CBSE कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (भूगोल – Contemporary India-II)
अध्याय 3 : जल संसाधन
20 महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. जल को नवीकरणीय संसाधन क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
जल को नवीकरणीय संसाधन कहा जाता है क्योंकि यह जलचक्र के माध्यम से लगातार पुनः प्राप्त होता रहता है। सूर्य की ऊष्मा से जल वाष्पित होकर बादल बनाता है और वर्षा के रूप में पुनः पृथ्वी पर लौटता है। नदियाँ, झीलें और भूजल इसी प्रक्रिया से पुनर्भरित होते रहते हैं। यद्यपि जल की कुल मात्रा लगभग स्थिर रहती है, लेकिन उपयोग योग्य मीठा जल सीमित है। इसलिए जल का संरक्षण आवश्यक है। यदि जल का अत्यधिक दोहन किया जाए और पुनर्भरण के उपाय न किए जाएँ, तो जल संकट उत्पन्न हो सकता है। इस प्रकार जल प्राकृतिक रूप से पुनः उपलब्ध होता है, इसलिए इसे नवीकरणीय संसाधन माना जाता है।
प्रश्न 2. जल संकट क्या है?
उत्तर:
जब किसी क्षेत्र में जल की उपलब्धता लोगों की आवश्यकताओं की तुलना में कम हो जाती है, तो उसे जल संकट कहते हैं। जल संकट केवल कम वर्षा के कारण नहीं होता, बल्कि जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण, औद्योगीकरण, कृषि में अत्यधिक सिंचाई तथा जल प्रदूषण भी इसके प्रमुख कारण हैं। कई क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा होने के बावजूद प्रदूषित जल के कारण जल संकट उत्पन्न हो जाता है। भारत के अनेक भागों में भूजल का अत्यधिक दोहन भी जल संकट को बढ़ा रहा है। जल संकट का प्रभाव कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य तथा सामाजिक जीवन पर पड़ता है। इसलिए जल संरक्षण और उचित प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।
प्रश्न 3. भारत में जल संरक्षण की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर:
भारत में बढ़ती जनसंख्या, कृषि विस्तार और औद्योगिक विकास के कारण जल की मांग तेजी से बढ़ रही है। दूसरी ओर, जल संसाधनों का असमान वितरण और भूजल का अत्यधिक दोहन जल संकट को जन्म दे रहा है। कई क्षेत्रों में वर्षा कम होती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अधिक वर्षा के बावजूद जल संग्रहण की व्यवस्था नहीं है। जल संरक्षण से भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकता है तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जा सकता है। यह कृषि उत्पादन बढ़ाने, पेयजल उपलब्ध कराने और जल संकट को कम करने में सहायता करता है। इसलिए जल संरक्षण सतत विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
प्रश्न 4. बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना क्या है?
उत्तर:
बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना ऐसी योजना है जिसमें नदी पर बाँध बनाकर जल का विभिन्न उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, पेयजल आपूर्ति, मत्स्य पालन, नौपरिवहन तथा पर्यटन को बढ़ावा देना होता है। स्वतंत्रता के बाद भारत में अनेक बड़े बाँधों का निर्माण किया गया, जिन्हें आधुनिक भारत के विकास का आधार माना गया। इन परियोजनाओं से कृषि और उद्योग दोनों को लाभ मिलता है। हालांकि इनके कुछ पर्यावरणीय और सामाजिक दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके कारण कई स्थानों पर इनके विरुद्ध आंदोलन हुए हैं।
प्रश्न 5. बाँध क्या है?
उत्तर:
बाँध नदी या जलधारा पर बनाया गया ऐसा अवरोध है जो जल के प्रवाह को नियंत्रित करता है और जल को एक जलाशय में संग्रहीत करता है। बाँधों का उपयोग सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन, पेयजल आपूर्ति तथा बाढ़ नियंत्रण के लिए किया जाता है। जलाशय में संचित जल आवश्यकता के अनुसार छोड़ा जाता है। भारत में भाखड़ा नांगल, हीराकुंड और टिहरी जैसे प्रसिद्ध बाँध हैं। बाँध कृषि उत्पादन बढ़ाने तथा औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही वे जल संसाधनों के समुचित प्रबंधन में सहायता करते हैं।
प्रश्न 6. बहुउद्देशीय परियोजनाओं के दो लाभ लिखिए।
उत्तर:
बहुउद्देशीय परियोजनाओं का पहला प्रमुख लाभ सिंचाई सुविधा प्रदान करना है, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है। सूखा प्रभावित क्षेत्रों को भी जल उपलब्ध कराया जा सकता है। दूसरा महत्वपूर्ण लाभ जलविद्युत उत्पादन है, जो उद्योगों और घरों को स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त ये परियोजनाएँ बाढ़ नियंत्रण, मत्स्य पालन, पर्यटन तथा पेयजल आपूर्ति में भी सहायक होती हैं। इनसे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के विकास को गति मिलती है। इसलिए इन्हें देश के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रश्न 7. बहुउद्देशीय परियोजनाओं के दो नुकसान लिखिए।
उत्तर:
बहुउद्देशीय परियोजनाओं के कारण बड़े क्षेत्रों में भूमि जलमग्न हो जाती है, जिससे लोगों का विस्थापन होता है और उनकी आजीविका प्रभावित होती है। दूसरा प्रमुख नुकसान पर्यावरणीय असंतुलन है। बाँधों के निर्माण से नदियों का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होता है तथा जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कई बार उपजाऊ भूमि और वन क्षेत्र भी नष्ट हो जाते हैं। नदी में गाद के प्राकृतिक प्रवाह में कमी आने से निचले क्षेत्रों की मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है। इसी कारण कई पर्यावरणविद् इन परियोजनाओं का विरोध करते हैं।
प्रश्न 8. वर्षा जल संचयन क्या है?
उत्तर:
वर्षा जल संचयन वह प्रक्रिया है जिसमें वर्षा के जल को एकत्रित करके भविष्य में उपयोग के लिए संग्रहित किया जाता है। यह जल छतों, खेतों या अन्य सतहों से एकत्र किया जा सकता है। संग्रहित जल का उपयोग पेयजल, घरेलू कार्यों तथा भूजल पुनर्भरण के लिए किया जाता है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में पारंपरिक और आधुनिक दोनों प्रकार की वर्षा जल संचयन प्रणालियाँ प्रचलित हैं। यह तकनीक जल संकट को कम करने और भूजल स्तर बनाए रखने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई है। इसलिए इसे जल संरक्षण का महत्वपूर्ण उपाय माना जाता है।
प्रश्न 9. राजस्थान में वर्षा जल संचयन कैसे किया जाता है?
उत्तर:
राजस्थान के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन की समृद्ध परंपरा रही है। यहाँ घरों की छतों से वर्षा का जल भूमिगत टंकियों, जिन्हें टांका कहा जाता है, में संग्रहित किया जाता है। यह जल वर्ष भर पेयजल के रूप में उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त खड़ीन और जोहड़ जैसी पारंपरिक प्रणालियाँ भी प्रचलित हैं, जिनके माध्यम से वर्षा के जल को खेतों और जलाशयों में संचित किया जाता है। इन प्रणालियों ने कम वर्षा वाले क्षेत्रों में जल उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रश्न 10. रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग क्या है?
उत्तर:
रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग में भवनों की छतों पर गिरने वाले वर्षा जल को पाइपों द्वारा एकत्र कर टंकियों या भूमिगत जलभंडारों में संग्रहित किया जाता है। यह जल घरेलू उपयोग के लिए रखा जा सकता है या भूजल पुनर्भरण हेतु भूमि में पहुँचाया जा सकता है। इस तकनीक से जल की बर्बादी कम होती है तथा भूजल स्तर बढ़ता है। शहरी क्षेत्रों में जल संकट को कम करने के लिए यह अत्यंत उपयोगी उपाय माना जाता है। भारत के कई राज्यों में इसे बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्रश्न 11. जल संसाधनों के असमान वितरण का क्या अर्थ है?
उत्तर:
जल संसाधनों का असमान वितरण का अर्थ है कि सभी क्षेत्रों में जल समान मात्रा में उपलब्ध नहीं होता। कुछ क्षेत्रों में अधिक वर्षा और पर्याप्त जल संसाधन होते हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों में जल की कमी होती है। भारत में उत्तर-पूर्वी राज्यों में अधिक वर्षा होती है, जबकि राजस्थान जैसे क्षेत्रों में जल संकट सामान्य है। यह असमानता कृषि, उद्योग और मानव जीवन को प्रभावित करती है। इसलिए जल का समुचित प्रबंधन और विभिन्न क्षेत्रों के बीच संतुलित वितरण आवश्यक है ताकि सभी लोगों को पर्याप्त जल उपलब्ध हो सके।
प्रश्न 12. भूजल के अत्यधिक दोहन के परिणाम बताइए।
उत्तर:
भूजल के अत्यधिक दोहन से भूजल स्तर लगातार नीचे गिरता है। इससे कुएँ और ट्यूबवेल सूख सकते हैं तथा सिंचाई और पेयजल की समस्या उत्पन्न हो सकती है। कई क्षेत्रों में भूमि धँसने और जल की गुणवत्ता खराब होने जैसी समस्याएँ भी देखने को मिलती हैं। भूजल का पुनर्भरण यदि पर्याप्त मात्रा में नहीं होता, तो भविष्य में गंभीर जल संकट पैदा हो सकता है। इसलिए भूजल का संतुलित उपयोग और वर्षा जल संचयन जैसी तकनीकों का अपनाना आवश्यक है।
प्रश्न 13. जल प्रदूषण जल संकट को कैसे बढ़ाता है?
उत्तर:
जब नदियों, झीलों और भूजल स्रोतों में औद्योगिक अपशिष्ट, घरेलू गंदगी तथा रासायनिक पदार्थ मिल जाते हैं, तो जल प्रदूषित हो जाता है। प्रदूषित जल पीने और अन्य उपयोगों के लिए अनुपयुक्त हो जाता है। परिणामस्वरूप उपलब्ध जल की मात्रा तो बनी रहती है, लेकिन उपयोग योग्य जल कम हो जाता है। इससे जल संकट की स्थिति उत्पन्न होती है। जल प्रदूषण मानव स्वास्थ्य, कृषि तथा पर्यावरण को भी प्रभावित करता है। इसलिए जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना जल संरक्षण का महत्वपूर्ण भाग है।
Question 14. एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन क्या है?
उत्तर:
एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन (Integrated Water Resources Management) जल के संरक्षण, विकास और उपयोग की ऐसी प्रक्रिया है जिसमें जल संसाधनों का समन्वित और टिकाऊ ढंग से प्रबंधन किया जाता है। इसका उद्देश्य जल का न्यायसंगत वितरण, पर्यावरण संरक्षण तथा आर्थिक विकास सुनिश्चित करना है। इसमें जल संरक्षण, पुनर्भरण, जल गुणवत्ता सुधार और विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुसार जल का उपयोग शामिल है। यह दृष्टिकोण वर्तमान और भविष्य दोनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखता है।
प्रश्न 15. जल संरक्षण में समुदाय की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जल संरक्षण में समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोग वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों की सफाई, जल प्रदूषण रोकने तथा जल के विवेकपूर्ण उपयोग में योगदान दे सकते हैं। सामुदायिक सहभागिता से पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों का पुनर्जीवन भी संभव है। गाँवों और शहरों में जनजागरूकता अभियान चलाकर जल बचाने की आदत विकसित की जा सकती है। जब समाज मिलकर जल संरक्षण के प्रयास करता है, तब जल संकट को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है और सतत विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।
प्रश्न 16. ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru ने बड़े बाँधों को ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ कहा था। उनका मानना था कि ये परियोजनाएँ कृषि, उद्योग और ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देकर देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी। बाँधों से सिंचाई, जलविद्युत, बाढ़ नियंत्रण तथा पेयजल जैसी अनेक सुविधाएँ प्राप्त होती हैं। इसलिए इन्हें राष्ट्र निर्माण और आर्थिक प्रगति का प्रतीक माना गया। हालांकि बाद में इनके सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों पर भी ध्यान दिया जाने लगा।
प्रश्न 17. गूल और कुल क्या हैं?
उत्तर:
गूल और कुल पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में प्रयुक्त पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणालियाँ हैं। ये छोटी जल नहरें होती हैं जिनके माध्यम से पहाड़ी क्षेत्रों में जल को खेतों तक पहुँचाया जाता है। इनका निर्माण स्थानीय लोगों द्वारा किया जाता था और ये वर्षा तथा पर्वतीय जल स्रोतों पर आधारित होती थीं। इन प्रणालियों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में कृषि को संभव बनाया। आज भी कुछ क्षेत्रों में इनका उपयोग किया जाता है और इन्हें पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।
प्रश्न 18. जोहड़ क्या है?
उत्तर:
जोहड़ राजस्थान में प्रचलित एक पारंपरिक वर्षा जल संचयन संरचना है। यह एक छोटा जलाशय होता है जिसमें वर्षा का जल एकत्रित किया जाता है। जोहड़ भूजल पुनर्भरण में सहायता करता है तथा आसपास के क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाता है। इसका उपयोग सिंचाई, पशुओं के लिए जल तथा घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति में किया जाता है। शुष्क क्षेत्रों में जोहड़ों ने जल संरक्षण और ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह सामुदायिक सहभागिता पर आधारित एक सफल पारंपरिक प्रणाली है।
प्रश्न 19. कृषि क्षेत्र में जल की मांग अधिक क्यों होती है?
उत्तर:
कृषि भारत की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है और सिंचाई के लिए बड़ी मात्रा में जल की आवश्यकता होती है। विशेष रूप से धान, गन्ना और गेहूँ जैसी फसलों के लिए अधिक जल चाहिए। हरित क्रांति के बाद सिंचित कृषि क्षेत्र में वृद्धि हुई, जिससे जल की मांग और बढ़ गई। कई किसान ट्यूबवेल और कुओं के माध्यम से भूजल का उपयोग करते हैं। परिणामस्वरूप जल संसाधनों पर दबाव बढ़ता है। इसलिए कृषि में जल के कुशल उपयोग तथा सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है।
प्रश्न 20. जल संरक्षण के लिए विद्यार्थियों द्वारा किए जा सकने वाले उपाय बताइए।
उत्तर:
विद्यार्थी जल संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। वे जल का अनावश्यक उपयोग रोक सकते हैं, नलों को खुला नहीं छोड़ सकते तथा रिसाव की सूचना संबंधित लोगों को दे सकते हैं। विद्यालयों और घरों में वर्षा जल संचयन के प्रति जागरूकता फैला सकते हैं। जल प्रदूषण रोकने के लिए नदियों और तालाबों में कचरा नहीं डालना चाहिए। पौधारोपण को बढ़ावा देना तथा जल बचत संबंधी अभियानों में भाग लेना भी आवश्यक है। छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े परिणाम दे सकते हैं और भविष्य में जल संकट को कम करने में सहायक बन सकते हैं।
