CBSE कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (भूगोल – Contemporary India-II)
अध्याय 4 – कृषि
20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
भारत की कृषि, फसल प्रतिरूप, प्रमुख फसलें, कृषि सुधार तथा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में कृषि के योगदान जैसे विषय इस अध्याय के प्रमुख भाग हैं।
1. भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का क्या महत्व है?
उत्तर:
कृषि भारत की प्रमुख आर्थिक गतिविधियों में से एक है। देश की बड़ी आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर करती है। कृषि खाद्यान्न, फल, सब्जियाँ तथा उद्योगों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराती है। कपड़ा, चीनी और खाद्य प्रसंस्करण जैसे अनेक उद्योग कृषि पर आधारित हैं। कृषि निर्यात के माध्यम से विदेशी मुद्रा अर्जित करने में भी सहायता करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान करने के कारण इसका सामाजिक महत्व भी है। इसलिए कृषि केवल भोजन उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय आय, रोजगार और औद्योगिक विकास का भी महत्वपूर्ण आधार है।
2. आदिम निर्वाह कृषि (Primitive Subsistence Farming) क्या है?
उत्तर:
आदिम निर्वाह कृषि कृषि की सबसे पुरानी पद्धति है। इसमें किसान छोटे भू-भाग पर पारंपरिक उपकरणों जैसे कुदाल, फावड़ा और लकड़ी के हल का उपयोग करते हैं। इस कृषि में उत्पादन मुख्यतः परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया जाता है। इसमें उर्वरकों और आधुनिक तकनीकों का सीमित प्रयोग होता है। देश के कई जनजातीय क्षेत्रों में स्थानांतरण कृषि (झूम खेती) इसी का एक रूप है। इसमें भूमि की उर्वरता कम होने पर किसान दूसरे स्थान पर खेती करने लगते हैं। यह कृषि कम उत्पादक होती है, लेकिन स्थानीय समुदायों की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
3. गहन निर्वाह कृषि (Intensive Subsistence Farming) की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
गहन निर्वाह कृषि उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ जनसंख्या घनत्व अधिक होता है और कृषि भूमि सीमित होती है। इस पद्धति में किसान छोटे खेतों पर अधिक श्रम और पूँजी लगाकर अधिक उत्पादन प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। सिंचाई, उन्नत बीज, उर्वरक और कीटनाशकों का व्यापक उपयोग किया जाता है। इस प्रकार की खेती मुख्य रूप से मानसूनी क्षेत्रों में की जाती है। भारत के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यह कृषि पद्धति अधिक प्रचलित है। इसका उद्देश्य कम भूमि से अधिक उपज प्राप्त करना होता है। इसलिए यह खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने और बढ़ती जनसंख्या की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
4. वाणिज्यिक कृषि (Commercial Farming) क्या है?
उत्तर:
वाणिज्यिक कृषि वह कृषि है जिसमें उत्पादन मुख्यतः बाजार में बिक्री के उद्देश्य से किया जाता है। इसमें आधुनिक मशीनों, उन्नत बीजों, रासायनिक उर्वरकों और सिंचाई सुविधाओं का व्यापक उपयोग होता है। इस कृषि में लाभ कमाना प्रमुख उद्देश्य होता है। गेहूँ, कपास, गन्ना तथा तिलहन जैसी फसलें बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं। इसके अंतर्गत बागान कृषि भी आती है, जहाँ चाय, कॉफी और रबर जैसी फसलें बड़े क्षेत्रों में उगाई जाती हैं। वाणिज्यिक कृषि कृषि उत्पादकता बढ़ाने तथा कृषि को बाजार और उद्योगों से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
5. भारत में खरीफ फसलों की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
खरीफ फसलें मानसून के आगमन के साथ जून-जुलाई में बोई जाती हैं और सितंबर-अक्टूबर में काटी जाती हैं। इन फसलों को गर्म एवं आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है। धान, मक्का, बाजरा, ज्वार, कपास और जूट प्रमुख खरीफ फसलें हैं। इनका उत्पादन मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर करता है। भारत में खरीफ फसलें कृषि उत्पादन का महत्वपूर्ण भाग हैं क्योंकि ये देश की खाद्य सुरक्षा में योगदान देती हैं। मानसून की स्थिति का इनकी उपज पर सीधा प्रभाव पड़ता है। अच्छी वर्षा होने पर उत्पादन बढ़ता है जबकि सूखे की स्थिति में उत्पादन घट सकता है।
6. रबी फसलें क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
रबी फसलें सर्दियों के मौसम में अक्टूबर से दिसंबर के बीच बोई जाती हैं और अप्रैल से जून के बीच काटी जाती हैं। इन फसलों को ठंडी जलवायु और कम वर्षा की आवश्यकता होती है। गेहूँ, जौ, चना, मटर और सरसों प्रमुख रबी फसलें हैं। उत्तर भारत में रबी फसलों का उत्पादन विशेष रूप से अधिक होता है। सिंचाई सुविधाओं के विकास से इनकी उत्पादकता में वृद्धि हुई है। रबी फसलें भारत के खाद्यान्न उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। विशेष रूप से गेहूँ देश की प्रमुख खाद्य फसल है और करोड़ों लोगों के भोजन का आधार है।
7. धान की खेती के लिए आवश्यक भौगोलिक परिस्थितियाँ बताइए।
उत्तर:
धान भारत की प्रमुख खाद्य फसल है। इसके लिए उच्च तापमान, अधिक आर्द्रता और पर्याप्त वर्षा की आवश्यकता होती है। सामान्यतः 25°C से अधिक तापमान तथा 100 सेमी से अधिक वार्षिक वर्षा धान की खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है। समतल भूमि और जलभराव वाली परिस्थितियाँ इसके विकास में सहायक होती हैं। धान मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, असम, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा तथा तटीय क्षेत्रों में उगाया जाता है। जहाँ वर्षा कम होती है, वहाँ सिंचाई की सहायता से धान की खेती की जाती है। यह भारत के अधिकांश लोगों का प्रमुख भोजन है।
8. गेहूँ की खेती के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ बताइए।
उत्तर:
गेहूँ भारत की दूसरी प्रमुख खाद्य फसल है। इसकी खेती के लिए ठंडी जलवायु तथा मध्यम वर्षा की आवश्यकता होती है। बुवाई के समय ठंडा मौसम और पकने के समय धूपयुक्त मौसम उपयुक्त माना जाता है। गेहूँ मुख्यतः पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में उगाया जाता है। सिंचाई, उन्नत बीज और हरित क्रांति के कारण गेहूँ उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। गेहूँ भारत की खाद्य सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण आधार है और देश की बड़ी आबादी के भोजन का प्रमुख स्रोत है। इसलिए इसका आर्थिक और सामाजिक महत्व बहुत अधिक है।
9. दलहनी फसलों का महत्व बताइए।
उत्तर:
दलहनी फसलें जैसे चना, अरहर, मूंग और मसूर प्रोटीन का प्रमुख स्रोत हैं। ये शाकाहारी लोगों के लिए पोषण का महत्वपूर्ण आधार हैं। दलहनी पौधों की जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जीवाणु पाए जाते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं। इस कारण ये फसलें कृषि की दृष्टि से भी लाभकारी होती हैं। भारत विश्व के प्रमुख दलहन उत्पादक देशों में से एक है। दलहनी फसलें मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायता करती हैं और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता को कम करती हैं। इसलिए इनका कृषि एवं पोषण दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व है।
10. गन्ना भारत की महत्वपूर्ण फसल क्यों है?
उत्तर:
गन्ना भारत की प्रमुख नकदी फसलों में से एक है। यह चीनी उद्योग के लिए मुख्य कच्चा माल प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त इससे गुड़, खांडसारी तथा एथेनॉल भी बनाया जाता है। गन्ने की खेती के लिए गर्म जलवायु तथा पर्याप्त जल की आवश्यकता होती है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और बिहार इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। गन्ना किसानों को अच्छी आय प्रदान करता है तथा लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है। चीनी उद्योग भारत के सबसे बड़े कृषि आधारित उद्योगों में से एक है, इसलिए गन्ना देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
11. चाय की खेती के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ बताइए।
उत्तर:
चाय भारत की एक महत्वपूर्ण पेय फसल है। इसकी खेती के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु आवश्यक होती है। गहरी, उपजाऊ तथा जल निकास वाली मिट्टी चाय उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती है। चाय की खेती पर्वतीय ढलानों पर अधिक की जाती है, जिससे जल निकास सुचारु बना रहता है। असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल प्रमुख चाय उत्पादक राज्य हैं। भारत विश्व के प्रमुख चाय उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। चाय उद्योग लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है और विदेशी मुद्रा अर्जित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
12. बागान कृषि (Plantation Agriculture) क्या है?
उत्तर:
बागान कृषि वाणिज्यिक कृषि का एक विशेष रूप है जिसमें किसी एक फसल की बड़े क्षेत्र में खेती की जाती है। चाय, कॉफी, रबर और गन्ना इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इसमें बड़े पैमाने पर पूँजी, श्रम और आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाता है। उत्पादन मुख्यतः बाजार और निर्यात के लिए किया जाता है। बागान कृषि में प्रसंस्करण इकाइयाँ भी प्रायः खेतों के निकट स्थापित की जाती हैं। यह कृषि विदेशी व्यापार को बढ़ावा देती है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान करती है। इसलिए इसका आर्थिक महत्व अत्यंत अधिक है।
13. हरित क्रांति क्या थी?
उत्तर:
हरित क्रांति भारत में कृषि उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल थी। इसके अंतर्गत उच्च उत्पादकता वाले बीज, रासायनिक उर्वरक, सिंचाई सुविधाएँ और आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग बढ़ाया गया। इसका मुख्य प्रभाव गेहूँ और चावल के उत्पादन पर पड़ा। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसके परिणाम विशेष रूप से दिखाई दिए। हरित क्रांति के कारण खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और देश खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ा। इसने किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
14. कृषि में तकनीकी सुधारों का महत्व बताइए।
उत्तर:
तकनीकी सुधारों ने भारतीय कृषि को आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाएँ, ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से कृषि उत्पादन बढ़ा है। इन सुधारों के कारण खेती अधिक वैज्ञानिक और उत्पादक बनी है। तकनीकी विकास से किसानों का श्रम कम हुआ तथा उत्पादन लागत में भी कमी आई। इससे खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि हुई और कृषि क्षेत्र की दक्षता बढ़ी। आधुनिक तकनीक का उपयोग किसानों को बदलती जलवायु परिस्थितियों का सामना करने में भी सहायता प्रदान करता है। इसलिए कृषि विकास के लिए तकनीकी सुधार आवश्यक हैं।
15. संस्थागत सुधारों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
संस्थागत सुधार वे सरकारी उपाय हैं जिनका उद्देश्य किसानों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार करना है। इनमें भूमि सुधार, सहकारी समितियों की स्थापना, कृषि ऋण की व्यवस्था, फसल बीमा तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी योजनाएँ शामिल हैं। किसानों को सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए बैंकों और ग्रामीण संस्थाओं का विकास किया गया। इन सुधारों से किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ी तथा उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्राप्त हुई। संस्थागत सुधार कृषि क्षेत्र को अधिक संगठित और सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध हुए हैं।
16. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का महत्व बताइए।
उत्तर:
न्यूनतम समर्थन मूल्य वह मूल्य है जिस पर सरकार किसानों से उनकी उपज खरीदने की गारंटी देती है। इसका उद्देश्य किसानों को उचित मूल्य प्रदान करना और उन्हें बाजार की अनिश्चितताओं से बचाना है। यदि बाजार में कीमतें बहुत कम हो जाएँ, तब भी किसान अपनी उपज MSP पर बेच सकते हैं। इससे किसानों की आय सुरक्षित रहती है और वे उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित होते हैं। MSP खाद्यान्न सुरक्षा बनाए रखने तथा किसानों के आर्थिक हितों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह कृषि क्षेत्र की स्थिरता के लिए एक आवश्यक नीति है।
17. कृषि में सिंचाई का महत्व बताइए।
उत्तर:
सिंचाई कृषि उत्पादन का एक महत्वपूर्ण आधार है। भारत में वर्षा असमान और अनिश्चित होती है, इसलिए फसलों की नियमित जल आवश्यकता को पूरा करने के लिए सिंचाई आवश्यक है। सिंचाई से सूखे की स्थिति में भी खेती संभव हो जाती है। यह फसलों की उत्पादकता बढ़ाने तथा एक वर्ष में एक से अधिक फसलें उगाने में सहायता करती है। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं के कारण कृषि विकास तेजी से हुआ है। इसलिए कृषि उत्पादन बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सिंचाई का विशेष महत्व है।
18. तिलहन फसलों का महत्व बताइए।
उत्तर:
तिलहन फसलें जैसे सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी और तिल खाद्य तेलों का प्रमुख स्रोत हैं। इनका उपयोग घरेलू उपभोग के साथ-साथ विभिन्न उद्योगों में भी किया जाता है। तिलहन फसलें किसानों को नकदी आय प्रदान करती हैं और कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देती हैं। भारत में इन फसलों का आर्थिक महत्व लगातार बढ़ रहा है। खाद्य तेलों की मांग को पूरा करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। तिलहन उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। इसलिए ये फसलें कृषि और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
19. कृषि के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ कौन-सी हैं?
उत्तर:
भारतीय कृषि कई चुनौतियों का सामना कर रही है। अनिश्चित मानसून, भूमि का छोटा आकार, मिट्टी की उर्वरता में कमी और जल संकट प्रमुख समस्याएँ हैं। किसानों को कभी-कभी उचित मूल्य नहीं मिल पाता, जिससे उनकी आय प्रभावित होती है। जलवायु परिवर्तन के कारण सूखा, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति भी बढ़ रही है। कृषि में आधुनिक तकनीकों का असमान उपयोग भी एक चुनौती है। इन समस्याओं के समाधान के लिए सतत कृषि, बेहतर सिंचाई, वैज्ञानिक तकनीकों और प्रभावी सरकारी नीतियों की आवश्यकता है।
20. खाद्य सुरक्षा में कृषि की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
खाद्य सुरक्षा का अर्थ है सभी लोगों को पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध होना। कृषि इस लक्ष्य को प्राप्त करने का मुख्य आधार है। धान, गेहूँ, दालें, सब्जियाँ और फल जैसे खाद्य पदार्थ कृषि के माध्यम से ही प्राप्त होते हैं। कृषि उत्पादन बढ़ने से खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित होती है और भूख तथा कुपोषण की समस्या कम होती है। हरित क्रांति और आधुनिक कृषि तकनीकों ने खाद्य उत्पादन में वृद्धि करके खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया है। इसलिए कृषि न केवल अर्थव्यवस्था बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
