CBSE कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (इतिहास)
अध्याय 3 – भूमंडलीकृत विश्व का निर्माण
20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
यह अध्याय वैश्वीकरण के इतिहास, व्यापार, प्रवास, उपनिवेशवाद तथा विश्व अर्थव्यवस्था के विकास को समझाता है। इसमें प्राचीन व्यापार मार्गों से लेकर आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था तक की यात्रा का वर्णन है।
प्रश्न 1. भूमंडलीकरण से क्या आशय है?
उत्तर:
भूमंडलीकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से विश्व के विभिन्न देश आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा राजनीतिक रूप से एक-दूसरे से जुड़ते हैं। इसके कारण वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी, तकनीक तथा लोगों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आदान-प्रदान बढ़ता है। हालांकि आज का भूमंडलीकरण आधुनिक तकनीकों और संचार साधनों से जुड़ा है, इसकी जड़ें प्राचीन व्यापार और प्रवास में मिलती हैं। प्राचीन काल से ही व्यापारी, यात्री और धर्मप्रचारक विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ते रहे हैं। इस प्रकार भूमंडलीकरण केवल आधुनिक घटना नहीं बल्कि एक दीर्घकालिक ऐतिहासिक प्रक्रिया है।
प्रश्न 2. रेशम मार्ग (Silk Route) का महत्व बताइए।
उत्तर:
रेशम मार्ग एशिया, यूरोप और अफ्रीका को जोड़ने वाले व्यापारिक मार्गों का विशाल नेटवर्क था। इन मार्गों के माध्यम से चीन का रेशम, भारत के मसाले तथा अन्य मूल्यवान वस्तुएँ विभिन्न देशों तक पहुँचती थीं। केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि विचारों, धर्मों, कला और संस्कृति का भी आदान-प्रदान हुआ। बौद्ध धर्म भारत से चीन तथा अन्य एशियाई देशों तक इन्हीं मार्गों के माध्यम से पहुँचा। रेशम मार्ग ने विभिन्न सभ्यताओं के बीच संपर्क स्थापित किया और विश्व को आपस में जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न 3. स्पेगेटी और आलू की यात्रा वैश्विक संपर्कों को कैसे दर्शाती है?
उत्तर:
स्पेगेटी और आलू की यात्रा यह दिखाती है कि खाद्य पदार्थ भी वैश्विक संपर्कों के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचे। माना जाता है कि नूडल्स का विचार चीन से पश्चिमी देशों तक पहुँचा, जिससे स्पेगेटी का विकास हुआ। इसी प्रकार आलू दक्षिण अमेरिका से यूरोप पहुँचा और बाद में विश्वभर में फैल गया। इन खाद्य पदार्थों ने लोगों की खान-पान की आदतों को बदल दिया और कृषि उत्पादन को प्रभावित किया। यह उदाहरण सिद्ध करता है कि विभिन्न समाज लंबे समय से एक-दूसरे से जुड़े हुए थे।
प्रश्न 4. अमेरिका की खोज का विश्व पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
अमेरिका की खोज ने विश्व इतिहास में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए। यूरोपीय देशों ने अमेरिका में उपनिवेश स्थापित किए और वहाँ के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन शुरू किया। नई फसलें जैसे आलू, मक्का और टमाटर यूरोप तथा एशिया तक पहुँचीं। साथ ही यूरोप से लाई गई बीमारियों ने अमेरिका की मूल जनसंख्या को भारी नुकसान पहुँचाया। व्यापार और उपनिवेशवाद के विस्तार से विश्व अर्थव्यवस्था अधिक जुड़ गई। इस प्रकार अमेरिका की खोज ने वैश्विक व्यापार, कृषि और जनसंख्या संरचना को गहराई से प्रभावित किया।
प्रश्न 5. उन्नीसवीं सदी में विश्व अर्थव्यवस्था के विकास के तीन प्रमुख तत्व कौन-से थे?
उत्तर:
उन्नीसवीं सदी में विश्व अर्थव्यवस्था के विकास के तीन प्रमुख तत्व थे—व्यापार का विस्तार, श्रम का प्रवास और पूंजी का प्रवाह। औद्योगिक देशों को कच्चे माल और नए बाजारों की आवश्यकता थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़ा। लाखों लोग रोजगार की तलाश में यूरोप से अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे क्षेत्रों में गए। साथ ही निवेशकों ने विभिन्न देशों में पूंजी निवेश किया। इन तीनों तत्वों ने देशों की अर्थव्यवस्थाओं को आपस में जोड़ दिया और आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींव रखी।
प्रश्न 6. तकनीकी प्रगति ने वैश्विक व्यापार को कैसे बढ़ावा दिया?
उत्तर:
उन्नीसवीं सदी में रेलवे, स्टीमशिप और टेलीग्राफ जैसी तकनीकों के विकास ने वैश्विक व्यापार को गति दी। परिवहन तेज और सस्ता हो गया, जिससे वस्तुओं को दूर-दराज के बाजारों तक पहुँचाना आसान हुआ। टेलीग्राफ ने संचार में क्रांति ला दी और व्यापारिक निर्णय तेजी से लिए जाने लगे। खाद्य पदार्थों और कच्चे माल का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आदान-प्रदान बढ़ा। परिणामस्वरूप विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाएँ एक-दूसरे पर अधिक निर्भर हो गईं।
प्रश्न 7. रिंडरपेस्ट क्या था?
उत्तर:
रिंडरपेस्ट एक घातक पशु रोग था जो उन्नीसवीं सदी के अंत में अफ्रीका में फैला। यह रोग संक्रमित मवेशियों के माध्यम से पहुँचा और लाखों पशुओं की मृत्यु का कारण बना। पशुओं के नष्ट होने से किसानों और पशुपालकों की आजीविका प्रभावित हुई। कृषि उत्पादन में गिरावट आई और कई क्षेत्रों में अकाल जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। यूरोपीय उपनिवेशवादियों ने इस संकट का लाभ उठाकर अफ्रीकी भूमि और संसाधनों पर नियंत्रण मजबूत किया। इसलिए रिंडरपेस्ट केवल एक बीमारी नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक संकट भी था।
प्रश्न 8. अनुबंधित श्रमिक (Indentured Labour) किसे कहा जाता है?
उत्तर:
अनुबंधित श्रमिक वे मजदूर थे जो एक निश्चित अवधि के लिए अनुबंध के तहत विदेशी उपनिवेशों में काम करने भेजे जाते थे। दास प्रथा समाप्त होने के बाद ब्रिटिश सरकार ने भारत और चीन से श्रमिकों को फिजी, मॉरीशस, कैरेबियन द्वीपों और अन्य उपनिवेशों में भेजा। उन्हें बेहतर जीवन और रोजगार का वादा किया जाता था, लेकिन वास्तविकता में उन्हें कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता था। इन श्रमिकों ने विदेशी समाजों में भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रसार में भी योगदान दिया।
प्रश्न 9. भारतीय अनुबंधित श्रमिकों के जीवन की प्रमुख कठिनाइयाँ बताइए।
उत्तर:
भारतीय अनुबंधित श्रमिकों को विदेशों में अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था। उन्हें कम वेतन दिया जाता था और लंबे समय तक कठिन श्रम करना पड़ता था। रहने और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएँ भी सीमित थीं। कई बार अनुबंध की शर्तें स्पष्ट नहीं होती थीं, जिससे उनका शोषण होता था। परिवारों से दूर रहने के कारण सामाजिक और भावनात्मक समस्याएँ भी उत्पन्न होती थीं। इसके बावजूद उन्होंने नई भूमि में भारतीय संस्कृति, भाषा और परंपराओं को जीवित रखा।
प्रश्न 10. उपनिवेशवाद ने वैश्विक व्यापार को कैसे प्रभावित किया?
उत्तर:
उपनिवेशवाद ने वैश्विक व्यापार के स्वरूप को बदल दिया। यूरोपीय शक्तियों ने एशिया, अफ्रीका और अमेरिका के उपनिवेशों से कच्चा माल प्राप्त किया और तैयार वस्तुएँ वहाँ के बाजारों में बेचीं। इससे उपनिवेशों की अर्थव्यवस्था यूरोपीय देशों पर निर्भर हो गई। स्थानीय उद्योगों को नुकसान पहुँचा और संसाधनों का दोहन बढ़ा। हालांकि व्यापार का विस्तार हुआ, लेकिन इसके लाभ मुख्यतः औपनिवेशिक शक्तियों को मिले। इस प्रकार उपनिवेशवाद ने वैश्विक व्यापार को बढ़ावा दिया, परंतु असमानता भी बढ़ाई।
प्रश्न 11. प्रथम विश्व युद्ध का विश्व अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
प्रथम विश्व युद्ध ने विश्व अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया। युद्ध के कारण उत्पादन और व्यापार बाधित हुए तथा अनेक देशों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। सरकारों ने युद्ध खर्च पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर ऋण लिया। उद्योगों का ध्यान युद्ध सामग्री के उत्पादन पर केंद्रित हो गया। युद्ध के बाद बेरोजगारी और महँगाई बढ़ी। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में गिरावट आई और आर्थिक अस्थिरता बढ़ी। इस प्रकार युद्ध ने पहले से विकसित वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को कमजोर कर दिया।
प्रश्न 12. महामंदी (Great Depression) क्या थी?
उत्तर:
महामंदी 1929 में शुरू हुई विश्वव्यापी आर्थिक मंदी थी। इसकी शुरुआत अमेरिका के शेयर बाजार के पतन से हुई और शीघ्र ही इसका प्रभाव पूरी दुनिया में फैल गया। उद्योगों का उत्पादन घट गया, व्यापार कम हो गया और लाखों लोग बेरोजगार हो गए। किसानों को अपनी उपज के उचित मूल्य नहीं मिले। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारी गिरावट आई। कई देशों की अर्थव्यवस्था संकट में पड़ गई। महामंदी ने यह स्पष्ट कर दिया कि विश्व अर्थव्यवस्था कितनी गहराई से एक-दूसरे से जुड़ी हुई है।
प्रश्न 13. भारत पर महामंदी का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
महामंदी का भारतीय अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा। कृषि उत्पादों की कीमतों में भारी गिरावट आई, जिससे किसानों की आय कम हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक संकट बढ़ा और ऋण का बोझ बढ़ गया। हालांकि उत्पादन में बहुत अधिक कमी नहीं आई, लेकिन किसानों को अपनी उपज के लिए उचित मूल्य नहीं मिला। कई लोगों की जीवन-स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। इस संकट ने भारतीय जनता में औपनिवेशिक आर्थिक नीतियों के प्रति असंतोष को भी बढ़ाया।
प्रश्न 14. ब्रेटन वुड्स व्यवस्था क्या थी?
उत्तर:
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाने के लिए 1944 में ब्रेटन वुड्स सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था स्थापित करने का निर्णय लिया गया। इसके अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की स्थापना की गई। इन संस्थाओं का उद्देश्य आर्थिक सहयोग बढ़ाना, वित्तीय स्थिरता बनाए रखना और युद्धग्रस्त देशों के पुनर्निर्माण में सहायता करना था। ब्रेटन वुड्स व्यवस्था ने युद्धोत्तर वैश्विक आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न 15. IMF की स्थापना क्यों की गई?
उत्तर:
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की स्थापना विश्व अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने के लिए की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों को वित्तीय सहायता प्रदान करना, विनिमय दरों में स्थिरता बनाए रखना तथा भुगतान संतुलन की समस्याओं का समाधान करना था। IMF आर्थिक संकट का सामना कर रहे देशों को ऋण उपलब्ध कराता है और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग को प्रोत्साहित करता है। युद्ध के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
प्रश्न 16. विश्व बैंक का उद्देश्य क्या था?
उत्तर:
विश्व बैंक की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पुनर्निर्माण और विकास कार्यों के लिए की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य युद्ध से प्रभावित देशों को आर्थिक सहायता प्रदान करना तथा विकासशील देशों में आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देना था। विश्व बैंक दीर्घकालिक ऋण प्रदान करता है ताकि देशों का आर्थिक विकास हो सके। समय के साथ यह संस्था वैश्विक विकास और गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगी।
Question 17. उपनिवेशवाद और वैश्वीकरण में क्या संबंध है?
उत्तर:
उपनिवेशवाद और वैश्वीकरण का घनिष्ठ संबंध रहा है। यूरोपीय देशों ने उपनिवेशों के माध्यम से नए बाजार, कच्चा माल और श्रम प्राप्त किया। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार का विस्तार हुआ और विभिन्न क्षेत्रों की अर्थव्यवस्थाएँ आपस में जुड़ने लगीं। हालांकि यह जुड़ाव समानता पर आधारित नहीं था, क्योंकि उपनिवेशों का शोषण किया जाता था। फिर भी वस्तुओं, लोगों और विचारों का व्यापक आदान-प्रदान हुआ, जिसने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। इसलिए उपनिवेशवाद आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था के निर्माण का एक महत्वपूर्ण चरण था।
प्रश्न 18. युद्धोत्तर काल में विश्व अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण कैसे हुआ?
उत्तर:
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अनेक देशों की अर्थव्यवस्थाएँ नष्ट हो चुकी थीं। इनके पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया गया। ब्रेटन वुड्स संस्थाओं, विशेषकर IMF और विश्व बैंक, ने वित्तीय सहायता प्रदान की। औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि हुई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का विस्तार हुआ। तकनीकी विकास और निवेश ने आर्थिक विकास को गति दी। कई देशों ने कल्याणकारी नीतियाँ अपनाईं, जिससे रोजगार और जीवन स्तर में सुधार हुआ। परिणामस्वरूप विश्व अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पुनः मजबूत हुई।
प्रश्न 19. आधुनिक वैश्वीकरण की शुरुआत कब मानी जाती है?
उत्तर:
आधुनिक वैश्वीकरण की शुरुआत सामान्यतः 1970 के दशक के बाद मानी जाती है, जब ब्रेटन वुड्स व्यवस्था समाप्त हुई और व्यापार तथा पूंजी के प्रवाह पर कई प्रतिबंध कम किए गए। संचार और सूचना प्रौद्योगिकी में तीव्र विकास हुआ। बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विस्तार बढ़ा और देशों के बीच आर्थिक संबंध अधिक मजबूत हुए। परिवहन और इंटरनेट ने विश्व को और अधिक जोड़ दिया। इस प्रकार आधुनिक वैश्वीकरण ने विश्व अर्थव्यवस्था को पहले की तुलना में कहीं अधिक परस्पर निर्भर बना दिया।
प्रश्न 20. ‘भूमंडलीकृत विश्व का निर्माण’ अध्याय का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर:
इस अध्याय का मुख्य संदेश यह है कि वैश्वीकरण कोई नई घटना नहीं है, बल्कि यह सदियों से चल रही ऐतिहासिक प्रक्रिया का परिणाम है। व्यापार, प्रवास, तकनीकी प्रगति, उपनिवेशवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ने मिलकर आज के वैश्विक विश्व का निर्माण किया है। विभिन्न देशों और समाजों के बीच आर्थिक तथा सांस्कृतिक संबंध समय के साथ मजबूत हुए हैं। अध्याय यह भी बताता है कि वैश्वीकरण के लाभ और चुनौतियाँ दोनों हैं तथा इसका प्रभाव विश्व के विभिन्न क्षेत्रों पर अलग-अलग रहा है।
