CBSE कक्षा 12 व्यवसाय अध्ययन (Business Studies)

अध्याय 5 – संगठन (Organising)

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

संगठन अध्याय में संगठन की अवधारणा, संगठन प्रक्रिया, संगठन संरचना, औपचारिक एवं अनौपचारिक संगठन, प्रत्यायोजन (Delegation) तथा विकेंद्रीकरण (Decentralisation) प्रमुख विषय हैं।


प्रश्न 1. संगठन (Organising) से क्या अभिप्राय है?

उत्तर:
संगठन प्रबंधन का वह कार्य है जिसके अंतर्गत संगठन के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु कार्यों की पहचान, वर्गीकरण तथा कर्मचारियों के मध्य उनका उचित विभाजन किया जाता है। इसमें मानव, भौतिक एवं वित्तीय संसाधनों का समन्वय स्थापित किया जाता है। संगठन यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक कर्मचारी को उसकी जिम्मेदारी और अधिकार स्पष्ट रूप से ज्ञात हों। इससे कार्यों में दोहराव कम होता है तथा दक्षता बढ़ती है। संगठन योजनाओं को क्रियान्वित करने का माध्यम है क्योंकि इसके द्वारा कार्यों का सुव्यवस्थित ढाँचा तैयार किया जाता है। अतः संगठन किसी भी संस्था की सफलता का आधार माना जाता है।


प्रश्न 2. संगठन के कोई दो महत्व बताइए।

उत्तर:
संगठन का पहला महत्व विशेषज्ञता (Specialisation) को बढ़ावा देना है। कार्यों का विभाजन होने से प्रत्येक व्यक्ति एक विशेष कार्य में दक्ष हो जाता है, जिससे उत्पादकता बढ़ती है। दूसरा महत्व कार्य संबंधों में स्पष्टता लाना है। संगठन प्रत्येक कर्मचारी की जिम्मेदारी तथा अधिकार को स्पष्ट करता है, जिससे भ्रम की स्थिति समाप्त होती है। इसके अतिरिक्त संगठन संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग, प्रभावी प्रशासन, समन्वय तथा संगठन के विस्तार में भी सहायता करता है। इसलिए संगठन किसी भी व्यवसाय की कार्यकुशलता और सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है।


प्रश्न 3. संगठन प्रक्रिया के चरणों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
संगठन प्रक्रिया में चार प्रमुख चरण होते हैं। प्रथम, कार्यों की पहचान एवं विभाजन, जिसमें कुल कार्य को छोटे-छोटे कार्यों में बाँटा जाता है। द्वितीय, विभागीकरण (Departmentalisation), जिसमें समान कार्यों को एक विभाग में समूहित किया जाता है। तृतीय, कर्तव्यों का आवंटन, जिसके अंतर्गत कर्मचारियों को उनकी योग्यता के अनुसार कार्य सौंपे जाते हैं। चतुर्थ, अधिकार एवं उत्तरदायित्व संबंधों की स्थापना, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कौन किसके प्रति उत्तरदायी है। इन चरणों के माध्यम से संगठन एक व्यवस्थित संरचना विकसित करता है और उद्देश्यों की प्राप्ति को सरल बनाता है।


प्रश्न 4. विभागीकरण (Departmentalisation) क्या है?

उत्तर:
विभागीकरण संगठन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है जिसमें समान प्रकृति के कार्यों को एक साथ समूहित करके विभाग बनाए जाते हैं। उदाहरण के लिए उत्पादन, विपणन, वित्त तथा मानव संसाधन विभाग। विभागीकरण से कार्यों में विशेषज्ञता आती है तथा समन्वय स्थापित करना आसान हो जाता है। यह प्रबंधकों को कार्यों की निगरानी और नियंत्रण में सहायता प्रदान करता है। इसके माध्यम से संगठन की कार्यक्षमता बढ़ती है और प्रत्येक विभाग अपने विशिष्ट उद्देश्यों की पूर्ति पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। इस प्रकार विभागीकरण संगठनात्मक संरचना को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


प्रश्न 5. संगठन संरचना से क्या अभिप्राय है?

उत्तर:
संगठन संरचना वह ढाँचा है जिसके माध्यम से संगठन में अधिकार, उत्तरदायित्व तथा संचार संबंध निर्धारित किए जाते हैं। यह बताती है कि कौन किसके अधीन कार्य करेगा और निर्णय लेने का अधिकार किसके पास होगा। संगठन संरचना कर्मचारियों के बीच कार्य संबंधों को स्पष्ट करती है तथा समन्वय स्थापित करती है। एक प्रभावी संरचना कार्यों के सुचारु निष्पादन, संसाधनों के उचित उपयोग तथा संगठनात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायता करती है। सामान्यतः संगठन संरचना कार्यात्मक (Functional) और प्रभागीय (Divisional) प्रकार की होती है।


प्रश्न 6. कार्यात्मक संगठन संरचना (Functional Structure) क्या है?

उत्तर:
कार्यात्मक संगठन संरचना वह व्यवस्था है जिसमें समान प्रकार के कार्यों को एक विभाग के अंतर्गत रखा जाता है। जैसे उत्पादन, विपणन, वित्त तथा मानव संसाधन विभाग। प्रत्येक विभाग का नेतृत्व उस क्षेत्र का विशेषज्ञ करता है। यह संरचना विशेषज्ञता को बढ़ावा देती है और संसाधनों के बेहतर उपयोग में सहायता करती है। इससे कार्यों में दक्षता बढ़ती है तथा निर्णय अधिक प्रभावी होते हैं। हालांकि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की समस्या उत्पन्न हो सकती है। फिर भी छोटे एवं मध्यम आकार के संगठनों में यह संरचना अत्यंत उपयोगी मानी जाती है।


प्रश्न 7. प्रभागीय संगठन संरचना (Divisional Structure) क्या है?

उत्तर:
प्रभागीय संरचना वह संगठनात्मक ढाँचा है जिसमें विभिन्न उत्पादों, क्षेत्रों या ग्राहक समूहों के आधार पर अलग-अलग प्रभाग बनाए जाते हैं। प्रत्येक प्रभाग अपने कार्यों के लिए लगभग स्वतंत्र होता है तथा उसके पास उत्पादन, विपणन और वित्त जैसी सुविधाएँ होती हैं। यह संरचना बड़े एवं विविध उत्पादों वाले संगठनों के लिए उपयुक्त है। इससे उत्पाद-विशेष पर ध्यान केंद्रित करना आसान हो जाता है तथा प्रदर्शन का मूल्यांकन भी सरल होता है। हालांकि संसाधनों की पुनरावृत्ति के कारण लागत बढ़ सकती है। फिर भी विस्तार और विकास के लिए यह संरचना लाभदायक मानी जाती है।


प्रश्न 8. औपचारिक संगठन (Formal Organisation) क्या है?

उत्तर:
औपचारिक संगठन वह संगठनात्मक व्यवस्था है जिसे प्रबंधन द्वारा जानबूझकर तैयार किया जाता है। इसमें अधिकार, उत्तरदायित्व, नियम, प्रक्रियाएँ तथा कार्य संबंध स्पष्ट रूप से निर्धारित होते हैं। औपचारिक संगठन कार्यों में अनुशासन तथा नियंत्रण बनाए रखने में सहायता करता है। इससे कर्मचारियों को अपने कर्तव्यों और अधिकारों की स्पष्ट जानकारी मिलती है। संगठनात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए यह एक व्यवस्थित ढाँचा प्रदान करता है। हालांकि अत्यधिक नियमों के कारण निर्णय लेने में विलंब हो सकता है। फिर भी किसी भी संगठन के प्रभावी संचालन के लिए औपचारिक संगठन आवश्यक है।


प्रश्न 9. अनौपचारिक संगठन (Informal Organisation) क्या है?

उत्तर:
अनौपचारिक संगठन कर्मचारियों के बीच स्वतः विकसित होने वाले सामाजिक और व्यक्तिगत संबंधों का नेटवर्क है। यह प्रबंधन द्वारा स्थापित नहीं किया जाता बल्कि कर्मचारियों के आपसी संपर्क और मित्रता के कारण विकसित होता है। अनौपचारिक संगठन संचार को तेज बनाता है तथा कर्मचारियों की सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है और कार्य वातावरण बेहतर बनता है। हालांकि कभी-कभी अफवाहों के प्रसार और संगठनात्मक अनुशासन में कमी का कारण भी बन सकता है। इसलिए औपचारिक एवं अनौपचारिक दोनों संगठनों में संतुलन आवश्यक है।


प्रश्न 10. प्रत्यायोजन (Delegation) क्या है?

उत्तर:
प्रत्यायोजन वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत उच्च अधिकारी अपने अधीनस्थों को कार्यों के साथ आवश्यक अधिकार भी सौंपता है तथा उन्हें उत्तरदायी बनाता है। इसका उद्देश्य प्रबंधकीय कार्यभार को कम करना तथा अधीनस्थों की क्षमता का विकास करना है। प्रत्यायोजन के माध्यम से निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होती है और संगठन की कार्यकुशलता बढ़ती है। यह प्रबंधन के सभी स्तरों पर आवश्यक है क्योंकि एक व्यक्ति सभी कार्य स्वयं नहीं कर सकता। प्रभावी प्रत्यायोजन संगठन में नेतृत्व विकास तथा बेहतर समन्वय को भी प्रोत्साहित करता है।


प्रश्न 11. प्रत्यायोजन के तत्व बताइए।

उत्तर:
प्रत्यायोजन के तीन प्रमुख तत्व हैं—उत्तरदायित्व (Responsibility), अधिकार (Authority) और जवाबदेही (Accountability)। उत्तरदायित्व से आशय सौंपे गए कार्य को पूरा करने के दायित्व से है। अधिकार वह शक्ति है जिसके माध्यम से कर्मचारी निर्णय ले सकता है और कार्य करा सकता है। जवाबदेही का अर्थ है कि कर्मचारी अपने कार्यों के परिणामों के लिए उत्तरदायी रहेगा। ये तीनों तत्व परस्पर जुड़े हुए हैं। बिना अधिकार के उत्तरदायित्व पूरा नहीं किया जा सकता और बिना जवाबदेही के नियंत्रण संभव नहीं होता। इसलिए प्रभावी प्रत्यायोजन के लिए इन तीनों तत्वों का संतुलन आवश्यक है।


प्रश्न 12. प्रत्यायोजन का कोई दो महत्व बताइए।

उत्तर:
प्रत्यायोजन का पहला महत्व प्रभावी प्रबंधन है। इसके माध्यम से उच्च अधिकारी महत्वपूर्ण कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं तथा उनका कार्यभार कम होता है। दूसरा महत्व कर्मचारियों का विकास है। अधीनस्थों को अधिकार और जिम्मेदारी मिलने से उनके निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है तथा उनमें नेतृत्व गुण विकसित होते हैं। इसके अतिरिक्त प्रत्यायोजन कर्मचारियों को प्रेरित करता है, संगठन के विस्तार में सहायता करता है तथा समन्वय को मजबूत बनाता है। इसलिए आधुनिक संगठनों में प्रत्यायोजन को प्रबंधन की सफलता का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।


प्रश्न 13. विकेंद्रीकरण (Decentralisation) क्या है?

उत्तर:
विकेंद्रीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें निर्णय लेने के अधिकार संगठन के विभिन्न स्तरों पर वितरित किए जाते हैं। इसमें केवल एक व्यक्ति या शीर्ष प्रबंधन के पास सभी अधिकार नहीं रहते, बल्कि अधीनस्थ प्रबंधकों को भी निर्णय लेने की शक्ति प्रदान की जाती है। इससे स्थानीय समस्याओं का समाधान शीघ्रता से किया जा सकता है। विकेंद्रीकरण संगठन को अधिक लचीला और उत्तरदायी बनाता है। यह प्रबंधकीय प्रतिभा के विकास में भी सहायक होता है। बड़े संगठनों में प्रभावी संचालन तथा तेज निर्णय प्रक्रिया के लिए विकेंद्रीकरण अत्यंत उपयोगी माना जाता है।


प्रश्न 14. विकेंद्रीकरण के दो महत्व बताइए।

उत्तर:
विकेंद्रीकरण का पहला महत्व शीघ्र निर्णय लेना है। अधिकार निचले स्तर तक पहुँचने से समस्याओं का समाधान तुरंत किया जा सकता है। दूसरा महत्व प्रबंधकीय प्रतिभा का विकास है। अधीनस्थ प्रबंधकों को निर्णय लेने का अवसर मिलने से उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित होती है। इसके अतिरिक्त विकेंद्रीकरण शीर्ष प्रबंधन का कार्यभार कम करता है, कर्मचारियों में पहल करने की भावना बढ़ाता है तथा संगठन के विस्तार में सहायता करता है। यह नियंत्रण प्रणाली को भी अधिक प्रभावी बनाता है क्योंकि प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी स्पष्ट होती है।


प्रश्न 15. प्रत्यायोजन और विकेंद्रीकरण में अंतर बताइए।

उत्तर:
प्रत्यायोजन और विकेंद्रीकरण दोनों अधिकारों के हस्तांतरण से संबंधित हैं, परंतु इनमें अंतर है। प्रत्यायोजन एक व्यक्ति द्वारा अपने अधीनस्थ को अधिकार सौंपने की प्रक्रिया है, जबकि विकेंद्रीकरण पूरे संगठन में निर्णय लेने की शक्ति का वितरण है। प्रत्यायोजन सभी संगठनों में आवश्यक होता है, जबकि विकेंद्रीकरण संगठन की नीति पर निर्भर करता है। प्रत्यायोजन व्यक्तिगत स्तर पर होता है, जबकि विकेंद्रीकरण संगठनात्मक स्तर पर लागू होता है। इसके अतिरिक्त प्रत्यायोजन प्रबंधकीय कार्यभार कम करने पर केंद्रित होता है, जबकि विकेंद्रीकरण निर्णय प्रक्रिया को व्यापक बनाने पर बल देता है।


प्रश्न 16. संगठन विशेषज्ञता को कैसे बढ़ावा देता है?

उत्तर:
संगठन कार्यों का विभाजन करके विशेषज्ञता को बढ़ावा देता है। प्रत्येक कर्मचारी को उसकी योग्यता और कौशल के अनुसार विशेष कार्य सौंपा जाता है। बार-बार एक ही प्रकार का कार्य करने से व्यक्ति उस कार्य में दक्ष हो जाता है। इससे कार्य की गुणवत्ता तथा गति दोनों में सुधार होता है। विशेषज्ञता के कारण प्रशिक्षण की आवश्यकता कम होती है और उत्पादकता बढ़ती है। संगठन के माध्यम से विभिन्न विभागों में विशेषज्ञों की नियुक्ति भी संभव होती है। इस प्रकार संगठन कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाकर संगठन की समग्र कार्यकुशलता में वृद्धि करता है।


प्रश्न 17. संगठन संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग में कैसे सहायक है?

उत्तर:
संगठन उपलब्ध मानव, भौतिक तथा वित्तीय संसाधनों का उचित समन्वय स्थापित करता है। कार्यों के स्पष्ट विभाजन से संसाधनों की अनावश्यक पुनरावृत्ति समाप्त होती है। प्रत्येक कर्मचारी को उसकी योग्यता के अनुसार कार्य मिलने से समय और श्रम की बचत होती है। विभागों के बीच समन्वय होने से मशीनों, धन और सामग्री का प्रभावी उपयोग संभव होता है। इससे लागत कम होती है तथा उत्पादकता बढ़ती है। संगठन संसाधनों के दुरुपयोग को रोककर संगठनात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देता है।


प्रश्न 18. औपचारिक संगठन के दो लाभ बताइए।

उत्तर:
औपचारिक संगठन का पहला लाभ कार्यों में स्पष्टता है। इसमें प्रत्येक कर्मचारी की भूमिका, अधिकार और उत्तरदायित्व स्पष्ट रूप से निर्धारित होते हैं। दूसरा लाभ प्रभावी नियंत्रण है। स्पष्ट आदेश श्रृंखला (Chain of Command) होने से कार्यों की निगरानी और मूल्यांकन सरल हो जाता है। इसके अतिरिक्त औपचारिक संगठन समन्वय को बढ़ावा देता है, कार्यों में अनुशासन बनाए रखता है तथा संगठनात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति को सुनिश्चित करता है। यह संसाधनों के बेहतर उपयोग और निर्णय प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने में भी सहायता करता है।


प्रश्न 19. अनौपचारिक संगठन के दो लाभ बताइए।

उत्तर:
अनौपचारिक संगठन का पहला लाभ तीव्र संचार है। सूचना कर्मचारियों के बीच तेजी से पहुँचती है, जिससे निर्णय प्रक्रिया में सहायता मिलती है। दूसरा लाभ सामाजिक संतुष्टि है। कर्मचारियों को मित्रता और सहयोग का वातावरण मिलता है, जिससे उनका मनोबल बढ़ता है। अनौपचारिक संगठन कर्मचारियों की भावनात्मक आवश्यकताओं की पूर्ति करता है तथा प्रबंधन को वास्तविक प्रतिक्रिया प्राप्त करने में सहायता करता है। इससे कार्य वातावरण सकारात्मक बनता है और कर्मचारियों की संगठन के प्रति निष्ठा बढ़ती है। हालांकि इसके साथ उचित नियंत्रण बनाए रखना आवश्यक होता है।


प्रश्न 20. संगठन और नियोजन (Planning) में क्या संबंध है?

उत्तर:
नियोजन और संगठन प्रबंधन के परस्पर पूरक कार्य हैं। नियोजन में उद्देश्यों और कार्य योजनाओं का निर्धारण किया जाता है, जबकि संगठन उन योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए आवश्यक संरचना प्रदान करता है। नियोजन यह बताता है कि क्या करना है, जबकि संगठन यह निर्धारित करता है कि कौन करेगा और कैसे करेगा। बिना नियोजन के संगठन दिशाहीन हो जाता है और बिना संगठन के योजनाएँ केवल कागज़ों तक सीमित रह जाती हैं। इसलिए संगठन को नियोजन का कार्यान्वयन चरण कहा जाता है। दोनों मिलकर संगठनात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करते हैं।