CBSE कक्षा 10 विज्ञान (रसायन विज्ञान)
अध्याय 1: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण
20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. रासायनिक अभिक्रिया किसे कहते हैं? इसके प्रमुख लक्षण लिखिए।
उत्तर:
जब एक या अधिक पदार्थ आपस में क्रिया करके नए गुणों वाले पदार्थों का निर्माण करते हैं, तो उसे रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं। इस प्रक्रिया में अभिकारकों के गुण बदलकर उत्पादों के गुण प्राप्त हो जाते हैं। रासायनिक अभिक्रिया होने के प्रमुख लक्षण हैं— रंग में परिवर्तन, तापमान में परिवर्तन, गैस का उत्सर्जन, अवक्षेप का बनना तथा प्रकाश या ध्वनि का उत्पन्न होना। उदाहरण के लिए, मैग्नीशियम रिबन को जलाने पर चमकदार सफेद प्रकाश उत्पन्न होता है और मैग्नीशियम ऑक्साइड बनता है। यह एक रासायनिक अभिक्रिया है क्योंकि नया पदार्थ बनता है जिसका गुण मूल पदार्थ से भिन्न होता है।
प्रश्न 2. रासायनिक समीकरण क्या है? इसे संतुलित करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
रासायनिक अभिक्रिया को प्रतीकों और सूत्रों की सहायता से संक्षेप में व्यक्त करने को रासायनिक समीकरण कहते हैं। इसमें अभिकारकों को बाईं ओर तथा उत्पादों को दाईं ओर लिखा जाता है। किसी रासायनिक समीकरण को संतुलित करना आवश्यक है क्योंकि द्रव्यमान संरक्षण का नियम बताता है कि अभिक्रिया के दौरान पदार्थ न तो उत्पन्न होता है और न ही नष्ट होता है। इसलिए दोनों पक्षों में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होनी चाहिए। संतुलित समीकरण अभिक्रिया की सही जानकारी देता है तथा अभिकारकों और उत्पादों की मात्राओं का सही संबंध दर्शाता है। वैज्ञानिक गणनाओं के लिए संतुलित समीकरण अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
प्रश्न 3. द्रव्यमान संरक्षण का नियम क्या है?
उत्तर:
द्रव्यमान संरक्षण का नियम फ्रांसीसी वैज्ञानिक Antoine Lavoisier द्वारा प्रतिपादित किया गया था। इस नियम के अनुसार किसी रासायनिक अभिक्रिया में कुल द्रव्यमान स्थिर रहता है। अर्थात अभिक्रिया से पहले उपस्थित अभिकारकों का कुल द्रव्यमान और अभिक्रिया के बाद प्राप्त उत्पादों का कुल द्रव्यमान समान होता है। इसका कारण यह है कि अभिक्रिया के दौरान परमाणुओं का केवल पुनर्विन्यास होता है, उनका निर्माण या विनाश नहीं होता। इसी नियम के आधार पर रासायनिक समीकरणों को संतुलित किया जाता है। उदाहरण के लिए, जल के निर्माण में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के कुल द्रव्यमान के बराबर जल का द्रव्यमान प्राप्त होता है।
प्रश्न 4. मैग्नीशियम रिबन को जलाने से पहले साफ क्यों किया जाता है?
उत्तर:
मैग्नीशियम रिबन को जलाने से पहले उसकी सतह को सैंडपेपर से रगड़कर साफ किया जाता है क्योंकि उसकी सतह पर वायु के संपर्क से मैग्नीशियम ऑक्साइड की पतली परत बन जाती है। यह परत मैग्नीशियम को सीधे ऑक्सीजन के संपर्क में आने से रोकती है और दहन की प्रक्रिया को धीमा कर देती है। जब इस परत को हटा दिया जाता है, तब मैग्नीशियम आसानी से ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करता है और चमकीले सफेद प्रकाश के साथ जलता है। इस अभिक्रिया में मैग्नीशियम ऑक्साइड बनता है। इसलिए प्रयोग को सफलतापूर्वक करने के लिए मैग्नीशियम रिबन को साफ करना आवश्यक होता है।
प्रश्न 5. संयोजन अभिक्रिया क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक पदार्थ मिलकर एक ही उत्पाद बनाते हैं, संयोजन अभिक्रिया कहलाती है। इस प्रकार की अभिक्रिया में उत्पाद की संख्या अभिकारकों की तुलना में कम होती है। उदाहरण के लिए, कैल्शियम ऑक्साइड (चूना) जल के साथ अभिक्रिया करके कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड बनाता है। इस अभिक्रिया में ऊष्मा भी उत्पन्न होती है।
CaO + H₂O → Ca(OH)₂
इसी प्रकार हाइड्रोजन और ऑक्सीजन मिलकर जल बनाते हैं। संयोजन अभिक्रियाएँ दैनिक जीवन और उद्योगों में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनके माध्यम से अनेक उपयोगी यौगिकों का निर्माण किया जाता है।
प्रश्न 6. अपघटन अभिक्रिया क्या है? इसके प्रकार बताइए।
उत्तर:
जब एक यौगिक टूटकर दो या दो से अधिक सरल पदार्थों में परिवर्तित हो जाता है, तो उसे अपघटन अभिक्रिया कहते हैं। यह संयोजन अभिक्रिया का विपरीत है। अपघटन अभिक्रियाएँ मुख्यतः तीन प्रकार की होती हैं— ऊष्मीय अपघटन, विद्युत अपघटन और प्रकाशीय अपघटन। ऊष्मीय अपघटन में ऊष्मा द्वारा यौगिक टूटता है, जैसे कैल्शियम कार्बोनेट का कैल्शियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड में टूटना। विद्युत अपघटन में विद्युत धारा का उपयोग किया जाता है, जबकि प्रकाशीय अपघटन में सूर्य के प्रकाश की सहायता से यौगिक विघटित होता है। ये अभिक्रियाएँ विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
प्रश्न 7. विस्थापन अभिक्रिया क्या है? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
वह अभिक्रिया जिसमें अधिक क्रियाशील तत्व किसी यौगिक से कम क्रियाशील तत्व को हटाकर उसका स्थान ग्रहण कर लेता है, विस्थापन अभिक्रिया कहलाती है। इस प्रकार की अभिक्रिया धातुओं की क्रियाशीलता पर आधारित होती है। उदाहरण के लिए, जब जिंक को कॉपर सल्फेट के विलयन में डाला जाता है, तो जिंक कॉपर को विस्थापित कर देता है और जिंक सल्फेट बनता है।
Zn + CuSO₄ → ZnSO₄ + Cu
इस अभिक्रिया में नीले रंग का विलयन धीरे-धीरे रंगहीन हो जाता है और तांबे की परत दिखाई देने लगती है। यह विस्थापन अभिक्रिया का स्पष्ट उदाहरण है।
प्रश्न 8. द्विविस्थापन अभिक्रिया क्या है?
उत्तर:
द्विविस्थापन अभिक्रिया वह अभिक्रिया है जिसमें दो यौगिकों के आयन आपस में स्थान बदलते हैं और दो नए यौगिक बनाते हैं। इस प्रकार की अभिक्रियाओं में अक्सर अवक्षेप बनता है। उदाहरण के लिए, सिल्वर नाइट्रेट और सोडियम क्लोराइड के विलयन को मिलाने पर सफेद रंग का सिल्वर क्लोराइड अवक्षेप प्राप्त होता है।
AgNO₃ + NaCl → AgCl + NaNO₃
यहाँ सिल्वर और सोडियम आयनों का परस्पर आदान-प्रदान होता है। द्विविस्थापन अभिक्रियाएँ रसायन विज्ञान में विभिन्न लवणों के निर्माण तथा विश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
प्रश्न 9. अवक्षेपण अभिक्रिया क्या है?
उत्तर:
जब दो जलीय विलयनों को मिलाने पर अघुलनशील ठोस पदार्थ बनता है, तो उसे अवक्षेपण अभिक्रिया कहते हैं। बनने वाले ठोस पदार्थ को अवक्षेप कहा जाता है। उदाहरण के लिए, बेरियम क्लोराइड और सोडियम सल्फेट के विलयन को मिलाने पर सफेद रंग का बेरियम सल्फेट अवक्षेप बनता है।
BaCl₂ + Na₂SO₄ → BaSO₄ + 2NaCl
यह अवक्षेप जल में नहीं घुलता और नीचे बैठ जाता है। ऐसी अभिक्रियाओं का उपयोग रासायनिक परीक्षणों तथा जल शोधन प्रक्रियाओं में किया जाता है। अवक्षेपण अभिक्रियाएँ द्विविस्थापन अभिक्रियाओं का एक विशेष प्रकार हैं।
प्रश्न 10. ऑक्सीकरण और अपचयन में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ऑक्सीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें किसी पदार्थ में ऑक्सीजन की वृद्धि या हाइड्रोजन की कमी होती है। इसके विपरीत, अपचयन वह प्रक्रिया है जिसमें किसी पदार्थ में ऑक्सीजन की कमी या हाइड्रोजन की वृद्धि होती है। उदाहरण के लिए, कॉपर ऑक्साइड का हाइड्रोजन द्वारा तांबे में परिवर्तन अपचयन है, जबकि हाइड्रोजन का जल में परिवर्तन ऑक्सीकरण है। रासायनिक अभिक्रियाओं में ऑक्सीकरण और अपचयन साथ-साथ होते हैं, इसलिए इन्हें रेडॉक्स अभिक्रिया कहा जाता है। ये प्रक्रियाएँ धातु निष्कर्षण, बैटरियों तथा अनेक औद्योगिक प्रक्रियाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 11. रेडॉक्स अभिक्रिया क्या है?
उत्तर:
रेडॉक्स अभिक्रिया वह अभिक्रिया है जिसमें ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों एक साथ होते हैं। एक पदार्थ इलेक्ट्रॉन खोता है और दूसरा इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है। उदाहरण के लिए—
CuO + H₂ → Cu + H₂O
इस अभिक्रिया में कॉपर ऑक्साइड का अपचयन होकर तांबा बनता है, जबकि हाइड्रोजन का ऑक्सीकरण होकर जल बनता है। रेडॉक्स अभिक्रियाएँ ऊर्जा उत्पादन, श्वसन, प्रकाश संश्लेषण और औद्योगिक निर्माण प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन अभिक्रियाओं के माध्यम से पदार्थों के रासायनिक गुणों में परिवर्तन होता है और नए उत्पाद प्राप्त होते हैं।
प्रश्न 12. संक्षारण क्या है? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
वायु, नमी तथा अन्य रासायनिक पदार्थों के प्रभाव से धातुओं का धीरे-धीरे नष्ट होना संक्षारण कहलाता है। लोहे पर जंग लगना इसका सबसे सामान्य उदाहरण है। जंग मुख्यतः हाइड्रेटेड आयरन ऑक्साइड होता है। संक्षारण से धातुओं की चमक, मजबूती तथा उपयोगिता कम हो जाती है। इसे रोकने के लिए पेंटिंग, गैल्वनाइजेशन, मिश्रधातु निर्माण तथा तेल या ग्रीस का लेप किया जाता है। संक्षारण के कारण उद्योगों और भवन निर्माण में आर्थिक हानि होती है। इसलिए धातुओं की सुरक्षा के लिए उचित उपाय अपनाना आवश्यक है।
प्रश्न 13. जंग लगने की प्रक्रिया को समझाइए।
उत्तर:
जब लोहा वायु में उपस्थित ऑक्सीजन तथा नमी के संपर्क में लंबे समय तक रहता है, तब उसके ऊपर लाल-भूरे रंग की परत बन जाती है जिसे जंग कहते हैं। यह मुख्यतः हाइड्रेटेड आयरन ऑक्साइड होती है। जंग लगने की प्रक्रिया में ऑक्सीकरण होता है, जिसमें लोहा धीरे-धीरे ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करता है। नमी इस प्रक्रिया को तेज करती है। यदि लोहे को शुष्क वातावरण में रखा जाए तो जंग कम लगती है। जंग लगने से धातु कमजोर हो जाती है और उसकी उपयोगिता घट जाती है। इसलिए लोहे की वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं।
प्रश्न 14. विकृतगंधिता (Rancidity) क्या है?
उत्तर:
वसा और तेल युक्त खाद्य पदार्थों का वायु में उपस्थित ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके खराब हो जाना तथा उनमें दुर्गंध और स्वाद का परिवर्तन आ जाना विकृतगंधिता कहलाता है। यह एक प्रकार की ऑक्सीकरण प्रक्रिया है। उदाहरण के लिए, लंबे समय तक खुले रखे चिप्स, नमकीन या घी में खराब गंध आने लगती है। विकृतगंधिता को रोकने के लिए खाद्य पदार्थों को वायुरुद्ध डिब्बों में रखा जाता है, रेफ्रिजरेटर में संग्रहित किया जाता है तथा एंटीऑक्सीडेंट मिलाए जाते हैं। खाद्य उद्योग में नाइट्रोजन गैस भरकर भी इस प्रक्रिया को धीमा किया जाता है।
प्रश्न 15. ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया क्या है?
उत्तर:
वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें ऊष्मा का उत्सर्जन होता है, ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहलाती है। ऐसी अभिक्रियाओं में उत्पादों की ऊर्जा अभिकारकों की तुलना में कम होती है और अतिरिक्त ऊर्जा ऊष्मा के रूप में निकलती है। उदाहरण के लिए, प्राकृतिक गैस का दहन तथा श्वसन ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ हैं। श्वसन के दौरान ग्लूकोज ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड, जल और ऊर्जा उत्पन्न करता है। ये अभिक्रियाएँ दैनिक जीवन में ऊर्जा प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ईंधनों का दहन भी ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया का प्रमुख उदाहरण है।
प्रश्न 16. ऊष्माशोषी अभिक्रिया क्या है?
उत्तर:
वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें वातावरण से ऊष्मा अवशोषित की जाती है, ऊष्माशोषी अभिक्रिया कहलाती है। ऐसी अभिक्रियाओं में उत्पादों की ऊर्जा अभिकारकों से अधिक होती है। उदाहरण के लिए, कैल्शियम कार्बोनेट को गर्म करने पर वह कैल्शियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड में विघटित होता है। इस प्रक्रिया के लिए निरंतर ऊष्मा की आवश्यकता होती है। प्रकाश संश्लेषण भी एक ऊष्माशोषी प्रक्रिया है क्योंकि इसमें सूर्य की ऊर्जा का उपयोग किया जाता है। ये अभिक्रियाएँ उद्योगों और प्राकृतिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।
प्रश्न 17. रासायनिक समीकरण को संतुलित करने की हिट-एंड-ट्रायल विधि समझाइए।
उत्तर:
हिट-एंड-ट्रायल विधि द्वारा रासायनिक समीकरण को संतुलित करने के लिए पहले अभिकारकों और उत्पादों के सूत्र लिखे जाते हैं। इसके बाद दोनों पक्षों में उपस्थित प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या की तुलना की जाती है। जिस तत्व के परमाणु असमान होते हैं, उसके सामने गुणांक लगाकर संख्या बराबर की जाती है। यह प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती है जब तक सभी तत्वों के परमाणुओं की संख्या दोनों पक्षों में समान न हो जाए। अंत में गुणांकों को सरलतम पूर्णांक रूप में लिखा जाता है। यह विधि द्रव्यमान संरक्षण के नियम पर आधारित है और विद्यालय स्तर पर सबसे अधिक प्रयोग की जाती है।
प्रश्न 18. श्वसन को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
श्वसन के दौरान शरीर की कोशिकाओं में ग्लूकोज ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करता है और कार्बन डाइऑक्साइड, जल तथा ऊर्जा उत्पन्न होती है। इस प्रक्रिया में पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है जो शरीर की विभिन्न गतिविधियों के लिए आवश्यक होती है। चूँकि इस अभिक्रिया में ऊष्मा और ऊर्जा का उत्सर्जन होता है, इसलिए इसे ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहा जाता है। श्वसन जीवित प्राणियों के लिए अत्यंत आवश्यक प्रक्रिया है क्योंकि इससे प्राप्त ऊर्जा शरीर की वृद्धि, गति और अन्य जैविक क्रियाओं को संचालित करती है।
प्रश्न 19. प्रकाशीय अपघटन अभिक्रिया का उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
प्रकाशीय अपघटन अभिक्रिया वह अभिक्रिया है जिसमें किसी यौगिक का विघटन प्रकाश की उपस्थिति में होता है। सिल्वर क्लोराइड का सूर्य के प्रकाश में सिल्वर और क्लोरीन में टूटना इसका प्रमुख उदाहरण है।
2AgCl → 2Ag + Cl₂
सिल्वर क्लोराइड सफेद रंग का होता है, लेकिन प्रकाश के प्रभाव से यह धूसर रंग का हो जाता है क्योंकि इसमें सिल्वर धातु बनती है। इस गुण के कारण सिल्वर ब्रोमाइड और सिल्वर क्लोराइड का उपयोग फोटोग्राफी में किया जाता था। यह प्रकाशीय अपघटन का महत्वपूर्ण व्यावहारिक अनुप्रयोग है।
प्रश्न 20. दैनिक जीवन में रासायनिक अभिक्रियाओं के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
रासायनिक अभिक्रियाएँ हमारे दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। भोजन का पाचन, श्वसन, प्रकाश संश्लेषण, ईंधनों का दहन और धातुओं का संक्षारण सभी रासायनिक अभिक्रियाओं के उदाहरण हैं। उद्योगों में उर्वरक, औषधियाँ, साबुन, प्लास्टिक और सीमेंट के निर्माण में भी रासायनिक अभिक्रियाएँ उपयोगी होती हैं। भोजन संरक्षण, जल शोधन तथा ऊर्जा उत्पादन में इनका विशेष महत्व है। रासायनिक अभिक्रियाओं के अध्ययन से हम पदार्थों के गुणों और उनके परिवर्तनों को समझ सकते हैं। इसलिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास में इनकी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है।
