CBSE कक्षा 12 अर्थशास्त्र (Macroeconomics)
अध्याय 2 – मुद्रा और बैंकिंग (Money and Banking)
20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
1. मुद्रा (Money) से क्या अभिप्राय है? इसकी मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
मुद्रा वह वस्तु है जिसे वस्तुओं एवं सेवाओं के विनिमय के माध्यम के रूप में सामान्य स्वीकृति प्राप्त होती है। आधुनिक अर्थव्यवस्था में नोट, सिक्के तथा बैंक जमा मुद्रा के प्रमुख रूप हैं। मुद्रा की मुख्य विशेषताएँ हैं—सार्वभौमिक स्वीकार्यता, टिकाऊपन, विभाज्यता, वहनीयता तथा मूल्य की स्थिरता। मुद्रा ने विनिमय प्रणाली की कठिनाइयों को समाप्त किया और आर्थिक लेन-देन को सरल बनाया। इसके कारण वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान अधिक सुगम एवं तीव्र हो गया। आधुनिक अर्थव्यवस्था में मुद्रा उत्पादन, उपभोग, निवेश और व्यापार को सुचारु रूप से संचालित करने का आधार है।
2. वस्तु-विनिमय प्रणाली (Barter System) की दो प्रमुख कमियाँ बताइए।
उत्तर:
वस्तु-विनिमय प्रणाली में वस्तुओं का आदान-प्रदान सीधे वस्तुओं से किया जाता था। इसकी पहली प्रमुख कमी थी द्वैध इच्छाओं का संयोग (Double Coincidence of Wants), अर्थात् दोनों पक्षों की आवश्यकताएँ एक-दूसरे से मेल खानी चाहिए। दूसरी कमी थी मूल्य मापन का अभाव, क्योंकि सभी वस्तुओं का मूल्य निर्धारित करने के लिए कोई सामान्य मापदंड नहीं था। इसके अतिरिक्त भविष्य के भुगतान, बचत तथा संपत्ति संचय में भी कठिनाइयाँ आती थीं। इन समस्याओं के कारण आर्थिक गतिविधियाँ सीमित हो जाती थीं। मुद्रा के आगमन ने इन कमियों को दूर करके व्यापार और आर्थिक विकास को गति प्रदान की।
3. मुद्रा के प्राथमिक कार्य कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
मुद्रा के दो प्राथमिक कार्य हैं—विनिमय का माध्यम (Medium of Exchange) तथा मूल्य का मापक (Unit of Account)। विनिमय के माध्यम के रूप में मुद्रा वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद-बिक्री को सरल बनाती है और वस्तु-विनिमय की आवश्यकता समाप्त करती है। मूल्य के मापक के रूप में मुद्रा विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य को एक समान इकाई में व्यक्त करती है। इससे तुलना और लेखांकन आसान हो जाता है। ये दोनों कार्य आधुनिक अर्थव्यवस्था की नींव हैं क्योंकि इनके बिना उत्पादन, व्यापार तथा उपभोग की प्रक्रिया जटिल हो जाती है।
4. मुद्रा के गौण कार्यों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
मुद्रा के गौण कार्यों में मूल्य का संचय (Store of Value) तथा स्थगित भुगतानों का मानक (Standard of Deferred Payment) शामिल हैं। मूल्य संचय के रूप में मुद्रा लोगों को अपनी आय का कुछ भाग भविष्य के लिए सुरक्षित रखने की सुविधा देती है। स्थगित भुगतानों के मानक के रूप में ऋण, वेतन, किराया और किस्तों का भुगतान मुद्रा में किया जाता है। इससे भविष्य के लेन-देन निश्चित और सुविधाजनक हो जाते हैं। इन कार्यों के कारण बचत, निवेश तथा ऋण व्यवस्था का विकास संभव हो पाता है, जो आर्थिक प्रगति के लिए आवश्यक है।
5. मांग जमा (Demand Deposits) क्या हैं?
उत्तर:
मांग जमा वे बैंक जमा हैं जिन्हें जमाकर्ता अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी समय निकाल सकता है। बचत खाता और चालू खाता इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इन जमाओं का उपयोग चेक, एटीएम, ऑनलाइन ट्रांसफर आदि के माध्यम से भुगतान करने में किया जाता है। क्योंकि इन्हें तुरंत नकद में बदला जा सकता है, इसलिए इन्हें मुद्रा का एक महत्वपूर्ण घटक माना जाता है। मांग जमा आधुनिक बैंकिंग प्रणाली का महत्वपूर्ण भाग हैं क्योंकि ये भुगतान प्रणाली को सरल, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाते हैं तथा अर्थव्यवस्था में तरलता बनाए रखते हैं।
6. समय जमा (Time Deposits) क्या हैं?
उत्तर:
समय जमा वे बैंक जमा हैं जिन्हें एक निश्चित अवधि के लिए बैंक में रखा जाता है। निश्चित जमा (Fixed Deposit) इसका प्रमुख उदाहरण है। इन जमाओं को अवधि पूरी होने से पहले सामान्यतः नहीं निकाला जा सकता या निकासी पर जुर्माना देना पड़ता है। समय जमा पर मांग जमा की तुलना में अधिक ब्याज मिलता है। ये जमा बैंक को दीर्घकालिक ऋण देने में सहायता करती हैं। चूँकि इन्हें तुरंत भुगतान के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता, इसलिए इन्हें मुद्रा आपूर्ति के संकीर्ण माप में शामिल नहीं किया जाता, परंतु व्यापक मापों में इनका महत्व होता है।
7. मुद्रा आपूर्ति (Money Supply) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
मुद्रा आपूर्ति से आशय अर्थव्यवस्था में किसी निश्चित समय पर जनता के पास उपलब्ध कुल मुद्रा की मात्रा से है। इसमें चलन में मौजूद नोट, सिक्के तथा बैंकों में जनता की मांग जमा शामिल होती हैं। मुद्रा आपूर्ति का स्तर उपभोग, निवेश, रोजगार तथा मूल्य स्तर को प्रभावित करता है। यदि मुद्रा आपूर्ति अत्यधिक बढ़ जाए तो मुद्रास्फीति की संभावना बढ़ जाती है, जबकि बहुत कम होने पर आर्थिक गतिविधियाँ धीमी पड़ सकती हैं। भारत में मुद्रा आपूर्ति का मापन विभिन्न रूपों जैसे M1, M2, M3 और M4 द्वारा किया जाता है।
8. M1 को संकीर्ण मुद्रा (Narrow Money) क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
M1 मुद्रा आपूर्ति का सबसे तरल और संकीर्ण माप है। इसमें जनता के पास उपलब्ध मुद्रा (नोट और सिक्के), बैंकों में मांग जमा तथा RBI में अन्य जमा शामिल होते हैं। इसे संकीर्ण मुद्रा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके सभी घटकों का उपयोग तुरंत भुगतान के लिए किया जा सकता है। यह अर्थव्यवस्था में वास्तविक लेन-देन की क्षमता को दर्शाता है। M1 का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि यह अल्पकालीन आर्थिक गतिविधियों और भुगतान व्यवस्था पर सीधा प्रभाव डालता है तथा मुद्रा की तरलता को मापने का प्रमुख संकेतक है।
9. वाणिज्यिक बैंक (Commercial Bank) क्या हैं?
उत्तर:
वाणिज्यिक बैंक वे वित्तीय संस्थाएँ हैं जो जनता से जमा स्वीकार करती हैं और ऋण प्रदान करती हैं। उनका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है। ये बचत खाते, चालू खाते, सावधि जमा, ऋण, नकद साख तथा अन्य बैंकिंग सेवाएँ प्रदान करते हैं। वाणिज्यिक बैंक आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि वे बचतों को एकत्र करके उन्हें उत्पादक निवेशों में परिवर्तित करते हैं। इसके अतिरिक्त वे भुगतान प्रणाली को सरल बनाते हैं और अर्थव्यवस्था में साख निर्माण (Credit Creation) का कार्य भी करते हैं।
10. वाणिज्यिक बैंकों के दो प्रमुख कार्य बताइए।
उत्तर:
वाणिज्यिक बैंकों के दो प्रमुख कार्य हैं—जमा स्वीकार करना तथा ऋण प्रदान करना। बैंक जनता से विभिन्न प्रकार की जमाएँ स्वीकार करते हैं और उन पर ब्याज देते हैं। दूसरी ओर, वे इन जमाओं का एक भाग ऋण के रूप में व्यक्तियों एवं व्यवसायों को प्रदान करते हैं। इससे उत्पादन, व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलता है। बैंक अर्थव्यवस्था में बचत और निवेश के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य करते हैं। इन कार्यों के कारण आर्थिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग होता है और आर्थिक विकास को गति मिलती है।
11. साख निर्माण (Credit Creation) क्या है?
उत्तर:
साख निर्माण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से वाणिज्यिक बैंक अपनी प्राप्त जमाओं के आधार पर ऋण प्रदान करके नई जमा का निर्माण करते हैं। बैंक जमा का केवल एक भाग नकद आरक्षित रखते हैं और शेष राशि ऋण के रूप में देते हैं। जब ऋण प्राप्तकर्ता उस राशि को खर्च करता है, तो वह पुनः किसी बैंक में जमा बन जाती है। इस प्रकार बैंकिंग प्रणाली में कई गुना जमा और साख का निर्माण होता है। यह प्रक्रिया मुद्रा आपूर्ति बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करती है।
12. केंद्रीय बैंक (Central Bank) क्या है?
उत्तर:
केंद्रीय बैंक किसी देश की सर्वोच्च बैंकिंग संस्था होती है जो मुद्रा और बैंकिंग प्रणाली को नियंत्रित करती है। भारत में यह कार्य Reserve Bank of India द्वारा किया जाता है। केंद्रीय बैंक मुद्रा निर्गमन, साख नियंत्रण, मौद्रिक नीति निर्माण तथा बैंकिंग प्रणाली के नियमन का कार्य करता है। यह सरकार का बैंक, बैंकों का बैंक तथा अंतिम ऋणदाता भी होता है। केंद्रीय बैंक का मुख्य उद्देश्य आर्थिक स्थिरता बनाए रखना और मुद्रास्फीति तथा आर्थिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है।
13. भारतीय रिज़र्व बैंक के दो प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर:
भारतीय रिज़र्व बैंक के प्रमुख कार्यों में मुद्रा निर्गमन तथा साख नियंत्रण शामिल हैं। RBI देश में नोट जारी करने का एकाधिकार रखता है और मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करता है। दूसरा, यह विभिन्न मौद्रिक नीति उपकरणों जैसे रेपो दर, CRR और खुला बाजार परिचालन के माध्यम से साख और मुद्रा की मात्रा को नियंत्रित करता है। इसके अतिरिक्त RBI सरकार का बैंक, विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षक तथा बैंकों का बैंक भी है। ये कार्य वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में सहायक होते हैं।
14. उच्च शक्ति मुद्रा (High Powered Money) क्या है?
उत्तर:
उच्च शक्ति मुद्रा वह मुद्रा है जिसे केंद्रीय बैंक और सरकार द्वारा जारी किया जाता है। इसमें जनता के पास उपलब्ध मुद्रा तथा वाणिज्यिक बैंकों के RBI के पास रखे गए नकद भंडार शामिल होते हैं। इसे आधार मुद्रा (Monetary Base) भी कहा जाता है। यह बैंकिंग प्रणाली में साख निर्माण की नींव होती है। वाणिज्यिक बैंक इसी आधार मुद्रा के आधार पर कई गुना जमा और ऋण का निर्माण करते हैं। इसलिए उच्च शक्ति मुद्रा का स्तर अर्थव्यवस्था की कुल मुद्रा आपूर्ति को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है।
15. मौद्रिक नीति (Monetary Policy) क्या है?
उत्तर:
मौद्रिक नीति वह नीति है जिसके माध्यम से केंद्रीय बैंक मुद्रा आपूर्ति और साख की मात्रा को नियंत्रित करता है। इसका उद्देश्य मूल्य स्थिरता, आर्थिक विकास और रोजगार को बढ़ावा देना होता है। भारत में RBI मौद्रिक नीति का संचालन करता है। जब अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति बढ़ती है, तब RBI मुद्रा आपूर्ति कम करने का प्रयास करता है। इसके विपरीत मंदी की स्थिति में वह मुद्रा आपूर्ति बढ़ाकर आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करता है। मौद्रिक नीति अर्थव्यवस्था में संतुलित विकास बनाए रखने का महत्वपूर्ण साधन है।
16. नकद आरक्षित अनुपात (CRR) क्या है?
उत्तर:
CRR अर्थात Cash Reserve Ratio वह न्यूनतम प्रतिशत है जिसे वाणिज्यिक बैंकों को अपनी कुल जमाओं का एक भाग नकद के रूप में RBI के पास रखना होता है। जब RBI CRR बढ़ाता है, तो बैंकों के पास ऋण देने के लिए कम धन बचता है और साख निर्माण घट जाता है। इसके विपरीत CRR कम करने पर ऋण देने की क्षमता बढ़ती है। इसलिए CRR मुद्रा आपूर्ति और साख नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण मात्रात्मक उपकरण है। इसका उपयोग मुद्रास्फीति और आर्थिक गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
17. खुला बाजार परिचालन (Open Market Operations) क्या है?
उत्तर:
खुला बाजार परिचालन वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत केंद्रीय बैंक सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद और बिक्री करता है। यदि RBI प्रतिभूतियाँ बेचता है, तो बाजार से नकदी निकल जाती है और मुद्रा आपूर्ति घटती है। इसके विपरीत प्रतिभूतियाँ खरीदने पर बाजार में नकदी बढ़ती है और मुद्रा आपूर्ति में वृद्धि होती है। यह मौद्रिक नीति का एक महत्वपूर्ण मात्रात्मक साधन है। इसके माध्यम से RBI अर्थव्यवस्था में तरलता की स्थिति को नियंत्रित करता है तथा मुद्रास्फीति और विकास के बीच संतुलन बनाए रखता है।
18. रेपो दर (Repo Rate) क्या है?
उत्तर:
रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर RBI अल्पकाल के लिए वाणिज्यिक बैंकों को ऋण प्रदान करता है। जब RBI रेपो दर बढ़ाता है, तो बैंकों के लिए ऋण लेना महँगा हो जाता है और वे जनता को कम ऋण देते हैं। इससे मुद्रा आपूर्ति घटती है। दूसरी ओर रेपो दर घटाने पर ऋण सस्ता हो जाता है और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलता है। इसलिए रेपो दर मौद्रिक नीति का एक महत्वपूर्ण उपकरण है जिसका उपयोग मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक विकास को प्रभावित करने के लिए किया जाता है।
19. बैंक दर (Bank Rate) और रेपो दर में अंतर बताइए।
उत्तर:
बैंक दर वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को दीर्घकालीन ऋण प्रदान करता है, जबकि रेपो दर अल्पकालीन ऋणों पर लागू होती है। रेपो लेन-देन में सरकारी प्रतिभूतियाँ गिरवी रखी जाती हैं, जबकि बैंक दर में ऐसा आवश्यक नहीं होता। दोनों दरें साख नियंत्रण के महत्वपूर्ण साधन हैं। बैंक दर में परिवर्तन से दीर्घकालीन ऋण लागत प्रभावित होती है, जबकि रेपो दर का प्रभाव अल्पकालीन तरलता और बैंकिंग प्रणाली की ऋण क्षमता पर अधिक पड़ता है। दोनों का उद्देश्य मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करना है।
20. मुद्रा गुणक (Money Multiplier) क्या है?
उत्तर:
मुद्रा गुणक वह अनुपात है जो बताता है कि उच्च शक्ति मुद्रा की एक इकाई से कुल मुद्रा आपूर्ति कितनी बढ़ सकती है। यह वाणिज्यिक बैंकों की साख निर्माण क्षमता को दर्शाता है। जब बैंक अपनी जमाओं का एक भाग आरक्षित रखकर शेष राशि ऋण के रूप में देते हैं, तो नई जमा उत्पन्न होती हैं और कुल मुद्रा आपूर्ति कई गुना बढ़ जाती है। नकद आरक्षित अनुपात जितना कम होगा, मुद्रा गुणक उतना अधिक होगा। यह अवधारणा बैंकिंग प्रणाली की मुद्रा निर्माण प्रक्रिया को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
