CBSE कक्षा 12वीं भौतिकी (2026-27)

अध्याय 6 – विद्युतचुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction)

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

1. विद्युतचुंबकीय प्रेरण क्या है?

उत्तर:
विद्युतचुंबकीय प्रेरण वह घटना है जिसमें किसी चालक या कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होने पर उसमें विद्युत वाहक बल (EMF) या प्रेरित धारा उत्पन्न होती है। इस घटना की खोज माइकल फैराडे ने की थी। चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन चुंबक और कुंडली के बीच सापेक्ष गति, चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता में परिवर्तन अथवा कुंडली की स्थिति बदलने से हो सकता है। प्रेरित धारा केवल तब तक उत्पन्न होती है जब तक फ्लक्स में परिवर्तन होता रहता है। विद्युत जनित्र (Generator), ट्रांसफॉर्मर तथा अनेक विद्युत उपकरण इसी सिद्धांत पर कार्य करते हैं। यह घटना विद्युत और चुंबकत्व के गहरे संबंध को दर्शाती है।


2. फैराडे का प्रथम नियम लिखिए।

उत्तर:
फैराडे के प्रथम नियम के अनुसार, जब किसी बंद परिपथ से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो उस परिपथ में विद्युत वाहक बल (EMF) प्रेरित होता है। यदि परिपथ बंद हो, तो उसमें प्रेरित धारा भी प्रवाहित होती है। यह प्रेरित EMF तभी तक उत्पन्न होता है जब तक चुंबकीय फ्लक्स बदलता रहता है। चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन चुंबक और कुंडली की सापेक्ष गति या परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र के कारण हो सकता है। यह नियम विद्युतचुंबकीय प्रेरण की मूल शर्त बताता है तथा समझाता है कि स्थिर चुंबक के पास कुंडली में धारा क्यों नहीं उत्पन्न होती, जबकि गति करने पर धारा उत्पन्न हो जाती है।


3. फैराडे का द्वितीय नियम लिखिए।

उत्तर:
फैराडे के द्वितीय नियम के अनुसार, प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है। इसे गणितीय रूप में इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:

[
E = -N\frac{d\Phi}{dt}
]

जहाँ (E) प्रेरित EMF, (N) कुंडली के फेरों की संख्या तथा (\Phi) चुंबकीय फ्लक्स है। ऋणात्मक चिन्ह लेंज़ के नियम को दर्शाता है। यदि चुंबकीय फ्लक्स तेजी से परिवर्तित होता है, तो अधिक EMF उत्पन्न होता है। यह नियम जनित्रों और ट्रांसफॉर्मरों के कार्य सिद्धांत का आधार है, जहाँ परिवर्ती चुंबकीय फ्लक्स के कारण लगातार वोल्टेज उत्पन्न होता है।


4. चुंबकीय फ्लक्स क्या है?

उत्तर:
चुंबकीय फ्लक्स किसी सतह से गुजरने वाली कुल चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का माप है। इसे (\Phi) द्वारा व्यक्त किया जाता है तथा इसका सूत्र है:

[
\Phi = BA\cos\theta
]

जहाँ (B) चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता, (A) सतह का क्षेत्रफल तथा (\theta) चुंबकीय क्षेत्र और सतह के अभिलंब के बीच का कोण है। चुंबकीय फ्लक्स का SI मात्रक वेबर (Wb) है। जब चुंबकीय क्षेत्र सतह पर लंबवत पड़ता है, तब फ्लक्स अधिकतम होता है तथा समानांतर होने पर शून्य होता है। विद्युतचुंबकीय प्रेरण की प्रक्रिया चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन पर ही आधारित होती है।


5. लेंज़ का नियम क्या है?

उत्तर:
लेंज़ के नियम के अनुसार, प्रेरित धारा की दिशा सदैव ऐसी होती है कि वह उस कारण का विरोध करती है जिससे वह उत्पन्न हुई है। अर्थात् प्रेरित धारा द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र, चुंबकीय फ्लक्स में होने वाले परिवर्तन का विरोध करता है। यही कारण है कि फैराडे के नियम में ऋणात्मक चिन्ह प्रयुक्त किया जाता है। यह नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है। यदि प्रेरित धारा परिवर्तन का विरोध न करे, तो बिना किसी बाहरी कार्य के ऊर्जा उत्पन्न हो जाएगी, जो असंभव है। लेंज़ का नियम प्रेरित धारा की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


6. लेंज़ का नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का समर्थन कैसे करता है?

उत्तर:
जब किसी कुंडली की ओर चुंबक को ले जाया जाता है, तो कुंडली में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है। यह धारा ऐसा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है जो चुंबक की गति का विरोध करता है। इसलिए चुंबक को आगे बढ़ाने के लिए बाहरी कार्य करना पड़ता है। यह बाहरी यांत्रिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है। यदि प्रेरित धारा गति का विरोध न करे और उसकी सहायता करे, तो बिना कार्य किए ऊर्जा प्राप्त हो जाएगी, जो ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत के विरुद्ध है। इसलिए लेंज़ का नियम सुनिश्चित करता है कि ऊर्जा का केवल रूपांतरण हो, सृजन या विनाश नहीं।


7. प्रेरित विद्युत वाहक बल (Induced EMF) क्या है?

उत्तर:
जब किसी चालक या कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो उसमें उत्पन्न होने वाले विभवांतर को प्रेरित विद्युत वाहक बल (Induced EMF) कहते हैं। इसका मात्रक वोल्ट है। फैराडे के नियम के अनुसार, प्रेरित EMF चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर पर निर्भर करता है। जितनी तेजी से फ्लक्स बदलेगा, उतना अधिक EMF उत्पन्न होगा। प्रेरित EMF चुंबकीय क्षेत्र में चालक की गति अथवा परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र के कारण उत्पन्न हो सकता है। विद्युत जनित्र इसी सिद्धांत पर कार्य करते हैं और यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।


8. गतिज EMF (Motional EMF) क्या है?

उत्तर:
जब कोई चालक चुंबकीय क्षेत्र में गति करता है, तब उसमें उत्पन्न विद्युत वाहक बल को गतिज EMF कहते हैं। चालक के भीतर उपस्थित मुक्त इलेक्ट्रॉनों पर चुंबकीय बल कार्य करता है, जिससे चालक के सिरों पर विभवांतर उत्पन्न हो जाता है। इसका सूत्र है:

[
E = Blv
]

जहाँ (B) चुंबकीय क्षेत्र, (l) चालक की लंबाई तथा (v) उसकी गति है। गतिज EMF विद्युत जनित्रों के कार्य का आधार है। यह सिद्ध करता है कि यांत्रिक गति को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है। आधुनिक बिजली उत्पादन संयंत्र इसी सिद्धांत का उपयोग करते हैं।


9. स्व-प्रेरण (Self-Induction) क्या है?

उत्तर:
स्व-प्रेरण वह घटना है जिसमें किसी कुंडली में प्रवाहित धारा के परिवर्तन के कारण उसी कुंडली में विद्युत वाहक बल प्रेरित हो जाता है। धारा बदलने पर कुंडली द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र भी बदलता है, जिससे उससे संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है। परिणामस्वरूप प्रेरित EMF उत्पन्न होता है, जो धारा के परिवर्तन का विरोध करता है। इसे बैक EMF भी कहते हैं। स्व-प्रेरण के कारण परिपथ में धारा अचानक नहीं बदलती। इंडक्टर तथा चोक कॉइल जैसे उपकरण इसी सिद्धांत पर आधारित होते हैं।


10. स्व-प्रेरण गुणांक (Coefficient of Self-Induction) क्या है?

उत्तर:
स्व-प्रेरण गुणांक या प्रेरकत्व (Inductance) किसी कुंडली की वह क्षमता है जिससे वह धारा में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है। इसे (L) द्वारा दर्शाया जाता है। इसका संबंध निम्न सूत्र से दिया जाता है:

[
E = -L\frac{dI}{dt}
]

इसका SI मात्रक हेनरी (H) है। यदि किसी कुंडली में धारा के परिवर्तन की दर 1 एम्पियर प्रति सेकंड होने पर 1 वोल्ट का प्रेरित EMF उत्पन्न हो, तो उसका प्रेरकत्व 1 हेनरी कहलाता है। अधिक प्रेरकत्व वाली कुंडली धारा में परिवर्तन का अधिक विरोध करती है।


11. पारस्परिक प्रेरण (Mutual Induction) क्या है?

उत्तर:
पारस्परिक प्रेरण वह घटना है जिसमें एक कुंडली में धारा के परिवर्तन के कारण पास स्थित दूसरी कुंडली में EMF प्रेरित हो जाता है। पहली कुंडली में बदलती हुई धारा एक परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है, जिससे दूसरी कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है। परिणामस्वरूप दूसरी कुंडली में प्रेरित EMF उत्पन्न होता है। ट्रांसफॉर्मर का कार्य इसी सिद्धांत पर आधारित है। पारस्परिक प्रेरण कुंडलियों के फेरों की संख्या, उनके बीच की दूरी तथा कोर के पदार्थ पर निर्भर करती है।


12. पारस्परिक प्रेरण गुणांक क्या है?

उत्तर:
पारस्परिक प्रेरण गुणांक ((M)) दो कुंडलियों के बीच प्रेरण की क्षमता का माप है। यह वह प्रेरित EMF है जो दूसरी कुंडली में तब उत्पन्न होता है जब पहली कुंडली में धारा परिवर्तन की दर एकांक हो। इसका सूत्र है:

[
E = -M\frac{dI}{dt}
]

इसका SI मात्रक हेनरी (H) है। पारस्परिक प्रेरण गुणांक कुंडलियों के फेरों की संख्या, उनकी दूरी, व्यवस्था तथा कोर की चुंबकीय पारगम्यता पर निर्भर करता है। ट्रांसफॉर्मर में उच्च पारस्परिक प्रेरण ऊर्जा के कुशल स्थानांतरण में सहायक होता है।


13. इंडक्टर क्या है?

उत्तर:
इंडक्टर एक विद्युत अवयव है जो चुंबकीय क्षेत्र के रूप में ऊर्जा का संचय करता है। यह सामान्यतः ताँबे के तार की कुंडली से बना होता है। जब इसमें धारा प्रवाहित होती है, तो इसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। स्व-प्रेरण के कारण यह धारा में होने वाले परिवर्तन का विरोध करता है। इंडक्टर का उपयोग फिल्टर सर्किट, ट्यूनिंग सर्किट, ऊर्जा संचयन तथा धारा के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में किया जाता है। इसकी क्षमता प्रेरकत्व (Inductance) द्वारा मापी जाती है।


14. प्रेरित धारा केवल चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होने पर ही क्यों उत्पन्न होती है?

उत्तर:
फैराडे के नियम के अनुसार प्रेरित EMF चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर पर निर्भर करता है। यदि चुंबकीय फ्लक्स स्थिर है, तो उसमें कोई परिवर्तन नहीं होगा और परिणामस्वरूप कोई प्रेरित EMF उत्पन्न नहीं होगा। जब EMF ही नहीं होगा, तो धारा भी उत्पन्न नहीं होगी। यही कारण है कि स्थिर चुंबक के पास रखी कुंडली में धारा उत्पन्न नहीं होती, जबकि चुंबक को गति देने पर धारा उत्पन्न हो जाती है। इसलिए चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन विद्युतचुंबकीय प्रेरण की आवश्यक शर्त है।


15. प्रेरित EMF को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं?

उत्तर:
प्रेरित EMF कई कारकों पर निर्भर करता है। चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर जितनी अधिक होगी, प्रेरित EMF उतना अधिक होगा। कुंडली के फेरों की संख्या बढ़ाने से फ्लक्स लिंकिंग बढ़ती है, जिससे EMF भी बढ़ता है। अधिक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र अधिक फ्लक्स उत्पन्न करता है। चुंबक और कुंडली के बीच सापेक्ष गति बढ़ाने पर भी EMF बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त, कुंडली की दिशा और स्थिति भी फ्लक्स को प्रभावित करती है। इसलिए प्रेरित EMF बढ़ाने के लिए फ्लक्स परिवर्तन की दर को अधिकतम किया जाता है।


16. भंवर धाराएँ (Eddy Currents) क्या हैं?

उत्तर:
जब किसी धातु के ठोस चालक को परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उसमें बंद वृत्ताकार मार्गों में प्रेरित धाराएँ उत्पन्न होती हैं, जिन्हें भंवर धाराएँ कहते हैं। ये धाराएँ चालक को गर्म करती हैं और ऊर्जा हानि का कारण बनती हैं। ट्रांसफॉर्मरों और मोटरों में भंवर धाराओं के कारण ऊर्जा की हानि होती है। इन हानियों को कम करने के लिए लोहे के कोर को पतली-पतली परतों में विभाजित किया जाता है। भंवर धाराओं का उपयोग इंडक्शन भट्ठियों, विद्युत ब्रेक, स्पीडोमीटर तथा ऊर्जा मीटरों में किया जाता है।


17. विद्युतचुंबकीय प्रेरण के दो अनुप्रयोग लिखिए।

उत्तर:
विद्युतचुंबकीय प्रेरण के अनेक व्यावहारिक अनुप्रयोग हैं। पहला प्रमुख अनुप्रयोग विद्युत जनित्र (Generator) है, जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है। दूसरा महत्वपूर्ण अनुप्रयोग ट्रांसफॉर्मर है, जो विद्युत ऊर्जा को एक परिपथ से दूसरे परिपथ में स्थानांतरित करता है तथा वोल्टेज को बढ़ाने या घटाने का कार्य करता है। इसके अतिरिक्त इंडक्शन कुकर, माइक्रोफोन, वायरलेस चार्जिंग, धातु खोजक (Metal Detector) और साइकिल डायनेमो भी इसी सिद्धांत पर आधारित हैं। आधुनिक विद्युत तकनीक में इसका अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।


18. विद्युतचुंबकीय प्रेरण के प्रयोगों में गैल्वेनोमीटर का उपयोग क्यों किया जाता है?

उत्तर:
गैल्वेनोमीटर एक अत्यंत संवेदनशील उपकरण है, जिसका उपयोग बहुत छोटी विद्युत धाराओं का पता लगाने के लिए किया जाता है। विद्युतचुंबकीय प्रेरण के प्रयोगों में उत्पन्न धारा अक्सर बहुत कम होती है, जिसे सामान्य उपकरणों से मापना कठिन होता है। गैल्वेनोमीटर का सूचक प्रेरित धारा की उपस्थिति और दिशा दोनों को दर्शाता है। इसकी सहायता से यह सिद्ध किया जा सकता है कि धारा केवल चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होने पर ही उत्पन्न होती है। इसलिए विद्युतचुंबकीय प्रेरण के अध्ययन में गैल्वेनोमीटर का विशेष महत्व है।


19. चुंबकीय फ्लक्स का SI मात्रक क्या है? इसकी परिभाषा दीजिए।

उत्तर:
चुंबकीय फ्लक्स का SI मात्रक वेबर (Weber, Wb) है। एक वेबर वह चुंबकीय फ्लक्स है, जो एक फेरे वाली कुंडली में एक सेकंड में शून्य हो जाने पर 1 वोल्ट का प्रेरित EMF उत्पन्न करे। इसे गणितीय रूप से इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:

[
1,Wb = 1,T \times 1,m^2
]

जहाँ टेस्ला (T) चुंबकीय क्षेत्र का SI मात्रक है। चुंबकीय फ्लक्स विद्युतचुंबकीय प्रेरण का मुख्य आधार है क्योंकि प्रेरित EMF इसकी परिवर्तन दर पर निर्भर करता है।


20. स्व-प्रेरण और पारस्परिक प्रेरण में अंतर लिखिए।

उत्तर:
स्व-प्रेरण में किसी कुंडली में धारा के परिवर्तन के कारण उसी कुंडली में EMF प्रेरित होता है। इसके विपरीत, पारस्परिक प्रेरण में एक कुंडली में धारा परिवर्तन के कारण दूसरी निकटवर्ती कुंडली में EMF उत्पन्न होता है। स्व-प्रेरण में केवल एक कुंडली शामिल होती है, जबकि पारस्परिक प्रेरण में दो कुंडलियाँ आवश्यक होती हैं। स्व-प्रेरण का उपयोग इंडक्टर और चोक कॉइल में किया जाता है, जबकि पारस्परिक प्रेरण ट्रांसफॉर्मर का आधार है। दोनों घटनाएँ फैराडे के नियम और चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन पर आधारित हैं, लेकिन उनके अनुप्रयोग और संरचना भिन्न होते हैं।