CBSE कक्षा 10 विज्ञान (रसायन विज्ञान)

अध्याय 5 – तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

(सत्र 2026–27 के नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम के अनुसार)


1. डॉबेराइनर के त्रिक नियम को समझाइए।

उत्तर:
डॉबेराइनर ने तत्वों को उनके समान गुणों के आधार पर तीन-तीन के समूहों में व्यवस्थित किया, जिन्हें त्रिक (Triads) कहा गया। उन्होंने पाया कि त्रिक के मध्य तत्व का परमाणु द्रव्यमान अन्य दो तत्वों के परमाणु द्रव्यमानों के औसत के लगभग बराबर होता है। उदाहरण के लिए, लिथियम (Li), सोडियम (Na) और पोटैशियम (K) एक त्रिक बनाते हैं। सोडियम का परमाणु द्रव्यमान लिथियम और पोटैशियम के परमाणु द्रव्यमानों के औसत के निकट होता है। यह वर्गीकरण सीमित संख्या में तत्वों पर ही लागू हुआ, इसलिए यह सभी ज्ञात तत्वों का संतोषजनक वर्गीकरण नहीं कर सका।


2. न्यूलैंड्स के अष्टक नियम का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
न्यूलैंड्स ने तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के क्रम में व्यवस्थित किया। उन्होंने देखा कि प्रत्येक आठवाँ तत्व पहले तत्व के समान गुण प्रदर्शित करता है। इस नियम को अष्टक नियम (Law of Octaves) कहा गया। उदाहरण के लिए, लिथियम और सोडियम के गुणों में समानता पाई जाती है। यह नियम संगीत के सप्तक से प्रेरित था। हालांकि यह नियम केवल कैल्शियम तक के तत्वों पर ही लागू हो सका। भारी तत्वों के लिए यह नियम असफल रहा क्योंकि बाद में खोजे गए तत्वों के गुण इस व्यवस्था से मेल नहीं खाते थे। इसलिए इसका उपयोग सीमित रहा।


3. मेंडलीफ के आवर्त नियम को लिखिए।

उत्तर:
मेंडलीफ का आवर्त नियम कहता है कि “तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाणु द्रव्यमानों के आवर्ती फलन होते हैं।” मेंडलीफ ने तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के अनुसार व्यवस्थित किया तथा समान गुणों वाले तत्वों को एक ही समूह में रखा। इस व्यवस्था से तत्वों के गुणों में आवृत्ति दिखाई दी। मेंडलीफ ने कुछ स्थान रिक्त छोड़े और भविष्य में खोजे जाने वाले तत्वों के गुणों की भी भविष्यवाणी की। उनके द्वारा अनुमानित तत्वों जैसे जर्मेनियम और गैलियम की खोज बाद में हुई, जिससे उनकी आवर्त सारणी की उपयोगिता सिद्ध हुई।


4. मेंडलीफ की आवर्त सारणी की दो उपलब्धियाँ लिखिए।

उत्तर:
मेंडलीफ की आवर्त सारणी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह थी कि उन्होंने कुछ तत्वों के लिए खाली स्थान छोड़े और उनके गुणों की सटीक भविष्यवाणी की। बाद में इन तत्वों की खोज होने पर उनके गुण अनुमानित गुणों से मेल खाते पाए गए। दूसरी उपलब्धि यह थी कि उन्होंने तत्वों को व्यवस्थित रूप से वर्गीकृत किया, जिससे समान गुणों वाले तत्व एक ही समूह में रखे जा सके। इससे तत्वों के गुणों का अध्ययन सरल हो गया। उनकी सारणी ने आगे के वैज्ञानिकों को आधुनिक आवर्त सारणी विकसित करने की दिशा प्रदान की और रसायन विज्ञान के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।


5. मेंडलीफ की आवर्त सारणी की दो सीमाएँ बताइए।

उत्तर:
मेंडलीफ की आवर्त सारणी की पहली सीमा यह थी कि हाइड्रोजन की निश्चित स्थिति निर्धारित नहीं की जा सकी क्योंकि उसके गुण क्षार धातुओं और हैलोजनों दोनों से मिलते-जुलते हैं। दूसरी सीमा समस्थानिकों (Isotopes) की स्थिति से संबंधित थी। समस्थानिकों के परमाणु द्रव्यमान अलग-अलग होते हैं, लेकिन उनके रासायनिक गुण समान होते हैं। मेंडलीफ की सारणी परमाणु द्रव्यमान पर आधारित थी, इसलिए समस्थानिकों को अलग-अलग स्थान मिलने चाहिए थे, जो व्यावहारिक नहीं था। इन कमियों को दूर करने के लिए आधुनिक आवर्त सारणी का विकास किया गया।


6. आधुनिक आवर्त नियम क्या है?

उत्तर:
आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार, “तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांकों के आवर्ती फलन होते हैं।” इस नियम को हेनरी मोजले ने प्रस्तुत किया। उन्होंने सिद्ध किया कि तत्वों का वर्गीकरण परमाणु द्रव्यमान के बजाय परमाणु क्रमांक के आधार पर अधिक उपयुक्त है। आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के अनुसार व्यवस्थित किया गया है। इससे मेंडलीफ की सारणी की कई कमियाँ दूर हो गईं, जैसे समस्थानिकों की स्थिति और तत्वों की गलत व्यवस्था। यह नियम वर्तमान आवर्त सारणी का आधार है।


7. आधुनिक आवर्त सारणी में आवर्त और समूह क्या हैं?

उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी में क्षैतिज पंक्तियों को आवर्त (Periods) और ऊर्ध्वाधर स्तंभों को समूह (Groups) कहा जाता है। वर्तमान आवर्त सारणी में कुल 7 आवर्त और 18 समूह हैं। एक ही समूह के तत्वों के बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, इसलिए उनके रासायनिक गुण भी समान होते हैं। एक आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु क्रमांक क्रमशः बढ़ता है। आवर्त तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की जानकारी प्रदान करते हैं, जबकि समूह समान रासायनिक गुणों वाले तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं।


8. संयोजकता क्या है? आवर्त में इसका परिवर्तन बताइए।

उत्तर:
संयोजकता किसी तत्व की वह क्षमता है जिसके द्वारा वह अन्य तत्वों के साथ रासायनिक बंध बनाता है। आधुनिक आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर संयोजकता पहले 1 से बढ़कर 4 तक पहुँचती है और फिर घटकर 0 हो जाती है। उदाहरण के लिए, दूसरे आवर्त में लिथियम की संयोजकता 1, कार्बन की 4 तथा नियोन की 0 होती है। यह परिवर्तन बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करता है। संयोजकता का यह नियमित परिवर्तन आवर्त सारणी की महत्वपूर्ण विशेषता है।


9. परमाणु आकार क्या है? समूह में इसका परिवर्तन समझाइए।

उत्तर:
परमाणु आकार से तात्पर्य परमाणु के केंद्रक से बाह्यतम इलेक्ट्रॉन तक की दूरी से है। किसी समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ता है। इसका कारण यह है कि प्रत्येक अगले तत्व में एक नया इलेक्ट्रॉनिक कोश जुड़ जाता है। कोशों की संख्या बढ़ने से बाह्यतम इलेक्ट्रॉन केंद्रक से अधिक दूर हो जाते हैं। परिणामस्वरूप परमाणु का आकार बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए, लिथियम से सीज़ियम तक जाने पर परमाणु आकार लगातार बढ़ता है। यह प्रवृत्ति आधुनिक आवर्त सारणी की महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है।


10. किसी आवर्त में परमाणु आकार क्यों घटता है?

उत्तर:
किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ता है, जिससे केंद्रक में प्रोटॉनों की संख्या भी बढ़ती है। हालांकि इलेक्ट्रॉन उसी कोश में जुड़ते हैं, इसलिए नए कोश नहीं बनते। केंद्रक का आकर्षण बढ़ने के कारण इलेक्ट्रॉन केंद्रक की ओर अधिक खिंचते हैं। परिणामस्वरूप परमाणु का आकार घटता जाता है। उदाहरण के लिए, दूसरे आवर्त में लिथियम का परमाणु आकार नियोन की तुलना में बड़ा होता है। इसलिए किसी आवर्त में परमाणु आकार क्रमशः कम होता जाता है।


11. धात्विक गुण क्या हैं? समूह में इनका परिवर्तन बताइए।

उत्तर:
धात्विक गुण किसी तत्व की इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाने की प्रवृत्ति को दर्शाते हैं। किसी समूह में ऊपर से नीचे जाने पर धात्विक गुण बढ़ते हैं। इसका कारण यह है कि परमाणु आकार बढ़ने से बाह्यतम इलेक्ट्रॉन केंद्रक से दूर हो जाते हैं और उन्हें हटाना आसान हो जाता है। परिणामस्वरूप तत्व अधिक आसानी से इलेक्ट्रॉन त्यागते हैं। उदाहरण के लिए, लिथियम की तुलना में सोडियम और पोटैशियम अधिक धात्विक होते हैं। इसलिए समूह में नीचे जाने पर धात्विक गुणों में वृद्धि होती है।


12. किसी आवर्त में धात्विक गुणों का परिवर्तन समझाइए।

उत्तर:
किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर धात्विक गुण घटते जाते हैं। इसका कारण यह है कि परमाणु आकार घटता है और केंद्रक का आकर्षण बढ़ता है। परिणामस्वरूप इलेक्ट्रॉनों को त्यागना कठिन हो जाता है। इसलिए तत्वों की धनायन बनाने की प्रवृत्ति कम हो जाती है। आवर्त के प्रारंभ में स्थित तत्व प्रायः धातुएँ होती हैं, जबकि अंत में अधातुएँ पाई जाती हैं। उदाहरण के लिए, सोडियम अत्यधिक धात्विक है जबकि क्लोरीन अधातु है। इस प्रकार आवर्त में धात्विक गुण क्रमशः कम होते जाते हैं।


13. अधात्विक गुण क्या हैं?

उत्तर:
अधात्विक गुण किसी तत्व की इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋणायन बनाने की प्रवृत्ति को दर्शाते हैं। आधुनिक आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर अधात्विक गुण बढ़ते हैं। इसका कारण बढ़ता हुआ प्रभावी नाभिकीय आकर्षण है, जिससे तत्व इलेक्ट्रॉनों को अधिक आसानी से ग्रहण कर लेते हैं। दूसरी ओर, किसी समूह में ऊपर से नीचे जाने पर अधात्विक गुण घटते हैं क्योंकि परमाणु आकार बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए, फ्लोरीन अत्यधिक अधात्विक है जबकि आयोडीन अपेक्षाकृत कम अधात्विक है। यह प्रवृत्ति तत्वों के रासायनिक व्यवहार को समझने में सहायक होती है।


14. उदासीन गैसों की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:
उदासीन गैसें आधुनिक आवर्त सारणी के समूह 18 में स्थित होती हैं। इनके बाह्यतम कोश पूर्ण रूप से भरे होते हैं, इसलिए ये सामान्य परिस्थितियों में रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग नहीं लेतीं। हीलियम में 2 तथा अन्य उदासीन गैसों में 8 इलेक्ट्रॉन बाह्यतम कोश में होते हैं। इनकी संयोजकता शून्य होती है। ये रंगहीन, गंधहीन और एकपरमाणुक गैसें होती हैं। नियोन, आर्गन, क्रिप्टॉन और जेनॉन इसके उदाहरण हैं। इनका उपयोग प्रकाश व्यवस्था, विज्ञापन संकेतों तथा वैज्ञानिक उपकरणों में किया जाता है।


15. आधुनिक आवर्त सारणी में हाइड्रोजन की स्थिति विशेष क्यों है?

उत्तर:
हाइड्रोजन का परमाणु क्रमांक 1 है और उसके बाह्यतम कोश में एक इलेक्ट्रॉन होता है। यह समूह 1 के तत्वों की तरह एक इलेक्ट्रॉन त्याग सकता है, इसलिए इसके कुछ गुण क्षार धातुओं से मिलते हैं। दूसरी ओर, यह एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन भी बना सकता है, जो हैलोजनों के समान है। इस कारण हाइड्रोजन की स्थिति विशिष्ट मानी जाती है। आधुनिक आवर्त सारणी में इसे सामान्यतः समूह 1 में रखा गया है, लेकिन इसके गुण अन्य तत्वों से भिन्न होने के कारण इसकी स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।


16. आवर्त सारणी में समूह 1 के तत्वों की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर:
समूह 1 के तत्वों को क्षार धातुएँ कहा जाता है। इनके बाह्यतम कोश में एक इलेक्ट्रॉन होता है, इसलिए इनकी संयोजकता 1 होती है। ये अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएँ होती हैं और आसानी से इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं। इनका घनत्व तथा गलनांक अपेक्षाकृत कम होता है। ये जल के साथ तीव्र अभिक्रिया करके क्षारीय विलयन बनाती हैं। लिथियम, सोडियम और पोटैशियम इसके प्रमुख उदाहरण हैं। समूह में नीचे जाने पर इनकी अभिक्रियाशीलता बढ़ती जाती है क्योंकि इलेक्ट्रॉन त्यागना अधिक सरल हो जाता है।


17. हैलोजन किसे कहते हैं?

उत्तर:
समूह 17 के तत्वों को हैलोजन कहा जाता है। इनके बाह्यतम कोश में सात इलेक्ट्रॉन होते हैं और इन्हें अष्टक पूर्ण करने के लिए केवल एक इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है। इसलिए ये अत्यधिक अभिक्रियाशील अधातुएँ होती हैं। फ्लोरीन, क्लोरीन, ब्रोमीन और आयोडीन इसके प्रमुख उदाहरण हैं। ये धातुओं के साथ अभिक्रिया करके लवण बनाते हैं, इसलिए इन्हें “लवण उत्पादक” भी कहा जाता है। समूह में ऊपर से नीचे जाने पर इनकी अभिक्रियाशीलता घटती जाती है। हैलोजन विभिन्न औद्योगिक तथा घरेलू उपयोगों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


18. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और आवर्त संख्या में क्या संबंध है?

उत्तर:
किसी तत्व के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में उपस्थित इलेक्ट्रॉनिक कोशों की संख्या उसकी आवर्त संख्या निर्धारित करती है। उदाहरण के लिए, सोडियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,8,1 है, जिसमें तीन कोश हैं, इसलिए यह तीसरे आवर्त में स्थित है। इसी प्रकार मैग्नीशियम भी तीसरे आवर्त का तत्व है क्योंकि उसके भी तीन कोश हैं। आवर्त संख्या तत्व के ऊर्जा स्तरों की संख्या को दर्शाती है। इसलिए इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के अध्ययन से किसी तत्व की आवर्त सारणी में स्थिति का निर्धारण आसानी से किया जा सकता है।


19. आधुनिक आवर्त सारणी में समस्थानिकों की समस्या कैसे हल हुई?

उत्तर:
समस्थानिक एक ही तत्व के ऐसे परमाणु होते हैं जिनका परमाणु क्रमांक समान लेकिन परमाणु द्रव्यमान अलग-अलग होता है। मेंडलीफ की सारणी परमाणु द्रव्यमान पर आधारित थी, इसलिए समस्थानिकों की स्थिति एक समस्या थी। आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु क्रमांक पर आधारित है। चूँकि किसी तत्व के सभी समस्थानिकों का परमाणु क्रमांक समान होता है, इसलिए उन्हें आवर्त सारणी में एक ही स्थान प्राप्त होता है। इस प्रकार समस्थानिकों की स्थिति संबंधी समस्या पूरी तरह हल हो गई और तत्वों का वर्गीकरण अधिक वैज्ञानिक तथा तार्किक बन गया।


20. आधुनिक आवर्त सारणी का महत्व बताइए।

उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी तत्वों के व्यवस्थित अध्ययन का आधार है। यह तत्वों को उनके परमाणु क्रमांक के अनुसार व्यवस्थित करती है, जिससे उनके गुणों की भविष्यवाणी करना सरल हो जाता है। समान गुणों वाले तत्व एक ही समूह में रखे जाते हैं, जिससे उनके रासायनिक व्यवहार को समझना आसान होता है। यह सारणी वैज्ञानिकों को नए तत्वों के गुणों का अनुमान लगाने में भी सहायता प्रदान करती है। आधुनिक रसायन विज्ञान, उद्योग, चिकित्सा और वैज्ञानिक अनुसंधान में इसका अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। इसलिए इसे रसायन विज्ञान का आधारभूत उपकरण माना जाता है।