CBSE कक्षा 12 इतिहास (2026–27)

अध्याय 1 – ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ (Bricks, Beads and Bones)

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

हड़प्पा सभ्यता भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीन नगरीय सभ्यता थी, जो लगभग 2600–1900 ईसा पूर्व के बीच विकसित हुई। इसकी पहचान सुव्यवस्थित नगरों, जल निकासी व्यवस्था, व्यापार, शिल्प उत्पादन और पुरातात्त्विक अवशेषों से होती है।


1. हड़प्पा सभ्यता की खोज कैसे हुई?

उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता की खोज 1921 ई. में दयाराम साहनी द्वारा हड़प्पा स्थल की खुदाई के दौरान हुई। इसके बाद 1922 ई. में राखालदास बनर्जी ने मोहनजोदड़ो की खोज की। पुरातत्व विभाग के महानिदेशक जॉन मार्शल ने 1924 में विश्व के सामने इस सभ्यता की घोषणा की। प्रारम्भ में अलेक्ज़ेंडर कनिंघम इन अवशेषों का महत्व नहीं समझ पाए थे। बाद की खुदाइयों से स्पष्ट हुआ कि यह एक अत्यंत विकसित नगरीय सभ्यता थी। इस खोज ने भारतीय इतिहास को नई दिशा दी और यह सिद्ध किया कि भारत में भी प्राचीन नगर सभ्यता विकसित थी।


2. हड़प्पा सभ्यता को ‘नगरीय सभ्यता’ क्यों कहा जाता है?

उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता को नगरीय सभ्यता इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके नगर सुव्यवस्थित योजना के अनुसार बनाए गए थे। सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं तथा जल निकासी की उन्नत व्यवस्था थी। नगरों को प्रायः दुर्ग क्षेत्र और निचले नगर में विभाजित किया गया था। पक्की ईंटों से बने मकान, सार्वजनिक भवन, कुएँ तथा गोदाम इसकी विशेषताएँ थीं। व्यापार, शिल्प उत्पादन और प्रशासनिक संगठन भी विकसित थे। इन सभी विशेषताओं से स्पष्ट होता है कि हड़प्पा समाज एक उन्नत शहरी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता था।


3. मोहनजोदड़ो के महान स्नानागार का महत्व बताइए।

उत्तर:
महान स्नानागार मोहनजोदड़ो की सबसे प्रसिद्ध सार्वजनिक इमारत थी। यह पक्की ईंटों से निर्मित एक बड़ा जलकुंड था, जिसके चारों ओर कमरे और बरामदे बने थे। इसमें जल भरने और निकालने की विशेष व्यवस्था थी। इतिहासकारों का मानना है कि इसका उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों या सामूहिक स्नान के लिए किया जाता होगा। इसकी सुदृढ़ संरचना और जलरोधक व्यवस्था हड़प्पावासियों की इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाती है। महान स्नानागार हड़प्पा सभ्यता के सामाजिक एवं धार्मिक जीवन की महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत करता है।


4. हड़प्पा सभ्यता की जल निकासी व्यवस्था की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता की जल निकासी व्यवस्था विश्व की प्राचीनतम और सर्वश्रेष्ठ व्यवस्थाओं में से एक थी। प्रत्येक घर से निकलने वाला गंदा पानी ढकी हुई नालियों द्वारा मुख्य नालियों तक पहुँचाया जाता था। नालियाँ पक्की ईंटों से बनी थीं और उनकी नियमित सफाई की व्यवस्था भी थी। सड़कों के किनारे नालियाँ बनाई गई थीं तथा अधिकांश घरों में स्नानघर और कुएँ थे। यह व्यवस्था नगरवासियों के स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति उनकी जागरूकता को दर्शाती है। इससे उनकी उन्नत नगर योजना का भी पता चलता है।


5. हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख कृषि उत्पाद कौन-कौन से थे?

उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित थी। यहाँ गेहूँ, जौ, दालें, तिल, बाजरा तथा कपास की खेती की जाती थी। कपास की खेती करने वाली यह विश्व की प्रारम्भिक सभ्यताओं में से एक थी। किसान बैलों द्वारा हल चलाते थे तथा नदियों और वर्षा के जल का उपयोग सिंचाई के लिए करते थे। कृषि उत्पादन के कारण नगरों को खाद्यान्न उपलब्ध होता था और व्यापार को भी बढ़ावा मिलता था। कृषि के साथ पशुपालन भी महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि थी।


6. हड़प्पा सभ्यता में पशुपालन का क्या महत्व था?

उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता में कृषि के साथ पशुपालन भी महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि थी। पुरातात्त्विक साक्ष्यों से पता चलता है कि लोग गाय, बैल, भैंस, भेड़, बकरी और सूअर पालते थे। बैलों का उपयोग खेती और परिवहन में किया जाता था। पशुओं से दूध, मांस और अन्य उपयोगी वस्तुएँ प्राप्त होती थीं। पशुपालन से कृषि कार्यों में सहायता मिलती थी और लोगों की आजीविका मजबूत होती थी। पशुओं की हड्डियों और चित्रों से उनके महत्व का प्रमाण मिलता है।


7. हड़प्पा सभ्यता के व्यापार की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता का व्यापार अत्यंत विकसित था। व्यापारी मनकों, धातुओं, आभूषणों, कपास और मिट्टी के बर्तनों का व्यापार करते थे। मेसोपोटामिया के साथ उनके व्यापारिक संबंधों के प्रमाण मिले हैं, जहाँ हड़प्पा क्षेत्र को ‘मेलुहा’ कहा गया है। व्यापार में मानकीकृत बाटों और मापों का प्रयोग किया जाता था। स्थल और जल दोनों मार्गों से व्यापार होता था। लोथल जैसे बंदरगाह व्यापारिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र थे। यह व्यापार हड़प्पा सभ्यता की समृद्धि का आधार था।


8. हड़प्पा सभ्यता में मनकों का क्या महत्व था?

उत्तर:
मनके हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख शिल्प उत्पाद थे। इन्हें कार्नेलियन, लैपिस लाजुली, शंख और अन्य बहुमूल्य पत्थरों से बनाया जाता था। चन्हूदड़ो और लोथल मनका निर्माण के प्रमुख केंद्र थे। मनकों का उपयोग आभूषणों तथा व्यापारिक वस्तुओं के रूप में किया जाता था। इनकी सुंदरता और गुणवत्ता हड़प्पावासियों की शिल्पकला में दक्षता को दर्शाती है। मनकों के माध्यम से दूर-दराज क्षेत्रों के साथ व्यापारिक संबंध भी स्थापित होते थे।


9. हड़प्पा मुहरों की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर:
हड़प्पा मुहरें प्रायः स्टियाटाइट पत्थर से बनाई जाती थीं। इन पर विभिन्न पशुओं जैसे एक-सींग वाले पशु, बैल और हाथी के चित्र अंकित होते थे। मुहरों पर लिपि के चिह्न भी पाए जाते हैं। इतिहासकारों का मानना है कि इनका उपयोग व्यापार, पहचान और प्रशासनिक कार्यों में होता था। मुहरें हड़प्पा कला, धर्म और आर्थिक जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती हैं। ये पुरातत्वविदों के लिए सभ्यता के अध्ययन का प्रमुख स्रोत हैं।


10. हड़प्पा लिपि को रहस्यमयी क्यों कहा जाता है?

उत्तर:
हड़प्पा लिपि को रहस्यमयी इसलिए कहा जाता है क्योंकि आज तक इसे पढ़ा नहीं जा सका है। यह लिपि मुख्यतः मुहरों, ताम्र-पत्रों और अन्य वस्तुओं पर अंकित मिली है। अधिकांश लेख बहुत छोटे हैं, जिनमें केवल कुछ ही चिह्न होते हैं। किसी द्विभाषी अभिलेख की अनुपस्थिति के कारण विद्वान इसका अर्थ समझने में सफल नहीं हो पाए हैं। लिपि के अपठित रहने से हड़प्पा सभ्यता के प्रशासन, धर्म और समाज के बारे में कई प्रश्न अनुत्तरित हैं।


11–20. अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

11. कालीबंगन का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
कालीबंगन से जुते हुए खेतों के प्रमाण मिले हैं, जो हड़प्पा कृषि तकनीक को दर्शाते हैं।

12. लोथल को महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र क्यों माना जाता है?
लोथल में गोदी (Dockyard) मिली है, जो समुद्री व्यापार का प्रमाण है।

13. धौलावीरा की विशेषताएँ बताइए।
धौलावीरा जल संरक्षण प्रणाली और विशाल जलाशयों के लिए प्रसिद्ध है।

14. हड़प्पा सभ्यता में सामाजिक भिन्नताओं का पता कैसे चलता है?
मकानों के आकार और कब्रों में मिली वस्तुओं से सामाजिक अंतर ज्ञात होते हैं।

15. पुरातत्वविद अतीत का पुनर्निर्माण कैसे करते हैं?
वे अवशेषों, हड्डियों, बर्तनों, मुहरों और भवनों के अध्ययन से निष्कर्ष निकालते हैं।

16. हड़प्पा सभ्यता के पतन के प्रमुख कारण क्या माने जाते हैं?
जलवायु परिवर्तन, नदियों का मार्ग बदलना और आर्थिक गिरावट प्रमुख कारण माने जाते हैं।

17. हड़प्पा सभ्यता में शिल्प उत्पादन का महत्व क्या था?
शिल्प उद्योग व्यापार और आर्थिक समृद्धि का मुख्य आधार था।

18. हड़प्पा सभ्यता में मानकीकृत बाटों का महत्व क्या था?
इनसे व्यापार में समानता और निष्पक्षता बनी रहती थी।

19. कब्रों से इतिहासकारों को क्या जानकारी मिलती है?
कब्रों से सामाजिक स्थिति, धार्मिक विश्वास और जीवन शैली की जानकारी मिलती है।

20. ‘ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ’ शीर्षक का क्या महत्व है?
यह शीर्षक हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख पुरातात्त्विक साक्ष्यों—ईंटों, मनकों और अस्थियों—को दर्शाता है, जिनसे सभ्यता के जीवन का पुनर्निर्माण किया जाता है।