CBSE कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (भूगोल)
अध्याय 5 – खनिज एवं ऊर्जा संसाधन
20 महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
यह प्रश्न CBSE 2026–27 सत्र के नवीनतम NCERT आधारित पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किए गए हैं।
1. खनिज क्या हैं? इनके महत्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
खनिज ऐसे प्राकृतिक, समरूप पदार्थ होते हैं जिनकी आंतरिक संरचना निश्चित होती है। ये पृथ्वी की परत में विभिन्न रूपों में पाए जाते हैं। मानव जीवन में खनिजों का अत्यधिक महत्व है क्योंकि लगभग सभी उद्योग खनिजों पर आधारित हैं। लोहे, तांबे, एल्युमिनियम तथा अन्य धातुएँ खनिजों से प्राप्त होती हैं। भवन निर्माण, परिवहन, संचार, ऊर्जा उत्पादन तथा मशीनों के निर्माण में खनिजों का उपयोग होता है। यहाँ तक कि भोजन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं में भी खनिज तत्व मौजूद होते हैं। इसलिए खनिज किसी भी देश के आर्थिक विकास और औद्योगिकीकरण की आधारशिला माने जाते हैं।
2. आग्नेय एवं कायांतरित चट्टानों में खनिज कैसे पाए जाते हैं?
उत्तर:
आग्नेय और कायांतरित चट्टानों में खनिज प्रायः दरारों, भ्रंशों तथा जोड़ों में पाए जाते हैं। जब पिघले हुए खनिज और गैसीय पदार्थ पृथ्वी की सतह की ओर बढ़ते हैं, तो वे ठंडे होकर ठोस रूप धारण कर लेते हैं। इन छोटे जमावों को शिराएँ (Veins) तथा बड़े जमावों को लोड्स (Lodes) कहा जाता है। तांबा, जस्ता, सीसा और टिन जैसे धात्विक खनिज मुख्य रूप से इसी प्रकार प्राप्त होते हैं। इस प्रकार के खनिज निक्षेप खनन कार्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं और देश के औद्योगिक विकास में योगदान देते हैं।
3. लौह खनिज और अलौह खनिज में अंतर बताइए।
उत्तर:
लौह खनिज वे खनिज होते हैं जिनमें लोहे की मात्रा पाई जाती है। उदाहरण के रूप में लौह अयस्क, मैंगनीज, निकेल और कोबाल्ट प्रमुख हैं। ये इस्पात उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। दूसरी ओर, अलौह खनिजों में लोहे का अंश नहीं होता। तांबा, बॉक्साइट, सीसा और जस्ता इसके प्रमुख उदाहरण हैं। अलौह खनिज विद्युत उपकरणों, परिवहन साधनों तथा निर्माण कार्यों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। दोनों प्रकार के खनिज औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक हैं, परंतु उनकी रासायनिक संरचना और उपयोग अलग-अलग होते हैं।
4. लौह अयस्क का महत्व बताइए।
उत्तर:
लौह अयस्क आधुनिक औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह इस्पात उद्योग का मुख्य कच्चा माल है। मशीनों, रेलवे पटरियों, वाहनों, भवनों तथा भारी उद्योगों के निर्माण में इसका उपयोग किया जाता है। भारत में मुख्य रूप से हेमेटाइट और मैग्नेटाइट प्रकार के लौह अयस्क पाए जाते हैं। मैग्नेटाइट में लोहे की मात्रा अधिक होती है, जबकि हेमेटाइट भारत का सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला लौह अयस्क है। देश के औद्योगिक विकास और आधारभूत संरचना के निर्माण में लौह अयस्क की महत्वपूर्ण भूमिका है।
5. बॉक्साइट का महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
बॉक्साइट एल्युमिनियम का प्रमुख अयस्क है। यह अपक्षय की प्रक्रिया द्वारा निर्मित होता है और अवशिष्ट निक्षेपों में पाया जाता है। बॉक्साइट से एल्युमिना प्राप्त किया जाता है, जिससे आगे एल्युमिनियम का उत्पादन किया जाता है। एल्युमिनियम हल्का, मजबूत और जंग-प्रतिरोधी धातु है। इसका उपयोग हवाई जहाज, रेलवे डिब्बे, बिजली के तार, रसोई के बर्तन तथा पैकेजिंग उद्योग में किया जाता है। भारत में ओडिशा बॉक्साइट का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। बढ़ते औद्योगिकीकरण के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
6. अभ्रक (माइका) का महत्व बताइए।
उत्तर:
अभ्रक एक महत्वपूर्ण अधात्विक खनिज है जो पतली परतों में पाया जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी विद्युतरोधी क्षमता तथा उच्च ताप सहनशीलता है। इसी कारण इसका उपयोग विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में व्यापक रूप से किया जाता है। अभ्रक बिजली के उपकरणों, ट्रांसफार्मरों तथा संचार उपकरणों में इन्सुलेटर के रूप में प्रयुक्त होता है। भारत लंबे समय तक अभ्रक उत्पादन में अग्रणी देशों में रहा है। झारखंड, बिहार और राजस्थान इसके प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं। आधुनिक तकनीकी उद्योगों में इसका विशेष महत्व है।
7. चूना पत्थर का औद्योगिक महत्व बताइए।
उत्तर:
चूना पत्थर एक महत्वपूर्ण अधात्विक खनिज है जिसमें मुख्यतः कैल्शियम कार्बोनेट पाया जाता है। यह सीमेंट उद्योग का प्रमुख कच्चा माल है। इसके अतिरिक्त इसका उपयोग लौह एवं इस्पात उद्योग में फ्लक्स के रूप में किया जाता है। निर्माण कार्यों, भवन निर्माण तथा सड़क निर्माण में भी इसका व्यापक उपयोग होता है। भारत में चूना पत्थर के विशाल भंडार उपलब्ध हैं, जो देश के औद्योगिक विकास को गति प्रदान करते हैं। सीमेंट उत्पादन में इसकी अनिवार्यता के कारण इसे अत्यंत महत्वपूर्ण खनिज माना जाता है।
8. खनिज संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर:
खनिज संसाधन सीमित और अनवीकरणीय होते हैं। इनके निर्माण में लाखों वर्ष लगते हैं, जबकि वर्तमान में इनका उपयोग बहुत तेजी से हो रहा है। लगातार खनन के कारण उच्च गुणवत्ता वाले भंडार कम होते जा रहे हैं और उत्पादन लागत बढ़ रही है। यदि इनका विवेकपूर्ण उपयोग नहीं किया गया, तो भविष्य की पीढ़ियों को इन संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। खनिज संरक्षण के लिए पुनर्चक्रण, वैकल्पिक पदार्थों का उपयोग तथा आधुनिक तकनीकों का विकास आवश्यक है। इससे सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा।
9. ऊर्जा संसाधन क्या हैं?
उत्तर:
ऊर्जा संसाधन वे साधन हैं जिनसे ऊर्जा प्राप्त की जाती है और जिनका उपयोग विभिन्न कार्यों को संपन्न करने में किया जाता है। ऊर्जा खाना पकाने, प्रकाश व्यवस्था, परिवहन, उद्योग तथा कृषि के लिए आवश्यक है। कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जलविद्युत तथा परमाणु ऊर्जा इसके प्रमुख स्रोत हैं। ऊर्जा संसाधनों को परंपरागत तथा अपरंपरागत स्रोतों में विभाजित किया जाता है। किसी भी देश की आर्थिक प्रगति ऊर्जा की उपलब्धता पर निर्भर करती है। इसलिए ऊर्जा संसाधनों का विकास और संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
10. परंपरागत और अपरंपरागत ऊर्जा स्रोतों में अंतर बताइए।
उत्तर:
परंपरागत ऊर्जा स्रोत वे हैं जिनका उपयोग लंबे समय से किया जा रहा है, जैसे कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जलविद्युत और तापीय ऊर्जा। इनमें से अधिकांश स्रोत सीमित हैं। दूसरी ओर, अपरंपरागत ऊर्जा स्रोत अपेक्षाकृत नए हैं और पर्यावरण के अनुकूल माने जाते हैं। इनमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, बायोगैस तथा परमाणु ऊर्जा शामिल हैं। अपरंपरागत स्रोत नवीकरणीय होते हैं और प्रदूषण कम फैलाते हैं। इसलिए भविष्य में इनके उपयोग की संभावनाएँ अधिक हैं।
11. कोयला भारत का महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत क्यों है?
उत्तर:
कोयला भारत का सबसे महत्वपूर्ण जीवाश्म ईंधन है। इसका उपयोग बिजली उत्पादन, इस्पात उद्योग तथा विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जाता है। भारत में कोयले के विशाल भंडार उपलब्ध हैं, जिससे यह देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में प्रमुख भूमिका निभाता है। तापीय विद्युत संयंत्रों में मुख्य रूप से कोयले का उपयोग होता है। कोयला उद्योग रोजगार सृजन में भी योगदान देता है। हालांकि इसके अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है, इसलिए इसके विवेकपूर्ण उपयोग और संरक्षण की आवश्यकता है।
12. पेट्रोलियम को ‘काला सोना’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
पेट्रोलियम को ‘काला सोना’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका आर्थिक महत्व अत्यधिक है। इससे पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल, एलपीजी तथा अनेक पेट्रो-रसायन उत्पाद प्राप्त होते हैं। आधुनिक परिवहन व्यवस्था और उद्योग पेट्रोलियम पर निर्भर हैं। यह सीमित मात्रा में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन है और इसके बिना आधुनिक अर्थव्यवस्था की कल्पना कठिन है। इसकी बढ़ती मांग और बहुउपयोगिता के कारण इसे अत्यंत मूल्यवान संसाधन माना जाता है। इसलिए इसे ‘काला सोना’ की संज्ञा दी जाती है।
13. प्राकृतिक गैस के लाभ बताइए।
उत्तर:
प्राकृतिक गैस एक स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा स्रोत है। इसका उपयोग उद्योगों, बिजली उत्पादन, घरेलू ईंधन तथा परिवहन क्षेत्र में किया जाता है। यह कोयले और पेट्रोलियम की तुलना में कम प्रदूषण फैलाती है। पाइपलाइन द्वारा आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाई जा सकती है। प्राकृतिक गैस का उपयोग उर्वरक उद्योग में भी किया जाता है। ऊर्जा दक्षता अधिक होने तथा पर्यावरण पर कम प्रभाव डालने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। भारत में इसे भविष्य के महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत के रूप में देखा जाता है।
14. सौर ऊर्जा का महत्व बताइए।
उत्तर:
सौर ऊर्जा सूर्य से प्राप्त होने वाली नवीकरणीय ऊर्जा है। यह प्रदूषण रहित, असीमित और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा स्रोत है। भारत उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में स्थित होने के कारण वर्ष के अधिकांश समय पर्याप्त सूर्य प्रकाश प्राप्त करता है। सौर ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन, जल गर्म करने तथा घरेलू उपकरणों के संचालन में किया जाता है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में भी इसका सफल उपयोग संभव है। जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और सतत विकास को बढ़ावा देने में सौर ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
15. पवन ऊर्जा के लाभ लिखिए।
उत्तर:
पवन ऊर्जा हवा की गति से प्राप्त की जाती है और यह एक स्वच्छ तथा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है। इसके उत्पादन में किसी प्रकार का ईंधन नहीं लगता तथा प्रदूषण भी नहीं होता। भारत के तटीय क्षेत्रों तथा कुछ पठारी भागों में पवन ऊर्जा की अपार संभावनाएँ हैं। तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। पवन ऊर्जा जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करती है तथा पर्यावरण संरक्षण में सहायक है। भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में इसका महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।
16. बायोगैस क्या है? इसके लाभ बताइए।
उत्तर:
बायोगैस जैविक अपशिष्ट पदार्थों जैसे गोबर, कृषि अवशेष और जैविक कचरे के अपघटन से प्राप्त होती है। यह एक स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है। बायोगैस का उपयोग खाना पकाने, प्रकाश व्यवस्था तथा छोटे उद्योगों में किया जाता है। इसके उपयोग से लकड़ी और जीवाश्म ईंधनों की खपत कम होती है। साथ ही, इससे प्राप्त अवशेष उत्कृष्ट जैविक खाद के रूप में उपयोग किए जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण में बायोगैस महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
17. परमाणु ऊर्जा का महत्व बताइए।
उत्तर:
परमाणु ऊर्जा रेडियोधर्मी तत्वों जैसे यूरेनियम और थोरियम से प्राप्त की जाती है। यह अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न करने वाला स्रोत है। कम मात्रा में ईंधन से बड़ी मात्रा में ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। भारत में ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने में परमाणु ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करती है और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करती है। हालांकि इसके उपयोग में सुरक्षा उपायों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण विकल्प है।
18. खनन के पर्यावरणीय प्रभाव बताइए।
उत्तर:
खनन गतिविधियाँ पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। इससे भूमि क्षरण, वनों की कटाई, जल प्रदूषण तथा वायु प्रदूषण जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। खदानों से निकलने वाला अपशिष्ट मिट्टी की उर्वरता को प्रभावित करता है। भूजल स्तर में कमी और जैव विविधता का नुकसान भी खनन के दुष्प्रभाव हैं। इसके अतिरिक्त स्थानीय समुदायों के स्वास्थ्य और जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए वैज्ञानिक खनन तकनीकों तथा पुनर्वास कार्यक्रमों को अपनाना आवश्यक है।
19. भारत में ऊर्जा संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
भारत की जनसंख्या और औद्योगिक विकास के कारण ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है। अधिकांश ऊर्जा स्रोत सीमित हैं और उनके अत्यधिक उपयोग से पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। ऊर्जा संरक्षण से संसाधनों की बचत होती है, उत्पादन लागत घटती है तथा प्रदूषण कम होता है। ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा तथा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का विकास संरक्षण के प्रभावी उपाय हैं। ऊर्जा संरक्षण से भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है।
20. “ऊर्जा बचाना ही ऊर्जा उत्पादन है” कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
“ऊर्जा बचाना ही ऊर्जा उत्पादन है” का अर्थ है कि ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग करके नई ऊर्जा उत्पन्न करने की आवश्यकता को कम किया जा सकता है। जब हम ऊर्जा की बर्बादी रोकते हैं, तो सीमित संसाधनों की बचत होती है और पर्यावरणीय प्रदूषण भी घटता है। ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग, अनावश्यक बिजली बंद रखना तथा सार्वजनिक परिवहन अपनाना इसके उदाहरण हैं। ऊर्जा संरक्षण से आर्थिक लाभ भी प्राप्त होते हैं और सतत विकास को बढ़ावा मिलता है। इसलिए ऊर्जा की बचत को ऊर्जा उत्पादन के समान महत्व दिया जाता है।
