नीचे CBSE कक्षा 12 राजनीतिक विज्ञान (समकालीन विश्व राजनीति), अध्याय 7 – वैश्वीकरण (Globalisation) के आधार पर 20 महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर दिए गए हैं। प्रत्येक उत्तर सरल, परीक्षा-उपयोगी भाषा में लिखा गया है।
1. वैश्वीकरण क्या है?
उत्तर:
वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें विश्व के विभिन्न देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी, विचारों और लोगों का तीव्र प्रवाह होता है। इसके कारण दुनिया एक “वैश्विक गांव” की तरह जुड़ जाती है। इसमें आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक तीनों आयाम शामिल होते हैं। वैश्वीकरण का मुख्य आधार तकनीकी विकास है, जिससे संचार और परिवहन आसान हुआ है। इससे देशों के बीच निर्भरता बढ़ी है। हालांकि, इसके लाभ समान रूप से वितरित नहीं हैं और विकासशील देशों पर इसका मिश्रित प्रभाव पड़ा है।
2. वैश्वीकरण के प्रमुख तत्व कौन-से हैं?
उत्तर:
वैश्वीकरण के चार प्रमुख तत्व हैं— वस्तुओं का प्रवाह, पूंजी का प्रवाह, लोगों का प्रवाह और विचारों का प्रवाह। इन चारों के माध्यम से विश्व के देश आपस में जुड़े रहते हैं। वस्तुएँ और सेवाएँ अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से पहुंचती हैं। पूंजी निवेश बहुराष्ट्रीय कंपनियों के माध्यम से होता है। लोग रोजगार और शिक्षा के लिए अन्य देशों में जाते हैं। विचार और सूचना इंटरनेट तथा मीडिया के जरिए फैलते हैं। ये सभी मिलकर वैश्वीकरण को गति प्रदान करते हैं।
3. वैश्वीकरण को बढ़ावा देने वाले कारण क्या हैं?
उत्तर:
वैश्वीकरण को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारण तकनीकी विकास, सूचना क्रांति और परिवहन व्यवस्था में सुधार हैं। इंटरनेट, मोबाइल और कंप्यूटर ने संचार को तेज किया है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) ने उत्पादन को वैश्विक स्तर पर फैलाया है। 1991 के बाद भारत जैसे देशों में उदारीकरण और निजीकरण ने भी इसे बढ़ावा दिया। विश्व व्यापार संगठन (WTO) ने मुक्त व्यापार को प्रोत्साहित किया। इन सभी कारणों ने देशों को आपस में अधिक निर्भर बना दिया है।
4. वैश्वीकरण के राजनीतिक प्रभाव क्या हैं?
उत्तर:
वैश्वीकरण के कारण राज्य की क्षमता में कमी आई है, जिसे “राज्य क्षमता का क्षरण” कहा जाता है। सरकारें अब आर्थिक नीतियों पर पूर्ण नियंत्रण नहीं रख पातीं। लेकिन दूसरी ओर तकनीक के कारण राज्य की निगरानी और सूचना एकत्र करने की क्षमता बढ़ी है। राज्य अभी भी कानून-व्यवस्था और सुरक्षा जैसे कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए वैश्वीकरण ने राज्य को पूरी तरह कमजोर नहीं किया, बल्कि उसकी भूमिका को बदला है।
5. आर्थिक वैश्वीकरण का क्या अर्थ है?
उत्तर:
आर्थिक वैश्वीकरण का अर्थ है देशों के बीच व्यापार, निवेश और पूंजी का मुक्त प्रवाह। इसमें बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। यह प्रक्रिया वैश्विक बाजार को बढ़ावा देती है और प्रतिस्पर्धा को बढ़ाती है। इससे उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प और बेहतर उत्पाद मिलते हैं। हालांकि, छोटे उद्योगों और मजदूरों पर इसका नकारात्मक प्रभाव भी पड़ता है। इसलिए इसके लाभ और हानियाँ दोनों हैं।
6. सांस्कृतिक वैश्वीकरण क्या है?
उत्तर:
सांस्कृतिक वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें विभिन्न देशों की संस्कृतियाँ एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं। इसके कारण “सांस्कृतिक समरूपीकरण” (homogenisation) और “सांस्कृतिक विविधता” दोनों देखने को मिलती हैं। पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव बढ़ा है, लेकिन स्थानीय संस्कृतियाँ भी नए रूप में उभर रही हैं। उदाहरण के लिए, भारतीय संस्कृति में पश्चिमी भोजन और फैशन का मिश्रण देखा जाता है। यह प्रक्रिया संस्कृति को अधिक वैश्विक और गतिशील बनाती है।
7. वैश्वीकरण का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
भारत पर वैश्वीकरण का मिश्रित प्रभाव पड़ा है। 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद विदेशी निवेश बढ़ा और उद्योगों का विकास हुआ। उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प और बेहतर उत्पाद मिले। लेकिन छोटे उद्योगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा। रोजगार के अवसर असमान रूप से बढ़े। कुछ क्षेत्रों में विकास हुआ, जबकि कुछ पीछे रह गए। इसलिए भारत में वैश्वीकरण के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों परिणाम देखे गए हैं।
8. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ क्या हैं?
उत्तर:
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs) वे कंपनियाँ होती हैं जो एक से अधिक देशों में अपने उत्पादन और व्यापार का संचालन करती हैं। इनका मुख्यालय किसी एक देश में होता है, लेकिन उत्पादन और बिक्री कई देशों में होती है। ये कंपनियाँ वैश्वीकरण का प्रमुख साधन हैं। ये विकासशील देशों में निवेश करती हैं क्योंकि वहाँ श्रम सस्ता होता है। उदाहरण के लिए, कोका-कोला और एप्पल जैसी कंपनियाँ वैश्विक स्तर पर कार्य करती हैं।
9. वैश्वीकरण का विरोध क्यों किया जाता है?
उत्तर:
वैश्वीकरण का विरोध इसलिए किया जाता है क्योंकि इससे आर्थिक असमानता बढ़ती है। गरीब देशों और छोटे उद्योगों को नुकसान होता है। सांस्कृतिक पहचान पर भी खतरा उत्पन्न होता है। कई लोग मानते हैं कि इससे केवल अमीर और बड़ी कंपनियों को लाभ होता है। पर्यावरणीय समस्याएँ भी बढ़ती हैं। इसलिए कई सामाजिक आंदोलन वैश्वीकरण के वर्तमान स्वरूप का विरोध करते हैं।
10. विश्व व्यापार संगठन (WTO) क्या है?
उत्तर:
विश्व व्यापार संगठन (WTO) एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो वैश्विक व्यापार को नियंत्रित और बढ़ावा देती है। इसका उद्देश्य देशों के बीच व्यापार बाधाओं को कम करना है। यह मुक्त व्यापार की नीति को प्रोत्साहित करता है। हालांकि, आलोचक मानते हैं कि यह विकसित देशों के पक्ष में अधिक काम करता है। WTO वैश्वीकरण की प्रक्रिया को संस्थागत रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
11. वैश्वीकरण और उदारीकरण में क्या अंतर है?
उत्तर:
उदारीकरण का अर्थ है सरकार द्वारा व्यापार और उद्योग पर लगे प्रतिबंधों को कम करना। जबकि वैश्वीकरण एक व्यापक प्रक्रिया है जिसमें देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंध बढ़ते हैं। उदारीकरण वैश्वीकरण का एक साधन है। 1991 के बाद भारत में उदारीकरण लागू हुआ, जिससे वैश्वीकरण को बढ़ावा मिला। इस प्रकार उदारीकरण नीति है और वैश्वीकरण उसका परिणाम।
12. वैश्वीकरण में तकनीक की भूमिका क्या है?
उत्तर:
तकनीक वैश्वीकरण का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। इंटरनेट, मोबाइल, कंप्यूटर और उपग्रह संचार ने दुनिया को जोड़ दिया है। इससे सूचना, विचार और पूंजी का आदान-प्रदान तेज हुआ है। परिवहन तकनीक ने वस्तुओं की आवाजाही आसान बनाई है। तकनीक के बिना वैश्वीकरण संभव नहीं था। यह प्रक्रिया विश्व को एकीकृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
13. सांस्कृतिक समरूपीकरण क्या है?
उत्तर:
सांस्कृतिक समरूपीकरण का अर्थ है जब एक प्रमुख संस्कृति अन्य संस्कृतियों पर हावी होकर उन्हें समान बना देती है। इसमें स्थानीय परंपराएँ कमजोर हो जाती हैं। उदाहरण के लिए, पश्चिमी भोजन और फैशन का बढ़ता प्रभाव। इसे वैश्वीकरण का नकारात्मक पहलू माना जाता है। हालांकि, कई बार यह सांस्कृतिक मिश्रण को भी बढ़ावा देता है।
14. वैश्वीकरण के सकारात्मक प्रभाव क्या हैं?
उत्तर:
वैश्वीकरण से व्यापार बढ़ा है और उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिले हैं। तकनीकी विकास तेज हुआ है। रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। विदेशी निवेश से अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। देशों के बीच सहयोग बढ़ा है। इससे जीवन स्तर में सुधार हुआ है।
15. वैश्वीकरण के नकारात्मक प्रभाव क्या हैं?
उत्तर:
वैश्वीकरण से आर्थिक असमानता बढ़ी है। छोटे उद्योग कमजोर हुए हैं। श्रमिकों की नौकरी असुरक्षित हुई है। पर्यावरण को नुकसान हुआ है। सांस्कृतिक पहचान पर भी प्रभाव पड़ा है। इसलिए इसके कई नकारात्मक पहलू भी हैं।
16. राज्य की भूमिका पर वैश्वीकरण का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
वैश्वीकरण के कारण राज्य की पारंपरिक भूमिका में बदलाव आया है। आर्थिक मामलों में राज्य का नियंत्रण कम हुआ है। लेकिन सुरक्षा और कानून-व्यवस्था में राज्य अभी भी मजबूत है। तकनीक ने राज्य की क्षमता को बढ़ाया भी है। इसलिए राज्य पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है।
17. वैश्वीकरण में लोगों के प्रवास का क्या महत्व है?
उत्तर:
लोगों का प्रवास वैश्वीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लोग रोजगार, शिक्षा और बेहतर जीवन के लिए अन्य देशों में जाते हैं। इससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान होता है। हालांकि, कई देशों में प्रवास पर प्रतिबंध भी होता है। यह वैश्वीकरण की सीमाओं को दर्शाता है।
18. वैश्वीकरण और असमानता में क्या संबंध है?
उत्तर:
वैश्वीकरण से आर्थिक विकास तो हुआ है, लेकिन इसका लाभ समान रूप से नहीं मिला। अमीर देश और बड़ी कंपनियाँ अधिक लाभान्वित हुई हैं। गरीब देशों और मजदूर वर्ग को कम लाभ मिला है। इससे सामाजिक और आर्थिक असमानता बढ़ी है। इसलिए यह एक प्रमुख आलोचना है।
19. भारत में 1991 के सुधारों का क्या महत्व है?
उत्तर:
1991 के आर्थिक सुधारों ने भारत में उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण को बढ़ावा दिया। विदेशी निवेश को अनुमति मिली। व्यापार नियमों को सरल बनाया गया। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक बाजार से जुड़ गई। यह भारत के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण मोड़ था।
20. वैश्वीकरण का भविष्य कैसा है?
उत्तर:
वैश्वीकरण का भविष्य तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर निर्भर करेगा। डिजिटल अर्थव्यवस्था और इंटरनेट इसका विस्तार बढ़ाएंगे। लेकिन असमानता और पर्यावरणीय चुनौतियाँ भी बनी रहेंगी। यदि इसे संतुलित रूप से लागू किया जाए तो यह सभी देशों के लिए लाभकारी हो सकता है। इसलिए “समान और न्यायपूर्ण वैश्वीकरण” आवश्यक है।
