CBSE कक्षा 10 विज्ञान (जीव विज्ञान)

अध्याय 1 – जीवन प्रक्रियाएँ

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

1. जीवन प्रक्रियाएँ क्या हैं? इनके महत्व को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
जीवन प्रक्रियाएँ वे सभी क्रियाएँ हैं जो किसी जीव को जीवित बनाए रखने के लिए आवश्यक होती हैं। इनमें पोषण, श्वसन, परिवहन तथा उत्सर्जन प्रमुख हैं। पोषण से जीव को ऊर्जा और वृद्धि के लिए आवश्यक पदार्थ प्राप्त होते हैं। श्वसन द्वारा भोजन से ऊर्जा मुक्त होती है। परिवहन तंत्र शरीर के विभिन्न भागों तक पोषक पदार्थों, ऑक्सीजन तथा हार्मोनों को पहुँचाता है। उत्सर्जन शरीर में बनने वाले हानिकारक अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है। यदि इनमें से कोई भी प्रक्रिया बाधित हो जाए तो जीव का सामान्य जीवन प्रभावित हो सकता है। इसलिए जीवन प्रक्रियाएँ जीवों के अस्तित्व और निरंतरता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।


2. स्वपोषी एवं परपोषी पोषण में अंतर लिखिए।

उत्तर:
स्वपोषी पोषण वह प्रक्रिया है जिसमें जीव अपना भोजन स्वयं तैयार करते हैं। हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा सूर्य के प्रकाश, जल और कार्बन डाइऑक्साइड की सहायता से भोजन बनाते हैं। दूसरी ओर, परपोषी पोषण में जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते और अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं। मनुष्य, पशु तथा अधिकांश कवक परपोषी होते हैं। स्वपोषी जीव पारिस्थितिकी तंत्र में उत्पादक कहलाते हैं, जबकि परपोषी जीव उपभोक्ता कहलाते हैं। स्वपोषी पोषण में क्लोरोफिल की आवश्यकता होती है, जबकि परपोषी पोषण में नहीं। दोनों प्रकार के पोषण जीवों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


3. प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
प्रकाश संश्लेषण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड और जल से ग्लूकोज का निर्माण करते हैं तथा ऑक्सीजन मुक्त करते हैं। यह प्रक्रिया पत्तियों के क्लोरोप्लास्ट में उपस्थित क्लोरोफिल द्वारा संपन्न होती है। पौधे जड़ों द्वारा जल तथा रंध्रों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं। सूर्य का प्रकाश आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप भोजन के रूप में ग्लूकोज बनता है जिसे पौधे ऊर्जा एवं वृद्धि के लिए उपयोग करते हैं। प्रकाश संश्लेषण पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भोजन और ऑक्सीजन दोनों उपलब्ध कराता है।


4. मानव पाचन तंत्र का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर:
मानव पाचन तंत्र भोजन को सरल पदार्थों में परिवर्तित करता है ताकि उनका अवशोषण हो सके। पाचन की शुरुआत मुख से होती है जहाँ दाँत भोजन को चबाते हैं और लार में उपस्थित एंजाइम स्टार्च का पाचन प्रारंभ करता है। भोजन ग्रासनली से होकर आमाशय में पहुँचता है। आमाशय में अम्ल और एंजाइम भोजन को और सरल बनाते हैं। छोटी आँत में यकृत से प्राप्त पित्त रस तथा अग्न्याशय के एंजाइम भोजन के पूर्ण पाचन में सहायता करते हैं। यहीं पोषक तत्वों का अवशोषण होता है। बड़ी आँत जल का अवशोषण करती है और अपचित पदार्थ मल के रूप में बाहर निकाल दिए जाते हैं।


5. आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का क्या कार्य है?

उत्तर:
आमाशय की भित्तियों से हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) स्रावित होता है। इसका मुख्य कार्य भोजन के पाचन के लिए अम्लीय माध्यम प्रदान करना है। यह अम्ल पेप्सिन एंजाइम को सक्रिय करता है, जो प्रोटीन के पाचन में सहायता करता है। इसके अतिरिक्त, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल भोजन के साथ प्रवेश करने वाले अनेक हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट कर देता है, जिससे संक्रमण का खतरा कम होता है। यह पाचन तंत्र की कार्यक्षमता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आमाशय की भीतरी परत श्लेष्मा (म्यूकस) का स्राव करती है, जो अम्ल के हानिकारक प्रभावों से आमाशय की रक्षा करती है।


6. श्वसन क्या है? इसका महत्व बताइए।

उत्तर:
श्वसन वह जैविक प्रक्रिया है जिसमें भोजन के अणुओं का ऑक्सीकरण होकर ऊर्जा मुक्त होती है। यह ऊर्जा शरीर की सभी जीवन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए आवश्यक होती है। श्वसन कोशिकाओं के भीतर होता है और इसके परिणामस्वरूप कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल बनते हैं। मनुष्य और अधिकांश जीव ऑक्सीजन की सहायता से वायवीय श्वसन करते हैं। श्वसन से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग वृद्धि, गति, प्रजनन तथा अन्य जैविक क्रियाओं में किया जाता है। यदि श्वसन न हो तो कोशिकाओं को ऊर्जा नहीं मिलेगी और जीवन संभव नहीं रहेगा। इसलिए श्वसन जीवन की एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।


7. वायवीय एवं अवायवीय श्वसन में अंतर लिखिए।

उत्तर:
वायवीय श्वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है, जबकि अवायवीय श्वसन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है। वायवीय श्वसन में ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है और अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है। इसके उत्पाद कार्बन डाइऑक्साइड और जल होते हैं। दूसरी ओर, अवायवीय श्वसन में ग्लूकोज का अपूर्ण ऑक्सीकरण होता है और कम ऊर्जा प्राप्त होती है। यीस्ट में अवायवीय श्वसन से एथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड बनते हैं, जबकि मनुष्य की मांसपेशियों में लैक्टिक अम्ल बनता है। वायवीय श्वसन अधिक प्रभावी होता है क्योंकि इससे अधिक मात्रा में ऊर्जा प्राप्त होती है।


8. मानव श्वसन तंत्र का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
मानव श्वसन तंत्र में नासिका, श्वासनली, ब्रोंकाई तथा फेफड़े शामिल होते हैं। वायु नासिका द्वारा शरीर में प्रवेश करती है, जहाँ वह छनी, नम तथा गर्म होती है। इसके बाद वायु श्वासनली से होकर ब्रोंकाई और फिर फेफड़ों में पहुँचती है। फेफड़ों में उपस्थित वायुकोष्ठिकाएँ (एल्वियोली) गैसों के आदान-प्रदान का कार्य करती हैं। यहाँ ऑक्सीजन रक्त में प्रवेश करती है और कार्बन डाइऑक्साइड रक्त से बाहर निकलती है। श्वसन तंत्र शरीर की कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुँचाने और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


9. रक्त के मुख्य घटकों के कार्य लिखिए।

उत्तर:
रक्त मुख्यतः प्लाज्मा, लाल रक्त कणिकाएँ (RBC), श्वेत रक्त कणिकाएँ (WBC) और प्लेटलेट्स से मिलकर बना होता है। प्लाज्मा पोषक पदार्थों, हार्मोनों तथा अपशिष्ट पदार्थों का परिवहन करता है। लाल रक्त कणिकाएँ हीमोग्लोबिन की सहायता से ऑक्सीजन का परिवहन करती हैं। श्वेत रक्त कणिकाएँ शरीर को रोगजनकों से बचाकर प्रतिरक्षा प्रदान करती हैं। प्लेटलेट्स रक्त के थक्के बनने में सहायता करती हैं, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव रुकता है। ये सभी घटक मिलकर शरीर के सामान्य कार्यों को बनाए रखते हैं और स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं।


10. मानव हृदय की संरचना एवं कार्य बताइए।

उत्तर:
मानव हृदय एक पेशीय अंग है जो रक्त परिसंचरण का कार्य करता है। यह चार कक्षों—दो आलिंद और दो निलय—में विभाजित होता है। दायाँ भाग अशुद्ध रक्त तथा बायाँ भाग शुद्ध रक्त को संभालता है। हृदय नियमित रूप से संकुचन और प्रसार करके रक्त को पूरे शरीर में भेजता है। फेफड़ों से ऑक्सीजन युक्त रक्त बाएँ आलिंद में आता है और फिर पूरे शरीर में पहुँचाया जाता है। शरीर से लौटने वाला अशुद्ध रक्त दाएँ भाग में प्रवेश करता है और फेफड़ों में भेजा जाता है। इस प्रकार हृदय शरीर के सभी भागों तक रक्त पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य करता है।


11. धमनियों और शिराओं में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
धमनियाँ रक्त को हृदय से शरीर के विभिन्न भागों तक ले जाती हैं, जबकि शिराएँ रक्त को शरीर से वापस हृदय तक लाती हैं। धमनियों की दीवारें मोटी और लचीली होती हैं क्योंकि उनमें रक्त उच्च दाब से प्रवाहित होता है। शिराओं की दीवारें अपेक्षाकृत पतली होती हैं और उनमें वाल्व पाए जाते हैं जो रक्त के विपरीत प्रवाह को रोकते हैं। सामान्यतः धमनियाँ ऑक्सीजन युक्त रक्त तथा शिराएँ ऑक्सीजन रहित रक्त ले जाती हैं, हालांकि फुफ्फुसीय धमनी और शिरा इसके अपवाद हैं। दोनों रक्त वाहिकाएँ परिसंचरण तंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।


12. पौधों में जल का परिवहन कैसे होता है?

उत्तर:
पौधों में जल का परिवहन जाइलम ऊतक द्वारा किया जाता है। जड़ें मिट्टी से जल और खनिजों का अवशोषण करती हैं। इसके बाद जाइलम नलिकाओं के माध्यम से जल तने और पत्तियों तक पहुँचता है। वाष्पोत्सर्जन के कारण पत्तियों से जल वाष्प के रूप में बाहर निकलता है, जिससे एक खिंचाव बल उत्पन्न होता है। यह बल जड़ों से जल को ऊपर खींचने में सहायता करता है। इसके अतिरिक्त, मूल दाब और जल के अणुओं के बीच आकर्षण भी जल परिवहन में योगदान देते हैं। यह प्रक्रिया पौधों के जीवन और वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है।


13. वाष्पोत्सर्जन क्या है? इसका महत्व बताइए।

उत्तर:
वाष्पोत्सर्जन वह प्रक्रिया है जिसमें पौधों की पत्तियों के रंध्रों द्वारा जल वाष्प के रूप में बाहर निकलता है। यह मुख्यतः दिन के समय होता है। वाष्पोत्सर्जन पौधों में जल और खनिजों के ऊपर की ओर परिवहन में सहायता करता है। यह पौधों के तापमान को नियंत्रित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अधिक गर्मी होने पर वाष्पोत्सर्जन पौधों को ठंडा बनाए रखता है। इसके अतिरिक्त, यह जल चक्र में भी योगदान देता है। इसलिए वाष्पोत्सर्जन पौधों की शारीरिक क्रियाओं तथा पर्यावरणीय संतुलन दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।


14. उत्सर्जन क्या है? इसका महत्व बताइए।

उत्तर:
उत्सर्जन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव अपने शरीर में बनने वाले हानिकारक एवं अनावश्यक पदार्थों को बाहर निकालते हैं। श्वसन, पाचन तथा अन्य उपापचयी क्रियाओं के दौरान अनेक अपशिष्ट पदार्थ बनते हैं। यदि ये पदार्थ शरीर में जमा हो जाएँ तो कोशिकाओं को हानि पहुँचा सकते हैं। मनुष्य में गुर्दे, त्वचा और फेफड़े उत्सर्जन में भाग लेते हैं। गुर्दे यूरिया और अतिरिक्त जल को मूत्र के रूप में बाहर निकालते हैं। उत्सर्जन शरीर के आंतरिक संतुलन को बनाए रखने और स्वास्थ्य की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


15. मानव उत्सर्जी तंत्र का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
मानव उत्सर्जी तंत्र में दो गुर्दे, दो मूत्रवाहिनियाँ, मूत्राशय और मूत्रमार्ग शामिल होते हैं। गुर्दे रक्त को छानकर उसमें से यूरिया, अतिरिक्त लवण तथा अतिरिक्त जल को अलग करते हैं। इससे मूत्र का निर्माण होता है। मूत्र मूत्रवाहिनियों द्वारा मूत्राशय में पहुँचता है, जहाँ वह कुछ समय तक संग्रहित रहता है। बाद में मूत्रमार्ग द्वारा शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। यह तंत्र शरीर में जल और लवण संतुलन बनाए रखने में भी सहायता करता है। मानव शरीर के स्वस्थ संचालन के लिए उत्सर्जी तंत्र का सही कार्य करना अत्यंत आवश्यक है।


16. नेफ्रॉन की संरचना और कार्य लिखिए।

उत्तर:
नेफ्रॉन गुर्दे की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है। प्रत्येक गुर्दे में लाखों नेफ्रॉन पाए जाते हैं। नेफ्रॉन में बोमैन कैप्सूल, ग्लोमेरुलस तथा नलिकाएँ होती हैं। ग्लोमेरुलस रक्त का निस्यंदन करता है और निस्यंदित द्रव बोमैन कैप्सूल में एकत्र होता है। नलिकाओं में आवश्यक जल, ग्लूकोज और लवण पुनः अवशोषित कर लिए जाते हैं। शेष अपशिष्ट पदार्थ मूत्र के रूप में बाहर निकल जाते हैं। नेफ्रॉन शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को हटाने तथा जल एवं लवण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


17. रंध्र (Stomata) क्या हैं? इनके कार्य बताइए।

उत्तर:
रंध्र पत्तियों की सतह पर उपस्थित सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जो दो रक्षक कोशिकाओं से घिरे रहते हैं। ये पौधों में गैसों के आदान-प्रदान का मुख्य माध्यम हैं। प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड रंध्रों द्वारा पौधे में प्रवेश करती है और ऑक्सीजन बाहर निकलती है। इसके अतिरिक्त, रंध्र वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रक्षक कोशिकाएँ रंध्रों के खुलने और बंद होने को नियंत्रित करती हैं। इस प्रकार रंध्र पौधों में गैस विनिमय, जल संतुलन तथा प्रकाश संश्लेषण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के संचालन में सहायक होते हैं।


18. पित्त रस का पाचन में क्या महत्व है?

उत्तर:
पित्त रस का निर्माण यकृत में होता है और इसका संग्रहण पित्ताशय में किया जाता है। यह छोटी आँत में स्रावित होता है। पित्त रस में कोई पाचक एंजाइम नहीं होता, फिर भी यह पाचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह वसा को छोटे-छोटे कणों में तोड़कर उसका इमल्सीकरण करता है, जिससे लाइपेज एंजाइम आसानी से कार्य कर पाता है। इसके अतिरिक्त, यह आमाशय से आए अम्लीय भोजन को क्षारीय बनाता है, जिससे छोटी आँत में एंजाइमों की क्रिया सुचारु रूप से हो सके। इस प्रकार पित्त रस वसा पाचन के लिए अत्यंत आवश्यक है।


19. ATP क्या है? इसका महत्व बताइए।

उत्तर:
ATP (एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) कोशिकाओं की ऊर्जा मुद्रा कहलाता है। श्वसन प्रक्रिया के दौरान भोजन के ऑक्सीकरण से प्राप्त ऊर्जा ATP के रूप में संग्रहित होती है। जब कोशिकाओं को किसी कार्य के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, तब ATP टूटकर ऊर्जा प्रदान करता है। यह ऊर्जा मांसपेशियों की गतिविधि, कोशिका विभाजन, प्रोटीन संश्लेषण तथा अन्य जैविक क्रियाओं में उपयोग होती है। ATP जीवित कोशिकाओं में ऊर्जा के संचय और स्थानांतरण का मुख्य माध्यम है। इसलिए इसे कोशिका की ऊर्जा इकाई कहा जाता है।


20. जीवन प्रक्रियाओं के बीच संबंध को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
जीवन प्रक्रियाएँ एक-दूसरे से घनिष्ठ रूप से जुड़ी होती हैं। पोषण द्वारा प्राप्त भोजन श्वसन के लिए आवश्यक होता है। श्वसन से ऊर्जा प्राप्त होती है, जो शरीर की सभी गतिविधियों के लिए आवश्यक है। परिवहन तंत्र भोजन, ऑक्सीजन और अन्य आवश्यक पदार्थों को कोशिकाओं तक पहुँचाता है तथा अपशिष्ट पदार्थों को उत्सर्जी अंगों तक ले जाता है। उत्सर्जन इन अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालता है। यदि किसी एक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हो जाए तो अन्य प्रक्रियाएँ भी प्रभावित होती हैं। इसलिए सभी जीवन प्रक्रियाएँ मिलकर जीव के अस्तित्व और स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं।