नीचे CBSE Class 12 Chemistry (Inorganic Chemistry)

Chapter 6: समन्वय यौगिक Coordination Compounds

के लिए 20 महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर दिए गए हैं। प्रत्येक उत्तर लगभग 100–120 शब्दों में और 2–3 अंक स्तर के बोर्ड पैटर्न के अनुसार तैयार किया गया है।


1. समन्वय यौगिक (Coordination Compounds) क्या होते हैं?

समन्वय यौगिक वे यौगिक होते हैं जिनमें एक केंद्रीय धातु आयन या परमाणु के साथ कुछ आयन या अणु (लिगैंड) समन्वय सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़े होते हैं। उदाहरण: ([Co(NH_3)_6]^{3+})। इसमें केंद्रीय धातु इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करता है जबकि लिगैंड इलेक्ट्रॉन युग्म दान करते हैं। ये यौगिक जैव रसायन, औषधि और औद्योगिक रसायन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके गुण सामान्य यौगिकों से भिन्न होते हैं जैसे रंग, चुम्बकीय गुण एवं ज्यामिति।


2. लिगैंड क्या है? प्रकार बताइए।

लिगैंड वे आयन या अणु होते हैं जो केंद्रीय धातु परमाणु को इलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान करते हैं। इनके प्रकार हैं: (i) मोनोडेंटेट (NH₃, Cl⁻), (ii) बाइडेंटेट (en = एथिलीनडायमीन), (iii) पॉलिडेंटेट (EDTA)। लिगैंड की प्रकृति समन्वय संख्या और ज्यामिति को निर्धारित करती है। वे न्यूट्रल या ऋणात्मक हो सकते हैं। दंतता के आधार पर लिगैंड की बंधन क्षमता बदलती है।


3. समन्वय संख्या क्या है?

केंद्रीय धातु परमाणु से सीधे जुड़े लिगैंड परमाणुओं की कुल संख्या को समन्वय संख्या कहते हैं। उदाहरण: ([Co(NH_3)_6]^{3+}) में समन्वय संख्या 6 है। यह यौगिक की ज्यामिति निर्धारित करती है जैसे 4 के लिए टेट्राहेड्रल या स्क्वेयर प्लानर, और 6 के लिए ऑक्टाहेड्रल। समन्वय संख्या धातु आयन के आकार, आवेश और लिगैंड की प्रकृति पर निर्भर करती है।


4. वर्नर का समन्वय सिद्धांत समझाइए।

अल्फ्रेड वर्नर के अनुसार धातु दो प्रकार की संयोजकताएँ दिखाता है—प्राथमिक (आयनिक) और द्वितीयक (समन्वय)। प्राथमिक संयोजकता आयनित होती है, जबकि द्वितीयक लिगैंड से जुड़ी होती है और आयनित नहीं होती। यह सिद्धांत समन्वय यौगिकों की संरचना और ज्यामिति को समझाता है। उदाहरण: ([Co(NH_3)_6]Cl_3) में Co की समन्वय संख्या 6 है और Cl⁻ बाहरी आयन हैं।


5. लिगैंड की दंतता (Denticity) क्या है?

लिगैंड द्वारा केंद्रीय धातु से बनने वाले बंधों की संख्या को दंतता कहते हैं। जैसे NH₃ एक दंत (monodentate), en द्विदंत (bidentate), और EDTA षड्दंत (hexadentate) लिगैंड है। दंतता जितनी अधिक होगी, यौगिक उतना अधिक स्थिर होगा क्योंकि chelation प्रभाव बढ़ता है।


6. चेलेट प्रभाव क्या है?

जब बहुदंत लिगैंड एक ही धातु आयन से कई बंध बनाता है, तो बनने वाला चक्रीय यौगिक अधिक स्थिर होता है, इसे चेलेट प्रभाव कहते हैं। उदाहरण: ([Ni(en)_3]^{2+})। यह स्थिरता एंट्रॉपी वृद्धि के कारण होती है। चेलेट यौगिक औषधि और जैविक प्रणालियों में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।


7. IUPAC नामकरण में नियम क्या हैं?

IUPAC नामकरण में पहले लिगैंडों का नाम वर्णानुक्रम में, फिर धातु का नाम और उसके ऑक्सीकरण अवस्था को रोमन अंकों में लिखा जाता है। नकारात्मक समन्वय यौगिक में धातु के नाम के अंत में “-ate” जोड़ा जाता है। उदाहरण: ([Co(NH_3)_6]Cl_3) = Hexaammine cobalt(III) chloride।


8. समन्वय यौगिकों में आइसोमेरिज़्म क्या है?

आइसोमेरिज़्म वह स्थिति है जब एक ही आणविक सूत्र के अलग-अलग संरचनात्मक रूप होते हैं। समन्वय यौगिकों में संरचनात्मक (ionization, linkage, coordination) और ज्यामितीय आइसोमेरिज़्म पाए जाते हैं। उदाहरण: ([Co(NH_3)_5Br]SO_4) और ([Co(NH_3)_5SO_4]Br)।


9. लिंकज आइसोमेरिज़्म क्या है?

जब एंबिडेंटेट लिगैंड दो अलग-अलग परमाणुओं से जुड़ सकता है, तब लिंकज आइसोमेरिज़्म होता है। उदाहरण: NO₂⁻ लिगैंड N या O के माध्यम से जुड़ सकता है। इससे अलग-अलग संरचनाएँ बनती हैं। यह गुण समन्वय रसायन में विशेष महत्व रखता है।


10. ज्यामितीय आइसोमेरिज़्म क्या है?

जब समान लिगैंड विभिन्न स्थानों पर व्यवस्थित हों (cis और trans), तो इसे ज्यामितीय आइसोमेरिज़्म कहते हैं। यह मुख्यतः स्क्वेयर प्लानर और ऑक्टाहेड्रल यौगिकों में पाया जाता है। उदाहरण: ([Pt(NH_3)_2Cl_2]) में cis और trans रूप होते हैं।


11. वैलेंस बॉन्ड थ्योरी क्या है?

VBT के अनुसार धातु के खाली ऑर्बिटल लिगैंड के इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करते हैं। इससे हाइब्रिड ऑर्बिटल बनते हैं जो ज्यामिति तय करते हैं जैसे sp³, dsp², d²sp³। यह सिद्धांत बंध निर्माण और आकार समझाने में सहायक है।


12. क्रिस्टल फील्ड थ्योरी क्या है?

CFT के अनुसार लिगैंड इलेक्ट्रोस्टैटिक क्षेत्र उत्पन्न करते हैं जिससे d-ऑर्बिटल विभाजित हो जाते हैं। ऑक्टाहेड्रल क्षेत्र में t₂g और e_g स्तर बनते हैं। इससे रंग और चुम्बकीय गुण समझाए जाते हैं।


13. ऑक्टाहेड्रल और टेट्राहेड्रल जटिलों में अंतर?

ऑक्टाहेड्रल में 6 लिगैंड होते हैं जबकि टेट्राहेड्रल में 4। ऑक्टाहेड्रल में d-ऑर्बिटल विभाजन अधिक होता है जबकि टेट्राहेड्रल में कम। ऑक्टाहेड्रल अधिक स्थिर होते हैं और प्रायः लो-स्पिन/हाई-स्पिन बनाते हैं।


14. स्पेक्ट्रोकेमिकल श्रेणी क्या है?

लिगैंडों को उनके क्षेत्र विभाजन क्षमता के अनुसार क्रमबद्ध करना स्पेक्ट्रोकेमिकल श्रेणी कहलाता है। जैसे I⁻ < Br⁻ < Cl⁻ < NH₃ < CN⁻ < CO। यह CFT में उपयोगी है।


15. हाई स्पिन और लो स्पिन यौगिक क्या हैं?

जब इलेक्ट्रॉन युग्मन नहीं होता तो हाई स्पिन यौगिक बनते हैं, जबकि मजबूत लिगैंडों के कारण युग्मन होकर लो स्पिन बनते हैं। यह CFT पर निर्भर करता है।


16. चुंबकीय गुण कैसे निर्धारित होते हैं?

अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या से चुम्बकीय गुण निर्धारित होते हैं। अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होने पर यौगिक पैरामैग्नेटिक होता है, अन्यथा डायमैग्नेटिक।


17. रंगीन यौगिक क्यों बनते हैं?

d–d इलेक्ट्रॉन संक्रमण के कारण दृश्य प्रकाश का अवशोषण होता है, जिससे समन्वय यौगिक रंगीन दिखाई देते हैं। यह CFT पर आधारित है।


18. EDTA क्या है?

EDTA एक षड्दंत लिगैंड है जो धातु आयनों से मजबूत चेलेट बनाता है। इसका उपयोग जल कठोरता हटाने और औषधियों में होता है।


19. समन्वय यौगिकों के उपयोग लिखिए।

इनका उपयोग धातु निष्कर्षण, औषधियाँ (cisplatin), जैव रसायन (हीमोग्लोबिन), और विश्लेषणात्मक रसायन में होता है।


20. समन्वय यौगिकों का महत्व क्या है?

ये जैविक प्रक्रियाओं, उद्योग और चिकित्सा में महत्वपूर्ण हैं। उदाहरण: क्लोरोफिल, हीमोग्लोबिन आदि समन्वय यौगिक हैं जो जीवन के लिए आवश्यक हैं।