CBSE कक्षा 10 विज्ञान (जीव विज्ञान)

अध्याय 6 – प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

1. प्राकृतिक संसाधन क्या हैं? इनके संरक्षण की आवश्यकता क्यों है?

उत्तर:
प्राकृतिक संसाधन वे संसाधन हैं जो हमें प्रकृति से प्राप्त होते हैं, जैसे जल, वायु, भूमि, वन, खनिज तथा वन्य जीव। ये मानव जीवन और विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण तथा अत्यधिक दोहन के कारण इन संसाधनों की मात्रा और गुणवत्ता में कमी आ रही है। यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य की पीढ़ियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। संसाधनों का संतुलित उपयोग, पुनर्चक्रण, वृक्षारोपण तथा प्रदूषण नियंत्रण इनके संरक्षण के प्रमुख उपाय हैं। इसलिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सतत विकास के लिए आवश्यक है।


2. सतत विकास (Sustainable Development) से क्या तात्पर्य है?

उत्तर:
सतत विकास का अर्थ है वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति इस प्रकार करना कि भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति में कोई बाधा न आए। इसमें प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और पर्यावरण संरक्षण दोनों शामिल हैं। सतत विकास के अंतर्गत जल, वन, भूमि तथा ऊर्जा संसाधनों का संतुलित उपयोग किया जाता है। इससे आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहता है। उदाहरण के लिए वर्षा जल संचयन, सौर ऊर्जा का उपयोग तथा वृक्षारोपण सतत विकास के उपाय हैं। यह अवधारणा मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने पर बल देती है।


3. वन संरक्षण का महत्व बताइए।

उत्तर:
वन पृथ्वी के महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन हैं। ये ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करते हैं तथा जलवायु को संतुलित रखते हैं। वन मिट्टी के कटाव को रोकते हैं और वर्षा चक्र को बनाए रखने में सहायता करते हैं। अनेक वन्य जीवों का आवास भी वन ही हैं। वनों की कटाई से जैव विविधता में कमी आती है तथा पर्यावरणीय असंतुलन उत्पन्न होता है। इसलिए वन संरक्षण के लिए वृक्षारोपण, अवैध कटाई पर रोक तथा जनभागीदारी आवश्यक है। वन संरक्षण से पर्यावरण की सुरक्षा और मानव जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है।


4. चिपको आंदोलन क्या था?

उत्तर:
चिपको आंदोलन भारत में वन संरक्षण के लिए चलाया गया एक महत्वपूर्ण जन आंदोलन था। इसकी शुरुआत 1970 के दशक में उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में हुई। इस आंदोलन में ग्रामीण लोग, विशेषकर महिलाएँ, पेड़ों से चिपक जाती थीं ताकि उन्हें काटा न जा सके। इसका उद्देश्य वनों की अंधाधुंध कटाई को रोकना और पर्यावरण की रक्षा करना था। इस आंदोलन के कारण सरकार को वन संरक्षण संबंधी नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ा। चिपको आंदोलन ने यह संदेश दिया कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।


5. जल संरक्षण क्यों आवश्यक है?

उत्तर:
जल जीवन का आधार है और सभी जीवों के अस्तित्व के लिए आवश्यक है। बढ़ती जनसंख्या, कृषि, उद्योग तथा घरेलू उपयोग के कारण जल की मांग लगातार बढ़ रही है। भूजल स्तर में गिरावट और जल प्रदूषण भी गंभीर समस्याएँ हैं। यदि जल का संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में जल संकट उत्पन्न हो सकता है। जल संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन, जल का पुनः उपयोग, रिसाव रोकना तथा जल का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है। जल संरक्षण से जल की उपलब्धता बनी रहती है और पर्यावरणीय संतुलन भी सुरक्षित रहता है।


6. बाँधों के दो लाभ और दो हानियाँ लिखिए।

उत्तर:
बाँधों का निर्माण जल संचयन, सिंचाई और विद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है। इनके प्रमुख लाभ हैं— (1) कृषि के लिए सिंचाई सुविधा उपलब्ध होती है। (2) जलविद्युत उत्पादन से ऊर्जा प्राप्त होती है।
इसके साथ कुछ हानियाँ भी हैं। (1) बाँध निर्माण के कारण अनेक लोगों का विस्थापन होता है। (2) बड़े क्षेत्र जलमग्न हो जाते हैं जिससे वन और जैव विविधता को नुकसान पहुँचता है। इसके अतिरिक्त नदी के प्राकृतिक प्रवाह में भी परिवर्तन होता है। इसलिए बाँध निर्माण करते समय पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का ध्यान रखना आवश्यक है।


7. जल संग्रहण (Water Harvesting) क्या है?

उत्तर:
जल संग्रहण या वर्षा जल संचयन वह प्रक्रिया है जिसमें वर्षा के जल को एकत्र करके भविष्य में उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाता है। यह जल भूमिगत टैंकों, तालाबों, कुओं या जलाशयों में संग्रहित किया जा सकता है। इससे भूजल स्तर बढ़ता है और जल की कमी दूर करने में सहायता मिलती है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन उपयोगी है। यह बाढ़ की संभावना को कम करता है तथा जल संकट के समय सहायक होता है। जल संरक्षण का यह एक प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल उपाय माना जाता है।


8. जैव विविधता का संरक्षण क्यों आवश्यक है?

उत्तर:
जैव विविधता से तात्पर्य विभिन्न प्रकार के पौधों, जीव-जंतुओं और सूक्ष्मजीवों की विविधता से है। यह पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रत्येक जीव किसी न किसी रूप में खाद्य श्रृंखला और प्राकृतिक प्रक्रियाओं से जुड़ा होता है। जैव विविधता में कमी आने से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ सकता है। इसके अलावा कई पौधे और जीव औषधीय तथा आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। जैव विविधता के संरक्षण के लिए वनों की रक्षा, वन्यजीव संरक्षण तथा प्रदूषण नियंत्रण आवश्यक है। इससे पारिस्थितिक तंत्र स्थिर और स्वस्थ बना रहता है।


9. कोयला और पेट्रोलियम को जीवाश्म ईंधन क्यों कहा जाता है?

उत्तर:
कोयला और पेट्रोलियम लाखों वर्ष पहले जीवित पौधों और जीवों के अवशेषों से बने हैं। ये अवशेष पृथ्वी की परतों के नीचे दबकर उच्च ताप और दबाव के कारण धीरे-धीरे ईंधन में परिवर्तित हो गए। इसलिए इन्हें जीवाश्म ईंधन कहा जाता है। ये ऊर्जा के महत्वपूर्ण स्रोत हैं, लेकिन इनके अत्यधिक उपयोग से वायु प्रदूषण और वैश्विक तापवृद्धि जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। चूँकि इनका निर्माण बहुत धीमी प्रक्रिया से होता है, इसलिए इन्हें पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता। अतः इनका सीमित और विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है।


10. संसाधनों के प्रबंधन में स्थानीय समुदायों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
स्थानीय समुदाय प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे संसाधनों का प्रत्यक्ष उपयोग करते हैं और उनकी वास्तविक आवश्यकताओं को समझते हैं। स्थानीय लोगों की भागीदारी से वन, जल और भूमि का संरक्षण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उदाहरण के लिए संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रमों में ग्रामीण समुदाय वनों की रक्षा करते हैं और बदले में उन्हें वन उत्पादों का लाभ मिलता है। इससे संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित होता है। सामुदायिक सहभागिता पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों के आर्थिक विकास में भी सहायक होती है।


11. गंगा कार्य योजना (Ganga Action Plan) क्या थी?

उत्तर:
गंगा कार्य योजना भारत सरकार द्वारा गंगा नदी के प्रदूषण को कम करने के लिए शुरू की गई एक महत्वपूर्ण योजना थी। इसका मुख्य उद्देश्य गंगा में गिरने वाले औद्योगिक अपशिष्ट, सीवेज तथा अन्य प्रदूषकों को नियंत्रित करना था। इस योजना के अंतर्गत जल शोधन संयंत्रों की स्थापना और प्रदूषण नियंत्रण उपाय किए गए। गंगा नदी करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है और धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इस योजना ने लोगों में नदी संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई। स्वच्छ नदियाँ मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।


12. वन्यजीव संरक्षण क्यों आवश्यक है?

उत्तर:
वन्यजीव पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे खाद्य श्रृंखला और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में सहायता करते हैं। कई प्रजातियाँ आज शिकार, आवास विनाश और प्रदूषण के कारण विलुप्त होने के खतरे में हैं। यदि वन्यजीव समाप्त हो जाएँ तो पारिस्थितिक तंत्र असंतुलित हो सकता है। वन्यजीव संरक्षण के लिए राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और संरक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं। इससे दुर्लभ प्रजातियों की रक्षा होती है और जैव विविधता बनी रहती है। वन्यजीव संरक्षण मानव और प्रकृति दोनों के हित में है।


13. प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के परिणाम क्या हैं?

उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग को अंधाधुंध दोहन कहा जाता है। इसके परिणामस्वरूप वनों की कटाई, जल संकट, भूमि क्षरण तथा जैव विविधता में कमी जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। इससे पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ता है और जलवायु परिवर्तन की समस्या बढ़ती है। संसाधनों की कमी से भविष्य की पीढ़ियों के विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए संसाधनों का उपयोग आवश्यकता के अनुसार और वैज्ञानिक तरीकों से करना चाहिए। संरक्षण और पुनर्चक्रण जैसी गतिविधियाँ इस समस्या को कम कर सकती हैं।


14. कोयला एवं पेट्रोलियम संरक्षण के उपाय बताइए।

उत्तर:
कोयला और पेट्रोलियम सीमित संसाधन हैं, इसलिए उनका संरक्षण आवश्यक है। इनके संरक्षण के लिए सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करना चाहिए। ऊर्जा दक्ष उपकरणों का प्रयोग तथा अनावश्यक बिजली की खपत को कम करना चाहिए। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जैव ऊर्जा जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना चाहिए। वाहनों की नियमित सर्विसिंग से ईंधन की बचत होती है। उद्योगों में आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके ऊर्जा की खपत कम की जा सकती है। इन उपायों से जीवाश्म ईंधनों का संरक्षण और पर्यावरण प्रदूषण में कमी संभव है।


15. तीन आर (3Rs) क्या हैं?

उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए तीन आर (3Rs) का सिद्धांत अपनाया जाता है— Reduce, Reuse और Recycle। Reduce का अर्थ है संसाधनों की खपत कम करना। Reuse का अर्थ है वस्तुओं का पुनः उपयोग करना। Recycle का अर्थ है अपशिष्ट पदार्थों को पुनः संसाधित करके नई वस्तुएँ बनाना। उदाहरण के लिए कागज, प्लास्टिक और धातुओं का पुनर्चक्रण किया जा सकता है। यह सिद्धांत संसाधनों की बचत करता है, कचरे की मात्रा कम करता है और पर्यावरण संरक्षण में सहायता करता है। सतत विकास के लिए 3Rs का पालन अत्यंत आवश्यक है।


16. संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) क्या है?

उत्तर:
संयुक्त वन प्रबंधन (Joint Forest Management) एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें स्थानीय समुदाय और वन विभाग मिलकर वनों का संरक्षण करते हैं। इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण लोग वन सुरक्षा, वृक्षारोपण और वन प्रबंधन में भाग लेते हैं। बदले में उन्हें वन उत्पादों से होने वाले लाभों में हिस्सा मिलता है। इससे लोगों में वनों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। JFM कार्यक्रम से वनों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हुई है। यह वन संरक्षण का एक सफल सहभागी मॉडल माना जाता है।


17. वर्षा जल संचयन के दो लाभ लिखिए।

उत्तर:
वर्षा जल संचयन जल संरक्षण का प्रभावी उपाय है। इसका पहला लाभ यह है कि इससे भूजल स्तर में वृद्धि होती है और जल की उपलब्धता बनी रहती है। दूसरा लाभ यह है कि इससे जल संकट और सूखे की स्थिति में राहत मिलती है। इसके अतिरिक्त वर्षा जल संचयन बाढ़ की संभावना को कम करता है तथा जल प्रदूषण को भी नियंत्रित करने में सहायता करता है। यह कम लागत वाली और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक है। इसलिए आज के समय में वर्षा जल संचयन को व्यापक रूप से अपनाने की आवश्यकता है।


18. संसाधनों के समान वितरण का महत्व बताइए।

उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों का समान वितरण सामाजिक और आर्थिक न्याय के लिए आवश्यक है। यदि संसाधनों का लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित रह जाए तो असमानता बढ़ती है। समान वितरण से सभी लोगों को जल, भूमि, वन और ऊर्जा जैसे संसाधनों का उचित लाभ मिलता है। इससे समाज में संतुलन और विकास को बढ़ावा मिलता है। संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग से संघर्ष और विवाद भी कम होते हैं। इसलिए सरकार और समाज दोनों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग सभी वर्गों के हित में हो।


19. पर्यावरण संरक्षण में नागरिकों की भूमिका क्या है?

उत्तर:
पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। नागरिक जल और ऊर्जा की बचत कर सकते हैं, वृक्षारोपण कर सकते हैं तथा प्लास्टिक का उपयोग कम कर सकते हैं। कचरे का उचित प्रबंधन और पुनर्चक्रण भी पर्यावरण संरक्षण में सहायक है। सार्वजनिक परिवहन का उपयोग और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय अपनाकर पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है। जागरूक नागरिक दूसरों को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं। सामूहिक प्रयासों से ही प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण की रक्षा संभव है।


20. प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण हेतु विद्यार्थियों का योगदान कैसे हो सकता है?

उत्तर:
विद्यार्थी प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वे जल और बिजली की बचत कर सकते हैं, वृक्षारोपण कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं तथा पर्यावरण जागरूकता अभियान चला सकते हैं। स्कूल और घर में कागज का कम उपयोग तथा पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना भी उपयोगी है। विद्यार्थी प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और स्वच्छता बनाए रखने में योगदान दे सकते हैं। इसके अलावा वे दूसरों को भी संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित कर सकते हैं। छोटे-छोटे प्रयास मिलकर पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में बड़ा योगदान दे सकते हैं।