यहाँ कक्षा 12 (CBSE) राजनीति विज्ञान – भाग: भारत में राजनीति (स्वतंत्रता के बाद)
अध्याय 5: “कांग्रेस प्रणाली की चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना” के लिए
20 महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर दिए गए हैं।


1. कांग्रेस प्रणाली से क्या तात्पर्य है?

कांग्रेस प्रणाली का अर्थ उस राजनीतिक व्यवस्था से है जिसमें स्वतंत्रता के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का राष्ट्रीय और अधिकांश राज्यों की राजनीति पर प्रभुत्व था। इस प्रणाली में कांग्रेस एक “सामाजिक गठबंधन” के रूप में कार्य करती थी, जिसमें विभिन्न वर्ग, जाति और समुदाय शामिल थे। नेहरू के नेतृत्व में यह प्रणाली स्थिरता का प्रतीक थी। लेकिन 1960 के दशक में नेतृत्व संकट, आंतरिक गुटबाजी और क्षेत्रीय असंतोष के कारण इसकी चुनौतियाँ बढ़ीं। 1967 के चुनावों ने इस प्रणाली को गहरा झटका दिया और विपक्षी दलों का उदय हुआ, जिससे एकदलीय प्रभुत्व कमजोर हुआ।


2. 1967 के चुनावों को “राजनीतिक भूकंप” क्यों कहा गया?

1967 के आम चुनावों को “राजनीतिक भूकंप” इसलिए कहा गया क्योंकि पहली बार कांग्रेस कई राज्यों में सत्ता से बाहर हो गई। पार्टी को लोकसभा में भी पहले की तुलना में कम सीटें मिलीं। कई राज्यों में संयुक्त विधायक दल (SVD) की सरकारें बनीं। यह कांग्रेस के प्रभुत्व में पहली बड़ी दरार थी। आर्थिक संकट, महंगाई और नेतृत्व की कमजोरी ने जनता के असंतोष को बढ़ाया। इस चुनाव ने भारतीय राजनीति में बहुदलीय प्रणाली और क्षेत्रीय दलों के उदय को मजबूत किया। यह घटना कांग्रेस प्रणाली के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुई।


3. कांग्रेस के भीतर “सिंडिकेट” क्या था?

सिंडिकेट कांग्रेस के शक्तिशाली नेताओं का एक अनौपचारिक समूह था, जो संगठन और निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। इसमें के. कामराज, एस. निजलिंगप्पा, अतुल्य घोष जैसे नेता शामिल थे। यह समूह प्रधानमंत्री चयन और पार्टी नीतियों को प्रभावित करता था। इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके और सिंडिकेट के बीच सत्ता संघर्ष बढ़ गया। 1969 के राष्ट्रपति चुनाव में यह टकराव स्पष्ट रूप से सामने आया। सिंडिकेट ने अधिक संगठनात्मक नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की, जबकि इंदिरा गांधी ने स्वतंत्र निर्णय लेने की नीति अपनाई।


4. कांग्रेस विभाजन (1969) के प्रमुख कारण क्या थे?

1969 में कांग्रेस का विभाजन कई कारणों से हुआ। पहला कारण था इंदिरा गांधी और सिंडिकेट के बीच नेतृत्व संघर्ष। दूसरा कारण राष्ट्रपति चुनाव में प्रत्याशी को लेकर मतभेद था। तीसरा कारण आर्थिक नीतियों जैसे बैंकों के राष्ट्रीयकरण पर विवाद था। इंदिरा गांधी ने अधिक समाजवादी नीतियाँ अपनाईं, जिसका सिंडिकेट ने विरोध किया। अंततः पार्टी दो हिस्सों में बँट गई—कांग्रेस (ओ) और कांग्रेस (आर)। यह विभाजन कांग्रेस प्रणाली के विघटन का महत्वपूर्ण चरण था और इससे पार्टी की आंतरिक एकता कमजोर हो गई।


5. दलबदल (Defection) क्या है?

दलबदल का अर्थ है किसी निर्वाचित प्रतिनिधि का अपनी राजनीतिक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल हो जाना। 1967 के बाद यह प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी। इसे “आया राम गया राम” की राजनीति भी कहा गया। दलबदल के कारण कई राज्यों में सरकारें अस्थिर हो गईं। विधायक और सांसद व्यक्तिगत लाभ के लिए दल बदलने लगे। इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हुई और राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ी। बाद में इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए 1985 में दल-बदल विरोधी कानून लाया गया। यह कांग्रेस प्रणाली की स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती थी।


6. इंदिरा गांधी के नेतृत्व की प्रमुख विशेषताएँ क्या थीं?

इंदिरा गांधी का नेतृत्व अधिक केंद्रीकृत और व्यक्तिगत था। उन्होंने “गरीबी हटाओ” जैसे लोकप्रिय नारे दिए और जनसमर्थन हासिल किया। 1971 के चुनाव में उनकी बड़ी जीत ने उनके नेतृत्व को मजबूत किया। उन्होंने बैंकों का राष्ट्रीयकरण और प्रिवी पर्स समाप्त करने जैसे कदम उठाए। इससे उनकी समाजवादी छवि बनी। उन्होंने पार्टी संगठन पर भी अपना नियंत्रण स्थापित किया। उनका नेतृत्व कांग्रेस (आर) की सफलता का प्रमुख कारण बना और कांग्रेस प्रणाली को पुनः मजबूत करने में मदद मिली।


7. 1967 के चुनावों में कांग्रेस की कमजोरी के कारण क्या थे?

1967 में कांग्रेस की कमजोरी के कई कारण थे। आर्थिक संकट, महंगाई और खाद्य संकट ने जनता में असंतोष बढ़ाया। नेहरू के बाद नेतृत्व परिवर्तन की समस्या भी सामने आई। आंतरिक गुटबाजी और संगठनात्मक कमजोरियाँ भी प्रमुख कारण थीं। विपक्षी दलों का एकजुट होना भी कांग्रेस के लिए चुनौती बना। क्षेत्रीय असंतोष और भाषाई आंदोलनों ने स्थिति को और जटिल बना दिया। इन सभी कारणों ने कांग्रेस के प्रभुत्व को कमजोर किया और उसे कई राज्यों में सत्ता से बाहर कर दिया।


8. कांग्रेस प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ क्या थीं?

कांग्रेस प्रणाली एक ऐसी व्यवस्था थी जिसमें कांग्रेस पार्टी विभिन्न सामाजिक समूहों का गठबंधन थी। इसमें किसान, मजदूर, व्यापारी और उच्च वर्ग शामिल थे। यह पार्टी केंद्र और राज्यों दोनों में प्रभुत्व रखती थी। आंतरिक लोकतंत्र की कमी के बावजूद यह स्थिरता प्रदान करती थी। नेहरू के नेतृत्व में यह प्रणाली राष्ट्रीय एकता का प्रतीक थी। लेकिन समय के साथ आंतरिक संघर्ष और क्षेत्रीय राजनीति ने इसे कमजोर कर दिया। यह प्रणाली 1967 के बाद गंभीर चुनौतियों का सामना करने लगी।


9. “आया राम गया राम” की घटना क्या है?

“आया राम गया राम” 1967 के दशक में हरियाणा के एक विधायक गयालाल से जुड़ी प्रसिद्ध घटना है। उन्होंने एक ही दिन में कई बार पार्टी बदली। यह घटना दलबदल की राजनीति का प्रतीक बन गई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि नेता व्यक्तिगत लाभ के लिए दल बदल रहे थे। इस प्रवृत्ति ने सरकारों को अस्थिर कर दिया। यह भारतीय राजनीति में नैतिकता की कमी को दर्शाता है। इस घटना ने दलबदल विरोधी कानून की आवश्यकता को उजागर किया।


10. कांग्रेस (ओ) और कांग्रेस (आर) क्या हैं?

1969 के कांग्रेस विभाजन के बाद पार्टी दो भागों में बँट गई। कांग्रेस (ओ) का नेतृत्व सिंडिकेट नेताओं ने किया, जबकि कांग्रेस (आर) का नेतृत्व इंदिरा गांधी ने किया। “ओ” का अर्थ ऑर्गनाइजेशन था और “आर” का अर्थ रीक्विज़िशन या रिवोल्यूशनरी माना गया। कांग्रेस (आर) को अधिक जनसमर्थन मिला। 1971 के चुनाव में कांग्रेस (आर) ने भारी जीत हासिल की। इस विभाजन ने कांग्रेस प्रणाली को पूरी तरह बदल दिया।


11. 1971 के चुनावों का महत्व क्या था?

1971 के चुनाव इंदिरा गांधी के नेतृत्व की बड़ी जीत थे। उनकी पार्टी कांग्रेस (आर) ने भारी बहुमत प्राप्त किया। “गरीबी हटाओ” नारे ने जनता को प्रभावित किया। इस चुनाव ने कांग्रेस प्रणाली को पुनर्स्थापित किया। विपक्ष कमजोर हो गया और इंदिरा गांधी का नेतृत्व मजबूत हुआ। यह चुनाव भारतीय राजनीति में व्यक्तिगत नेतृत्व की भूमिका को दर्शाता है। इससे कांग्रेस का प्रभुत्व फिर से स्थापित हुआ।


12. “गरीबी हटाओ” नारे का प्रभाव क्या था?

“गरीबी हटाओ” इंदिरा गांधी का चुनावी नारा था जो 1971 के चुनाव में दिया गया। इसका उद्देश्य गरीब वर्ग को आकर्षित करना था। इस नारे ने जनता में उम्मीद जगाई। यह कांग्रेस की समाजवादी छवि को मजबूत करता है। इससे कांग्रेस (आर) को व्यापक समर्थन मिला। हालांकि आलोचकों का मानना था कि यह केवल एक राजनीतिक नारा था। फिर भी इसने चुनाव परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


13. कांग्रेस प्रणाली के पतन के मुख्य कारण क्या थे?

कांग्रेस प्रणाली के पतन के मुख्य कारण नेतृत्व संकट, आंतरिक गुटबाजी और दलबदल थे। 1967 के चुनावों ने इसकी कमजोरी उजागर की। क्षेत्रीय दलों का उदय भी एक कारण था। आर्थिक संकट और बेरोजगारी ने जनता का असंतोष बढ़ाया। विपक्षी दलों का एकजुट होना भी चुनौती बना। इन सभी कारणों ने कांग्रेस के प्रभुत्व को कमजोर किया।


14. क्षेत्रीय दलों का उदय कैसे हुआ?

1967 के बाद क्षेत्रीय दलों का तेजी से उदय हुआ। कई राज्यों में क्षेत्रीय मुद्दे महत्वपूर्ण हो गए। भाषा, संस्कृति और आर्थिक असमानता ने इन दलों को मजबूत किया। कांग्रेस की कमजोरी ने इन्हें अवसर दिया। DMK, अकाली दल जैसे दलों का प्रभाव बढ़ा। इससे भारतीय राजनीति बहुदलीय प्रणाली की ओर बढ़ी।


15. कांग्रेस प्रणाली में नेहरू की भूमिका क्या थी?

जवाहरलाल नेहरू ने कांग्रेस प्रणाली को मजबूत किया। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं को स्थापित किया। उनके नेतृत्व में कांग्रेस एक राष्ट्रीय गठबंधन बनी। उन्होंने विपक्ष को भी स्थान दिया। लेकिन उनके बाद नेतृत्व संकट उत्पन्न हुआ। उनकी मृत्यु के बाद कांग्रेस की एकता कमजोर होने लगी।


16. 1969 का राष्ट्रपति चुनाव क्यों महत्वपूर्ण था?

1969 का राष्ट्रपति चुनाव कांग्रेस विभाजन का कारण बना। सिंडिकेट ने नीलम संजीव रेड्डी का समर्थन किया, जबकि इंदिरा गांधी ने वी.वी. गिरि का समर्थन किया। वी.वी. गिरि की जीत ने पार्टी में विभाजन को स्पष्ट कर दिया। यह घटना कांग्रेस के आंतरिक संघर्ष का प्रतीक थी।


17. कांग्रेस प्रणाली में गुटबाजी का क्या प्रभाव पड़ा?

गुटबाजी ने कांग्रेस को कमजोर किया। निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। नेताओं के बीच संघर्ष बढ़ा। इससे संगठनात्मक एकता टूट गई। 1967 और 1969 की घटनाओं में इसका प्रभाव स्पष्ट दिखा। गुटबाजी ने कांग्रेस प्रणाली के पतन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


18. कांग्रेस प्रणाली का पुनर्स्थापन कैसे हुआ?

1971 के चुनाव में कांग्रेस (आर) की जीत से प्रणाली का पुनर्स्थापन हुआ। इंदिरा गांधी के नेतृत्व ने पार्टी को मजबूत किया। लोकप्रिय नीतियों ने जनसमर्थन बढ़ाया। विपक्ष कमजोर हो गया। इस प्रकार कांग्रेस का प्रभुत्व फिर से स्थापित हुआ।


19. भारतीय राजनीति में 1967 का महत्व क्या है?

1967 भारतीय राजनीति का टर्निंग पॉइंट था। पहली बार कांग्रेस की एकाधिकार स्थिति टूटी। क्षेत्रीय दलों का उदय हुआ। विपक्षी राजनीति मजबूत हुई। यह बहुदलीय लोकतंत्र की शुरुआत थी।


20. कांग्रेस प्रणाली से क्या सीख मिलती है?

कांग्रेस प्रणाली से यह सीख मिलती है कि लोकतंत्र में एकदलीय प्रभुत्व स्थायी नहीं होता। आंतरिक लोकतंत्र और पारदर्शिता आवश्यक हैं। जनता की अपेक्षाओं को समझना जरूरी है। राजनीतिक स्थिरता के लिए संगठनात्मक एकता महत्वपूर्ण है।