CBSE कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (भूगोल – समकालीन भारत-II)
अध्याय 2 – वन एवं वन्य जीव संसाधन
20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
1. वन एवं वन्य जीव संसाधनों का संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
वन एवं वन्य जीव संसाधन पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वन कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन प्रदान करते हैं तथा जलवायु को संतुलित रखते हैं। वन्य जीव खाद्य श्रृंखला और जैव विविधता के संरक्षण में सहायक होते हैं। यदि वन और वन्य जीव नष्ट हो जाएँ तो पर्यावरणीय असंतुलन, मिट्टी का कटाव, जल संकट तथा प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि हो सकती है। इसके अतिरिक्त अनेक औषधियाँ, ईंधन, लकड़ी तथा अन्य संसाधन भी वनों से प्राप्त होते हैं। इसलिए मानव जीवन और सतत विकास के लिए इनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
2. जैव विविधता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जैव विविधता का अर्थ किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले पौधों, पशुओं, सूक्ष्म जीवों तथा उनकी विभिन्न प्रजातियों की विविधता से है। भारत विश्व के समृद्ध जैव विविधता वाले देशों में से एक है। जैव विविधता पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में सहायता करती है और मानव को भोजन, औषधि, ईंधन तथा अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराती है। विभिन्न जीव-जंतु और वनस्पतियाँ एक-दूसरे पर निर्भर रहती हैं, जिससे प्राकृतिक तंत्र सुचारु रूप से कार्य करता है। जैव विविधता में कमी आने से कई प्रजातियाँ विलुप्त हो सकती हैं तथा पर्यावरणीय समस्याएँ बढ़ सकती हैं। इसलिए इसका संरक्षण आवश्यक है।
3. भारत में वनस्पति और जीव-जंतुओं के ह्रास के प्रमुख कारण बताइए।
उत्तर:
भारत में वनस्पति और जीव-जंतुओं के ह्रास के कई कारण हैं। कृषि के विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर वनों की कटाई की गई है। औद्योगिकीकरण, शहरीकरण तथा खनन गतिविधियों ने भी प्राकृतिक आवासों को नष्ट किया है। बड़े बाँध, सड़कें तथा अन्य विकास परियोजनाएँ वन क्षेत्रों को प्रभावित करती हैं। अत्यधिक शिकार, अवैध तस्करी तथा वन उत्पादों का अनियंत्रित उपयोग भी वन्य जीवों के लिए खतरा बन गया है। इन कारणों से अनेक प्रजातियाँ संकटग्रस्त हो गई हैं और जैव विविधता में कमी आई है।
4. संकटग्रस्त प्रजातियाँ क्या होती हैं?
उत्तर:
संकटग्रस्त प्रजातियाँ वे जीव-जंतु या पौधे होते हैं जिनकी संख्या इतनी कम हो गई है कि उनके विलुप्त होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। इन प्रजातियों के प्राकृतिक आवास नष्ट होने, शिकार, प्रदूषण तथा मानव गतिविधियों के कारण उनकी जनसंख्या लगातार घटती जा रही है। भारत में काला हिरण, बाघ, गैंडा तथा कई दुर्लभ पक्षी संकटग्रस्त श्रेणी में आते हैं। यदि इनके संरक्षण के लिए उचित कदम नहीं उठाए गए तो ये प्रजातियाँ पूरी तरह समाप्त हो सकती हैं। इसलिए सरकार और समाज दोनों को इनके संरक्षण के लिए प्रयास करने चाहिए।
5. भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का महत्व बताइए।
उत्तर:
भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 वन्य जीवों और उनके आवासों की सुरक्षा के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। इस अधिनियम के अंतर्गत राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों और संरक्षित क्षेत्रों की स्थापना की गई। इसके माध्यम से शिकार पर नियंत्रण लगाया गया तथा संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के लिए विशेष प्रावधान किए गए। इस कानून ने वन्यजीवों की अवैध तस्करी और व्यापार को रोकने में भी सहायता की। परिणामस्वरूप कई दुर्लभ प्रजातियों की संख्या में सुधार हुआ और जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा मिला।
6. प्रोजेक्ट टाइगर क्या है?
उत्तर:
प्रोजेक्ट टाइगर भारत सरकार द्वारा वर्ष 1973 में प्रारंभ किया गया एक प्रमुख वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में घटती बाघों की संख्या को बढ़ाना और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना था। इस परियोजना के अंतर्गत विभिन्न टाइगर रिजर्व स्थापित किए गए तथा शिकार और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण लगाया गया। स्थानीय समुदायों को भी संरक्षण कार्यों में शामिल किया गया। इस योजना के कारण भारत में बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यह वन्यजीव संरक्षण की एक सफल पहल मानी जाती है।
7. आरक्षित वन क्या होते हैं?
उत्तर:
आरक्षित वन वे वन होते हैं जिन्हें वन एवं वन्य जीव संरक्षण की दृष्टि से सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण माना जाता है। इन वनों में मानव गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण होता है और बिना अनुमति के पेड़ों की कटाई, शिकार या अन्य गतिविधियाँ प्रतिबंधित होती हैं। भारत के अधिकांश संरक्षित वन क्षेत्र इसी श्रेणी में आते हैं। इनका उद्देश्य जैव विविधता को सुरक्षित रखना, वन संसाधनों का संरक्षण करना तथा पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना है। आरक्षित वन देश के पर्यावरणीय स्वास्थ्य और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
8. संरक्षित वन क्या होते हैं?
उत्तर:
संरक्षित वन वे वन क्षेत्र होते हैं जिन्हें सरकार द्वारा संरक्षण प्रदान किया जाता है ताकि उनका अत्यधिक दोहन न हो सके। इन वनों में कुछ सीमित मानव गतिविधियों की अनुमति होती है, लेकिन वन विभाग इनके उपयोग और संरक्षण की निगरानी करता है। भारत के कुल वन क्षेत्र का एक बड़ा भाग संरक्षित वनों के अंतर्गत आता है। इनका उद्देश्य वनों की गुणवत्ता बनाए रखना, वन्य जीवों के आवासों की रक्षा करना तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को सुनिश्चित करना है। ये वन पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं।
9. अवर्गीकृत वन क्या होते हैं?
उत्तर:
अवर्गीकृत वन वे वन और बंजर भूमि होती हैं जो सरकार, निजी व्यक्तियों या स्थानीय समुदायों के स्वामित्व में होती हैं। इन वनों पर आरक्षित या संरक्षित वनों जैसी कठोर कानूनी पाबंदियाँ नहीं होतीं। पूर्वोत्तर भारत तथा कुछ अन्य क्षेत्रों में ऐसे वनों का प्रतिशत अधिक है। स्थानीय समुदाय इनका उपयोग ईंधन, चारा तथा अन्य आवश्यकताओं के लिए करते हैं। उचित प्रबंधन न होने पर इन वनों के क्षरण की संभावना अधिक रहती है। इसलिए इनके संरक्षण के लिए सामुदायिक भागीदारी आवश्यक है।
10. चिपको आंदोलन का महत्व बताइए।
उत्तर:
चिपको आंदोलन उत्तराखंड में प्रारंभ हुआ एक प्रसिद्ध पर्यावरणीय आंदोलन था। इसमें ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने पेड़ों को कटने से बचाने के लिए उनसे चिपककर विरोध किया। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य वनों की अंधाधुंध कटाई को रोकना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना था। इसने यह सिद्ध किया कि स्थानीय समुदाय वन संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। चिपको आंदोलन ने पूरे देश में पर्यावरणीय चेतना को बढ़ावा दिया तथा वन संरक्षण संबंधी नीतियों को प्रभावित किया।
11. वनों का पर्यावरण में क्या योगदान है?
उत्तर:
वन पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वे कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके ऑक्सीजन प्रदान करते हैं तथा वैश्विक तापमान को नियंत्रित करने में सहायता करते हैं। वन वर्षा चक्र को बनाए रखते हैं और भूजल स्तर को संरक्षित करते हैं। वे मिट्टी के कटाव को रोकते हैं तथा बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करते हैं। इसके अतिरिक्त वन अनेक जीव-जंतुओं का प्राकृतिक आवास हैं। इस प्रकार वन पर्यावरणीय संतुलन, जैव विविधता और मानव जीवन की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
12. सामुदायिक संरक्षण क्या है?
उत्तर:
सामुदायिक संरक्षण वह प्रक्रिया है जिसमें स्थानीय लोग वन एवं वन्य जीव संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। ग्रामीण समुदाय अपने आसपास के वनों की सुरक्षा करते हैं तथा अवैध कटाई और शिकार को रोकने में सहयोग देते हैं। भारत के कई क्षेत्रों में ग्राम समितियों और स्वयंसेवी संगठनों ने वन संरक्षण के सफल उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। सामुदायिक संरक्षण से लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है तथा प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग संभव हो पाता है। यह संरक्षण की एक प्रभावी और दीर्घकालिक रणनीति है।
13. संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) क्या है?
उत्तर:
संयुक्त वन प्रबंधन (Joint Forest Management – JFM) एक ऐसी योजना है जिसमें स्थानीय समुदाय और वन विभाग मिलकर वनों के संरक्षण और प्रबंधन का कार्य करते हैं। इस योजना के अंतर्गत ग्रामीणों को वन संरक्षण में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और बदले में उन्हें वन संसाधनों के सीमित उपयोग का अधिकार दिया जाता है। इससे वन क्षेत्र में वृद्धि हुई है तथा स्थानीय लोगों की आजीविका को भी समर्थन मिला है। JFM ने वन संरक्षण में जनभागीदारी को बढ़ावा देकर सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
14. वन्य जीवों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय उद्यानों की भूमिका बताइए।
उत्तर:
राष्ट्रीय उद्यान ऐसे संरक्षित क्षेत्र होते हैं जहाँ वन्य जीवों और प्राकृतिक पर्यावरण की सुरक्षा की जाती है। इन क्षेत्रों में शिकार, पेड़ों की कटाई तथा अन्य हानिकारक गतिविधियाँ प्रतिबंधित होती हैं। राष्ट्रीय उद्यान संकटग्रस्त प्रजातियों को सुरक्षित आवास प्रदान करते हैं और उनके प्रजनन में सहायता करते हैं। साथ ही, ये जैव विविधता के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रीय उद्यानों के माध्यम से वन्य जीवों के प्रति जागरूकता भी बढ़ती है और वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहन मिलता है।
15. वनों की कटाई के दुष्परिणाम लिखिए।
उत्तर:
वनों की कटाई से पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इससे मिट्टी का कटाव बढ़ता है और भूमि की उर्वरता घटती है। वर्षा चक्र प्रभावित होने से सूखा और बाढ़ जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। वन्य जीवों के आवास नष्ट होने से उनकी संख्या कम होती है और कई प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर पहुँच जाती हैं। कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से वैश्विक तापमान में वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त जल स्रोतों का क्षरण तथा जैव विविधता में कमी भी वनों की कटाई के प्रमुख दुष्परिणाम हैं।
16. वन्य जीव अभयारण्य क्या हैं?
उत्तर:
वन्य जीव अभयारण्य ऐसे संरक्षित क्षेत्र हैं जहाँ वन्य जीवों को सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाता है। इनका मुख्य उद्देश्य जीव-जंतुओं की विभिन्न प्रजातियों और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना है। अभयारण्यों में शिकार पर प्रतिबंध होता है तथा वन्य जीवों के संरक्षण के लिए विशेष प्रबंध किए जाते हैं। ये क्षेत्र जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत में अनेक प्रसिद्ध वन्य जीव अभयारण्य हैं जो दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में योगदान देते हैं।
17. स्थानीय समुदाय वन संरक्षण में कैसे योगदान देते हैं?
उत्तर:
स्थानीय समुदाय वन संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे अवैध कटाई, शिकार और वन संसाधनों के अंधाधुंध दोहन को रोकने में सहयोग करते हैं। कई क्षेत्रों में ग्राम समितियाँ वन सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाती हैं तथा वृक्षारोपण कार्यक्रमों में भाग लेती हैं। स्थानीय लोग वनों के महत्व को समझते हैं क्योंकि उनकी आजीविका इन पर निर्भर होती है। सामुदायिक भागीदारी से वन क्षेत्र में वृद्धि हुई है और वन संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव हुआ है। यह संरक्षण की एक सफल और टिकाऊ पद्धति है।
18. जैव विविधता मानव जीवन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर:
जैव विविधता मानव जीवन के लिए अनेक प्रकार से उपयोगी है। यह भोजन, औषधि, ईंधन, चारा तथा अन्य प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध कराती है। विभिन्न जीव-जंतु और पौधे पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में सहायता करते हैं। जैव विविधता जलवायु नियंत्रण, मिट्टी संरक्षण तथा जल शुद्धिकरण जैसी प्राकृतिक सेवाएँ भी प्रदान करती है। यदि जैव विविधता में कमी आती है तो मानव जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए पर्यावरणीय स्थिरता और सतत विकास के लिए जैव विविधता का संरक्षण आवश्यक है।
19. वन संरक्षण में महिलाओं की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत में महिलाओं ने वन संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। चिपको आंदोलन इसका प्रमुख उदाहरण है, जिसमें महिलाओं ने पेड़ों को कटने से बचाने के लिए सक्रिय भागीदारी निभाई। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएँ ईंधन, चारा और जल के लिए वनों पर निर्भर रहती हैं, इसलिए वे उनके संरक्षण के महत्व को भली-भाँति समझती हैं। कई स्वयं सहायता समूह और ग्राम समितियाँ महिलाओं के नेतृत्व में वृक्षारोपण और वन संरक्षण कार्य करती हैं। उनकी भागीदारी से पर्यावरण संरक्षण के प्रयास अधिक प्रभावी और सफल बने हैं।
20. वन एवं वन्य जीव संसाधनों के संरक्षण के लिए किन उपायों की आवश्यकता है?
उत्तर:
वन एवं वन्य जीव संसाधनों के संरक्षण के लिए वनों की कटाई पर नियंत्रण, व्यापक वृक्षारोपण तथा अवैध शिकार पर कठोर प्रतिबंध आवश्यक हैं। राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों का विस्तार किया जाना चाहिए। स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाकर संयुक्त वन प्रबंधन जैसी योजनाओं को प्रोत्साहित करना चाहिए। पर्यावरण शिक्षा के माध्यम से लोगों में जागरूकता फैलानी चाहिए। सरकार को संरक्षण संबंधी कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना चाहिए। इन उपायों से जैव विविधता सुरक्षित रहेगी तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण संभव होगा।
