CBSE Class 12 Chemistry (Physical Chemistry)
Chapter 2: विद्युत रसायन (Electrochemistry)
20 महत्वपूर्ण के प्रश्न एवं उत्तर
विद्युत रसायन अध्याय में विद्युत-रासायनिक सेल, नर्न्स्ट समीकरण, चालकता, मोलर चालकता, विद्युत अपघटन तथा फैराडे के नियम प्रमुख विषय हैं। यह अध्याय CBSE बोर्ड परीक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
1. विद्युत रासायनिक सेल क्या है? इसके मुख्य भागों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विद्युत रासायनिक सेल वह उपकरण है जिसमें रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। इसमें दो इलेक्ट्रोड (एनोड और कैथोड), इलेक्ट्रोलाइट विलयन तथा लवण सेतु (Salt Bridge) होते हैं। एनोड पर ऑक्सीकरण तथा कैथोड पर अपचयन होता है। इलेक्ट्रॉन बाह्य परिपथ द्वारा एनोड से कैथोड की ओर प्रवाहित होते हैं। लवण सेतु दोनों अर्ध-कोशों में विद्युत उदासीनता बनाए रखता है और परिपथ को पूर्ण करता है। डेनियल सेल विद्युत रासायनिक सेल का प्रसिद्ध उदाहरण है। ऐसे सेल स्वतः होने वाली रेडॉक्स अभिक्रियाओं के आधार पर कार्य करते हैं और विद्युत वाहक बल (EMF) उत्पन्न करते हैं।
2. गैल्वैनिक सेल एवं विद्युत अपघटनी सेल में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
गैल्वैनिक सेल में स्वतः होने वाली रेडॉक्स अभिक्रिया से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है, जबकि विद्युत अपघटनी सेल में बाहरी विद्युत ऊर्जा द्वारा अस्वतः अभिक्रिया कराई जाती है। गैल्वैनिक सेल में एनोड ऋणात्मक तथा कैथोड धनात्मक होता है, जबकि विद्युत अपघटनी सेल में एनोड धनात्मक और कैथोड ऋणात्मक होता है। गैल्वैनिक सेल रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है, जबकि विद्युत अपघटनी सेल विद्युत ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है। डेनियल सेल गैल्वैनिक सेल का उदाहरण है, जबकि जल का विद्युत अपघटन विद्युत अपघटनी सेल का उदाहरण है।
3. लवण सेतु (Salt Bridge) का कार्य लिखिए।
उत्तर:
लवण सेतु एक U-आकार की नली होती है जिसमें KCl या KNO₃ जैसे निष्क्रिय इलेक्ट्रोलाइट का जेल भरा रहता है। इसका मुख्य कार्य दोनों अर्ध-कोशों के बीच आयनों का प्रवाह बनाए रखना है। यह परिपथ को पूर्ण करता है तथा दोनों विलयनों में विद्युत उदासीनता बनाए रखता है। यदि लवण सेतु न हो तो एक अर्ध-कोश में धनात्मक तथा दूसरे में ऋणात्मक आवेश बढ़ने से अभिक्रिया शीघ्र रुक जाएगी। यह द्रव-संधि विभव (Liquid Junction Potential) को भी कम करता है। इसलिए लवण सेतु विद्युत रासायनिक सेल की दक्षता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
4. मानक इलेक्ट्रोड विभव (Standard Electrode Potential) क्या है?
उत्तर:
किसी इलेक्ट्रोड का मानक इलेक्ट्रोड विभव वह विभव है जो 1 M सांद्रता, 1 atm दाब तथा 298 K ताप पर मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) की तुलना में मापा जाता है। SHE का विभव शून्य माना जाता है। इलेक्ट्रोड विभव किसी पदार्थ की इलेक्ट्रॉन ग्रहण या त्याग करने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। धनात्मक मानक अपचयन विभव अधिक अपचयन क्षमता तथा ऋणात्मक मान अधिक ऑक्सीकरण क्षमता को दर्शाता है। मानक इलेक्ट्रोड विभवों की सहायता से सेल विभव, अभिक्रिया की स्वस्फूर्तता तथा ऑक्सीकारक एवं अपचायक की शक्ति का निर्धारण किया जाता है।
5. नर्न्स्ट समीकरण का महत्व लिखिए।
उत्तर:
नर्न्स्ट समीकरण का उपयोग गैर-मानक परिस्थितियों में सेल विभव ज्ञात करने के लिए किया जाता है। यह अभिकारकों एवं उत्पादों की सांद्रता तथा सेल विभव के बीच संबंध स्थापित करता है। इस समीकरण द्वारा विभिन्न सांद्रताओं पर इलेक्ट्रोड विभव और EMF की गणना की जाती है। इसके अतिरिक्त संतुलन स्थिरांक (K) तथा गिब्स मुक्त ऊर्जा परिवर्तन (ΔG) के निर्धारण में भी इसका उपयोग होता है। बोर्ड परीक्षाओं में नर्न्स्ट समीकरण आधारित संख्यात्मक प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यह विद्युत रसायन के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक अध्ययन का आधार माना जाता है।
6. चालकता (Conductance) एवं विशिष्ट चालकता (Conductivity) में अंतर बताइए।
उत्तर:
चालकता (G) किसी चालक द्वारा विद्युत धारा प्रवाहित करने की क्षमता है तथा यह प्रतिरोध (R) का व्युत्क्रम होती है। इसकी इकाई सीमेंस (S) है। विशिष्ट चालकता (κ) एक सेंटीमीटर लंबाई एवं एक वर्ग सेंटीमीटर अनुप्रस्थ क्षेत्रफल वाले विलयन की चालकता होती है। इसकी इकाई S cm⁻¹ होती है। चालकता चालक के आयामों पर निर्भर करती है जबकि विशिष्ट चालकता पदार्थ का आंतरिक गुण है। विशिष्ट चालकता इलेक्ट्रोलाइट विलयनों की विद्युत वहन क्षमता को मापने का महत्वपूर्ण मापदंड है।
7. मोलर चालकता क्या है? सांद्रता के साथ इसका परिवर्तन समझाइए।
उत्तर:
मोलर चालकता (Λm) किसी विलयन में उपस्थित एक मोल इलेक्ट्रोलाइट द्वारा प्रदर्शित चालकता है। इसका मात्रक S cm² mol⁻¹ होता है। प्रबल इलेक्ट्रोलाइटों के लिए सांद्रता घटने पर मोलर चालकता धीरे-धीरे बढ़ती है क्योंकि आयनों के बीच आकर्षण कम हो जाता है। दुर्बल इलेक्ट्रोलाइटों में तनुकरण करने पर आयनीकरण की मात्रा बढ़ती है, इसलिए मोलर चालकता में तीव्र वृद्धि होती है। अनंत तनुकरण पर मोलर चालकता अधिकतम मान प्राप्त करती है जिसे सीमांत मोलर चालकता कहते हैं।
8. कोलरॉश का नियम लिखिए।
उत्तर:
कोलरॉश के स्वतंत्र आयन गमन नियम के अनुसार अनंत तनुकरण पर प्रत्येक आयन की मोलर चालकता में स्वतंत्र योगदान होता है तथा किसी इलेक्ट्रोलाइट की सीमांत मोलर चालकता उसके धनायन एवं ऋणायन की सीमांत चालकताओं के योग के बराबर होती है। इस नियम का उपयोग दुर्बल इलेक्ट्रोलाइटों की सीमांत मोलर चालकता, आयनीकरण की मात्रा तथा वियोजन स्थिरांक ज्ञात करने में किया जाता है। यह नियम विद्युत रसायन में चालकता संबंधी गणनाओं का महत्वपूर्ण आधार है।
9. फैराडे का प्रथम नियम लिखिए।
उत्तर:
फैराडे के प्रथम नियम के अनुसार विद्युत अपघटन के दौरान इलेक्ट्रोड पर निक्षेपित या मुक्त पदार्थ का द्रव्यमान प्रवाहित विद्युत आवेश के समानुपाती होता है। अर्थात् m ∝ Q या m = ZIt, जहाँ m निक्षेपित द्रव्यमान, Z विद्युत रासायनिक तुल्यांक, I धारा तथा t समय है। इस नियम से ज्ञात होता है कि अधिक समय तक या अधिक धारा प्रवाहित करने पर अधिक मात्रा में पदार्थ प्राप्त होगा। यह नियम विद्युत अपघटन संबंधी संख्यात्मक प्रश्नों में व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है।
10. फैराडे का द्वितीय नियम लिखिए।
उत्तर:
फैराडे के द्वितीय नियम के अनुसार समान विद्युत आवेश विभिन्न इलेक्ट्रोलाइटों से प्रवाहित करने पर निक्षेपित पदार्थों का द्रव्यमान उनके रासायनिक तुल्यांकों के समानुपाती होता है। अर्थात् m₁/m₂ = E₁/E₂। यह नियम दर्शाता है कि निक्षेपित पदार्थ की मात्रा केवल आवेश पर ही नहीं बल्कि उसके तुल्यांक भार पर भी निर्भर करती है। धातुओं के निक्षेपण, विद्युत परिष्करण तथा औद्योगिक विद्युत अपघटन प्रक्रियाओं में इसका विशेष महत्व है।
11. विद्युत अपघटन क्या है?
उत्तर:
विद्युत अपघटन वह प्रक्रिया है जिसमें किसी इलेक्ट्रोलाइट के जलीय विलयन या गलित अवस्था में विद्युत धारा प्रवाहित कर रासायनिक परिवर्तन कराया जाता है। इस प्रक्रिया में कैथोड पर अपचयन तथा एनोड पर ऑक्सीकरण होता है। विद्युत अपघटन का उपयोग धातुओं के निष्कर्षण, शोधन, विद्युत लेपन तथा रासायनिक उद्योगों में किया जाता है। यह एक अस्वतः प्रक्रिया है जिसके लिए बाहरी विद्युत स्रोत आवश्यक होता है।
12. विद्युत वाहक बल (EMF) क्या है?
उत्तर:
किसी विद्युत रासायनिक सेल द्वारा खुले परिपथ में उत्पन्न अधिकतम विभवांतर को विद्युत वाहक बल (EMF) कहते हैं। यह सेल की कार्य करने की क्षमता का माप है। EMF का मान कैथोड और एनोड के इलेक्ट्रोड विभवों के अंतर के बराबर होता है। यदि EMF का मान धनात्मक हो तो अभिक्रिया स्वस्फूर्त होती है। EMF का उपयोग सेल की दक्षता, संतुलन स्थिरांक तथा गिब्स मुक्त ऊर्जा परिवर्तन ज्ञात करने में किया जाता है।
13. गिब्स मुक्त ऊर्जा तथा EMF में संबंध बताइए।
उत्तर:
गिब्स मुक्त ऊर्जा परिवर्तन (ΔG) और सेल विभव (Ecell) के बीच संबंध ΔG = –nFEcell द्वारा व्यक्त किया जाता है, जहाँ n इलेक्ट्रॉनों की संख्या तथा F फैराडे नियतांक है। यदि Ecell धनात्मक है तो ΔG ऋणात्मक होगा और अभिक्रिया स्वस्फूर्त होगी। इसी प्रकार Ecell शून्य होने पर प्रणाली संतुलन में होती है। यह संबंध ऊष्मागतिकी और विद्युत रसायन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी स्थापित करता है।
14. मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड एक संदर्भ इलेक्ट्रोड है जिसका विभव शून्य माना जाता है। इसमें प्लैटिनम इलेक्ट्रोड को 1 M H⁺ आयन वाले विलयन में डुबोया जाता है तथा 1 atm दाब पर हाइड्रोजन गैस प्रवाहित की जाती है। इसका उपयोग अन्य इलेक्ट्रोडों के मानक इलेक्ट्रोड विभव मापने के लिए किया जाता है। SHE विद्युत रसायन में सार्वभौमिक संदर्भ इलेक्ट्रोड के रूप में कार्य करता है और इलेक्ट्रोड विभवों की सारणी तैयार करने का आधार है।
15. प्रबल एवं दुर्बल इलेक्ट्रोलाइट में अंतर लिखिए।
उत्तर:
प्रबल इलेक्ट्रोलाइट जल में लगभग पूर्णतः आयनित हो जाते हैं, जैसे HCl, NaCl तथा KOH। इनके विलयन में आयनों की संख्या अधिक होने से चालकता अधिक होती है। दुर्बल इलेक्ट्रोलाइट केवल आंशिक रूप से आयनित होते हैं, जैसे CH₃COOH तथा NH₄OH। इनकी चालकता अपेक्षाकृत कम होती है। तनुकरण करने पर प्रबल इलेक्ट्रोलाइटों की चालकता में थोड़ा परिवर्तन होता है, जबकि दुर्बल इलेक्ट्रोलाइटों की मोलर चालकता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
16. इलेक्ट्रोड विभव को प्रभावित करने वाले कारक लिखिए।
उत्तर:
इलेक्ट्रोड विभव मुख्यतः आयनों की सांद्रता, तापमान, इलेक्ट्रोड की प्रकृति तथा गैसीय इलेक्ट्रोडों के लिए दाब पर निर्भर करता है। नर्न्स्ट समीकरण के अनुसार सांद्रता बदलने से इलेक्ट्रोड विभव का मान भी बदल जाता है। तापमान बढ़ने पर विभव में परिवर्तन देखा जाता है। इलेक्ट्रोड पदार्थ की इलेक्ट्रॉन ग्रहण या त्याग करने की प्रवृत्ति भी विभव को प्रभावित करती है। इसलिए विभिन्न परिस्थितियों में इलेक्ट्रोड विभव का मान अलग-अलग हो सकता है।
17. संक्षारण (Corrosion) क्या है?
उत्तर:
संक्षारण वह प्रक्रिया है जिसमें धातु वातावरण की नमी, ऑक्सीजन या अन्य रासायनिक पदार्थों की उपस्थिति में धीरे-धीरे नष्ट होती है। लोहे पर जंग लगना इसका सामान्य उदाहरण है। यह एक विद्युत रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें धातु का ऑक्सीकरण होता है। संक्षारण से धातुओं की उपयोगिता और आयु कम हो जाती है। इसे रोकने के लिए गैल्वनीकरण, पेंटिंग, मिश्रधातु निर्माण तथा कैथोडिक संरक्षण जैसी विधियाँ अपनाई जाती हैं।
18. ईंधन सेल (Fuel Cell) क्या है?
उत्तर:
ईंधन सेल ऐसा विद्युत रासायनिक सेल है जिसमें ईंधन और ऑक्सीकारक की निरंतर आपूर्ति से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है। हाइड्रोजन-ऑक्सीजन ईंधन सेल इसका प्रमुख उदाहरण है। इसमें हाइड्रोजन का ऑक्सीकरण तथा ऑक्सीजन का अपचयन होता है और उत्पाद के रूप में जल बनता है। ईंधन सेल उच्च दक्षता वाले तथा पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा स्रोत माने जाते हैं क्योंकि इनमें प्रदूषण बहुत कम होता है। इनका उपयोग अंतरिक्ष यानों तथा आधुनिक ऊर्जा प्रणालियों में किया जाता है।
19. बैटरियाँ क्या हैं? इनके प्रकार बताइए।
उत्तर:
बैटरियाँ ऐसे विद्युत रासायनिक उपकरण हैं जो रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती हैं। इन्हें मुख्यतः प्राथमिक तथा द्वितीयक बैटरियों में वर्गीकृत किया जाता है। प्राथमिक बैटरियाँ एक बार उपयोग के बाद पुनः चार्ज नहीं की जा सकतीं, जैसे ड्राई सेल। द्वितीयक बैटरियाँ पुनः चार्ज की जा सकती हैं, जैसे लेड-अम्ल संचायक तथा लिथियम-आयन बैटरियाँ। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, वाहनों और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में इनका व्यापक उपयोग होता है।
20. विद्युत रसायन का दैनिक जीवन में महत्व लिखिए।
उत्तर:
विद्युत रसायन का उपयोग बैटरियों, ईंधन कोशिकाओं, विद्युत लेपन, धातुओं के शोधन, संक्षारण नियंत्रण तथा औद्योगिक विद्युत अपघटन प्रक्रियाओं में किया जाता है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक वाहन तथा ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ विद्युत रसायन के सिद्धांतों पर आधारित हैं। धातुओं के निष्कर्षण और शुद्धिकरण में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान है। आधुनिक विज्ञान, उद्योग और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा तकनीकों के विकास में विद्युत रसायन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
