CBSE कक्षा 10 विज्ञान (रसायन विज्ञान)
अध्याय 3 – धातु और अधातु
20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. धातु और अधातु में चार प्रमुख अंतर लिखिए।
उत्तर:
धातु और अधातु के भौतिक गुणों में स्पष्ट अंतर पाया जाता है। धातुएँ सामान्यतः चमकदार होती हैं, जबकि अधातुएँ प्रायः चमकहीन होती हैं। धातुएँ ऊष्मा एवं विद्युत की अच्छी चालक होती हैं, जबकि अधिकांश अधातुएँ कुचालक होती हैं। धातुएँ आघातवर्धनीय (पीटकर चादर बन सकती हैं) तथा तन्य (तार बनाई जा सकती हैं) होती हैं, जबकि अधातुएँ भंगुर होती हैं। धातुएँ प्रायः ठोस अवस्था में पाई जाती हैं, जबकि अधातुएँ ठोस, द्रव या गैस किसी भी अवस्था में मिल सकती हैं। इन गुणों के आधार पर पदार्थों को धातु एवं अधातु वर्गों में विभाजित किया जाता है।
प्रश्न 2. आघातवर्ध्यता तथा तन्यता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आघातवर्ध्यता वह गुण है जिसके कारण धातुओं को पीटकर पतली चादरों में बदला जा सकता है। उदाहरण के लिए, सोना और चाँदी की बहुत पतली पत्तियाँ बनाई जाती हैं। तन्यता वह गुण है जिसके कारण धातुओं को खींचकर पतले तारों में परिवर्तित किया जा सकता है। ताँबा और एल्युमिनियम के तार विद्युत संचरण के लिए उपयोग किए जाते हैं। ये दोनों गुण धातुओं की विशेष पहचान हैं और इन्हीं के कारण उनका व्यापक औद्योगिक उपयोग होता है। अधातुओं में ये गुण नहीं पाए जाते क्योंकि वे सामान्यतः भंगुर होती हैं और आसानी से टूट जाती हैं।
Question 3. धातुएँ विद्युत की अच्छी चालक क्यों होती हैं?
उत्तर:
धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति होती है। जब किसी धातु पर विद्युत विभव लगाया जाता है, तो ये मुक्त इलेक्ट्रॉन एक दिशा में गति करने लगते हैं और विद्युत धारा का प्रवाह संभव होता है। यही कारण है कि ताँबा, एल्युमिनियम और चाँदी जैसी धातुएँ उत्कृष्ट विद्युत चालक होती हैं। विद्युत तारों, मोटरों तथा विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इन धातुओं का उपयोग किया जाता है। दूसरी ओर, अधिकांश अधातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं होते, इसलिए वे विद्युत की कुचालक होती हैं। हालांकि ग्रेफाइट एक अपवाद है, जो अधातु होते हुए भी विद्युत का चालक है।
प्रश्न 4. धातुएँ ऑक्सीजन के साथ किस प्रकार अभिक्रिया करती हैं?
उत्तर:
धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड बनाती हैं। अधिकांश धातु ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं। उदाहरण के लिए, मैग्नीशियम ऑक्सीजन में जलकर मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है।
समीकरण:
2Mg + O₂ → 2MgO
मैग्नीशियम ऑक्साइड पानी में घुलकर क्षारीय विलयन बनाता है। कुछ धातु ऑक्साइड जैसे एल्युमिनियम ऑक्साइड और जिंक ऑक्साइड उभयधर्मी होते हैं, अर्थात वे अम्ल और क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया कर सकते हैं। धातुओं की यह अभिक्रिया उनकी रासायनिक सक्रियता को दर्शाती है।
प्रश्न 5. अधातुएँ ऑक्सीजन के साथ किस प्रकार अभिक्रिया करती हैं?
उत्तर:
अधातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके अधातु ऑक्साइड बनाती हैं। अधिकांश अधातु ऑक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते हैं। उदाहरण के लिए, कार्बन ऑक्सीजन में जलकर कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है।
समीकरण:
C + O₂ → CO₂
जब कार्बन डाइऑक्साइड पानी में घुलती है तो कार्बोनिक अम्ल बनाती है। इसी प्रकार सल्फर ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके सल्फर डाइऑक्साइड बनाता है, जो पानी में घुलकर अम्लीय विलयन देता है। इस प्रकार अधातुओं के ऑक्साइड सामान्यतः अम्लीय गुण प्रदर्शित करते हैं और धातुओं के ऑक्साइड से भिन्न होते हैं।
प्रश्न 6. धातुएँ जल के साथ अभिक्रिया करके क्या बनाती हैं?
उत्तर:
धातुएँ जल के साथ अभिक्रिया करके धातु हाइड्रॉक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस बनाती हैं। सभी धातुएँ समान गति से अभिक्रिया नहीं करतीं। सोडियम और पोटैशियम ठंडे जल के साथ अत्यंत तीव्र अभिक्रिया करती हैं, जबकि मैग्नीशियम गर्म जल से अभिक्रिया करता है। ताँबा, चाँदी और सोना जल से अभिक्रिया नहीं करते।
उदाहरण:
2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂
इस अभिक्रिया में हाइड्रोजन गैस निकलती है और क्षारीय विलयन बनता है। धातुओं की जल के प्रति अभिक्रियाशीलता उनके सक्रियता क्रम पर निर्भर करती है।
प्रश्न 7. धातु और अम्ल की अभिक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अधिकांश धातुएँ तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण तथा हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती हैं। उदाहरण के लिए, जिंक तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके जिंक क्लोराइड और हाइड्रोजन गैस बनाता है।
समीकरण:
Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂
हाइड्रोजन गैस की पहचान जलती हुई तीली लाने पर ‘पॉप’ ध्वनि से की जाती है। ताँबा, चाँदी और सोना जैसे कम सक्रिय धातु तनु अम्लों से हाइड्रोजन नहीं निकालते। यह अभिक्रिया धातुओं की रासायनिक सक्रियता को समझने में महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 8. उभयधर्मी ऑक्साइड क्या होते हैं?
उत्तर:
वे ऑक्साइड जो अम्ल और क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया करते हैं, उभयधर्मी ऑक्साइड कहलाते हैं। एल्युमिनियम ऑक्साइड (Al₂O₃) तथा जिंक ऑक्साइड (ZnO) इसके प्रमुख उदाहरण हैं। ये ऑक्साइड अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं तथा क्षारों के साथ भी अभिक्रिया कर सकते हैं। इस कारण इन्हें उभयधर्मी कहा जाता है। उभयधर्मी ऑक्साइड धातुओं के विशेष रासायनिक गुणों को दर्शाते हैं। इनके अध्ययन से यह समझने में सहायता मिलती है कि सभी धातु ऑक्साइड केवल क्षारीय प्रकृति के नहीं होते।
प्रश्न 9. सक्रियता श्रेणी क्या है?
उत्तर:
धातुओं को उनकी अभिक्रियाशीलता के घटते क्रम में व्यवस्थित करने पर जो सूची प्राप्त होती है उसे सक्रियता श्रेणी कहते हैं। इस श्रेणी में पोटैशियम सबसे अधिक सक्रिय तथा सोना सबसे कम सक्रिय धातु है। सक्रियता श्रेणी की सहायता से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि कौन-सी धातु किसी यौगिक से दूसरी धातु को विस्थापित कर सकती है। यह धातुओं के निष्कर्षण तथा रासायनिक अभिक्रियाओं को समझने में अत्यंत उपयोगी है। धातुओं के व्यवहार और उनके औद्योगिक उपयोग का निर्धारण भी इसी श्रेणी के आधार पर किया जाता है।
प्रश्न 10. विस्थापन अभिक्रिया क्या है?
उत्तर:
जब कोई अधिक अभिक्रियाशील धातु किसी कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण विलयन से हटाकर उसका स्थान ग्रहण कर लेती है, तो इसे विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं। उदाहरण के लिए, जिंक को कॉपर सल्फेट विलयन में डालने पर जिंक, ताँबे को विस्थापित कर देता है।
समीकरण:
Zn + CuSO₄ → ZnSO₄ + Cu
इस अभिक्रिया में नीले रंग का विलयन धीरे-धीरे रंगहीन हो जाता है और ताँबा प्राप्त होता है। यह अभिक्रिया सक्रियता श्रेणी की अवधारणा को सिद्ध करती है।
प्रश्न 11. धातुओं का संक्षारण क्या है?
उत्तर:
वायु, नमी और अन्य रासायनिक पदार्थों के प्रभाव से धातुओं की सतह का धीरे-धीरे नष्ट होना संक्षारण कहलाता है। लोहे पर जंग लगना इसका सबसे सामान्य उदाहरण है। जंग मुख्यतः हाइड्रेटेड आयरन ऑक्साइड होती है। संक्षारण के कारण धातुएँ कमजोर हो जाती हैं तथा उनकी उपयोगिता कम हो जाती है। उद्योगों में इससे आर्थिक हानि भी होती है। संक्षारण को रोकने के लिए पेंटिंग, ग्रीसिंग, गैल्वनीकरण और मिश्रधातु निर्माण जैसी विधियाँ अपनाई जाती हैं।
प्रश्न 12. गैल्वनीकरण क्या है?
उत्तर:
लोहे या इस्पात की सतह पर जिंक की पतली परत चढ़ाने की प्रक्रिया को गैल्वनीकरण कहते हैं। यह परत लोहे को वायु और नमी के संपर्क से बचाती है, जिससे जंग नहीं लगती। जिंक स्वयं पहले ऑक्सीकरण होकर लोहे की रक्षा करता है। पानी की टंकियाँ, लोहे की पाइपें, छत की चादरें और तार आदि गैल्वनीकृत किए जाते हैं। यह संक्षारण रोकने की एक प्रभावी और सस्ती विधि है। इसके द्वारा लोहे की आयु और उपयोगिता दोनों बढ़ जाती हैं।
प्रश्न 13. मिश्रधातु क्या है? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
दो या दो से अधिक धातुओं अथवा धातु और अधातु के समांगी मिश्रण को मिश्रधातु कहते हैं। मिश्रधातुएँ शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक मजबूत तथा उपयोगी होती हैं। उदाहरण के लिए, पीतल ताँबा और जिंक से बनता है, जबकि कांसा ताँबा और टिन से बनता है। स्टेनलेस स्टील लोहे, क्रोमियम और निकेल का मिश्रधातु है। मिश्रधातुओं का उपयोग मशीनों, बर्तनों, आभूषणों तथा निर्माण कार्यों में किया जाता है। इनके गुण आवश्यकता के अनुसार बदले जा सकते हैं।
प्रश्न 14. खनिज और अयस्क में अंतर बताइए।
उत्तर:
पृथ्वी की भूपर्पटी में पाए जाने वाले प्राकृतिक पदार्थ जिनमें धातुएँ उपस्थित होती हैं, खनिज कहलाते हैं। जिन खनिजों से धातु का आर्थिक रूप से लाभदायक निष्कर्षण किया जा सके, उन्हें अयस्क कहते हैं। अर्थात सभी अयस्क खनिज होते हैं, लेकिन सभी खनिज अयस्क नहीं होते। उदाहरण के लिए, बॉक्साइट एल्युमिनियम का अयस्क है। अयस्कों में धातु की मात्रा पर्याप्त होती है, जिससे उनका निष्कर्षण लाभदायक बनता है। धातु उद्योगों के लिए अयस्क अत्यंत महत्वपूर्ण कच्चा माल हैं।
प्रश्न 15. धातुओं का निष्कर्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
अधिकांश धातुएँ प्रकृति में मुक्त अवस्था में नहीं पाई जातीं, बल्कि यौगिकों के रूप में उपस्थित रहती हैं। उपयोगी धातु प्राप्त करने के लिए इन यौगिकों से धातु को अलग करना आवश्यक होता है। इस प्रक्रिया को धातु निष्कर्षण कहते हैं। निष्कर्षण की विधि धातु की सक्रियता पर निर्भर करती है। अधिक सक्रिय धातुओं के लिए विद्युत अपघटन तथा कम सक्रिय धातुओं के लिए अपचयन विधियाँ अपनाई जाती हैं। निष्कर्षण के बाद प्राप्त धातुओं का उपयोग उद्योगों, परिवहन, निर्माण तथा दैनिक जीवन में किया जाता है।
प्रश्न 16. सोडियम को मिट्टी के तेल में क्यों रखा जाता है?
उत्तर:
सोडियम अत्यंत अभिक्रियाशील धातु है। यह वायु में उपस्थित ऑक्सीजन तथा नमी के साथ तेजी से अभिक्रिया कर सकता है। कभी-कभी यह अभिक्रिया इतनी तीव्र होती है कि आग भी लग सकती है। इसलिए सोडियम को सुरक्षित रखने के लिए मिट्टी के तेल (केरोसिन) में डुबोकर रखा जाता है। केरोसिन की परत सोडियम को वायु और नमी के संपर्क से बचाती है। यह सुरक्षा उपाय प्रयोगशालाओं तथा उद्योगों में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रश्न 17. आयनिक यौगिकों के दो गुण लिखिए।
उत्तर:
आयनिक यौगिक धनायनों और ऋणायनों के बीच प्रबल वैद्युत आकर्षण बलों से बने होते हैं। इनके गलनांक और क्वथनांक सामान्यतः बहुत अधिक होते हैं क्योंकि आयनों को अलग करने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ये ठोस अवस्था में विद्युत का संचालन नहीं करते, लेकिन पिघली हुई अवस्था या जलीय विलयन में विद्युत चालक बन जाते हैं क्योंकि आयन स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं। सोडियम क्लोराइड और मैग्नीशियम क्लोराइड आयनिक यौगिकों के प्रमुख उदाहरण हैं।
प्रश्न 18. धातुएँ ध्वानिक क्यों कहलाती हैं?
उत्तर:
धातुओं में ध्वानिकता (Sonority) का गुण पाया जाता है। जब धातुओं पर किसी कठोर वस्तु से प्रहार किया जाता है, तो वे मधुर एवं स्पष्ट ध्वनि उत्पन्न करती हैं। इसी गुण के कारण उन्हें ध्वानिक कहा जाता है। घंटियाँ, मंदिर के घड़ियाल, संगीत वाद्ययंत्र तथा धातु के अनेक उपकरण इसी गुण का लाभ उठाते हैं। अधिकांश अधातुएँ यह गुण प्रदर्शित नहीं करतीं। ध्वानिकता धातुओं की एक महत्वपूर्ण भौतिक विशेषता है जो उनकी पहचान में सहायता करती है।
प्रश्न 19. एल्युमिनियम का उपयोग विद्युत तारों में क्यों किया जाता है?
उत्तर:
एल्युमिनियम विद्युत का अच्छा चालक है तथा इसका घनत्व कम होता है। यह हल्का, सस्ता और आसानी से उपलब्ध धातु है। इसके अतिरिक्त यह संक्षारण के प्रति भी अपेक्षाकृत प्रतिरोधी होता है क्योंकि इसकी सतह पर ऑक्साइड की सुरक्षात्मक परत बन जाती है। इन गुणों के कारण लंबी दूरी की विद्युत संचरण लाइनों में एल्युमिनियम का व्यापक उपयोग किया जाता है। यद्यपि ताँबा बेहतर चालक है, फिर भी हल्के वजन और कम लागत के कारण एल्युमिनियम अधिक उपयुक्त माना जाता है।
प्रश्न 20. ताँबा और चाँदी का उपयोग विद्युत तारों में क्यों किया जाता है?
उत्तर:
ताँबा और चाँदी विद्युत के उत्कृष्ट चालक हैं। इनमें मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या अधिक होती है, जिसके कारण विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित होती है। ताँबा अपेक्षाकृत सस्ता, मजबूत तथा तन्य होता है, इसलिए घरेलू वायरिंग और विद्युत उपकरणों में इसका उपयोग व्यापक रूप से किया जाता है। चाँदी सबसे अच्छी चालक धातु है, लेकिन महंगी होने के कारण इसका उपयोग विशेष इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और उच्च गुणवत्ता वाले संपर्क बिंदुओं में किया जाता है। इन धातुओं की चालकता और टिकाऊपन उन्हें विद्युत उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं।
