नीचे CBSE Class 12 Political Science (Politics in India Since Independence)
Chapter 3 – “नियोजित विकास की राजनीति (Politics of Planned Development)” के लिए
20 महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर दिए गए हैं।


1. नियोजित विकास क्या है?

उत्तर:
नियोजित विकास का अर्थ है देश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए सरकार द्वारा एक निश्चित योजना के तहत कार्य करना। स्वतंत्रता के बाद भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था को अपनाया जिसमें सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्र शामिल थे। इसका उद्देश्य गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना था। इसके लिए पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत की गई, जिन्हें योजना आयोग तैयार करता था। नियोजित विकास में संसाधनों का सही उपयोग और संतुलित विकास सुनिश्चित किया जाता है।


2. योजना आयोग की स्थापना क्यों की गई?

उत्तर:
योजना आयोग की स्थापना 1950 में भारत के आर्थिक विकास की योजना बनाने के लिए की गई थी। इसका मुख्य कार्य देश के संसाधनों का उचित उपयोग करते हुए पंचवर्षीय योजनाएँ बनाना था। यह आयोग विकास के लक्ष्यों को तय करता था जैसे कृषि, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य का विकास। प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष होते थे। इसका उद्देश्य भारत में संतुलित और तीव्र आर्थिक विकास सुनिश्चित करना था। बाद में इसे नीति आयोग से बदल दिया गया।


3. भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था क्यों अपनाई?

उत्तर:
स्वतंत्रता के बाद भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था अपनाई क्योंकि केवल पूंजीवादी या समाजवादी मॉडल पर्याप्त नहीं थे। पूंजीवाद असमानता बढ़ाता है जबकि समाजवाद निजी पहल को सीमित करता है। इसलिए भारत ने दोनों का मिश्रण अपनाया जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र को आधारभूत उद्योगों की जिम्मेदारी दी गई और निजी क्षेत्र को भी विकास में भागीदारी मिली। इससे आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय दोनों को संतुलित किया जा सका।


4. बॉम्बे योजना क्या थी?

उत्तर:
बॉम्बे योजना 1944 में भारतीय उद्योगपतियों द्वारा तैयार की गई आर्थिक विकास की रूपरेखा थी। इसमें राज्य की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया गया और भारी उद्योगों के विकास की बात की गई। यह योजना स्वतंत्र भारत में नियोजित विकास की नींव रखने वाली अवधारणा मानी जाती है। इसमें यह सुझाव दिया गया कि सरकार को उद्योगों में निवेश करना चाहिए ताकि तेज आर्थिक विकास हो सके।


5. पंचवर्षीय योजना का उद्देश्य क्या था?

उत्तर:
पंचवर्षीय योजनाओं का उद्देश्य देश के आर्थिक और सामाजिक विकास को योजनाबद्ध तरीके से बढ़ाना था। इसमें कृषि उत्पादन बढ़ाना, औद्योगिक विकास करना, रोजगार सृजन करना और गरीबी कम करना शामिल था। हर योजना पाँच वर्षों के लिए बनाई जाती थी। इससे संसाधनों का संतुलित उपयोग और राष्ट्रीय विकास सुनिश्चित करने की कोशिश की गई।


6. प्रथम पंचवर्षीय योजना की मुख्य विशेषता क्या थी?

उत्तर:
प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56) मुख्य रूप से कृषि और सिंचाई पर केंद्रित थी। इसका उद्देश्य खाद्य उत्पादन बढ़ाना और अर्थव्यवस्था को स्थिर करना था। विभाजन के बाद खाद्यान्न संकट एक बड़ी समस्या थी, इसलिए कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई। इस योजना ने ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद की।


7. द्वितीय पंचवर्षीय योजना किस पर आधारित थी?

उत्तर:
द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-61) पी.सी. महालनोबिस मॉडल पर आधारित थी। इसमें भारी उद्योगों के विकास पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य भारत में औद्योगिक आधार मजबूत करना था। इस योजना ने सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों को बढ़ावा दिया और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया।


8. सार्वजनिक क्षेत्र का क्या महत्व था?

उत्तर:
सार्वजनिक क्षेत्र का महत्व भारत में नियोजित विकास के लिए बहुत अधिक था। इसे इस्पात, ऊर्जा, परिवहन और भारी उद्योगों के विकास की जिम्मेदारी दी गई। इसका उद्देश्य आर्थिक असमानता को कम करना और देश को आत्मनिर्भर बनाना था। यह क्षेत्र सरकार के नियंत्रण में रहता था और सामाजिक कल्याण को प्राथमिकता देता था।


9. निजी क्षेत्र की भूमिका क्या थी?

उत्तर:
निजी क्षेत्र को भारत में मिश्रित अर्थव्यवस्था के तहत सीमित लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका दी गई। यह उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन, छोटे उद्योगों और व्यापार में सक्रिय था। सरकार ने इसे नियंत्रण में रखते हुए विकास प्रक्रिया में शामिल किया। इससे रोजगार बढ़ा और आर्थिक विकास को गति मिली।


10. नियोजन में असहमति के मुख्य मुद्दे क्या थे?

उत्तर:
नियोजन को लेकर मुख्य असहमति कृषि और उद्योग के बीच प्राथमिकता को लेकर थी। कुछ नेता कृषि को अधिक महत्व देना चाहते थे जबकि कुछ उद्योगों के विकास को आवश्यक मानते थे। इसके अलावा निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका को लेकर भी मतभेद थे। यह बहस भारत की आर्थिक नीति को प्रभावित करती रही।


11. पी.सी. महालनोबिस का क्या योगदान था?

उत्तर:
पी.सी. महालनोबिस एक प्रसिद्ध भारतीय सांख्यिकीविद् थे जिन्होंने द्वितीय पंचवर्षीय योजना का मॉडल तैयार किया। उन्होंने भारी उद्योगों पर आधारित विकास का सुझाव दिया। उनका मानना था कि औद्योगिक विकास से ही दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति संभव है। उनका मॉडल भारतीय नियोजन प्रणाली का आधार बना।


12. हरित क्रांति क्या थी?

उत्तर:
हरित क्रांति 1960 के दशक में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए शुरू की गई तकनीकी और नीतिगत पहल थी। इसमें उच्च उपज वाले बीज, उर्वरक और सिंचाई तकनीक का उपयोग किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य खाद्यान्न आत्मनिर्भरता प्राप्त करना था। इससे गेहूं और चावल उत्पादन में वृद्धि हुई।


13. हरित क्रांति के लाभ क्या थे?

उत्तर:
हरित क्रांति से कृषि उत्पादन में भारी वृद्धि हुई और भारत खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बना। किसानों की आय में वृद्धि हुई और आधुनिक कृषि तकनीक का विकास हुआ। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। हालांकि इसके लाभ सभी क्षेत्रों में समान रूप से नहीं पहुँचे।


14. हरित क्रांति की सीमाएँ क्या थीं?

उत्तर:
हरित क्रांति के लाभ सीमित क्षेत्रों तक ही रहे, विशेषकर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में। छोटे किसानों को इसका पूरा लाभ नहीं मिला। इससे क्षेत्रीय असमानता बढ़ी। साथ ही रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरणीय समस्याएँ भी उत्पन्न हुईं।


15. भूमि सुधार का उद्देश्य क्या था?

उत्तर:
भूमि सुधार का उद्देश्य जमींदारी प्रथा को समाप्त करना और भूमि का समान वितरण करना था। इसका लक्ष्य किसानों को भूमि का अधिकार देना और कृषि उत्पादन बढ़ाना था। सरकार ने भूमि सीमा कानून लागू किया ताकि बड़े जमींदारों की भूमि सीमित की जा सके।


16. जमींदारी प्रथा का उन्मूलन क्यों किया गया?

उत्तर:
जमींदारी प्रथा को इसलिए समाप्त किया गया क्योंकि यह शोषणकारी थी और किसानों को आर्थिक रूप से कमजोर बनाती थी। इससे भूमि का असमान वितरण होता था। स्वतंत्र भारत में सामाजिक न्याय और समानता सुनिश्चित करने के लिए यह सुधार आवश्यक था।


17. भारत में विकास का मुख्य लक्ष्य क्या था?

उत्तर:
भारत में विकास का मुख्य लक्ष्य आर्थिक विकास के साथ सामाजिक न्याय प्राप्त करना था। इसमें गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन और समानता पर जोर दिया गया। सरकार ने योजनाबद्ध विकास के माध्यम से यह लक्ष्य प्राप्त करने का प्रयास किया।


18. विकास मॉडल पर बहस क्यों हुई?

उत्तर:
विकास मॉडल पर बहस इसलिए हुई क्योंकि अलग-अलग विचारधाराएँ थीं। कुछ नेता पूंजीवादी मॉडल के समर्थक थे जबकि कुछ समाजवादी मॉडल को बेहतर मानते थे। भारत ने दोनों का मिश्रण अपनाकर संतुलित विकास की कोशिश की।


19. नियोजित विकास की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या थीं?

उत्तर:
नियोजित विकास से भारत में औद्योगिक आधार मजबूत हुआ और कृषि उत्पादन बढ़ा। कई सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग स्थापित हुए। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सुधार हुआ। इससे आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रगति हुई।


20. नियोजित विकास की प्रमुख चुनौतियाँ क्या थीं?

उत्तर:
नियोजित विकास की मुख्य चुनौतियाँ गरीबी, बेरोजगारी और क्षेत्रीय असमानता थीं। कृषि और उद्योग के बीच असंतुलन भी बना रहा। सार्वजनिक क्षेत्र में दक्षता की कमी और भ्रष्टाचार भी समस्याएँ बनीं। इन चुनौतियों ने विकास की गति को प्रभावित किया।