्ति को निर्धारित करता है। कम कला कोण का अर्थ अधिक शक्ति गुणांक और बेहतर दक्षता है।
20. ट्रांसफॉर्मर का रूपांतरण अनुपात (Transformation Ratio) क्या है?
उत्तर:
ट्रांसफॉर्मर का रूपांतरण अनुपात द्वितीयक वोल्टेज और प्राथमिक वोल्टेज के अनुपात को कहते हैं। यह द्वितीयक और प्राथमिक कुंडली के चक्करों के अनुपात के बराबर होता है।
[
\frac{V_s}{V_p}=\frac{N_s}{N_p}
]
यदि यह अनुपात 1 से अधिक है तो ट्रांसफॉर्मर स्टेप-अप होगा और यदि 1 से कम है तो स्टेप-डाउन होगा। यह अनुपात ट्रांसफॉर्मर की कार्यक्षमता और उपयोगिता को निर्धारित करता है।
