CBSE कक्षा 10 विज्ञान (रसायन विज्ञान)
अध्याय 2 : अम्ल, क्षार एवं लवण
20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
1. अम्ल क्या हैं? इनके दो प्रमुख गुण लिखिए।
उत्तर:
अम्ल वे पदार्थ हैं जो जल में घुलकर हाइड्रोजन आयन (H⁺) उत्पन्न करते हैं। अम्लों का स्वाद खट्टा होता है तथा ये नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं। अम्ल विद्युत के अच्छे चालक होते हैं क्योंकि इनके जलीय विलयन में आयन उपस्थित रहते हैं। उदाहरण के लिए हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl), सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) तथा नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) प्रमुख अम्ल हैं। अम्ल धातुओं के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करते हैं। दैनिक जीवन में नींबू, संतरा तथा सिरके में भी प्राकृतिक अम्ल पाए जाते हैं। अम्लों का उपयोग उद्योगों, उर्वरकों तथा औषधियों के निर्माण में किया जाता है।
2. क्षार क्या हैं? इनके दो प्रमुख गुण बताइए।
उत्तर:
क्षार वे पदार्थ हैं जो जल में घुलकर हाइड्रॉक्साइड आयन (OH⁻) उत्पन्न करते हैं। इनका स्वाद कड़वा तथा स्पर्श साबुन जैसा चिकना होता है। क्षार लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं। सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH), पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH) तथा कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड [Ca(OH)₂] प्रमुख क्षार हैं। क्षार अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं, जिसे उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं। क्षारों का उपयोग साबुन, कागज तथा वस्त्र उद्योगों में किया जाता है। प्रबल क्षार संक्षारक होते हैं और त्वचा को नुकसान पहुँचा सकते हैं, इसलिए इनके प्रयोग में सावधानी आवश्यक है।
3. उदासीनीकरण अभिक्रिया क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
जब कोई अम्ल किसी क्षार के साथ अभिक्रिया करता है और परिणामस्वरूप लवण तथा जल बनते हैं, तो इसे उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं। इस अभिक्रिया में अम्ल और क्षार के गुण समाप्त हो जाते हैं। उदाहरण के लिए:
HCl + NaOH → NaCl + H₂O
यहाँ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सोडियम हाइड्रॉक्साइड मिलकर सोडियम क्लोराइड (साधारण नमक) तथा जल बनाते हैं। यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी होती है, अर्थात इसमें ऊष्मा उत्पन्न होती है। दैनिक जीवन में अम्लता (Acidity) की समस्या को दूर करने के लिए एंटासिड का उपयोग भी उदासीनीकरण का उदाहरण है।
4. pH स्केल क्या है? इसका महत्व बताइए।
उत्तर:
pH स्केल किसी विलयन की अम्लीय या क्षारीय प्रकृति को मापने का पैमाना है। इसका मान 0 से 14 तक होता है। pH = 7 उदासीन विलयन को दर्शाता है। 7 से कम pH वाले विलयन अम्लीय तथा 7 से अधिक pH वाले विलयन क्षारीय होते हैं। pH का महत्व जीव विज्ञान, कृषि तथा चिकित्सा में बहुत अधिक है। मानव रक्त का pH लगभग 7.4 होता है। मिट्टी का उपयुक्त pH पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक है। दाँतों का क्षय भी pH में परिवर्तन के कारण होता है। इस प्रकार pH स्केल विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाओं को समझने में सहायता करता है।
5. अम्लों का जलीय विलयन ही विद्युत का संचालन क्यों करता है?
उत्तर:
अम्ल अपने शुद्ध रूप में विद्युत का संचालन नहीं करते, लेकिन जब वे जल में घुलते हैं तो आयनों में टूट जाते हैं। उदाहरण के लिए HCl जल में घुलकर H⁺ तथा Cl⁻ आयन बनाता है। ये मुक्त आयन विद्युत धारा के प्रवाह में सहायता करते हैं। इसलिए अम्लों के जलीय विलयन विद्युत के अच्छे चालक होते हैं। यदि जल उपस्थित न हो तो आयन नहीं बनते और विद्युत चालकता नहीं होती। यही कारण है कि सूखी अवस्था में अम्ल विद्युत का संचालन नहीं कर पाते, जबकि उनके जलीय विलयन आसानी से विद्युत प्रवाहित करते हैं।
6. धातु और अम्ल की अभिक्रिया को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
जब कोई धातु अम्ल के साथ अभिक्रिया करती है, तब लवण तथा हाइड्रोजन गैस बनती है। इस अभिक्रिया में धातु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देती है। उदाहरण के लिए:
Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂↑
इस अभिक्रिया में जिंक और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिया से जिंक क्लोराइड तथा हाइड्रोजन गैस उत्पन्न होती है। हाइड्रोजन गैस की पहचान जलती हुई तीली लाने पर “पॉप” ध्वनि से होती है। सभी धातुएँ अम्लों के साथ समान रूप से अभिक्रिया नहीं करतीं। ताँबा और चाँदी जैसी कम क्रियाशील धातुएँ सामान्य अम्लों के साथ हाइड्रोजन गैस नहीं देतीं।
7. अम्ल और धातु कार्बोनेट की अभिक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अम्ल जब धातु कार्बोनेट या धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट से अभिक्रिया करते हैं, तो लवण, जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न होती है। उदाहरण:
CaCO₃ + 2HCl → CaCl₂ + H₂O + CO₂
इस अभिक्रिया में कैल्शियम कार्बोनेट और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिया से कैल्शियम क्लोराइड, जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड बनती है। उत्पन्न CO₂ गैस चूने के पानी को दूधिया बना देती है। यह अभिक्रिया प्रयोगशालाओं में CO₂ गैस तैयार करने के लिए उपयोग की जाती है। संगमरमर और चूना पत्थर मुख्यतः कैल्शियम कार्बोनेट से बने होते हैं।
8. सूचक (Indicator) क्या होते हैं? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
सूचक वे पदार्थ होते हैं जो अम्लीय तथा क्षारीय माध्यम में अलग-अलग रंग प्रदर्शित करते हैं। इनका उपयोग किसी विलयन की प्रकृति ज्ञात करने के लिए किया जाता है। लिटमस, फिनॉल्फ्थेलीन तथा मिथाइल ऑरेंज प्रमुख रासायनिक सूचक हैं। नीला लिटमस अम्ल में लाल हो जाता है जबकि लाल लिटमस क्षार में नीला हो जाता है। प्राकृतिक सूचकों में हल्दी तथा गुड़हल का फूल शामिल हैं। हल्दी क्षार के संपर्क में लाल-भूरी हो जाती है। सूचक रसायन विज्ञान में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनके द्वारा किसी अज्ञात विलयन की अम्लीय या क्षारीय प्रकृति आसानी से ज्ञात की जा सकती है।
9. सार्वत्रिक सूचक क्या है?
उत्तर:
सार्वत्रिक सूचक विभिन्न सूचकों का मिश्रण होता है जो किसी विलयन के pH मान के अनुसार अलग-अलग रंग प्रदर्शित करता है। यह केवल अम्लीय या क्षारीय प्रकृति ही नहीं बताता बल्कि अम्ल या क्षार की तीव्रता भी दर्शाता है। pH 1 से 3 तक लाल रंग, 4 से 6 तक नारंगी या पीला, 7 पर हरा तथा 8 से 14 तक नीला या बैंगनी रंग दिखाई देता है। इसका उपयोग प्रयोगशालाओं में pH मान ज्ञात करने के लिए किया जाता है। सार्वत्रिक सूचक रसायन विज्ञान में अत्यंत उपयोगी उपकरण है क्योंकि यह अधिक सटीक जानकारी प्रदान करता है।
10. दाँतों का क्षय pH से कैसे संबंधित है?
उत्तर:
हमारे मुँह में उपस्थित बैक्टीरिया भोजन के शर्करा युक्त अवशेषों को अम्लों में परिवर्तित कर देते हैं। जब मुँह का pH 5.5 से नीचे चला जाता है, तब दाँतों की बाहरी परत (एनामेल) घुलने लगती है। इससे दाँतों का क्षय आरंभ हो जाता है। क्षय को रोकने के लिए नियमित रूप से दाँत साफ करना तथा क्षारीय टूथपेस्ट का उपयोग करना आवश्यक है। टूथपेस्ट अम्ल को उदासीन कर देता है और pH को सामान्य बनाए रखता है। इसलिए दाँतों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में pH का महत्वपूर्ण योगदान है।
11. लवण क्या हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
लवण वे यौगिक हैं जो अम्ल और क्षार की उदासीनीकरण अभिक्रिया से बनते हैं। इनमें अम्ल का ऋणायन तथा क्षार का धनायन उपस्थित होता है। उदाहरण के लिए सोडियम क्लोराइड (NaCl), पोटैशियम नाइट्रेट (KNO₃) तथा कॉपर सल्फेट (CuSO₄) प्रमुख लवण हैं। लवणों के गुण उनके निर्माण में प्रयुक्त अम्ल और क्षार पर निर्भर करते हैं। कुछ लवण उदासीन, कुछ अम्लीय तथा कुछ क्षारीय प्रकृति के होते हैं। लवणों का उपयोग खाद्य पदार्थों, उर्वरकों, औषधियों तथा विभिन्न उद्योगों में व्यापक रूप से किया जाता है।
12. सामान्य नमक का रासायनिक नाम और उपयोग लिखिए।
उत्तर:
सामान्य नमक का रासायनिक नाम सोडियम क्लोराइड (NaCl) है। यह हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सोडियम हाइड्रॉक्साइड की उदासीनीकरण अभिक्रिया से प्राप्त किया जा सकता है। यह हमारे भोजन का आवश्यक घटक है और शरीर में जल संतुलन बनाए रखने में सहायता करता है। सामान्य नमक से कई महत्वपूर्ण रसायन जैसे कास्टिक सोडा, बेकिंग सोडा, वाशिंग सोडा तथा ब्लीचिंग पाउडर बनाए जाते हैं। इसका उपयोग खाद्य संरक्षण, रासायनिक उद्योगों तथा चिकित्सा क्षेत्र में भी किया जाता है। समुद्री जल और खनिज निक्षेप इसके प्रमुख स्रोत हैं।
13. बेकिंग सोडा क्या है? इसके उपयोग बताइए।
उत्तर:
बेकिंग सोडा का रासायनिक नाम सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (NaHCO₃) है। यह एक क्षारीय लवण है। इसका उपयोग बेकिंग पाउडर बनाने में किया जाता है जिससे केक और ब्रेड मुलायम तथा फूले हुए बनते हैं। यह गरम करने पर कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न करता है। बेकिंग सोडा का उपयोग अग्निशामक यंत्रों में भी किया जाता है। इसके अतिरिक्त यह अम्लता को कम करने वाली दवाओं (एंटासिड) में प्रयुक्त होता है। यह दैनिक जीवन में अत्यंत उपयोगी रसायन है और भोजन उद्योग में इसका विशेष महत्व है।
14. वाशिंग सोडा क्या है? इसके उपयोग लिखिए।
उत्तर:
वाशिंग सोडा का रासायनिक नाम सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट (Na₂CO₃·10H₂O) है। यह एक महत्वपूर्ण लवण है जो बेकिंग सोडा को गर्म करके प्राप्त किया जाता है। इसका उपयोग कपड़े धोने, काँच निर्माण, साबुन उद्योग तथा कागज उद्योग में किया जाता है। यह जल की स्थायी कठोरता को दूर करने में भी सहायक है। वाशिंग सोडा एक क्षारीय पदार्थ है और सफाई कार्यों में प्रभावी भूमिका निभाता है। घरेलू तथा औद्योगिक दोनों क्षेत्रों में इसका व्यापक उपयोग होता है।
15. ब्लीचिंग पाउडर क्या है? इसके प्रमुख उपयोग बताइए।
उत्तर:
ब्लीचिंग पाउडर का रासायनिक सूत्र CaOCl₂ है। इसका निर्माण शुष्क बुझा हुआ चूना [Ca(OH)₂] पर क्लोरीन गैस प्रवाहित करके किया जाता है। ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग कपड़ा उद्योग तथा कागज उद्योग में विरंजन (Bleaching) के लिए किया जाता है। यह पीने के पानी को कीटाणुरहित करने में भी उपयोगी है। इसके अतिरिक्त यह एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है। स्वच्छता और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में ब्लीचिंग पाउडर का विशेष महत्व है क्योंकि यह रोगजनक सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने में सहायता करता है।
16. प्लास्टर ऑफ पेरिस क्या है?
उत्तर:
प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) का रासायनिक नाम कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट (CaSO₄·½H₂O) है। इसे जिप्सम को लगभग 373 K तापमान पर गर्म करके प्राप्त किया जाता है। पानी मिलाने पर यह पुनः जिप्सम में परिवर्तित होकर कठोर हो जाता है। इसका उपयोग टूटी हुई हड्डियों पर प्लास्टर चढ़ाने, मूर्तियाँ बनाने तथा सजावटी वस्तुओं के निर्माण में किया जाता है। POP हल्का तथा आसानी से आकार लेने वाला पदार्थ है। चिकित्सा और कला दोनों क्षेत्रों में इसका व्यापक उपयोग होता है।
17. जल के बिना अम्ल अम्लीय गुण क्यों नहीं दिखाते?
उत्तर:
अम्लों के अम्लीय गुण H⁺ आयनों के कारण होते हैं। जब अम्ल जल में घुलते हैं तभी वे H⁺ या H₃O⁺ आयन उत्पन्न करते हैं। जल की अनुपस्थिति में ये आयन नहीं बनते, इसलिए अम्ल अपने विशिष्ट गुण प्रदर्शित नहीं करते। उदाहरण के लिए शुष्क हाइड्रोक्लोरिक अम्ल गैस नीले लिटमस को लाल नहीं करती, लेकिन जल में घुलने पर ऐसा करती है। इससे स्पष्ट होता है कि अम्लीय व्यवहार के लिए जल का उपस्थित होना आवश्यक है। यही कारण है कि अम्लों के जलीय विलयन अधिक सक्रिय होते हैं।
18. चींटी के काटने पर जलन क्यों होती है? इसका उपचार कैसे किया जाता है?
उत्तर:
चींटी के काटने पर उसके द्वारा फॉर्मिक अम्ल त्वचा में प्रवेश कर जाता है, जिससे जलन और दर्द होता है। यह अम्ल त्वचा को प्रभावित करता है और असुविधा उत्पन्न करता है। इस स्थिति में किसी हल्के क्षार का उपयोग किया जाता है ताकि अम्ल का उदासीनीकरण हो सके। सामान्यतः बेकिंग सोडा का घोल या कैलामाइन लोशन लगाया जाता है। इससे अम्ल की तीव्रता कम हो जाती है और जलन से राहत मिलती है। यह उदासीनीकरण अभिक्रिया का एक व्यावहारिक उदाहरण है जो दैनिक जीवन में देखने को मिलता है।
19. मिट्टी के pH का कृषि में क्या महत्व है?
उत्तर:
मिट्टी का pH पौधों की वृद्धि और फसल उत्पादन को प्रभावित करता है। अधिकांश फसलें लगभग 6.5 से 7.5 pH वाली मिट्टी में अच्छी तरह उगती हैं। यदि मिट्टी अधिक अम्लीय हो तो उसमें चूना मिलाया जाता है, जबकि अधिक क्षारीय मिट्टी में जैविक पदार्थ या जिप्सम मिलाया जाता है। उचित pH होने पर पौधे पोषक तत्वों को बेहतर ढंग से अवशोषित कर पाते हैं। इसलिए किसान मिट्टी की जाँच कर उसके pH को संतुलित रखते हैं। कृषि उत्पादन बढ़ाने में मिट्टी के pH का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है।
20. क्लोर-क्षार प्रक्रिया क्या है?
उत्तर:
सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन (ब्राइन) का विद्युत अपघटन करने पर सोडियम हाइड्रॉक्साइड, क्लोरीन तथा हाइड्रोजन प्राप्त होते हैं। इस प्रक्रिया को क्लोर-क्षार प्रक्रिया कहते हैं। अभिक्रिया के दौरान एनोड पर क्लोरीन गैस तथा कैथोड पर हाइड्रोजन गैस निकलती है, जबकि विलयन में सोडियम हाइड्रॉक्साइड बनता है। क्लोरीन का उपयोग जल शोधन तथा PVC निर्माण में किया जाता है। हाइड्रोजन का उपयोग ईंधन और अमोनिया निर्माण में होता है। सोडियम हाइड्रॉक्साइड साबुन, कागज तथा वस्त्र उद्योग में प्रयुक्त होता है। इसलिए यह प्रक्रिया औद्योगिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
