CBSE कक्षा 12 जीवविज्ञान (Biology)

अध्याय 4: वंशागति एवं विविधता के सिद्धांत (Principles of Inheritance and Variation)

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

1. मेंडल का एकसंकर संकरण (Monohybrid Cross) क्या है?

उत्तर:
एकसंकर संकरण वह संकरण है जिसमें केवल एक जोड़ी विपरीत लक्षणों का अध्ययन किया जाता है। ग्रेगर मेंडल ने मटर के पौधों में लंबे (TT) और बौने (tt) पौधों का संकरण किया। F₁ पीढ़ी में सभी पौधे लंबे (Tt) प्राप्त हुए, जिससे प्रभाविता का नियम सिद्ध हुआ। F₁ पौधों के स्व-परागण से F₂ पीढ़ी में 3:1 का फीनोटाइपिक तथा 1:2:1 का जीनोटाइपिक अनुपात प्राप्त हुआ। इस प्रयोग से मेंडल ने प्रभाविता तथा पृथक्करण के नियम स्थापित किए। यह प्रयोग आनुवंशिकी का आधार माना जाता है।


2. मेंडल का पृथक्करण नियम (Law of Segregation) समझाइए।

उत्तर:
पृथक्करण का नियम मेंडल का प्रथम नियम है। इसके अनुसार किसी लक्षण के लिए उपस्थित कारकों (एलील) की जोड़ी गैमीट निर्माण के समय एक-दूसरे से अलग हो जाती है। प्रत्येक गैमीट में केवल एक एलील जाता है। निषेचन के समय ये एलील पुनः युग्म बनाते हैं। उदाहरण के लिए Tt पौधे में गैमीट निर्माण के समय T और t अलग-अलग गैमीटों में चले जाते हैं। यही कारण है कि F₂ पीढ़ी में अप्रभावी लक्षण पुनः प्रकट हो जाता है। यह नियम दर्शाता है कि आनुवंशिक कारक मिश्रित नहीं होते बल्कि स्वतंत्र रूप से अगली पीढ़ी में स्थानांतरित होते हैं।


3. प्रभाविता का नियम (Law of Dominance) क्या है?

उत्तर:
मेंडल के प्रभाविता नियम के अनुसार जब किसी जीव में किसी लक्षण के दो भिन्न एलील उपस्थित होते हैं, तब केवल प्रभावी एलील ही अपना प्रभाव प्रदर्शित करता है जबकि अप्रभावी एलील छिपा रहता है। उदाहरण के लिए मटर के पौधों में लंबाई का एलील (T) प्रभावी तथा बौनेपन का एलील (t) अप्रभावी है। इसलिए Tt जीनोटाइप वाले पौधे लंबे दिखाई देते हैं। यह नियम F₁ पीढ़ी में केवल एक ही लक्षण के प्रकट होने की व्याख्या करता है। इस नियम ने यह सिद्ध किया कि आनुवंशिक लक्षण मिश्रित न होकर पृथक इकाइयों के रूप में विरासत में मिलते हैं।


4. द्विसंकर संकरण (Dihybrid Cross) क्या है?

उत्तर:
द्विसंकर संकरण में दो जोड़ी विपरीत लक्षणों का एक साथ अध्ययन किया जाता है। मेंडल ने गोल-पीले (RRYY) तथा झुर्रीदार-हरे (rryy) बीज वाले मटर पौधों का संकरण किया। F₁ पीढ़ी में सभी बीज गोल और पीले प्राप्त हुए। F₁ के स्व-परागण से F₂ पीढ़ी में 9:3:3:1 का फीनोटाइपिक अनुपात प्राप्त हुआ। इससे यह सिद्ध हुआ कि विभिन्न लक्षणों के एलील एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से पृथक होते हैं। इस प्रयोग ने स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम को स्थापित किया और आनुवंशिक विविधता की व्याख्या की।


5. स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment) समझाइए।

उत्तर:
इस नियम के अनुसार दो या दो से अधिक लक्षणों के एलील गैमीट निर्माण के समय स्वतंत्र रूप से अलग होते हैं और एक-दूसरे के वितरण को प्रभावित नहीं करते। मेंडल ने द्विसंकर संकरण द्वारा यह सिद्ध किया। उदाहरण के लिए बीज के रंग और आकार के एलील अलग-अलग संयोजनों में गैमीटों में पहुँचते हैं। परिणामस्वरूप नई आनुवंशिक संयोजन उत्पन्न होते हैं। यही कारण है कि संतानों में माता-पिता से भिन्न लक्षणों का मिश्रण देखने को मिलता है। यह नियम आनुवंशिक विविधता उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


6. परीक्षण संकरण (Test Cross) क्या है?

उत्तर:
परीक्षण संकरण वह संकरण है जिसमें प्रभावी लक्षण वाले अज्ञात जीनोटाइप के जीव का संकरण अप्रभावी समयुग्मजी (homozygous recessive) जीव से कराया जाता है। इसका उद्देश्य अज्ञात जीव का जीनोटाइप ज्ञात करना होता है। यदि संतानें सभी प्रभावी लक्षण वाली हों तो जीव समयुग्मजी प्रभावी होता है। यदि 1:1 अनुपात में प्रभावी और अप्रभावी लक्षण प्राप्त हों तो जीव विषमयुग्मजी होता है। आनुवंशिकी में जीनोटाइप की पहचान के लिए यह एक महत्वपूर्ण तकनीक है।


7. अपूर्ण प्रभाविता (Incomplete Dominance) क्या है?

उत्तर:
अपूर्ण प्रभाविता वह स्थिति है जिसमें कोई भी एलील पूर्णतः प्रभावी नहीं होता। परिणामस्वरूप विषमयुग्मजी में मध्यवर्ती लक्षण प्रकट होता है। स्नैपड्रैगन (Antirrhinum) पौधे में लाल फूल (RR) और सफेद फूल (rr) के संकरण से F₁ पीढ़ी में गुलाबी (Rr) फूल प्राप्त होते हैं। F₂ पीढ़ी में 1 लाल : 2 गुलाबी : 1 सफेद का अनुपात प्राप्त होता है। यह मेंडल के प्रभाविता नियम का अपवाद है। इससे स्पष्ट होता है कि कुछ लक्षणों में दोनों एलील आंशिक रूप से अभिव्यक्त होते हैं।


8. सह-प्रभाविता (Codominance) क्या है?

उत्तर:
सह-प्रभाविता में दोनों एलील विषमयुग्मजी अवस्था में समान रूप से अभिव्यक्त होते हैं। कोई भी एलील दूसरे को दबाता नहीं है। मनुष्य के ABO रक्त समूह में IA और IB एलील सह-प्रभावी होते हैं। यदि किसी व्यक्ति का जीनोटाइप IAIB हो तो उसमें AB रक्त समूह विकसित होता है। इस स्थिति में A और B दोनों प्रतिजन लाल रक्त कोशिकाओं पर उपस्थित रहते हैं। सह-प्रभाविता आनुवंशिक अभिव्यक्ति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है और रक्त समूह निर्धारण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।


9. ABO रक्त समूह प्रणाली की व्याख्या कीजिए।

उत्तर:
ABO रक्त समूह प्रणाली की खोज कार्ल लैंडस्टीनर ने की थी। इसमें तीन एलील IA, IB और i होते हैं। IA और IB सह-प्रभावी हैं जबकि i अप्रभावी होता है। IAIA या IAi से रक्त समूह A, IBIB या IBi से B, IAIB से AB तथा ii से O रक्त समूह बनता है। यह प्रणाली रक्ताधान (Blood Transfusion) में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि असंगत रक्त चढ़ाने से गंभीर प्रतिक्रियाएँ हो सकती हैं। रक्त समूहों का अध्ययन आनुवंशिकता के सिद्धांतों को समझने में भी सहायक है।


10. Rh कारक क्या है?

उत्तर:
Rh कारक लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर उपस्थित एक विशेष प्रतिजन है। जिन व्यक्तियों में यह प्रतिजन उपस्थित होता है वे Rh धनात्मक (Rh+) कहलाते हैं और जिनमें अनुपस्थित होता है वे Rh ऋणात्मक (Rh−) कहलाते हैं। यदि Rh− माता के गर्भ में Rh+ भ्रूण विकसित हो तो अगली गर्भावस्था में एरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटेलिस नामक रोग उत्पन्न हो सकता है। इससे भ्रूण की लाल रक्त कोशिकाएँ नष्ट हो सकती हैं। इस समस्या की रोकथाम के लिए Rh प्रतिरक्षी इंजेक्शन दिया जाता है।


11. गुणसूत्रीय सिद्धांत (Chromosomal Theory of Inheritance) क्या है?

उत्तर:
गुणसूत्रीय सिद्धांत का प्रतिपादन Walter Sutton तथा Theodor Boveri ने किया। इसके अनुसार जीन गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं और गुणसूत्र ही आनुवंशिक लक्षणों के वाहक हैं। गुणसूत्र युग्मों में पाए जाते हैं तथा गैमीट निर्माण के समय अलग हो जाते हैं। निषेचन के समय ये पुनः युग्म बनाते हैं। यह सिद्धांत मेंडल के नियमों की कोशिकीय व्याख्या प्रस्तुत करता है। आधुनिक आनुवंशिकी का आधार यही सिद्धांत है और इससे जीनों के स्थान तथा व्यवहार को समझने में सहायता मिली।


12. लिंकज (Linkage) क्या है?

उत्तर:
लिंकज वह घटना है जिसमें एक ही गुणसूत्र पर स्थित जीन एक साथ वंशानुगत होते हैं। ऐसे जीन स्वतंत्र अपव्यूहन का पालन नहीं करते। लिंकज की खोज Thomas Hunt Morgan ने ड्रोसोफिला मक्खी पर कार्य करते हुए की थी। जितनी कम दूरी दो जीनों के बीच होती है, उनका लिंकज उतना ही मजबूत होता है। लिंकज के कारण कुछ लक्षण बार-बार एक साथ दिखाई देते हैं। यह आनुवंशिक मानचित्रण तथा जीनों की स्थिति निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


13. क्रॉसिंग ओवर (Crossing Over) क्या है?

उत्तर:
क्रॉसिंग ओवर अर्धसूत्री विभाजन की प्रोफेज-I अवस्था में होने वाली प्रक्रिया है। इसमें समजात गुणसूत्रों के असहोदर क्रोमैटिड भागों के बीच आनुवंशिक पदार्थ का आदान-प्रदान होता है। इसके परिणामस्वरूप जीनों के नए संयोजन बनते हैं। यह प्रक्रिया आनुवंशिक विविधता का प्रमुख स्रोत है। क्रॉसिंग ओवर के कारण संतानों में नए लक्षण दिखाई देते हैं जो विकास और अनुकूलन में सहायक होते हैं। आनुवंशिक मानचित्र तैयार करने में भी इसका उपयोग किया जाता है।


14. उत्परिवर्तन (Mutation) क्या है?

उत्तर:
उत्परिवर्तन जीन या गुणसूत्र की संरचना अथवा संख्या में होने वाला अचानक और स्थायी परिवर्तन है। यह प्राकृतिक रूप से या विकिरण एवं रसायनों के प्रभाव से हो सकता है। उत्परिवर्तन के कारण नए लक्षण उत्पन्न होते हैं। अधिकांश उत्परिवर्तन हानिकारक होते हैं, परंतु कुछ लाभकारी भी हो सकते हैं। विकास की प्रक्रिया में उत्परिवर्तन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि वे आनुवंशिक विविधता प्रदान करते हैं। जीवों के अनुकूलन और नई प्रजातियों के निर्माण में भी इनका योगदान होता है।


15. बहुविकल्पी एलील (Multiple Alleles) क्या हैं?

उत्तर:
जब किसी जीन के दो से अधिक एलील किसी जनसंख्या में पाए जाते हैं, तो उन्हें बहुविकल्पी एलील कहते हैं। हालांकि एक व्यक्ति में इनमें से केवल दो एलील ही उपस्थित हो सकते हैं। मनुष्य की ABO रक्त समूह प्रणाली इसका प्रमुख उदाहरण है, जिसमें IA, IB तथा i तीन एलील होते हैं। बहुविकल्पी एलील किसी लक्षण में विविधता बढ़ाते हैं और विभिन्न फीनोटाइप उत्पन्न करते हैं। यह अवधारणा मेंडल की सरल आनुवंशिकता से आगे बढ़कर जटिल आनुवंशिक पैटर्न को समझने में सहायता करती है।


16. बहुजीनी वंशागति (Polygenic Inheritance) क्या है?

उत्तर:
बहुजीनी वंशागति वह स्थिति है जिसमें किसी एक लक्षण का नियंत्रण अनेक जीनों द्वारा किया जाता है। प्रत्येक जीन लक्षण की अभिव्यक्ति में थोड़ा-थोड़ा योगदान देता है। मनुष्य की त्वचा का रंग, ऊँचाई तथा बुद्धिमत्ता इसके उदाहरण हैं। ऐसे लक्षणों में निरंतर विविधता दिखाई देती है और स्पष्ट वर्गीकरण संभव नहीं होता। पर्यावरणीय कारक भी इनकी अभिव्यक्ति को प्रभावित करते हैं। बहुजीनी वंशागति जटिल आनुवंशिक लक्षणों को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।


17. प्लीयोट्रॉपी (Pleiotropy) क्या है?

उत्तर:
प्लीयोट्रॉपी वह स्थिति है जिसमें एक ही जीन अनेक लक्षणों को प्रभावित करता है। इसका अर्थ है कि किसी एक जीन में परिवर्तन होने पर कई शारीरिक या जैविक प्रभाव दिखाई दे सकते हैं। मनुष्य में फेनिलकीटोनूरिया इसका प्रमुख उदाहरण है। इस रोग में एक जीन की खराबी के कारण मानसिक विकास, त्वचा के रंग और चयापचय पर प्रभाव पड़ता है। प्लीयोट्रॉपी यह दर्शाती है कि जीनों का प्रभाव केवल एक लक्षण तक सीमित नहीं होता बल्कि अनेक शारीरिक प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है।


18. लिंग-निर्धारण (Sex Determination) की XY प्रणाली समझाइए।

उत्तर:
मनुष्य में लिंग-निर्धारण XY प्रणाली द्वारा होता है। महिलाओं में XX तथा पुरुषों में XY गुणसूत्र पाए जाते हैं। महिला द्वारा बनने वाले सभी अंडाणुओं में X गुणसूत्र होता है, जबकि पुरुष के आधे शुक्राणुओं में X और आधे में Y गुणसूत्र होता है। X शुक्राणु द्वारा निषेचन होने पर XX संयोजन बनता है और कन्या जन्म लेती है। Y शुक्राणु द्वारा निषेचन होने पर XY संयोजन बनता है और पुत्र जन्म लेता है। इसलिए संतान का लिंग पिता द्वारा निर्धारित होता है।


19. लिंग-संबद्ध वंशागति (Sex-linked Inheritance) क्या है?

उत्तर:
लिंग-संबद्ध वंशागति वह प्रक्रिया है जिसमें जीन लिंग गुणसूत्रों, विशेषकर X गुणसूत्र पर स्थित होते हैं। ऐसे लक्षणों की विरासत सामान्य लक्षणों से भिन्न होती है। मनुष्यों में हीमोफीलिया और रंगांधता इसके प्रमुख उदाहरण हैं। पुरुषों में केवल एक X गुणसूत्र होने के कारण ये रोग अधिक प्रकट होते हैं। महिलाएँ सामान्यतः वाहक (Carrier) होती हैं। लिंग-संबद्ध वंशागति का अध्ययन आनुवंशिक रोगों की पहचान और परामर्श में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


20. डाउन सिंड्रोम क्या है?

उत्तर:
डाउन सिंड्रोम एक गुणसूत्रीय विकार है जो 21वें गुणसूत्र की त्रिगुणिता (Trisomy 21) के कारण उत्पन्न होता है। इस रोग में व्यक्ति के शरीर की कोशिकाओं में 46 के स्थान पर 47 गुणसूत्र पाए जाते हैं। प्रभावित व्यक्तियों में मानसिक विकास धीमा, चेहरा चपटा, छोटी गर्दन तथा विशिष्ट शारीरिक लक्षण दिखाई देते हैं। यह विकार अर्धसूत्री विभाजन के दौरान गुणसूत्रों के असामान्य पृथक्करण के कारण होता है। मातृ आयु बढ़ने पर इसकी संभावना अधिक होती है। यह मानव आनुवंशिकी का महत्वपूर्ण अध्ययन विषय है।