CBSE कक्षा 12 भौतिकी (2026–27)

अध्याय 5 : चुंबकत्व तथा पदार्थ (Magnetism and Matter)

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

1. चुंबकीय द्विध्रुव (Magnetic Dipole) क्या है? चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण की परिभाषा दीजिए।

उत्तर:
चुंबकीय द्विध्रुव दो समान एवं विपरीत चुंबकीय ध्रुवों का ऐसा युग्म है जो एक निश्चित दूरी से अलग होते हैं। एक दण्ड चुंबक इसका सामान्य उदाहरण है। चुंबकीय द्विध्रुव की शक्ति को उसके चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण (Magnetic Dipole Moment) द्वारा व्यक्त किया जाता है। यह ध्रुव प्रबलता (m) तथा चुंबकीय लंबाई (2l) के गुणनफल के बराबर होता है।

[
M = m(2l)
]

इसका SI मात्रक एम्पियर-मीटर² (A·m²) है। किसी बाहरी चुंबकीय क्षेत्र में चुंबक पर लगने वाला बलाघूर्ण इसी पर निर्भर करता है। अधिक द्विध्रुव आघूर्ण वाला चुंबक अधिक प्रभावी चुंबकीय गुण प्रदर्शित करता है।


2. चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुण लिखिए।

उत्तर:
चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ काल्पनिक रेखाएँ हैं जो चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और तीव्रता को दर्शाती हैं। ये चुंबक के बाहर उत्तर ध्रुव से निकलकर दक्षिण ध्रुव में प्रवेश करती हैं तथा चुंबक के भीतर दक्षिण से उत्तर की ओर जाती हैं, जिससे बंद वक्र बनता है। दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं क्योंकि किसी बिंदु पर क्षेत्र की दिशा एक ही होती है। जहाँ रेखाएँ अधिक सघन होती हैं वहाँ चुंबकीय क्षेत्र अधिक प्रबल होता है। किसी बिंदु पर क्षेत्र रेखा की स्पर्शरेखा उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताती है।


3. चुंबकीय एकध्रुव (Magnetic Monopole) क्यों नहीं पाए जाते?

उत्तर:
चुंबकीय एकध्रुव ऐसे काल्पनिक कण हैं जिनमें केवल उत्तर या केवल दक्षिण ध्रुव हो। अब तक के सभी प्रयोगों में यह पाया गया है कि चुंबकीय ध्रुव सदैव युग्म में पाए जाते हैं। यदि किसी दण्ड चुंबक को दो भागों में काट दिया जाए तो प्रत्येक भाग स्वयं एक नया चुंबक बन जाता है जिसमें उत्तर और दक्षिण दोनों ध्रुव उपस्थित रहते हैं। बार-बार काटने पर भी पृथक ध्रुव प्राप्त नहीं होते। चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ सदैव बंद लूप बनाती हैं, जो इस तथ्य का समर्थन करती हैं। इसलिए प्रकृति में स्वतंत्र चुंबकीय एकध्रुवों का अस्तित्व नहीं पाया गया है।


4. पृथ्वी को एक विशाल चुंबक क्यों माना जाता है?

उत्तर:
पृथ्वी एक विशाल चुंबक की भाँति व्यवहार करती है क्योंकि इसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र विद्यमान है। पृथ्वी का चुंबकीय दक्षिण ध्रुव भौगोलिक उत्तर ध्रुव के निकट तथा चुंबकीय उत्तर ध्रुव भौगोलिक दक्षिण ध्रुव के निकट स्थित है। इसी कारण स्वतंत्र रूप से लटकी चुंबकीय सुई उत्तर-दक्षिण दिशा में स्थिर हो जाती है। पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र उसके द्रवित लौह कोर में उत्पन्न विद्युत धाराओं के कारण माना जाता है। यह क्षेत्र अंतरिक्ष से आने वाले आवेशित कणों से पृथ्वी की रक्षा करता है तथा दिशा-निर्धारण और नौवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


5. चुंबकीय दिक्पात (Magnetic Declination) क्या है?

उत्तर:
किसी स्थान पर भौगोलिक याम्योत्तर (Geographical Meridian) और चुंबकीय याम्योत्तर (Magnetic Meridian) के बीच बनने वाले कोण को चुंबकीय दिक्पात कहते हैं। भौगोलिक याम्योत्तर भौगोलिक उत्तर-दक्षिण ध्रुवों से होकर गुजरता है, जबकि चुंबकीय याम्योत्तर वह दिशा है जिसमें स्वतंत्र रूप से लटकी चुंबकीय सुई स्थिर होती है। चूँकि पृथ्वी के चुंबकीय और भौगोलिक ध्रुव एक ही स्थान पर नहीं होते, इसलिए दोनों दिशाओं में अंतर होता है। दिक्पात का मान स्थान और समय के अनुसार बदलता रहता है। इसका उपयोग नौवहन, मानचित्रण तथा सर्वेक्षण कार्यों में किया जाता है।


6. नति कोण (Angle of Dip) क्या है?

उत्तर:
पृथ्वी के कुल चुंबकीय क्षेत्र तथा क्षैतिज तल के बीच बनने वाले कोण को नति कोण या चुंबकीय झुकाव कहते हैं। इसे θ द्वारा दर्शाया जाता है। यदि कोई चुंबकीय सुई ऊर्ध्वाधर तल में स्वतंत्र रूप से घूम सके तो वह पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में स्थिर होकर क्षैतिज के साथ एक कोण बनाती है, जिसे नति कोण कहते हैं। चुंबकीय विषुवत रेखा पर इसका मान 0° तथा चुंबकीय ध्रुवों पर 90° होता है। यह विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर बढ़ने पर धीरे-धीरे बढ़ता जाता है।


7. चुंबकीय प्रवृत्ति (Magnetic Susceptibility) क्या है?

उत्तर:
किसी पदार्थ की बाहरी चुंबकीय क्षेत्र में चुंबकित होने की क्षमता को चुंबकीय प्रवृत्ति कहते हैं। इसे χ (काई) से दर्शाया जाता है। यह चुंबकीकरण की तीव्रता (M) तथा चुंबकीय क्षेत्र तीव्रता (H) के अनुपात के बराबर होती है।

[
\chi = \frac{M}{H}
]

यह एक विमाहीन राशि है। धनात्मक प्रवृत्ति वाले पदार्थ जैसे अनुचुंबकीय और लौहचुंबकीय पदार्थ चुंबकीय क्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैं। ऋणात्मक प्रवृत्ति वाले पदार्थ जैसे प्रतिचुंबकीय पदार्थ चुंबकीय क्षेत्र से दूर हटते हैं। इसकी सहायता से पदार्थों के चुंबकीय गुणों का अध्ययन किया जाता है।


8. प्रतिचुंबकीय और अनुचुंबकीय पदार्थों में अंतर बताइए।

उत्तर:
प्रतिचुंबकीय पदार्थ बाहरी चुंबकीय क्षेत्र द्वारा कमजोर रूप से प्रतिकर्षित होते हैं, जबकि अनुचुंबकीय पदार्थ कमजोर रूप से आकर्षित होते हैं। प्रतिचुंबकीय पदार्थों की चुंबकीय प्रवृत्ति ऋणात्मक होती है तथा उनकी सापेक्ष पारगम्यता एक से कम होती है। बिस्मथ, ताँबा और चाँदी इसके उदाहरण हैं। अनुचुंबकीय पदार्थों की चुंबकीय प्रवृत्ति धनात्मक होती है तथा सापेक्ष पारगम्यता एक से थोड़ी अधिक होती है। एल्यूमिनियम, प्लैटिनम और ऑक्सीजन इसके उदाहरण हैं। दोनों पदार्थों का व्यवहार चुंबकीय क्षेत्र में भिन्न होता है।


9. लौहचुंबकीय पदार्थ क्या हैं? उदाहरण दीजिए।

उत्तर:
लौहचुंबकीय पदार्थ वे पदार्थ हैं जो चुंबकीय क्षेत्र द्वारा अत्यधिक आकर्षित होते हैं तथा चुंबकित होने के बाद लंबे समय तक अपना चुंबकत्व बनाए रख सकते हैं। इनमें उपस्थित परमाणुओं के चुंबकीय आघूर्ण छोटे-छोटे क्षेत्रों (Domains) में एक ही दिशा में व्यवस्थित होते हैं। बाहरी चुंबकीय क्षेत्र लगाने पर ये डोमेन एक दिशा में संरेखित हो जाते हैं जिससे प्रबल चुंबकीकरण उत्पन्न होता है। लौह, कोबाल्ट और निकेल इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इनका उपयोग स्थायी चुंबकों, ट्रांसफॉर्मरों, जनरेटरों और विद्युत मोटरों में किया जाता है।


10. चुंबकीय डोमेन क्या हैं?

उत्तर:
लौहचुंबकीय पदार्थों के भीतर उपस्थित सूक्ष्म क्षेत्रों को चुंबकीय डोमेन कहते हैं। प्रत्येक डोमेन में परमाणुओं के चुंबकीय आघूर्ण एक ही दिशा में व्यवस्थित रहते हैं। बिना चुंबकित पदार्थ में ये डोमेन विभिन्न दिशाओं में व्यवस्थित होते हैं, जिससे कुल चुंबकीय प्रभाव शून्य होता है। जब बाहरी चुंबकीय क्षेत्र लगाया जाता है, तो समान दिशा वाले डोमेन बड़े हो जाते हैं और पदार्थ चुंबकित हो जाता है। डोमेन सिद्धांत लौहचुंबकीय पदार्थों के प्रबल चुंबकीय गुणों की व्याख्या करता है तथा स्थायी चुंबकों के निर्माण को समझने में सहायता करता है।


11. चुंबकीकरण की तीव्रता (Intensity of Magnetization) क्या है?

उत्तर:
किसी पदार्थ के प्रति इकाई आयतन में उत्पन्न चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण को चुंबकीकरण की तीव्रता कहते हैं। इसे M द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

[
M = \frac{\text{चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण}}{\text{आयतन}}
]

इसका SI मात्रक एम्पियर प्रति मीटर (A/m) है। यह बताती है कि बाहरी चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव से पदार्थ किस सीमा तक चुंबकित हुआ है। चुंबकीकरण की तीव्रता का मान जितना अधिक होगा, पदार्थ का चुंबकीय प्रभाव उतना ही अधिक होगा। यह चुंबकीय प्रवृत्ति से संबंधित एक महत्वपूर्ण राशि है।


12. सापेक्ष पारगम्यता (Relative Permeability) क्या है?

उत्तर:
किसी पदार्थ की पारगम्यता तथा निर्वात की पारगम्यता के अनुपात को सापेक्ष पारगम्यता कहते हैं। इसे μr द्वारा दर्शाया जाता है।

[
\mu_r = \frac{\mu}{\mu_0}
]

यह एक विमाहीन राशि है। यह बताती है कि चुंबकीय क्षेत्र किसी पदार्थ में निर्वात की तुलना में कितनी आसानी से प्रवेश कर सकता है। प्रतिचुंबकीय पदार्थों के लिए इसका मान एक से कम तथा अनुचुंबकीय पदार्थों के लिए एक से थोड़ा अधिक होता है। लौहचुंबकीय पदार्थों के लिए इसका मान बहुत अधिक होता है। इसका उपयोग चुंबकीय परिपथों और विद्युत उपकरणों के निर्माण में किया जाता है।


13. कंपास की सुई उत्तर-दक्षिण दिशा में क्यों स्थिर होती है?

उत्तर:
कंपास की सुई एक छोटा दण्ड चुंबक होती है जो क्षैतिज तल में स्वतंत्र रूप से घूम सकती है। पृथ्वी एक विशाल चुंबक की तरह कार्य करती है और उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उपस्थित रहता है। जब कंपास को किसी स्थान पर रखा जाता है, तो पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र सुई पर बलाघूर्ण लगाता है। परिणामस्वरूप सुई चुंबकीय याम्योत्तर की दिशा में स्थिर हो जाती है। इस कारण कंपास की सुई लगभग उत्तर-दक्षिण दिशा दर्शाती है। यही सिद्धांत नौवहन और दिशा-निर्धारण में कंपास के उपयोग का आधार है।


14. चुंबकीय ध्रुवों के लिए कूलॉम का नियम लिखिए।

उत्तर:
कूलॉम का चुंबकीय नियम कहता है कि दो चुंबकीय ध्रुवों के बीच लगने वाला बल उनके ध्रुव प्रबलताओं के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

[
F=\frac{\mu_0}{4\pi}\frac{m_1m_2}{r^2}
]

जहाँ m₁ और m₂ ध्रुव प्रबलताएँ तथा r उनके बीच की दूरी है। समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं तथा असमान ध्रुव आकर्षित करते हैं। यह नियम वैद्युत स्थैतिकी के कूलॉम नियम के समान है और चुंबकीय बलों के अध्ययन का आधार प्रदान करता है।


15. चुंबकीय याम्योत्तर (Magnetic Meridian) क्या है?

उत्तर:
किसी स्थान पर वह ऊर्ध्वाधर तल जो पृथ्वी के चुंबकीय उत्तर और दक्षिण ध्रुवों से होकर गुजरता है, चुंबकीय याम्योत्तर कहलाता है। एक स्वतंत्र रूप से लटकी चुंबकीय सुई इसी तल में स्थिर होती है। चुंबकीय याम्योत्तर और भौगोलिक याम्योत्तर सामान्यतः एक-दूसरे से भिन्न होते हैं क्योंकि पृथ्वी के चुंबकीय और भौगोलिक ध्रुव अलग-अलग स्थानों पर स्थित हैं। दिशा-निर्धारण तथा कंपास के कार्य करने में चुंबकीय याम्योत्तर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।


16. चुंबकीय प्रवृत्ति और सापेक्ष पारगम्यता में क्या संबंध है?

उत्तर:
चुंबकीय प्रवृत्ति (χ) और सापेक्ष पारगम्यता (μr) के बीच निम्न संबंध होता है—

[
\mu_r = 1 + \chi
]

यदि किसी पदार्थ की चुंबकीय प्रवृत्ति धनात्मक है तो उसकी सापेक्ष पारगम्यता एक से अधिक होगी। यदि प्रवृत्ति ऋणात्मक है तो सापेक्ष पारगम्यता एक से कम होगी। लौहचुंबकीय पदार्थों में प्रवृत्ति का मान बहुत अधिक होने के कारण उनकी सापेक्ष पारगम्यता भी बहुत अधिक होती है। यह संबंध पदार्थों के चुंबकीय गुणों को समझने में अत्यंत उपयोगी है।


17. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद वक्र क्यों होती हैं?

उत्तर:
चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद वक्र बनाती हैं क्योंकि चुंबकीय ध्रुव सदैव युग्म में पाए जाते हैं। चुंबक के बाहर क्षेत्र रेखाएँ उत्तर ध्रुव से निकलकर दक्षिण ध्रुव में प्रवेश करती हैं, जबकि चुंबक के भीतर दक्षिण से उत्तर की ओर जाती हैं। इस प्रकार वे एक पूर्ण बंद लूप बनाती हैं। चूँकि स्वतंत्र चुंबकीय एकध्रुव अस्तित्व में नहीं हैं, इसलिए चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कहीं से शुरू या समाप्त नहीं होतीं। यह चुंबकीय क्षेत्र की निरंतरता को दर्शाती हैं।


18. चुंबकीय पारगम्यता (Magnetic Permeability) क्या है?

उत्तर:
चुंबकीय पारगम्यता किसी पदार्थ का वह गुण है जो यह बताता है कि चुंबकीय क्षेत्र उस पदार्थ में कितनी आसानी से स्थापित हो सकता है। इसे μ द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

[
\mu = \frac{B}{H}
]

जहाँ B चुंबकीय फ्लक्स घनत्व तथा H चुंबकीय क्षेत्र तीव्रता है। इसका SI मात्रक हेनरी प्रति मीटर (H/m) है। अधिक पारगम्यता वाले पदार्थ चुंबकीय क्षेत्र को अधिक आसानी से प्रवाहित करते हैं। लौहचुंबकीय पदार्थों की पारगम्यता बहुत अधिक होती है, इसलिए उनका उपयोग विद्युत मशीनों और ट्रांसफॉर्मरों में किया जाता है।


19. चुंबकीय विषुवत रेखा (Magnetic Equator) का महत्व बताइए।

उत्तर:
पृथ्वी की सतह पर वह काल्पनिक रेखा जहाँ नति कोण का मान शून्य होता है, चुंबकीय विषुवत रेखा कहलाती है। इस रेखा पर पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र पूर्णतः क्षैतिज होता है। यहाँ रखी गई डिप सुई क्षैतिज स्थिति में रहती है क्योंकि चुंबकीय क्षेत्र का ऊर्ध्वाधर घटक शून्य होता है। चुंबकीय विषुवत रेखा भौगोलिक विषुवत रेखा से पूर्णतः नहीं मिलती। यह पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के अध्ययन और भू-चुंबकत्व की समझ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


20. चुंबकीय ध्रुव और भौगोलिक ध्रुवों में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
भौगोलिक ध्रुव वे बिंदु हैं जहाँ पृथ्वी की घूर्णन अक्ष उसकी सतह को काटती है। ये वास्तविक उत्तर और दक्षिण दिशा निर्धारित करते हैं। दूसरी ओर, चुंबकीय ध्रुव वे स्थान हैं जहाँ पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र सबसे अधिक प्रबल होता है। चुंबकीय ध्रुवों की स्थिति समय के साथ बदलती रहती है जबकि भौगोलिक ध्रुव लगभग स्थिर रहते हैं। कंपास चुंबकीय ध्रुवों की दिशा दर्शाता है, जबकि मानचित्र भौगोलिक ध्रुवों पर आधारित होते हैं। दोनों के बीच अंतर के कारण चुंबकीय दिक्पात उत्पन्न होता है।